विषय सूची (Table of Contents)
- आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ (SAMARTH) पोर्टल और मॉडल ओएसआर (OSR) नियम: (GS Paper II: शासन व्यवस्था - पंचायती राज संस्थाएं और वित्तीय विकेंद्रीकरण)।
- लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026: (GS Paper II: शासन व्यवस्था - पारदर्शिता और जवाबदेही; सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)।
1. आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ (SAMARTH) पोर्टल और मॉडल ओएसआर (OSR) नियम: पंचायती राज के वित्तीय सशक्तिकरण की नई दिशा
संदर्भ (Context)
27 जुलाई 2026 को केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम', 'समर्थ (SAMARTH) पंचायत पोर्टल' और 'मॉडल ओएसआर (Own Source of Revenue) नियम' का शुभारंभ किया। यह पहल 'विकसित भारत @2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप पंचायती राज संस्थानों (PRIs - Panchayati Raj Institutions) को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक युगांतकारी कदम है। इस अवसर पर मंत्रालय को 'पंचायत उन्नति सूचकांक' (PAI) के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2026 से भी सम्मानित किया गया।
मुख्य विवरण (Technical Highlights)
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम: यह पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों की पहचान कर उन्हें स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने में सक्षम बनाता है।
लक्ष्य: 4 वर्षों में कुल 350 परियोजनाएं विकसित करना (प्रथम वर्ष में 50 और आगामी तीन वर्षों में प्रति वर्ष 100)।
पात्रता: कम से कम ₹50 लाख ओएसआर वाली ग्राम पंचायतें और ₹1 करोड़ ओएसआर वाली ब्लॉक पंचायतें (जिनका कार्यकाल न्यूनतम 3 वर्ष शेष हो) आवेदन हेतु पात्र हैं।
समर्थ पंचायत पोर्टल: ओएसआर प्रबंधन के लिए यह एक एकीकृत डिजिटल मंच है, जो करदाता पंजीकरण से लेकर ऑनलाइन भुगतान और वास्तविक समय की निगरानी तक की सुविधा प्रदान करता है।
वर्तमान स्थिति: छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश पहले ही इस पोर्टल पर शामिल हो चुके हैं, जहाँ 51 लाख से अधिक करदाता पंजीकृत हैं।
मॉडल ओएसआर नियम: ये नियम राज्यों के लिए एक मार्गदर्शक ढांचा (Advisory) प्रदान करते हैं ताकि वे संपत्ति कर, उपयोगकर्ता शुल्क और अन्य गैर-कर राजस्व के संग्रह के लिए एक पारदर्शी और कुशल प्रणाली बना सकें।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
16वें वित्त आयोग की सिफारिशें: यह पहल 16वें वित्त आयोग की उन सिफारिशों के अनुरूप है जो पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता के लिए उनके स्वयं के राजस्व (OSR) को मजबूत करने पर बल देती हैं।
राजस्व स्वायत्तता: स्थानीय संपत्तियों को राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलकर यह मॉडल पंचायतों की केंद्रीय और राज्य अनुदानों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
जमीनी लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण: डिजिटल उपकरणों और स्थायी आय के स्रोतों के माध्यम से यह ग्रामीण भारत में समावेशी विकास और नागरिक-केंद्रित शासन को गति प्रदान करेगा।
संस्थागत पक्ष
वित्तपोषण मॉडल: इन परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), सीएसआर (CSR) फंड और नाबार्ड (NABARD) तथा हुडको (HUDCO) जैसे संस्थागत भागीदारों के माध्यम से बैंक ऋण द्वारा सुगम बनाया जाएगा।
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: राजस्व सृजन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ेगी।
चुनौतियां: ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, विशेषज्ञता का अभाव और विभिन्न राज्यों में कार्यान्वयन की असमानता इस कार्यक्रम की सफलता के मार्ग में प्रमुख चुनौतियां हैं।
2. लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026: परीक्षा शुचिता और त्वरित न्याय की दिशा में एक कठोर विधिक प्रहार
संदर्भ (Context)
27 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक सभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' प्रस्तुत किया (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026)। यह संशोधन विधेयक, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के मौजूदा ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लाया गया है। हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की गंभीर घटनाओं को देखते हुए, सरकार ने अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विधिक संशोधनों का प्रस्ताव दिया है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
विधेयक में अपराधियों और संस्थाओं के लिए दंडात्मक प्रावधानों को अत्यधिक कठोर बनाया गया है:
व्यक्तिगत दंड में वृद्धि: अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों के लिए कारावास की अवधि को 3-5 वर्ष से बढ़ाकर न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष करने का प्रस्ताव है। साथ ही, अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है।
संगठित अपराध (Organised Crimes): संगठित परीक्षा-संबंधी अपराधों के लिए न्यूनतम जेल की सजा को 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष (अधिकतम 10 वर्ष) और अधिकतम जुर्माने को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है।
सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही: दोषी पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं (Service Providers) के लिए अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ और परीक्षाओं के आयोजन से प्रतिबंधित (Debarment) करने की अवधि को 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दिया गया है। उनके प्रबंधकीय कर्मियों के लिए भी 5-10 वर्ष की जेल का प्रावधान है।
न्यायिक समय-सीमा (Fast-Track Justice):
धारा 12A: जांच प्रक्रिया को दो माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।
फास्ट ट्रैक अदालतें: दैनिक सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें (सत्र न्यायालय) गठित होंगी, जहाँ आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।
अपील: उच्च न्यायालय में अपील 30 दिनों के भीतर और उसका निपटान संभवतः तीन माह में सुनिश्चित किया जाएगा।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
निवारक प्रभाव (Deterrence): प्रस्तावित कठोर दंड और वित्तीय जुर्माने का उद्देश्य परीक्षा माफियाओं और संगठित समूहों के बीच एक मजबूत डर पैदा करना है, ताकि परीक्षा प्रणालियों की शुचिता को भंग होने से बचाया जा सके।
सार्वजनिक विश्वास की बहाली: यह विधेयक योग्य और मेधावी उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करके देश की लोक परीक्षा प्रणाली (UPSC, SSC, NTA, RRB आदि) की ईमानदारी और निष्पक्षता में जनता के भरोसे को मजबूत करेगा।
जवाबदेही सुनिश्चित करना: प्रबंधकीय कर्मियों और सेवा प्रदाताओं पर भारी जुर्माना लगाकर यह विधेयक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के भीतर अधिक जवाबदेही और सतर्कता सुनिश्चित करता है।
संस्थागत पक्ष
विशेष कार्य बल (Special Task Force): विधेयक केंद्र सरकार को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह इन अपराधों की जांच के लिए एक विशेष कार्य बल (STF) का गठन कर सकती है, जिससे जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता बनी रहे।
विशेष लोक अभियोजक: त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत हेतु विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय कानूनी ढांचा: यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS), और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी प्रमुख भर्ती संस्थाओं पर लागू होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' का उद्देश्य क्या है?
यह कार्यक्रम पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों की पहचान कर उन्हें स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने में सक्षम बनाता है, ताकि वे केंद्रीय और राज्य अनुदानों पर निर्भरता कम कर वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
2. 'समर्थ (SAMARTH) पोर्टल' क्या है और वर्तमान में कौन-से राज्य इससे जुड़े हैं?
यह ओएसआर प्रबंधन के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच है, जो करदाता पंजीकरण से लेकर ऑनलाइन भुगतान और वास्तविक समय की निगरानी तक की सुविधा प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश पहले ही इस पोर्टल पर शामिल हो चुके हैं, जहाँ 51 लाख से अधिक करदाता पंजीकृत हैं।
3. 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' क्यों लाया गया है?
प्रश्न-पत्र लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने के लिए, यह विधेयक अपराधियों के लिए दंड को कठोर बनाता है और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया लागू करता है।
4. संशोधन विधेयक के तहत संगठित परीक्षा अपराधों के लिए क्या दंड प्रस्तावित है?
संगठित परीक्षा-संबंधी अपराधों के लिए न्यूनतम जेल की सजा को 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष (अधिकतम 10 वर्ष) और अधिकतम जुर्माने को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है।
5. फास्ट-ट्रैक न्याय प्रक्रिया के तहत जांच और सुनवाई की समय-सीमा क्या है?
धारा 12A के तहत जांच प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करनी होगी, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी, और उच्च न्यायालय में अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल कर तीन माह में निपटाई जाएगी।
MCQ
प्रश्न 1
'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' और 'समर्थ (SAMARTH) पोर्टल' के माध्यम से पंचायती राज संस्थानों (PRIs) के वित्तीय सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. 'समर्थ पोर्टल' एक एकीकृत राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है, जो करदाता पंजीकरण से लेकर वास्तविक समय की निगरानी तक संपूर्ण ओएसआर जीवनचक्र का डिजिटल प्रबंधन सुनिश्चित करता है।
3. यह कार्यक्रम 16वें वित्त आयोग की उन सिफारिशों के अनुरूप है जो स्थानीय निकायों की राजकोषीय आत्मनिर्भरता और वित्तीय स्थिरता बढ़ाने पर बल देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का मूल उद्देश्य पंचायतों को 'बैंक योग्य' (Bankable) और राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं को विकसित करने में सक्षम बनाना है, जिससे वे वित्तीय रूप से स्वायत्त बन सकें।
कथन 2 सही है: समर्थ पोर्टल तकनीकी-आधारित ओएसआर प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो न केवल पारदर्शी कराधान सुनिश्चित करता है बल्कि पंचायतों की वित्तीय क्षमता को डिजिटल रूप से सशक्त बनाता है।
कथन 3 सही है: यह पहल 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का पूरक है, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायतों के स्वयं के राजस्व को बढ़ाने पर जोर देता है।
प्रश्न 2
'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' के प्रस्तावित प्रावधानों और इसके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में धारा 12A को शामिल करने का प्रस्ताव है, जो आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर परीक्षण (Trial) पूरा करना अनिवार्य बनाता है।
3. यह संशोधन केवल व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की जवाबदेही तय करने पर केंद्रित है और परीक्षा आयोजित करने वाले 'सेवा प्रदाताओं' (Service Providers) को इसके दंडात्मक दायरे से बाहर रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 2
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: संगठित अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, जेल की न्यूनतम सजा को 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष और अधिकतम जुर्माने को 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
कथन 2 सही है: विधेयक में न्याय प्रक्रिया को 'फास्ट-ट्रैक' करने के लिए विशिष्ट समय-सीमा दी गई है—दो माह में जांच और आरोप पत्र के बाद तीन माह में सुनवाई पूरी करना।
कथन 3 गलत है: यह विधेयक सेवा प्रदाताओं और उनके प्रबंधकीय कर्मियों पर भी भारी जुर्माना (5 करोड़ रुपये तक) और प्रतिबंध (8 वर्ष तक) लगाने का कठोर प्रावधान करता है, जिससे परीक्षा आयोजन की पूरी श्रृंखला की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।



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