विषय सूची (Table of Contents)
- ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 : दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में आयोजित 27 देशों का बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास (GS Paper II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध - क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; GS Paper III: आंतरिक सुरक्षा - समुद्री सुरक्षा)।
- प्रथम स्वदेशी 'एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन' का सफल विकास: डीआरडीओ (DRDO) और निजी उद्योग की साझेदारी में 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के जेट इंजन का निर्माण (GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और रक्षा विनिर्माण)।।
- लंबी दूरी की 'कुशा' (Kusha) मिसाइल का सफल प्रथम उड़ान परीक्षण: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - रक्षा अनुसंधान और विकास; आंतरिक सुरक्षा)।
1. ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2: बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग का सुदृढ़ीकरण
संदर्भ (Context)
23 जुलाई 2026 को दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में 'OPERATION SOUTHERN READINESS 26-2' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास था, जिसका आयोजन भारतीय नौसेना द्वारा कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेस (CMF) के साथ साझेदारी में किया गया। इस अभ्यास का संचालन भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF) 154 के तत्वावधान में किया गया, जो वैश्विक समुद्री सुरक्षा ढांचे में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
व्यापक भागीदारी: इस अभ्यास में 27 देशों के 276 कर्मियों ने भाग लिया, जिन्हें 76 सुविधाकर्ताओं और विषय विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त था।
प्रशिक्षण का दायरा: चार दिनों के दौरान कुल 3,800 प्रशिक्षण मानव-घंटे (man-hours) उत्पन्न किए गए।
प्रशिक्षण के मुख्य क्षेत्र: इसमें समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA), सूचना साझाकरण, समुद्री कानून, मादक द्रव्य रोधी अभियान, असममित खतरे (Asymmetric Threats) और समुद्री मानवरहित प्रणालियों (Uncrewed Systems) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और प्रशिक्षण शामिल था।
व्यावहारिक अभ्यास: प्रतिभागियों ने आग बुझाने (Firefighting), क्षति नियंत्रण, समुद्र में उत्तरजीविता (Survival at Sea) और बोर्डिंग प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसमें भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर समुद्र में दिया गया प्रशिक्षण भी शामिल था।
महत्व (Strategic Significance)
अंतर-संचालनीयता (Interoperability): इस जुड़ाव ने भाग लेने वाले देशों के बीच पेशेवर नेटवर्क, परिचालन आत्मविश्वास और अंतर-संचालनीयता को मज़बूत किया है।
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण: यह अभ्यास हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय क्षमता को मजबूत करता है।
भारतीय नौसेना का नेतृत्व: अभ्यास के सफल संचालन ने CTF 154 के नेतृत्व में भारतीय नौसेना की विशेषज्ञता और दक्षिणी नौसेना कमान को एक प्रमुख वैश्विक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष
संस्थागत सहयोग: प्रशिक्षण को सूचना संलयन केंद्र - हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR), कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेस (CMF) और संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध कार्यालय (UNODC) जैसे विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग प्राप्त हुआ।
आधुनिक बुनियादी ढांचा: इस ऑपरेशन ने भारतीय नौसेना के आधुनिक प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे और अत्याधुनिक सिमुलेटरों की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है।
2. प्रथम स्वदेशी 'एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन' का सफल विकास: एयरोस्पेस क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
संदर्भ (Context)
भारत के रक्षा और एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए, 22 जुलाई 2026 को 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के पहले स्वदेशी 'Expendable Turbo Jet Engine' का सफलतापूर्वक विकास और वितरण किया गया। इस इंजन को डीआरडीओ (DRDO) की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे हैदराबाद स्थित निजी उद्योग भागीदार आजाद इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित और असेंबल किया गया है। यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदायों के बीच वर्षों की सघन भागीदारी और परिशुद्ध इंजीनियरिंग का परिणाम है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
इंजन क्षमता: यह 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का एक टर्बो जेट इंजन है, जिसे विशेष रूप से 'एक्सपेंडेबल' (व्यय योग्य) उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है।
जटिल इंजीनियरिंग: जेट इंजन तकनीक को दुनिया के सबसे परिष्कृत इंजीनियरिंग विषयों में से एक माना जाता है, जिसमें असाधारण परिशुद्धता, उन्नत धातुकर्म (Advanced Metallurgy) और समझौताहीन विनिर्माण मानकों की आवश्यकता होती है।
विनिर्माण भागीदार: GTRE ने इस जटिल प्रणाली के निर्माण और असेंबली के लिए आजाद इंजीनियरिंग को उद्योग भागीदार के रूप में चुना था।
प्रणाली वितरण: इंजन को आधिकारिक तौर पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों (डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन और डॉ. एस.वी. रमनमूर्ति) को आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ श्री राकेश चोपदार द्वारा सौंपा गया।
महत्व (Strategic Significance)
रणनीतिक स्वायत्तता: इस प्रकार की जटिल जेट इंजन तकनीक अब तक केवल दुनिया के कुछ ही देशों के पास उपलब्ध है। इसका स्वदेशी विकास भारत की 'रणनीतिक संप्रभुता' को सुदृढ़ करता है।
रक्षा स्वदेशीकरण: DRDO के डिजाइन पर आधारित इस प्रणाली की डिलीवरी भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं और 'आत्मनिर्भर भारत' विज़न के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
प्रतिस्पर्धात्मक कौशल: यह उपलब्धि एयरोस्पेस (Aerospace) क्षेत्र में भारत के प्रतिस्पर्धात्मक कौशल को उन्नत करती है और भविष्य की रक्षा प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।
संस्थागत पक्ष
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): रक्षा सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने GTRE और निजी उद्योग के बीच इस साझेदारी की सराहना की है, जिसने एक विज़न को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।
स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र: यह परियोजना भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) और घरेलू विनिर्माण इकाइयों के बीच समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता को कम करने में सहायक होगा।
3. लंबी दूरी की 'कुशा' (Kusha) मिसाइल का सफल प्रथम उड़ान परीक्षण: वायु रक्षा में एक युगांतरकारी उपलब्धि
संदर्भ (Context)
23 जुलाई 2026 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 'कुशा' (Kusha) का सफल प्रथम उड़ान परीक्षण (Maiden flight-test) संपन्न किया। यह परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के विरुद्ध किया गया था, जो उच्च गति और उच्च ऊंचाई वाले हवाई खतरे का अनुकरण कर रहा था, जिसे मिसाइल प्रणाली ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। यह परीक्षण भारत की वायु रक्षा प्रणालियों को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
बहुमुखी मारक क्षमता: 'कुशा' मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) और बड़े दुश्मन विमानों जैसे विविध हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।
परिचालन दायरा: यह प्रणाली एक विस्तृत रेंज (Range) और ऊंचाई के Altitude Envelope के भीतर प्रभावी ढंग से कार्य करती है।
स्वदेशी घटक: मिसाइल, रडार, कमांड और कंट्रोल सेंटर सहित हथियार प्रणाली के सभी प्रमुख तत्वों को विभिन्न DRDO प्रयोगशालाओं और उद्योग भागीदारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
सफल प्रदर्शन: अपने पहले ही परीक्षण में प्रणाली ने उच्च-तकनीकी मानकों पर आधारित सिम्युलेटेड खतरों को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी कर अपनी सटीकता सिद्ध की है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' क्या है?
यह भारतीय नौसेना द्वारा कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेस (CMF) के साथ साझेदारी में दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में आयोजित एक चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास है, जिसमें 27 देशों के 276 कर्मियों ने भाग लिया।
2. भारत का पहला स्वदेशी 'एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन' किसने विकसित किया है?
इस 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के इंजन को DRDO की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) ने डिजाइन किया है और हैदराबाद स्थित आजाद इंजीनियरिंग ने इसका निर्माण व असेंबली की है।
3. 'कुशा' (Kusha) मिसाइल क्या है और इसका परीक्षण कहां हुआ?
'कुशा' एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसका प्रथम सफल उड़ान परीक्षण 23 जुलाई 2026 को ओडिशा के तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
4. 'कुशा' मिसाइल प्रणाली किन हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है?
यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) और बड़े दुश्मन विमानों जैसे विविध हवाई खतरों को एक विस्तृत रेंज और ऊंचाई के भीतर नष्ट करने में सक्षम है।
5. 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' का नेतृत्व किसने किया?
इस अभ्यास का संचालन भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले CTF 154 (Combined Task Force) के तत्वावधान में किया गया, जिसे सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR), CMF और UNODC जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग प्राप्त था।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
प्रश्न 1
हाल ही में सफल परीक्षण की गई लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल 'कुशा' (Kusha) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. यह मिसाइल प्रणाली मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) और बड़े दुश्मन विमानों को नष्ट करने में सक्षम है।
3. इस मिसाइल प्रणाली के सभी तत्वों को पूर्णतः विदेशी प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: 23 जुलाई 2026 को DRDO ने ओडिशा के तट पर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से 'कुशा' मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया।
कथन 2 सही है: यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, UAVs और बड़े विमानों सहित विभिन्न हवाई खतरों को व्यापक रेंज में बेअसर करने में सक्षम है।
कथन 3 गलत है: मिसाइल, रडार और कमांड सेंटर सहित इस हथियार प्रणाली के सभी तत्वों को DRDO प्रयोगशालाओं और उद्योग भागीदारों द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
प्रश्न 2
भारत के पहले स्वदेशी 'एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन' (Expendable Turbo Jet Engine) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इसे DRDO की प्रयोगशाला गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया गया है।
3. इस परियोजना के लिए आजाद इंजीनियरिंग, हैदराबाद को विनिर्माण और असेंबली हेतु उद्योग भागीदार के रूप में चुना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 2
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: यह भारत का पहला स्वदेशी 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन है।
कथन 2 सही है: इंजन का डिजाइन और विकास DRDO की बेंगलुरु स्थित प्रयोगशाला GTRE द्वारा किया गया है।
कथन 3 सही है: आजाद इंजीनियरिंग इस जटिल इंजन प्रणाली के विनिर्माण और सफल वितरण में उद्योग भागीदार रही है। जेट इंजन तकनीक का यह सफल विकास भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, जो वर्तमान में विश्व के केवल कुछ ही देशों के पास है।
प्रश्न 3
'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' (Operation Southern Readiness 26-2) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
A. यह दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में आयोजित एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास था।
B. इसमें कुल 27 देशों के कर्मियों ने भाग लिया और यह भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF) 154 के तहत आयोजित किया गया था।
C. इस प्रशिक्षण अभ्यास में केवल भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों ने ही प्रशिक्षण प्रदान किया।
D. यह अभ्यास मुख्य रूप से केवल गहरे समुद्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) पर केंद्रित था।
उत्तर: B
विकल्प B सही है: यह एक बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण अभ्यास था जिसमें 27 देशों के 276 कर्मियों ने भाग लिया। इसका संचालन भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले CTF 154 के तत्वावधान में किया गया था।
विकल्प A गलत है: यह द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय (Multinational) अभ्यास था।
विकल्प C गलत है: इसमें भारतीय नौसेना के अलावा CMF, UNODC और IMO IMLI जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने भी प्रशिक्षण प्रदान किया।
विकल्प D गलत है: प्रशिक्षण का दायरा व्यापक था, जिसमें समुद्री कानून, मादक द्रव्य रोधी अभियान, असममित खतरे और समुद्री मानवरहित प्रणालियों जैसे कई विषय शामिल थे।




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