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- गोबर्धन (राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना) - GOBARdhan, the National Circular Bioenergy Scheme: (UPSC GS Paper III: बुनियादी ढाँचा - ऊर्जा; वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन व पर्यावरण; तथा भारतीय अर्थव्यवस्था व कृषि विकास)।
1. गोबर्धन (राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना): GOBARdhan, the National Circular Bioenergy Scheme
संदर्भ (Context)
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 अगस्त 2026 को देश की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक मूल्य में परिवर्तित करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय एकीकृत योजना "गोबर्धन" (राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना - National Circular Bioenergy Scheme) को मंजूरी प्रदान की है। कुल ₹23,731 करोड़ के विशाल बजटीय परिव्यय वाली यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 (10 वर्ष की अवधि) तक लागू की जाएगी।
वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस आवश्यकताओं का लगभग 50 प्रतिशत आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जो भारत के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात के लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्से का वहन करता है, वहां होने वाले भू-राजनीतिक व्यवधानों ने घरेलू ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया है। इस परिप्रेक्ष्य में, गोबर्धन योजना संपीड़ित बायोगैस (Compressed Biogas - CBG) को देश के भावी ऊर्जा मिश्रण (Energy mix) के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करेगी।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
गोबर्धन योजना को व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए इसे छह विकास इंजनों (Six Growth Engines) या घटकों के रूप में तैयार किया गया है:
घटक 1: सुनिश्चित संपीड़ित बायोगैस निकासी (Assured CBG Offtake): बायोगैस उत्पादकों के लिए एक विश्वसनीय बाजार प्रदान करने हेतु एक अनिवार्य सम्मिश्रण ढांचा (Blending obligation) स्थापित किया गया है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं द्वारा सीएनजी (CNG - परिवहन) और पीएनजी (PNG - घरेलू) क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से खरीद अनिवार्य की गई है: वित्त वर्ष 2026-27: 3 प्रतिशत (3%), वित्त वर्ष 2027-28: 4 प्रतिशत (4%), वित्त वर्ष 2028-29 और आगे: 5 प्रतिशत (5%)।
घटक 2: स्थिर संपीड़ित बायोगैस मूल्य निर्धारण (Stable Pricing Framework): दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ₹2,110 प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) (यानी लगभग ₹105 प्रति किलोग्राम) का प्रशासित बायोगैस मूल्य (Administered price) लागू किया है। इस ढांचे को न्यूनतम 10 वर्षों के लिए वैध रखा गया है।
घटक 3: पूंजी सहायता (Capital Assistance): पात्र नई (Greenfield) परियोजनाओं को स्थापित सीबीजी क्षमता के प्रति टन प्रति दिन (TPD) तक ₹2 करोड़ की पूंजी सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता मुख्य मशीनरी के साथ-साथ बायोमास एकत्रीकरण और जैविक खाद प्रसंस्करण जैसे मूल्य-श्रृंखला परिसंपत्तियों के लिए भी देय होगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली पुरानी (Brownfield) परियोजनाएं भी इसके योग्य होंगी।
घटक 4: पाइपलाइन अवसंरचना का विकास (Pipeline Infrastructure): सीबीजी संयंत्रों को राष्ट्रीय ग्रिड और शहरी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए क्लस्टर-आधारित और स्वतंत्र पाइपलाइन निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे परिवहन व निकासी लागत कम होगी।
घटक 5: क्रेडिट गारंटी सहायता (Credit Guarantee Support): पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर आधारित सीबीजी परियोजनाओं के लिए बिना किसी अतिरिक्त संपार्श्विक (Collateral) के ऋण प्रवाह बढ़ाने हेतु एक विशेष तंत्र विकसित किया गया है, जो बैंकों के लिए पात्र ऋणों पर 85 प्रतिशत तक की ऋण गारंटी सुरक्षा (Credit Guarantee Coverage) प्रदान करता है।
घटक 6: सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड (Ecosystem Challenge Fund): जिला स्तर पर स्थानीय कच्चे माल के संसाधन मानचित्रण, एकत्रीकरण अवसंरचना, जैविक खाद के मूल्यवर्धन और हितधारकों की जागरूकता जैसे कार्यों को गति देने के लिए एक समर्पित चुनौती कोष बनाया गया है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
एकीकृत प्रशासनिक नियंत्रण: गोबर्धन योजना को पहले Swachh Bharat Mission (Grameen) के तहत वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। पूर्व में इसका इकोसिस्टम चार अलग-अलग मंत्रालयों में विभाजित था। नीतिगत समन्वय को तीव्र और त्रुटिहीन बनाने के लिए अब संपूर्ण योजना को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अधीन एकीकृत कर दिया गया है।
घरेलू उत्पादन में दस गुना वृद्धि: इस नीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को लगभग दस गुना तक बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना है।
रणनीतिक आयात विस्थापन: रासायनिक रूप से संपीड़ित बायोगैस (CBG) प्राकृतिक गैस के पूरी तरह समतुल्य है और इसे वर्तमान गैस ग्रिड में सीधे एकीकृत किया जा सकता है। इससे भारत की ऊर्जा संप्रभुता (Energy sovereignty) सुदृढ़ होगी।
पर्यावरणीय धारणीयता और शुद्ध शून्य लक्ष्य: जैविक कचरे को लैंडफिल से हटाने के परिणामस्वरूप एक दशक के दौरान 40 मीट्रिक मिलियन टन (MMT) से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी, जो भारत के शुद्ध शून्य (Net-Zero) लक्ष्यों के अनुकूल है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष (Economic and Institutional Side)
व्यापक आर्थिक लाभ (दशक का दृष्टिकोण): अगले दस वर्षों में इस एकीकृत राष्ट्रीय नीति के माध्यम से देश को कई व्यापक आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे:
नवीकरणीय बायोगैस उत्पादन से आयातित जीवाश्म ईंधन विस्थापन के कारण ₹40,000 करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा (Forex) की बचत होगी।
यह नवोदित बायोगैस उद्योग राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ₹75,000 करोड़ से अधिक का योगदान जोड़ेगा।
पूरी मूल्य श्रृंखला (Value chain) में 1.5 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।
सहयोगी योजनाएं और वित्तीय सहायता:
बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना: ₹564.75 करोड़ के कुल आवंटन के साथ लागू इस योजना में सीबीजी उत्पादकों को बायोमास एकत्रीकरण उपकरण खरीदने में सहायता दी जाती है। मार्च 2026 तक ₹248 करोड़ की वित्तीय सहायता वाले 37 प्रस्तावों को स्वीकृति मिल चुकी है।
पाइपलाइन अवसंरचना विकास (DPI) योजना: वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 की अवधि के लिए ₹994.5 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ संचालित इस योजना के तहत अब तक ₹56.31 करोड़ स्वीकृत किए जा चुके हैं।
बाजार विकास सहायता (MDA) योजना: उर्वरक विभाग द्वारा पंजीकृत सीबीजी संयंत्रों से उत्पादित जैविक उर्वरकों (FOM, LFOM) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन की वित्तीय सहायता दी जा रही है। 28 फरवरी 2026 तक इस मद में ₹111.72 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
पोर्टल और परिचालन प्रगति (Unified Registration Portal):
देश भर में सीबीजी संयंत्र स्थापित करने के इच्छुक विकासकर्ताओं के लिए गोबर्धन एकीकृत पंजीकरण पोर्टल (gobardhan.eil.co.in) अनिवार्य बनाया गया है।
06 अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े: देश में कुल 1,908 बायोगैस संयंत्र पंजीकृत हैं, जिनमें से 217 संयंत्र चालू (Commissioned) हो चुके हैं और प्रतिदिन 0.4 मिलियन मानक घन मीटर (MMSCMD) गैस का उत्पादन कर रहे हैं। अतिरिक्त 339 संयंत्र निर्माणाधीन हैं।
UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: गोबर्धन योजना की नोडल एजेंसी (MoPNG); योजना की कार्यान्वयन अवधि (FY 2026-27 से FY 2035-36); छह बुनियादी विकास घटक; ब्लेंडिंग दायित्व की चरणबद्ध दरें (3%, 4%, 5%); प्रशासित मूल्य ढांचा (₹2,110/MMBTU); एमएसएमई हेतु 85% क्रेडिट गारंटी; और गोबर्धन पोर्टल के पंजीकरण संबंधी डेटा।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III):
पर्यावरण और अपशिष्ट प्रबंधन: 'कचरे से कंचन' (Waste-to-Wealth) की अवधारणा, जैविक कचरे का पुनर्चक्रण और चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था (Circular Bioeconomy) का निर्माण।
भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि: कृषि अवशेषों और गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण से किसानों के लिए गैर-कृषि आय के स्रोतों का सृजन, स्थानीय रोजगार और जैविक खादों के उपयोग से भूमि की उत्पादकता में सुधार।
ऊर्जा सुरक्षा: बाह्य भू-राजनीतिक अस्थिरताओं (जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग के संकट) के बीच घरेलू बायोगैस उत्पादन द्वारा रणनीतिक संप्रभुता का सुदृढ़ीकरण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. गोबर्धन (GOBARdhan) राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना क्या है?
यह ₹23,731 करोड़ के परिव्यय वाली एक राष्ट्रीय एकीकृत योजना है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 अगस्त 2026 को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य कृषि अवशेषों, गोबर और जैविक कचरे को संपीड़ित बायोगैस (CBG), जैविक खाद और ग्रामीण समृद्धि में बदलना है। यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू होगी।
2. गोबर्धन योजना के छह विकास इंजन (Growth Engines) क्या हैं?
इसमें सुनिश्चित CBG निकासी, स्थिर मूल्य निर्धारण ढांचा, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना विकास, क्रेडिट गारंटी सहायता, और CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड शामिल हैं।
3. CBG के लिए ब्लेंडिंग दायित्व (Blending Obligation) की दरें क्या हैं?
CGD संस्थाओं को CNG और PNG क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से CBG खरीदना अनिवार्य है: वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, वित्त वर्ष 2027-28 में 4%, और वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5%।
4. गोबर्धन योजना का प्रशासित मूल्य ढांचा क्या है?
सरकार ने ₹2,110 प्रति MMBTU (लगभग ₹105 प्रति किलोग्राम) का प्रशासित बायोगैस मूल्य निर्धारित किया है, जो न्यूनतम 10 वर्षों के लिए वैध रहेगा, जिससे उत्पादकों को दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता मिलेगी।
5. गोबर्धन पोर्टल पर अब तक कितने बायोगैस संयंत्र पंजीकृत हैं?
06 अगस्त 2026 तक कुल 1,908 बायोगैस संयंत्र पंजीकृत हैं, जिनमें से 217 चालू हो चुके हैं और प्रतिदिन 0.4 मिलियन मानक घन मीटर (MMSCMD) गैस का उत्पादन कर रहे हैं, जबकि 339 संयंत्र निर्माणाधीन हैं।
अभ्यास प्रश्न - MCQs for UPSC CSE Prelims
प्रश्न 1
संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र के आधार और सहयोगी योजनाओं के वित्तीय संकेतकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. पाइपलाइन अवसंरचना विकास (DPI) योजना को वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29 की अवधि के लिए ₹994.5 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ संचालित किया जा रहा है।
3. बाजार विकास सहायता (MDA) योजना के तहत गोबर्धन और सीबीजी संयंत्रों से उत्पादित ठोस व तरल जैविक उर्वरकों (FOM और LFOM) को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन की वित्तीय सहायता दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना का कुल बजटीय आवंटन ₹564.75 करोड़ है, जो सीबीजी उत्पादकों को बायोमास एकत्रीकरण के लिए उपकरण खरीदने में वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
कथन 2 सही है: सीबीजी की बाजार तक सुगम निकासी सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन अवसंरचना विकास (DPI) योजना को वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक ₹994.5 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ लागू किया गया है।
कथन 3 सही है: रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए बाजार विकास सहायता (MDA) योजना के माध्यम से सीबीजी संयंत्रों से उत्पादित किण्वित जैविक खाद (Fermented Organic Manure - FOM) और तरल किण्वित जैविक खाद (LFOM) के संवर्धन हेतु ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
प्रश्न 2
'गोबर्धन (राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना)' के रणनीतिक और पारिस्थितिकी-आर्थिक (Eco-economic) उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. यह योजना केवल गैसीय ऊर्जा के उत्पादन तक सीमित है, और किण्वित जैविक खाद (FOM/LFOM) की मूल्य श्रृंखला का संवर्धन इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
3. पूर्ववर्ती खंडित प्रशासनिक व्यवस्था के विपरीत, नीतिगत सुसंगतता और त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण सीबीजी मूल्य श्रृंखला को अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एकीकृत किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: C (केवल 1 और 3)
कथन 1 सही है: संपीड़ित बायोगैस (CBG) रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के पूर्णतः समतुल्य (Chemically equivalent) होती है। इसी कारण इसे बिना किसी ढांचागत बदलाव के भारत के मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में आसानी से एकीकृत किया जा सकता है।
कथन 2 गलत है: गोबर्धन योजना केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'कचरे से कंचन' (Waste-to-Wealth) और एक सुदृढ़ जैविक खाद अर्थव्यवस्था (Organic manure economy) बनाने पर केंद्रित है। यह किण्वित जैविक खाद (FOM) और तरल किण्वित जैविक खाद (LFOM) के उत्पादन, मूल्यवर्धन और उपयोग को मुख्य घटक के रूप में बढ़ावा देती है।
कथन 3 सही है: पहले संपीड़ित बायोगैस (CBG) का पारिस्थितिकी तंत्र चार अलग-अलग मंत्रालयों में विभाजित था। नीतिगत बाधाओं को दूर करने, निवेशकों में निश्चितता बढ़ाने और त्वरित कार्यान्वयन के लिए संपूर्ण योजना को अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अधीन एकीकृत किया गया है।
प्रश्न 3
गोबर्धन योजना के तहत बाजार की अनिश्चितता को दूर करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाए गए नीतिगत उपकरणों (Policy Instruments) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. प्रशासित मूल्य निर्धारण ढांचा (Administered pricing framework) केवल उपभोक्ताओं के लिए वहनीयता सुनिश्चित करता है, तथा उत्पादकों को बाजार की कीमतों के उतार-चढ़ाव से कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।
3. समर्पित क्रेडिट गारंटी तंत्र (Credit Guarantee Mechanism) विशेष रूप से एमएसएमई (MSMEs) और नए उद्यमियों के लिए ऋण जोखिम को साझा करके संस्थागत ऋण तक पहुंच को आसान बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
उत्तर: C (केवल 1 और 3)
कथन 1 सही है: सीबीजी उत्पादकों को एक विश्वसनीय बाजार प्रदान करने के लिए सीएनजी और पीएनजी क्षेत्रों में चरणबद्ध सम्मिश्रण बाध्यता (3%, 4% और 5%) लागू की गई है। यह मिश्रण बाध्यता उद्योग के लिए एक स्पष्ट, दीर्घकालिक मांग संकेत में परिवर्तित होती है जो परियोजनाओं की ऋणयोग्यता (Bankability) में सुधार करती है।
कथन 2 गलत है: स्थापित प्रशासित मूल्य निर्धारण ढांचा (Administered pricing framework) दोहरा लाभ प्रदान करता है। यह सरकारी वित्तीय सहायता और बाजार-आधारित लागत-साझाकरण के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए वहनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उत्पादकों को न्यूनतम 10 वर्षों के लिए दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता और निश्चित लाभ प्रदान करता है।
कथन 3 सही है: समर्पित ऋण गारंटी तंत्र ऋणदाताओं के विश्वास को मजबूत करता है और एमएसएमई-आधारित सीबीजी परियोजनाओं के लिए ऋण जोखिम के एक बड़े हिस्से (85 प्रतिशत तक) को साझा करता है। इससे संपार्श्विक (Collateral) आवश्यकताओं में कमी आती है और पहली बार के उद्यमियों व एमएसएमई की भागीदारी का विस्तार होता है।
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