संक्षिप्त विषय सूची (Table of Contents)
- समुद्री गवर्नेंस का डिजिटलीकरण (E-Samudra प्लेटफॉर्म): नाविक सुरक्षा, एकल-खिड़की डिजिटल सेवा वितरण, और डिजिटल सीफ़रर्स एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट (d-SEA) के माध्यम से प्रशासन का सुदृढ़ीकरण (UPSC GS Paper III: बुनियादी ढांचा - पत्तन एवं पोत परिवहन और UPSC GS Paper II: ई-गवर्नेंस)।
- इको-एजुकेशनल हब 'प्रकृति ज्ञान धाम': लखनऊ में सीएसआईआर-एनबीआरआई (CSIR-NBRI) द्वारा स्थापित जैव विविधता संरक्षण केंद्र, भारतीय विरासत उद्यान और अनुभवात्मक पावन पथ (PAaVan Path) व्याख्यात्मक मार्ग (UPSC GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण)।
- डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की कल्याणकारी योजनाओं का विलय: प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में दोहराव से बचने के लिए अंतर-जातीय विवाह और अत्याचार पीड़ितों की राहत योजनाओं का केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ एकीकरण (UPSC GS Paper II: सामाजिक न्याय एवं कमजोर वर्गों का कल्याण)।
- शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का आधुनिकीकरण ('सहकार नव-क्रांति'): NUCFDC द्वारा 'Bank in a Box' विनियामक एवं तकनीकी सेवा पैकेज का शुभारंभ, साइबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के साथ समन्वय (UPSC GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सुधार एवं सहकारिता)।
1. समुद्री गवर्नेंस का डिजिटलीकरण: ई-समुद्र (E-Samudra) प्लेटफॉर्म और नाविक कल्याण
संदर्भ (Context)
डिजिटल पहल का शुभारंभ: भारत सरकार ने समुद्री गवर्नेंस के डिजिटलीकरण को गति देने के लिए ई-समुद्र (E-Samudra) नामक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया है।
हितधारक संवाद: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई में आयोजित "नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण और ई-समुद्र का उद्घाटन" विषयक राष्ट्रीय हितधारक संवाद के दौरान इस मंच का उद्घाटन किया।
नोडल एजेंसी: इस मंच का विकास और क्रियान्वयन मंत्रालय के अधीन समुद्री गवर्नेंस महानिदेशालय (DGMA) द्वारा किया जा रहा है।
मुख्य विनियामक और तकनीकी विवरण (Technical and Regulatory Highlights)
एकीकृत सेवा वितरण: यह प्लेटफॉर्म नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और अन्य समुद्री हितधारकों के लिए आवश्यक विनियामक और प्रशासनिक सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है।
एकल-खिड़की समाधान: ई-समुद्र के माध्यम से संपूर्ण कार्यप्रणाली, ऑनलाइन भुगतान, वास्तविक समय ट्रैकिंग (real-time tracking) और डिजिटल रूप से जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्रों की सुविधा प्रदान की जाएगी।
संबद्ध पहलों का प्रदर्शन: DGMA द्वारा ई-समुद्र के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सहायक पहलों का प्रदर्शन किया गया:
e-NAVIK: हाल ही में शुरू की गई 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली।
d-SEA (Digital Seafarers Employment Agreement): नाविकों के रोजगार समझौतों का डिजिटल संपादन सुनिश्चित करने वाला ढांचा।
सीफ़रर ट्रैकिंग डैशबोर्ड: नाविकों के वास्तविक स्थान और सुरक्षा की निगरानी के लिए आगामी डिजिटल डैशबोर्ड।
SWFS विनियामक सुदृढ़ीकरण: सीफ़रर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी के तहत उन्नत कल्याणकारी उपायों का विस्तार।
महत्व (Strategic Significance)
डिजिटल-प्रथम और फेसलेस गवर्नेंस: ई-समुद्र समुद्री प्रशासन को भौतिक कार्यालय-आधारित मॉडल से एक समेकित डिजिटल इकोसिस्टम में परिवर्तित करता है, जिससे जहाज पर कार्यरत नाविक भी आसानी से सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
नीतिगत स्तंभ: भारत की नई समुद्री नीति तीन केंद्रीय स्तंभों पर आधारित है—मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 (जो नाविकों को 'प्रमुख कार्यकर्ता' या Key Workers के रूप में मान्यता देता है), मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047, और 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' का विनियामक सिद्धांत।
समावेशिता को बढ़ावा: 'सागर में सम्मान' जैसी पहलों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में महिला नाविकों के लिए अवसरों और समर्थन को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे हाल के वर्षों में उनकी भागीदारी में वृद्धि हुई है।
कार्यबल में तीव्र वृद्धि: भारत का सक्रिय नाविक कार्यबल वर्ष 2013 के लगभग 1.03 लाख से बढ़कर वर्ष 2025 में 3.23 लाख से अधिक हो गया है, जो इस क्षेत्र के विनियामक ढांचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
वैश्विक आपूर्ति में स्थान: भारत विश्व स्तर पर नाविकों का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। साथ ही, देश वैश्विक स्तर पर अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग केंद्र बन चुका है और शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने की दिशा में कार्यरत है।
संकटकालीन भू-राजनीतिक समन्वय: भू-राजनीतिक व्यवधानों के दौरान DGMA ने 16,000 से अधिक कॉल और 40,000 संचारों की निगरानी की, जिसके परिणामस्वरूप विदेश मंत्रालय और भारतीय नौसेना के सहयोग से 4,000 से अधिक फंसे हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई।
2. सीएसआईआर-एनबीआरआई का इको-एजुकेशनल हब 'प्रकृति ज्ञान धाम'
संदर्भ (Context)
राष्ट्र को समर्पण: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ के बंथरा स्थित महर्षि पाराशर बायोरिसोर्स सेंटर (MPBC) में देश के पहले 'इको-एजुकेशनल हब' 'प्रकृति ज्ञान धाम' को राष्ट्र को समर्पित किया (India’s first Eco-Educational Hub: 'Prakriti Gyan Dham')।
संस्थागत योगदान: इस सुविधा का विकास सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI) द्वारा किया गया है।
मुख्य विवरण
यह हब वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के अनूठे समन्वय को प्रदर्शित करता है:
पावन पथ (PAaVan Path): परिसर का केंद्रीय अनुभवात्मक घटक, जो 'प्लांट्स एंड एसोसिएटेड वेजीटेशन्स फॉर एप्रीशिएटिंग नेचर' का संक्षिप्त रूप है। यह एक क्षेत्रीय नेटवर्क और व्याख्यात्मक विरासत मार्ग है जो आगंतुकों को विभिन्न पारिस्थितिकी क्षेत्रों की वनस्पतियों से परिचित कराता है।
भारतीय विरासत उद्यान (Indian Heritage Garden): हब के केंद्र में स्थित इस उद्यान में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण विरासत वृक्षों के वंशजों को संरक्षित किया गया है:
- फतेहपुर का बावन इमली वृक्ष (52 स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से संबद्ध)।
- लखनऊ का मदर दशहरी आम का वृक्ष।
- प्रयागराज का पातालपुरी बरगद।
- चंपारण के भितिहरवा में महात्मा गांधी द्वारा रोपित आम का वृक्ष।
- गुजरात में ऐतिहासिक दांडी मार्च मार्ग से जुड़े वृक्षों के वंशज।
डिजिटल एकीकरण: इन विरासत वृक्षों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वनस्पति विवरण को साझा करने के लिए स्मार्टफ़ोन अनुकूल QR-कोड आधारित ऑडियो सिस्टम स्थापित किया गया है।
विभव एन्क्लेव (Vibhav Enclave): भारत के संकटग्रस्त पौधों के लिए समर्पित उद्यान, जो जैव विविधता ह्रास, जलवायु परिवर्तन और पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।
भैरव एन्क्लेव (Bhairav Enclave): भारत के राज्य पौधों का उद्यान, जो देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आधिकारिक राज्य पौधों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
बैंबूस्टीयम (Bamboosteum): इस सुविधा में 43 देशी और विदेशी बांस प्रजातियों को संरक्षित किया गया है जो इसे पारिस्थितिक पुनर्स्थापना, मृदा संरक्षण और स्थायी आजीविका के रूप में प्रदर्शित करती हैं।
महत्व (Strategic Significance)
विज्ञान-से-समाज जुड़ाव (Science-to-Society Connect): वैज्ञानिक संस्थानों के अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशालाओं की सीमाओं से बाहर निकालकर प्रत्यक्ष रूप से किसानों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और आम समाज तक पहुँचाना।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिकता का समन्वय: पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़कर उभरती पर्यावरणीय और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने का ढांचा तैयार करना।
एकीकृत वैज्ञानिक प्रयास: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच पूरक परियोजनाओं के एकीकरण को बढ़ावा देना ताकि सामूहिक वैज्ञानिक क्षमताओं का सामाजिक प्रभाव अधिकतम किया जा सके।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा: कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के नेतृत्व वाले रोजगार सृजन के उद्देश्य से चार प्रमुख पादप-आधारित प्रौद्योगिकियों को केरल के कुडुंबश्री राज्य गरीबी उन्मूलन मिशन को हस्तांतरित किया गया:
- हर्बल एंटी-डैंड्रफ हेयर केयर ऑयल।
- फ्रोटस: कमल से प्रेरित परफ्यूम।
- फ्रोटस: रुद्र परफ्यूम।
- हर्बल नैनो सीरम।
उद्योग-अकादमिक सहयोग: कम लागत वाले फोटोबायोरिएक्टर के डिजाइन और विकास की तकनीक को लखनऊ स्थित विटवेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए हस्तांतरित किया गया।
आयुर्वेद क्षेत्र में नवाचार: हिमालय (Himalaya) के सहयोग से विकसित पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के लिए एक विशेष हर्बल फॉर्मूलेशन का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया गया।
3. डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की कल्याणकारी योजनाओं का संरचनात्मक विलय
संदर्भ (Context)
संसदीय जानकारी: सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा को सूचित किया कि डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की दो प्रमुख योजनाओं का 31 मार्च 2023 से विभाग की केंद्र प्रायोजित योजना में विलय कर दिया गया है।
उद्देश्य: यह विलय योजनाओं के प्रशासनिक स्तर और क्रियान्वयन में होने वाले दोहराव (duplication) को समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया है।
मुख्य विनियामक प्रावधान (Technical and Regulatory Highlights)
विलय की गई योजनाएं:
- डॉ. अम्बेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटर-कास्ट मैरिजेज (Dr. Ambedkar Scheme for Social Integration through Inter-Caste Marriages)।
- डॉ. अम्बेडकर नेशनल रिलीफ टू द शेड्यूल्ड कास्ट्स/शेड्यूल्ड ट्राइब्स विक्टिम्स ऑफ एट्रोसिटीज स्कीम (Dr. Ambedkar National Relief to the Scheduled Castes/Scheduled Tribes Victims of Atrocities Scheme)।
एकीकरण का आधार: इन दोनों योजनाओं को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की निम्नलिखित अधिनियमों के क्रियान्वयन के लिए संचालित केंद्र प्रायोजित योजना के साथ समाहित किया गया है:
- नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955।
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989।
नीतिगत महत्व (Policy Significance)
प्रशासनिक सरलीकरण: इस विलय के उपरांत पूर्ववर्ती योजनाओं के तहत पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्यवार लंबित आवेदनों का विनियामक विस्थापन स्वतः हो गया है, क्योंकि अब इन राहत पहलों का संचालन सीधे केंद्र प्रायोजित योजना के तहत किया जा रहा है।
संघीय उत्तरदायित्व: नागरिक अधिकार संरक्षण और अत्याचार निवारण अधिनियमों के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को केंद्रीय सहायता दी जाती है, और इनके प्रभावी स्थानीय क्रियान्वयन की पूर्ण जिम्मेदारी राज्यों/UTs की है।
बैकलॉग निपटारे के लिए विशेष पहल: योजनाओं के विलय के संक्रमणकालीन प्रभाव को संतुलित करने के लिए डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन ने लंबित मामलों के निस्तारण हेतु विशेष अभियान चलाया।
वित्तीय आवंटन: इस विशेष पहल के तहत 'अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर योजना' के अंतर्गत 385 मामलों में लगभग ₹9 करोड़ की प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थियों के लिए जारी की गई।
4. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का आधुनिकीकरण: सहकार नव-क्रांति कार्यक्रम
संदर्भ (Context)
सहकार से समृद्धि: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुंबई के बीएसई (BSE) इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'सहकार नव-क्रांति' कार्यक्रम को संबोधित किया।
अम्ब्रेला संगठन का सुदृढ़ीकरण: यह कार्यक्रम देश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NUCFDC) के नए विनियामक ढांचे की जमीनी वास्तविकता को प्रदर्शित करता है।
कार्यालय उद्घाटन: केंद्रीय मंत्री ने मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में NUCFDC के नए कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन किया।
मुख्य विनियामक और तकनीकी विवरण (Technical Highlights)
NUCFDC द्वारा शहरी सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण हेतु निम्नलिखित सेवाएं और तकनीकी समाधान पेश किए गए हैं:
Bank in a Box: इस विनियामक और सेवा बंडल के माध्यम से एक ही एकीकृत प्लेटफॉर्म पर निम्नलिखित सुविधाएं बेहद किफायती दरों पर प्रदान की जाएंगी:
- कोर बैंकिंग (Sahkar CBS)।
- डिजिटल भुगतान और वास्तविक समय भुगतान सेवाएं।
- क्लाउड होस्टिंग (Sahkar Cloud)।
- स्वचालित नियामकीय अनुपालन ढांचा।
- लोन ओरिजिनेशन प्रणाली (Loan Origination System)।
सुरक्षा संचालन केंद्र (Security Operations Centre - SOC): शहरी सहकारी बैंकों को चौबीसों घंटे साइबर निगरानी, विनियामक सुरक्षा और डिजिटल खतरों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक केंद्रीयकृत सुरक्षा संचालन केंद्र का शुभारंभ किया गया।
MuleHunter: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित यह विशेष सॉफ्टवेयर बैंकों को साइबर धोखाधड़ी की पहचान करने और बढ़ते डिजिटल वित्तीय जोखिमों से निपटने की आधुनिक क्षमता प्रदान करेगा।
NFSU के साथ समझौता ज्ञापन (MoU): NUCFDC ने राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के साथ समन्वय किया है। इस साझेदारी से छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंक की प्रत्येक शाखा तक डिजिटल फॉरेंसिक और उन्नत साइबर सुरक्षा अनुसंधान सुविधाओं का विस्तार संभव होगा।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
विश्वास और पारदर्शिता: आरबीआई के मानकों के अनुरूप वित्तीय और विनियामक अनुपालन को सुनिश्चित कर यह अम्ब्रेला संगठन जनता और केंद्रीय बैंक दोनों के विश्वास को सुदृढ़ करेगा।
स्वरोजगार पारिस्थितिकी तंत्र: देश की आर्थिक समृद्धि के लिए 'सहकार से समृद्धि' मॉडल के तहत स्वरोजगार प्रणालियों को मजबूत करना, जिसमें लघु व्यापारियों, एमएसएमई, और महिला स्वयं सहायता समूहों को संवेदनशील और निकटवर्ती ऋण सहायता मिल सके।
मुख्यालय का स्थानांतरण: गतिविधियों के केंद्रीकरण और सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक उपस्थिति को देखते हुए NUCFDC का मुख्यालय दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया जाएगा। (महाराष्ट्र में देश के सर्वाधिक 449 शहरी सहकारी बैंक स्थित हैं)।
वित्तीय पैमाना: देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में करीब ₹6 लाख करोड़ की जमाराशि है, जो भारत की ग्रामीण और अर्ध-शहरी सूक्ष्म वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करती है।
पूंजी संग्रहण: इस अम्ब्रेला संगठन के गठन की चुनौती को पार करते हुए बहुत कम समय में ₹306 करोड़ की पूंजी एकत्रित की गई। वर्तमान में लगभग 650 बैंक इसके सदस्य बन चुके हैं।
आरबीआई द्वारा दी गई विनियामक राहतें: पिछले पांच वर्षों में सरकार और रिजर्व बैंक के संवाद से हुए प्रमुख नीतिगत सुधार:
- बिना अनुमति के 15 प्रतिशत तक शाखा विस्तार की छूट।
- सभी शहरी सहकारी बैंकों को डोरस्टेप बैंकिंग की अनुमति।
- प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के लक्ष्य को 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करना।
- पात्र टियर-3 बैंकों के लिए अनुसूचित बैंक का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण।
- NPA खातों के प्रावधानों के अनुपालन हेतु चरणबद्ध 'ग्लाइड पाथ' और वन टाइम सेटलमेंट (OTS) की सुविधा का विस्तार।
- मेंबर लेंडिंग इंस्टीट्यूशन (MLI) का दर्जा प्रदान कर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज और कोलेटरल-मुक्त ऋण की सुविधा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ई-समुद्र (E-Samudra) प्लेटफॉर्म क्या है?
यह पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन समुद्री गवर्नेंस महानिदेशालय (DGMA) द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो नाविकों, शिपिंग कंपनियों और बंदरगाहों के लिए विनियामक सेवाओं को एकल-खिड़की, फेसलेस गवर्नेंस मॉडल में बदलता है।
2. 'प्रकृति ज्ञान धाम' क्या है?
यह लखनऊ के बंथरा में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI) द्वारा स्थापित देश का पहला 'इको-एजुकेशनल हब' है, जिसमें पावन पथ, भारतीय विरासत उद्यान, विभव एन्क्लेव, भैरव एन्क्लेव और बैंबूस्टीयम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
3. डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की कौन-सी योजनाओं का विलय किया गया?
'डॉ. अम्बेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटर-कास्ट मैरिजेज' और 'डॉ. अम्बेडकर नेशनल रिलीफ टू द SC/ST विक्टिम्स ऑफ एट्रोसिटीज स्कीम' का 31 मार्च 2023 से सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की केंद्र प्रायोजित योजना में विलय किया गया है।
4. 'सहकार नव-क्रांति' कार्यक्रम के तहत NUCFDC क्या सेवाएं प्रदान कर रहा है?
NUCFDC 'Bank in a Box' के जरिए कोर बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, क्लाउड होस्टिंग और विनियामक अनुपालन जैसी सुविधाएं देता है, साथ ही साइबर सुरक्षा हेतु सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC) और AI आधारित MuleHunter सॉफ्टवेयर भी शुरू किया गया है।
5. NUCFDC का मुख्यालय कहाँ स्थानांतरित किया जाएगा और क्यों?
NUCFDC का मुख्यालय दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया जाएगा, क्योंकि महाराष्ट्र में देश के सर्वाधिक 449 शहरी सहकारी बैंक स्थित हैं, जिससे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
अभ्यास प्रश्न - MCQs for UPSC CSE Prelims
प्रश्न 1
'सहकार नव-क्रांति' कार्यक्रम के तहत घोषित शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) से संबंधित विनियामक और ढांचागत सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. गतिविधियों और शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक उपस्थिति को देखते हुए NUCFDC का मुख्यालय दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया जाएगा, जहाँ देश के सर्वाधिक 449 शहरी सहकारी बैंक स्थित हैं।
3. पिछले पांच वर्षों में विनियामक सुधारों के तहत शहरी सहकारी बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के लक्ष्य को 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है तथा बिना अलग अनुमति के शाखाओं में 15 प्रतिशत तक विस्तार की सुविधा दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: 'बैंक इन ए बॉक्स' सेवा के माध्यम से सहकारी बैंकों को कोर बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, क्लाउड और नियामकीय अनुपालन सहित सभी आवश्यक तकनीकी समाधान एक ही साझा एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कथन 2 सही है: भारत में शहरी सहकारी बैंकों की सर्वाधिक संख्या (449) महाराष्ट्र में होने के कारण NUCFDC के परिचालन को और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से इसके मुख्यालय को दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।
कथन 3 सही है: केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हुए नीतिगत संवाद के परिणामस्वरूप शहरी सहकारी बैंकों को बिना अलग अनुमति के अपनी शाखाओं में 15 प्रतिशत तक विस्तार की स्वायत्तता दी गई है और उनके लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के लक्ष्य को 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
प्रश्न 2
सीएसआईआर-एनबीआरआई द्वारा लखनऊ में स्थापित इको-एजुकेशनल हब 'प्रकृति ज्ञान धाम' की तकनीकी और नीतिगत विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
2. महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमिता एवं आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीएसआईआर-एनबीआरआई द्वारा चार पौध-आधारित प्रौद्योगिकियां केरल के कुडुंबश्री राज्य गरीबी उन्मूलन मिशन को हस्तांतरित की गई हैं।
3. 'विभव एन्क्लेव' (Vibhav Enclave) राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित राज्य पौधों को एक साथ प्रदर्शित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: इस इको-एजुकेशनल हब का केंद्रीय अनुभवात्मक घटक 'पावन पथ' (PAaVan Path) नामक एक विरासत मार्ग है जो आगंतुकों को प्राकृतिक वनस्पतियों से परिचित कराता है। साथ ही, 'बैंबूस्टीयम' (Bamboosteum) सुविधा में 43 देशी एवं विदेशी बांस प्रजातियों को संरक्षित कर मृदा संरक्षण और आजीविका के रूप में प्रदर्शित किया गया है।
कथन 2 सही है: महिलाओं को वैज्ञानिक उत्पादों के माध्यम से उद्यमिता से जोड़ने के लिए सीएसआईआर-एनबीआरआई ने चार पौध-आधारित तकनीकों (हर्बल एंटी-डैंड्रफ ऑयल, फ्रोटस कमल और रुद्र परफ्यूम तथा हर्बल नैनो सीरम) को केरल के कुडुंबश्री राज्य गरीबी उन्मूलन मिशन को हस्तांतरित किया है।
कथन 3 गलत है: 'विभव एन्क्लेव' (Vibhav Enclave) भारत के दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त पौधों के लिए समर्पित उद्यान है। विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित राज्य पौधों को प्रदर्शित करने वाला क्षेत्र 'भैरव एन्क्लेव' (Bhairav Enclave) है।
प्रश्न 3
समुद्री गवर्नेंस के डिजिटलीकरण हेतु पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए 'ई-समुद्र' (E-Samudra) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. भारत की राष्ट्रीय समुद्री नीति के प्रमुख स्तंभ 'मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025' के तहत नाविकों को 'प्रमुख कार्यकर्ता' (Key Workers) के रूप में मान्यता दी गई है।
3. भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सक्रिय नाविक कार्यबल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 3 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 2 D. 1, 2 और 3
उत्तर: C (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: 'ई-समुद्र' पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन समुद्री गवर्नेंस महानिदेशालय (DGMA) की एक परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य समुद्री प्रशासन को भौतिक कार्यालय-आधारित मॉडल से डिजिटल-प्रथम और फेसलेस गवर्नेंस की ओर स्थानांतरित करना है।
कथन 2 सही है: भारत की नई समुद्री नीति मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 के विनियामक स्तंभ पर टिकी है, जिसमें नाविकों को आधिकारिक रूप से 'प्रमुख कार्यकर्ता' (Key Workers) का दर्जा प्रदान किया गया है।
कथन 3 गलत है: भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर नाविकों का दूसरा सबसे बड़ा (second-largest) आपूर्तिकर्ता देश बनकर उभरा है, न कि सबसे बड़ा। सरकार वर्तमान सुधारों के माध्यम से जल्द ही इसे वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में कार्यरत है।
प्रश्न 4
डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की कल्याणकारी योजनाओं के हालिया नीतिगत एकीकरण (Structural Merger) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इस योजना का एकीकरण 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' और 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' के कार्यान्वयन के लिए संचालित केंद्र प्रायोजित योजना के साथ किया गया है।
3. योजनाओं के विलय के कारण उत्पन्न लंबित मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई विशेष पहल के तहत 'अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर योजना' के अंतर्गत 385 मामलों में लगभग ₹9 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: योजनाओं के कुशल कार्यान्वयन और उनमें दोहराव (duplication) को समाप्त करने के उद्देश्य से 'डॉ. अम्बेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटर-कास्ट मैरिजेज' और 'डॉ. अम्बेडकर नेशनल रिलीफ टू द शेड्यूल्ड कास्ट्स/शेड्यूल्ड ट्राइब्स विक्टिम्स ऑफ एट्रोसिटीज स्कीम' का 31 मार्च, 2023 से सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की केंद्र प्रायोजित योजना के साथ विलय कर दिया गया है।
कथन 2 सही है: इन दोनों योजनाओं का संरचनात्मक एकीकरण सीधे तौर पर 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' और 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए चलाई जा रही केंद्र प्रायोजित योजना के साथ किया गया है।
कथन 3 सही है: विलय प्रक्रिया के संक्रमण के दौरान उत्पन्न हुए लंबित मामलों (backlog) के त्वरित निपटारे के लिए डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन द्वारा एक विशेष विनियामक पहल की गई। इस पहल के हिस्से के रूप में, 'अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर योजना' के तहत कुल 385 स्वीकृत मामलों में लगभग ₹9 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन राशि सीधे जारी की गई है।




