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- भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: 'रोडमैप 2030' एवं द्विपक्षीय संबंधों का ऐतिहासिक उन्नयन
(GS Paper II: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते) - आईएनएस महेन्द्रगिरि (प्रोजेक्ट 17ए): स्वदेशी रक्षा विनिर्माण एवं समुद्री सुरक्षा क्षमता विस्तार
(GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) - MCQ
भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: 'रोडमैप 2030' एवं द्विपक्षीय संबंधों का ऐतिहासिक उन्नयन
1. संदर्भ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
10 और 11 जुलाई 2026 को भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड (ऑकलैंड) की आधिकारिक यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय का सूत्रपात किया है। यह 40 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड की पहली यात्रा है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में साझा हितों को पहचानते हुए, दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत करने का निर्णय लिया है।
2. 'रोडमैप 2030': मुख्य स्तंभ और तकनीकी विवरण
रणनीतिक साझेदारी को दिशा देने के लिए 'भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप 2030' को स्वीकृत किया गया है। यह ढांचा अगले चार वर्षों की संयुक्त कार्रवाई का मार्गदर्शन करेगा।
राजनीतिक और राजनयिक संलग्नता: नियमित उच्च-स्तरीय बैठकों के साथ-साथ एक वार्षिक 'विदेश मंत्री संवाद' (Foreign Ministers' Dialogue) तंत्र स्थापित किया गया है। साथ ही, भारतीय संसद में गठित 'न्यूज़ीलैंड के लिए संसदीय मैत्री समूह' के माध्यम से संसदीय आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग: दोनों देशों ने समुद्री सहयोग व्यवस्था (MCA), जलविज्ञान और समुद्री मानचित्रकला पर कार्यान्वयन व्यवस्था, और पारस्परिक रसद सहायता (Mutual Logistics Support) व्यवस्था को लागू करने पर सहमति व्यक्त की है। न्यूज़ीलैंड ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के तहत 'समुद्री सुरक्षा' को अपने प्राथमिकता स्तंभ के रूप में चुना है।
आतंकवाद और साइबर सुरक्षा: आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो-टॉलरेंस' दृष्टिकोण अपनाते हुए एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) की स्थापना की गई है। दोनों पक्षों ने नशीले पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर बल दिया है।
आर्थिक और व्यापारिक लक्ष्य: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। एक व्यापक और संतुलित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के निष्कर्ष और कार्यान्वयन पर भी सहमति बनी है।
3. रणनीतिक और नीतिगत महत्व
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता: दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून (विशेष रूप से UNCLOS 1982) के आधार पर नौवहन की स्वतंत्रता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई है। न्यूज़ीलैंड ने भारत की 'सागर' (SAGAR) परिकल्पना और आसियान (ASEAN) की केंद्रीयता का समर्थन किया है।
बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: न्यूज़ीलैंड ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन पुनः दोहराया है। साथ ही, भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में शामिल होने के महत्व को भी स्वीकार किया गया है।
जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा: न्यूज़ीलैंड का वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में शामिल होना और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के माध्यम से जलवायु सहयोग को गहरा करना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।
4. आर्थिक, संस्थागत और सामाजिक पक्ष
कृषि और नवाचार: कृषि उत्पादकता साझेदारी के तहत नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी फल के लिए दो 'उत्कृष्टता केंद्र' (Centres of Excellence) स्थापित किए जाएंगे।
जन-जन के बीच संबंध: न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय (प्रवासी) को दोनों देशों के बीच एक 'जीवंत सेतु' माना गया है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्र गतिशीलता और शोध सहयोग बढ़ाने के लिए 2025 की शिक्षा सहयोग व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है।
खेल और संस्कृति: वर्ष 2026 को 'खेल के माध्यम से एकता के 100 वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही, लोथल (गुजरात) स्थित 'राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर' और न्यूज़ीलैंड समुद्री संग्रहालय के बीच सहयोग पर समझौता हुआ है।
आईएनएस महेन्द्रगिरि (प्रोजेक्ट 17ए): स्वदेशी रक्षा विनिर्माण एवं समुद्री सुरक्षा क्षमता विस्तार
1. संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
भारतीय नौसेना ने 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित एक औपचारिक समारोह में स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट 'आईएनएस महेन्द्रगिरि' को अपने पूर्वी बेड़े (Sunrise Fleet) में शामिल किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में संपन्न यह कमीशनिंग प्रोजेक्ट 17ए (P17A) के अंतर्गत निर्मित छठे युद्धपोत के नौसेना में प्रवेश को चिह्नित करती है। यह घटनाक्रम न केवल भारत की जहाज निर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में 'प्रथम उत्तरदाता' (First Responder) के रूप में भारत की भूमिका को भी सुदृढ़ करता है।
2. तकनीकी विशिष्टताएँ और स्वदेशीकरण (Technical Highlights)
आईएनएस महेन्द्रगिरि का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है और इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है।
स्वदेशी सामग्री: इस युद्धपोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की सफलता का परिचायक है।
डिज़ाइन और विस्थापन: लगभग 6,670 टन के विस्थापन वाला यह फ्रिगेट 28 समुद्री मील (knots) की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम है।
हथियार प्रणालियाँ: यह सुपरसोनिक सतह-से-सतह मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस), मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MR-SAM), स्वदेशी रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चरों से सुसज्जित है।
उन्नत तकनीक: इसमें उन्नत स्टील्थ विशेषताएँ (Stealth Features), आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली (network-centric warfare system), और एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली शामिल है।
बहु-आयामी संचालन: यह बेड़ा हवाई रक्षा, सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे विविध अभियानों को संपन्न करने हेतु सक्षम है।
3. विनिर्माण दक्षता और आर्थिक पक्ष
प्रोजेक्ट 17ए के कार्यान्वयन में भारतीय नौसेना और MDL ने परिचालन दक्षता के नए मानक स्थापित किए हैं:
समय-सीमा में कटौती: लॉन्च से सुपुर्दगी (delivery) की अवधि में 50% की कमी (63 महीने से घटकर 31 महीने) और कुल निर्माण समय में 20% की कमी दर्ज की गई है।
परीक्षणों में सुधार: तकनीकी विश्लेषणों को सामान्यतः लगने वाले 5-7 समुद्री परीक्षणों के स्थान पर मात्र एक ही समुद्री परीक्षण में पूर्ण किया गया है।
MSME की भूमिका: इसके निर्माण में 200 से अधिक भारतीय उद्योगों और बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने योगदान दिया है, जिससे इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति मिली है।
4. नीतिगत और रणनीतिक महत्व
SAGAR विजन: आईएनएस महेन्द्रगिरि की कमीशनिंग 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' (SAGAR) और MAHASAGAR की परिकल्पना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल देती है।
ब्लू-वाटर नेवी: यह युद्धपोत भारत की 'ब्लू-वाटर' पहुंच का विस्तार करेगा, जिससे गहरे महासागरों में भारत के सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा: समुद्री मार्गों की सुरक्षा प्रत्यक्ष रूप से आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' जैसे अभियानों के माध्यम से नौसेना ने पहले ही अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
रक्षा कूटनीति: 'पसंदीदा सुरक्षा भागीदार' (Preferred Security Partner) के रूप में भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष: मुख्य बिंदु (FAQ)
I. भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप 2030
प्रश्न: रोडमैप 2030 के छह प्रमुख स्तंभ (Pillars) कौन से हैं?
उत्तर: (1) राजनीतिक और राजनयिक भागीदारी, (2) रक्षा और सुरक्षा सहयोग, (3) व्यापार और आर्थिक सहयोग, (4) जन-जन संबंध, संस्कृति और खेल, (5) शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं आपदा प्रबंधन, तथा (6) क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग।
प्रश्न: भारत-न्यूज़ीलैंड के व्यापारिक और आर्थिक लक्ष्यों का संक्षिप्त विवरण क्या है?
उत्तर: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वस्तु एवं सेवा व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूज़ीलैंड डॉलर (~₹35,000 करोड़) करना। मुख्य फोकस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के प्रभावी कार्यान्वयन और कृषि तकनीक (कीवी फल उत्कृष्टता केंद्र) पर है।
प्रश्न: समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग में क्या महत्वपूर्ण घोषणाएं हुईं?
उत्तर: न्यूज़ीलैंड द्वारा हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के 'समुद्री सुरक्षा' स्तंभ का नेतृत्व स्वीकारना, समुद्री सहयोग व्यवस्था (MCA) को लागू करना और वार्षिक 'समुद्री सुरक्षा संवाद' की स्थापना।
II. आईएनएस महेन्द्रगिरि (प्रोजेक्ट 17ए)
प्रश्न: आईएनएस महेन्द्रगिरि का तकनीकी और रणनीतिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह प्रोजेक्ट 17ए का छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है जिसमें 75% स्वदेशी सामग्री है। यह 'ब्रह्मोस' मिसाइलों से सुसज्जित है और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की 'प्रथम उत्तरदाता' (First Responder) क्षमता को बढ़ाता है।
प्रश्न: इस परियोजना ने विनिर्माण क्षेत्र में क्या नए मानक स्थापित किए हैं?
उत्तर: निर्माण अवधि में 20% की कमी और लॉन्च से सुपुर्दगी की समय-सीमा में 50% की कटौती (63 से 31 महीने)। यह 200 से अधिक भारतीय उद्योगों और MSMEs के सहयोग से निर्मित आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
- यह रोडमैप अगले चार वर्षों (2026-2030) के लिए संयुक्त कार्रवाई का मार्गदर्शन करने वाला एक रणनीतिक ढांचा है।
- यह दस्तावेज़ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राज्यों के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) अधिकार सृजित करता है।
- न्यूज़ीलैंड ने 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' (IPOI) के सात स्तंभों में से 'समुद्री सुरक्षा' को अपने प्राथमिकता स्तंभ के रूप में चुना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: प्रधानमंत्रियों ने 'रोडमैप 2030' को अगले चार वर्षों (2026-2030) के लिए एक साझा ढांचे के रूप में मंजूरी दी है।
कथन 2 गलत है: स्रोतों के अनुसार, यह रोडमैप न तो कोई वित्तीय प्रतिबद्धता बनाता है और न ही घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी अधिकार या दायित्व।
कथन 3 सही है: न्यूज़ीलैंड IPOI के तहत 'समुद्री सुरक्षा' स्तंभ में शामिल हुआ है, जिसका मुख्य फोकस अवैध और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने का मुकाबला करना है।
- आईएनएस महेन्द्रगिरि इस परियोजना का छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है।
- इस परियोजना में लॉन्च से सुपुर्दगी (Delivery) तक की समयावधि में लगभग 50% की कमी दर्ज की गई है।
- आईएनएस महेन्द्रगिरि के सभी तकनीकी विश्लेषण सामान्यतः लगने वाले 5-7 समुद्री परीक्षणों के स्थान पर केवल एक ही समुद्री परीक्षण में पूर्ण किए गए।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: यह अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत P17A श्रृंखला का छठा जहाज है।
कथन 2 सही है: नौसेना प्रमुख के अनुसार, सुपुर्दगी की समयावधि 63 महीने से घटकर 31 महीने (लगभग 50% की कमी) रह गई है।
कथन 3 सही है: स्वदेशी निर्माण की तकनीकी परिपक्वता के कारण, सभी विश्लेषण मात्र एक ही समुद्री परीक्षण (Sea Trial) में पूरे कर लिए गए।
| पहल/ऑपरेशन | मुख्य उद्देश्य/संदर्भ |
|---|---|
| 1. ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा | पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना |
| 2. संयुक्त कार्य बल 150 (CTF-150) | नशीले पदार्थों की तस्करी और समुद्री आतंकवाद विरोधी बहुराष्ट्रीय सहयोग |
| 3. ऑपरेशन सिंदूर | पारंपरिक और आधुनिक सैन्य क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण का उदाहरण |
उपर्युक्त में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
व्याख्या:
युग्म 1 सही है: ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत भारतीय नौसेना ने ₹9,000 करोड़ से अधिक मूल्य के माल वाले 18 व्यापारिक जहाजों की रक्षा की।
युग्म 2 सही है: भारत और न्यूज़ीलैंड ने CTF-150 के तहत सहयोग किया है, जहाँ न्यूज़ीलैंड कमांडर और भारत डिप्टी कमांडर की भूमिका में रहा।
युग्म 3 सही है: रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को आधुनिक और पारंपरिक क्षमताओं के एकीकरण के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उद्धृत किया।
- न्यूज़ीलैंड ने 'वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन' (GBA) में शामिल होने की घोषणा की है।
- दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 बिलियन न्यूज़ीलैंड डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
- कृषि सहयोग के तहत, उत्तराखंड और नागालैंड में 'कीवी फल' के लिए दो उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित किए जा रहे हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए न्यूज़ीलैंड GBA में शामिल हुआ है।
कथन 2 सही है: व्यापारिक संबंधों को गति देने हेतु 2030 तक व्यापार को NZ$7 बिलियन (~₹35,000 करोड़) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।
कथन 3 सही है: कृषि उत्पादकता साझेदारी के तहत शिक्षा और नवाचार के माध्यम से नागालैंड और उत्तराखंड में दो CoE की स्थापना की जा रही है।
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