विषय-सूची (Table of Contents)
- GS Paper 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; सुरक्षा): स्वदेशी 'नेत्र' (Netra) AEW&C प्रणाली—भारतीय वायुसेना को मिली 'अंतिम परिचालन स्वीकृति' (FOC) और सामरिक आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम
- GS Paper 1 (भारतीय विरासत और संस्कृति): भवाइया लोक परंपरा—उत्तर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और 'कोच राजबंशी' समुदाय का गौरवशाली इतिहास
स्वदेशी 'नेत्र' (Netra) AEW&C प्रणाली
चर्चा में क्यों? (Why in News)
25 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एक समारोह में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को स्वदेशी 'नेत्र' (Netra) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C - Airborne Early Warning and Control) प्रणाली के लिए 'फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस' (Final Operational Clearance - FOC) प्रमाणपत्र सौंप दिया। यह प्रमाणन इस प्रणाली की पूर्ण परिचालन क्षमता और तकनीकी परिपक्वता की पुष्टि करता है।
विकासात्मक इतिहास (Developmental History)
- 1983-1990: भारतीय वायुसेना ने एक स्वदेशी AEW&C क्षमता की आवश्यकता महसूस की। 'प्रोजेक्ट गार्जियन' (Project Guardian) के तहत एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म (ASP - एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म) का विकास एक संशोधित HS-748 Avro विमान पर शुरू हुआ।
- 1990-1991: 5 नवंबर 1990 को ASP ने अपनी पहली उड़ान भरी। 1991 में इसमें इटली से प्राप्त एक नेवल रडार को इंटीग्रेट (Integrate) किया गया।
- 1999 की त्रासदी: 11 जनवरी 1999 को एक परीक्षण मिशन के दौरान ASP विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 8 कर्मियों की मृत्यु हो गई। इस घटना के कारण कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
- 2004-2012: सरकार ने एम्ब्रेयर (Embraer) EMB-145 प्लेटफॉर्म पर आधारित नए AEW&C कार्यक्रम को मंजूरी दी। 2012 में स्वदेशी AESA रडार का सफल परीक्षण किया गया।
- 2017-2026: फरवरी 2017 में पहली 'नेत्र' प्रणाली को 'प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति' (IOC) कॉन्फ़िगरेशन में वायुसेना में शामिल किया गया। अंततः जून 2026 में इसे FOC प्राप्त हुआ।
मुख्य तकनीकी विशेषताएं (Key Technical Dimensions)
- प्लेटफॉर्म: यह प्रणाली ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर (Embraer)-145 विमान प्लेटफॉर्म पर आधारित है।
- मिशन एवियोनिक्स (Mission Avionics): इसमें सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए सरणी (AESA) रडार, 'आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड और फो' (IFF - Identification, friend or foe), और उन्नत मिशन कंप्यूटर शामिल हैं।
- सेंसर और संचार: इसमें इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) और कम्युनिकेशन सपोर्ट मेजर्स के साथ-साथ सुरक्षित संचार नेटवर्क और सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR) लगे हैं।
- नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस: यह हवाई और समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने (Detect), ट्रैक करने और उनकी पहचान करने में सक्षम है, जिससे वायुसेना की युद्ध प्रबंधन क्षमता बढ़ती है।
महत्व (Significance)
- ऑपरेशंस में सफलता: इस प्रणाली ने बालाकोट हवाई हमले (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (2025) के दौरान एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में अपनी उपयोगिता और विश्वसनीयता सिद्ध की है।
- स्वदेशी अपग्रेड क्षमता: विदेशी प्रणालियों के विपरीत, स्वदेशी होने के कारण IAF अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में स्वतंत्र रूप से संशोधन (Modifications) कर सकती है।
- भावी विस्तार: कैबिनेट (CCS) ने वायुसेना के लिए छह अतिरिक्त 'नेत्र Mk-1A' प्रणालियों के विकास को मंजूरी दी है, जो भारत की हवाई निगरानी क्षमता को और सुदृढ़ करेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
Prelims Pointers
- पूर्ण रूप: एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम।
- विकासकर्ता: सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS), DRDO।
- प्रमुख पड़ाव: 1983 (प्रारंभ), 2017 (IOC) और 2026 (FOC)।
- विमान: एम्ब्रेयर (Embraer) EMB-145I।
भवाइया लोक परंपरा
चर्चा में क्यों? (Why in News)
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने हाल ही में नई दिल्ली में "संस्कृति रत्न भंडार: भवाइयार इतिवृत्त" (Bhawaiya: A Cultural Treasure and Its Historical Journey) नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक कोच राजबंशी (Koch Rajbanshi) समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उनकी लोक परंपरा 'भवाइया' के दस्तावेजीकरण और संरक्षण पर केंद्रित है।
मुख्य विश्लेषण (Key Dimensions)
- भौगोलिक और सामाजिक आधार: भवाइया मुख्य रूप से उत्तर बंगाल, असम और उनके पड़ोसी क्षेत्रों की एक पारंपरिक लोक संगीत शैली (Folk Music Style) है। यह इस क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और कृषि परिदृश्य (Agrarian Landscape) में गहराई से रची-बसी है।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: यह संगीत आम लोगों की भावनाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और उनके सदियों पुराने ज्ञान (Wisdom) का प्रतिबिंब है। यह लोक परंपराओं, धार्मिक प्रथाओं और मौसमी त्योहारों (Seasonal Festivals) को जीवंत करती है।
- सभ्यतागत जुड़ाव (Civilizational Link): उपराष्ट्रपति के अनुसार, भवाइया मानवीय चेतना (Human Consciousness) को ब्रह्मांडीय व्यवस्था (Cosmic Order) से जोड़ने का माध्यम है। यह अवधारणा प्राचीन भारतीय दर्शन जैसे 'नाद ब्रह्म' (Nada Brahma) और 'सामवेद' (Sama Veda) के सिद्धांतों से मेल खाती है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के उदय से बहुत पहले, भारत में भरत मुनि का नाट्य शास्त्र मौजूद था, जो संगीत को आध्यात्मिक अनुभूति (Spiritual Realization) का मार्ग मानता था—भवाइया इसी महान परंपरा की एक क्षेत्रीय कड़ी है।
महत्व (Significance)
- सांस्कृतिक आत्मविश्वास (Cultural Confidence): उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि 'विकसित भारत @2047' का लक्ष्य तभी सार्थक है जब विकास के साथ-साथ हमारी सभ्यतागत जागरूकता (Civilizational Awareness) भी मजबूत हो।
- वैश्वीकरण (Globalization) के विरुद्ध लचीलापन: आधुनिकीकरण और शहरीकरण के दबाव के बावजूद, भवाइया परंपरा आज भी जीवित है क्योंकि यह वास्तविक मानवीय अनुभवों और सार्वभौमिक भावनाओं (Universal Emotions) पर आधारित है।
- युवा पीढ़ी और तकनीक: सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए युवा पीढ़ी को डिजिटल प्रिजर्वेशन (Digital Preservation) और आधुनिक प्रौद्योगिकी (Technology) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
- विविधता में एकता: महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उद्धृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में है, जहाँ विभिन्न भाषाएँ और समुदाय एक ही साझा सभ्यतागत भावना (Civilizational Spirit) से जुड़े हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
Prelims Pointers
- क्षेत्र (Region): उत्तर बंगाल और असम।
- समुदाय (Community): कोच राजबंशी (Koch Rajbanshi)।
- दार्शनिक मूल: नाद ब्रह्म और सामवेद।
- प्रमुख ग्रंथ: भरत मुनि का नाट्य शास्त्र।
मूल्यांकन एवं अभ्यास (Assessment & Practice)
Mains Question (मुख्य परीक्षा प्रश्न)
Prelims MCQs (प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न)
Q1. 'नेत्र' (Netra) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसे डीआरडीओ के 'सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स' (CABS) द्वारा विकसित किया गया है।
- यह प्रणाली ब्राजीलियाई 'एम्ब्रेयर-145' विमान प्लेटफॉर्म पर आधारित है।
- इसे केवल हवाई लक्ष्यों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
Q2. 'भवाइया' लोक संगीत परंपरा मुख्य रूप से किस समुदाय से संबंधित है?
- (A) वारली समुदाय
- (B) कोच राजबंशी समुदाय
- (C) संथाल समुदाय
- (D) गोंड समुदाय
व्याख्या (Detailed Explanation)
Q1 का उत्तर (A): कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि यह हवाई के साथ-साथ समुद्री सतह (Maritime Targets) के लक्ष्यों का पता लगाने में भी सक्षम है।
Q2 का उत्तर (B): भवाइया मुख्य रूप से उत्तर बंगाल के कोच राजबंशी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान है।
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