विषय सूची (Table of Contents)
- निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI): Investment Friendliness Index (GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था, निवेश मॉडल और समावेशी विकास)
- स्पाइसजेट पर सीसीपीए की कार्रवाई: डिजिटल 'dark patterns - deceptive design practices' और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा। (GS Paper II: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; उपभोक्ता संरक्षण)
1. इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (IFI): राज्यों के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
नीति आयोग ने 17 जुलाई 2026 को 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' (IFI) रिपोर्ट जारी की है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रभावशीलता का एक संरचित और डेटा-संचालित मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। इस सूचकांक की नींव जुलाई 2024 में नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री ने निवेश आकर्षित करने हेतु एक 'इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली चार्टर' तैयार करने का कार्य सौंपा था। इसके पश्चात, केंद्रीय बजट 2025-26 में सुधारों को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने के लिए इस सूचकांक के विकास की आधिकारिक घोषणा की गई थी। यह पहल 'विकसित भारत @2047' के विजन को 'विकसित राज्य' के माध्यम से प्राप्त करने की एक रणनीतिक कड़ी है।
तकनीकी और मुख्य विवरण
इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स का निर्माण एक कठोर और परामर्शदात्री प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है, जिसमें वैश्विक और घरेलू निवेश बेंचमार्किंग पद्धतियों की समीक्षा शामिल है।
आठ प्रमुख स्तंभ (8 Pillars): सूचकांक निवेश आकर्षण का मूल्यांकन निम्नलिखित स्तंभों पर करता है— बुनियादी ढांचा (अवसंरचना - Infrastructure), व्यावसायिक वातावरण (Business climate), संसाधन (Resources), सरकारी नीति (Government policy), विनियामक सुगमता (नियामकीय सुगमता - Regulatory Ease), संस्थागत वातावरण (Institutional Environment), वित्तीय स्वास्थ्य (Financial Health), और पर्यावरणीय लचक (Environmental Resilience)।
कार्यप्रणाली: इसमें कुल 84 संकेतकों का उपयोग किया गया है, जिसमें द्वितीयक डेटा (Secondary Data) और निवेशकों के प्राथमिक सर्वेक्षण से प्राप्त 'धारणा-आधारित' माप शामिल हैं, ताकि व्यवसायों के जमीनी अनुभव को प्रतिबिंबित किया जा सके।
राज्यों का वर्गीकरण: प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
- Top Performers - शीर्ष प्रदर्शनकर्ता (50 से अधिक अंक),
- Frontrunners - अग्रणी राज्य (45–50 अंक),
- Emerging Performers - उभरते प्रदर्शनकर्ता (≥40 – <45 अंक),
- Aspiring States - आकांक्षी राज्य (40 से कम अंक)
मुख्य परिणाम और रैंकिंग
विविध भौगोलिक और प्रशासनिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए, राज्यों को तीन 'पीयर ग्रुप्स' (Peer Groups) में भी आंका गया है:
- बड़े राज्य (Large States): इस श्रेणी में गुजरात प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान है।
- पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्य: उत्तराखंड सर्वोच्च स्थान पर रहा, उसके बाद असम और हिमाचल प्रदेश हैं।
- केंद्र शासित प्रदेश और नगर राज्य: गोवा ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद दिल्ली और चंडीगढ़ का स्थान है।
- समग्र 'टॉप परफॉर्मर्स': गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा समग्र सूचकांक में अग्रणी बनकर उभरे हैं।
महत्व
- सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद: IFI राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करता है और उन्हें सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाने हेतु प्रेरित करता है।
- नीतिगत सुधारों का उत्प्रेरक: यह रिपोर्ट केवल रैंकिंग प्रदान नहीं करती, बल्कि राज्यों की शक्तियों और सुधार की आवश्यकताओं की पहचान कर उन्हें रणनीतिक सुधारों की दिशा में मार्गदर्शिका प्रदान करती है।
- निवेशक विश्वास: विस्तृत 'स्टेट प्रोफाइल' निवेशकों को प्रत्येक क्षेत्राधिकार में उपलब्ध अवसरों, नियामक दक्षता और नीतिगत पूर्वानुमान क्षमता (Policy Predictability) को समझने में मदद करते हैं।
2. स्पाइसजेट (SpiceJet) पर सीसीपीए (CCPA) की कार्रवाई: डिजिटल 'डार्क पैटर्न' के विरुद्ध विनियामक हस्तक्षेप
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने स्पाइसजेट लिमिटेड पर अपने उड़ान बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भ्रामक डिजाइन प्रथाओं, जिन्हें 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) कहा जाता है, अपनाने के लिए ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए ने यह कार्रवाई उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण और डिजिटल व्यापार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत की है। प्राधिकरण ने पाया कि कंपनी की ये प्रथाएं उपभोक्ता स्वायत्तता को बाधित करती हैं और सूचित निर्णय लेने की प्रक्रिया को कमजोर करती हैं।
तकनीकी और मुख्य विवरण
सीसीपीए ने स्पाइसजेट के बुकिंग प्लेटफॉर्म पर कई विशिष्ट 'डार्क पैटर्न' की पहचान की है:
- जबरन कार्रवाई (Forced Action): ग्राहकों को 'स्पाइस क्लब लॉयल्टी प्रोग्राम' में एक प्री-टिक किए गए चेकबॉक्स के माध्यम से स्वतः नामांकित किया जा रहा था।
- इंटरफ़ेस हस्तक्षेप (Interface Interference): कंपनी ने अपने पसंदीदा विकल्पों को 'डिफ़ॉल्ट' विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे उपभोक्ताओं के निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रभावित हुई।
- भ्रामक प्रश्न (Trick Question): सहमति प्राप्त करने के लिए भ्रमित करने वाली और नकारात्मक भाषा का उपयोग किया गया, जिसमें उपभोक्ताओं को गुमराह करने की क्षमता थी।
- प्रचार संदेशों हेतु डिफ़ॉल्ट सहमति: उपभोक्ताओं द्वारा बिना किसी सक्रिय कार्रवाई के, उन्हें प्रचार संदेश प्राप्त करने के लिए सहमत मान लिया गया क्योंकि विकल्प पहले से ही चयनित था।
महत्व
- नियामक सुदृढ़ता: प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्री-टिक किए गए चेकबॉक्स, डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स या भ्रामक इंटरफ़ेस डिजाइन के माध्यम से प्राप्त सहमति वैध नहीं है और यह कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है।
- डिजिटल संप्रभुता और पारदर्शिता: यह कार्रवाई डिजिटल अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता को 'जोड़तोड़' (Manipulation) के बजाय 'सूचित विकल्प' (Informed Choice) देने के सिद्धांत को सुदृढ़ करती है।
- ई-कॉमर्स मानकों का अनुपालन: यह आदेश दोहराता है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को उपभोक्ता की सहमति प्राप्त करने के लिए 'स्पष्ट और सकारात्मक कार्रवाई' (Explicit and Affirmative Action) का पालन करना अनिवार्य है।
संस्थागत पक्ष
- सुधारात्मक कदम: स्पाइसजेट ने इन मुद्दों को एक 'तकनीकी त्रुटि' बताया है, जिसके बाद प्राधिकरण ने कंपनी से एक अंडरटेकिंग (Undertaking) मांगी है कि आवश्यक सुधारात्मक कदम स्थायी रूप से लागू किए जाएंगे।
- नियामक प्रतिबद्धता: सीसीपीए ने अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्मों को निष्पक्ष, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित तरीके से व्यवसाय संचालित करने के लिए उत्तरदायी बनाए रखेगा।
UPSC अभ्यास प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1.
नीति आयोग द्वारा जारी 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' (IFI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह सूचकांक राज्यों के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन करने के लिए पूरी तरह से केवल सरकारी सांख्यिकीय डेटा (Secondary Data) पर निर्भर है।
- 'पर्यावरणीय लचीलापन' (Environmental Resilience) को इस सूचकांक के मूल्यांकन के आठ प्रमुख स्तंभों में से एक के रूप में शामिल किया गया है।
- इसका उद्देश्य राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देकर 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 3
- (D) 1, 2 और 3
विस्तृत विश्लेषणात्मक व्याख्या:
कथन 1 गलत है: IFI की कार्यप्रणाली केवल द्वितीयक डेटा तक सीमित नहीं है। इसमें 84 संकेतकों का एक व्यापक ढांचा शामिल है, जिसमें सरकारी डेटा के साथ-साथ निवेशकों के प्राथमिक सर्वेक्षण से प्राप्त 'धारणा-आधारित' (Perception-based) उपाय भी शामिल हैं। यह निवेशकों के 'जमीनी अनुभव' को भी महत्व देता है।
कथन 2 सही है: सूचकांक का मूल्यांकन 8 प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: बुनियादी ढांचा, व्यावसायिक माहौल, संसाधन, सरकारी नीति, विनियामक सुगमता, संस्थागत वातावरण, वित्तीय स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लचीलापन। अंतिम स्तंभ यह सुनिश्चित करता है कि निवेश केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि सतत विकास पर भी केंद्रित हो।
कथन 3 सही है: IFI का विजन 'विकसित राज्य के माध्यम से विकसित भारत' है। यह राज्यों को सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और सुधारों में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करके प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करता है।
प्रश्न 2.
डिजिटल अर्थव्यवस्था में 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) के नियमन और उपभोक्ता अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 'इंटरफ़ेस हस्तक्षेप' (Interface Interference) के तहत उपभोक्ता को किसी सेवा या कार्यक्रम में स्वतः नामांकित करने के लिए प्री-टिक किए गए चेकबॉक्स का उपयोग किया जाता है।
- उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4(9) के तहत यह अनिवार्य है कि उपभोक्ता की सहमति केवल स्पष्ट और सकारात्मक कार्रवाई (Explicit and Affirmative Action) के माध्यम से प्राप्त की जाए।
- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को 'डार्क पैटर्न की रोकथाम एवं विनियमन हेतु दिशा-निर्देश, 2023' के तहत दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
विस्तृत विश्लेषणात्मक व्याख्या:
कथन 1 गलत है: प्री-टिक किए गए चेकबॉक्स के माध्यम से किसी उपभोक्ता को स्वतः नामांकित करना 'फोर्स्ड एक्शन' (Forced Action) कहलाता है। जबकि 'इंटरफ़ेस हस्तक्षेप' (Interface Interference) में कंपनी अपने पसंदीदा विकल्प को 'डिफ़ॉल्ट' के रूप में इस प्रकार प्रस्तुत करती है कि वह उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित कर सके।
कथन 2 सही है: विनियामक ढांचे के अनुसार, ई-कॉमर्स नियम 2020 का नियम 4(9) स्पष्ट रूप से कहता है कि उपभोक्ता की सहमति तब तक वैध नहीं मानी जाएगी जब तक कि वह स्पष्ट, सूचित और स्वतंत्र रूप से न दी गई हो। प्री-टिक किए गए चेकबॉक्स या डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स के माध्यम से प्राप्त सहमति कानून की दृष्टि में अमान्य है।
कथन 3 सही है: CCPA एक वैधानिक निकाय है जिसके पास उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन और भ्रामक प्रथाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने की शक्तियां हैं। स्पाइसजेट पर हाल ही में लगाया गया जुर्माना इसी विनियामक अधिकार और डार्क पैटर्न दिशा-निर्देश 2023 के अनुपालन का हिस्सा है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म को पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित तरीके से व्यवसाय संचालित करने के लिए उत्तरदायी बनाता है।
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