विषय सूची (Table of Contents)
- औषध (दसवां संशोधन) नियम, 2026: उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं हेतु विनियामक सुदृढ़ीकरण। (GS II: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप / स्वास्थ्य)
- FIU-IND की वैश्विक उपलब्धि: ₹868 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश और 'एग्मोंट केस अवार्ड'। (GS III: आंतरिक सुरक्षा / मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर सुरक्षा)
औषध (दसवां संशोधन) नियम, 2026: उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं हेतु विनियामक सुदृढ़ीकरण
(GS II: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप / स्वास्थ्य)
चर्चा में क्यों? (Context)
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने औषध नियम, 1945 (Drugs Rules) में संशोधन करते हुए 'औषध (दसवां संशोधन) नियम, 2026' को अधिसूचित किया है। संशोधन मुख्य रूप से उच्च अल्कोहल युक्त औषधीय फॉर्मूलेशन (जैसे औषधीय टिंचर) के नशों के रूप में होने वाले दुरुपयोग को रोकने के लिए किया गया है। यह निर्णय औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) के साथ परामर्श और विभिन्न राज्य सरकारों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर लिया गया है।
मुख्य विनियामक परिवर्तन (Technical Highlights)
मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत निम्नलिखित विशिष्ट मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- विनियामक सीमा: ऐसे सभी मुखलेव्य (Oral Formulations) जिनमें 12% से अधिक एथिल अल्कोहल (v/v) मौजूद है और जो 30 मिलीलीटर से अधिक की पैकिंग में बेचे जाते हैं, अब नए नियमों के दायरे में होंगे।
- अनुसूची 'के' (Schedule K) से निष्कासन: पूर्व में, कई सुगंधित औषधीय टिंचर (जिनमें अल्कोहल की सांद्रता 80-90% तक हो सकती है) अनुसूची 'के' के तहत लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से मुक्त थे। नए संशोधन के बाद, इन उच्च अल्कोहल-युक्त उत्पादों से यह छूट वापस ले ली गई है।
- अनुसूची 'एच1' (Schedule H1) में समावेश: इन उत्पादों को अब अनुसूची H1 (प्रविष्टि संख्या 52) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप इनकी बिक्री केवल एक पंजीकृत चिकित्सा पेशेवर (RMP) के पर्चे पर ही की जा सकेगी और विक्रेताओं को इनका सख्त रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
- प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन के 6 महीने बाद से प्रभावी होंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: औषध और प्रसाधन सामग्री अधिनियम एवं नियमावली
भारत में दवाओं के विनियामक ढांचे का विकास एक सुदीर्घ प्रक्रिया का परिणाम है:
- स्वतंत्रता पूर्व परिदृश्य: 1940 से पहले भारत में दवाओं की गुणवत्ता और वितरण को विनियमित करने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था, जिससे घटिया और नकली दवाओं का बोलबाला था।
- चोपड़ा समिति (1930): भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट कर्नल आर. एन. चोपड़ा की अध्यक्षता में 'औषध जांच समिति' (Drugs Enquiry Committee) का गठन किया गया। समिति ने दवाओं के आयात, निर्माण और बिक्री को विनियमित करने के लिए कड़े कानून और गुणवत्ता मानकों की सिफारिश की।
- औषध और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940: चोपड़ा समिति की सिफारिशों के आधार पर विधानमंडल ने 1940 में यह अधिनियम पारित किया। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों की गुणवत्ता, निर्माण और वितरण के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।
- औषध नियम, 1945: अधिनियम की धारा 12 और 33 के तहत इन नियमों को 21 दिसंबर, 1945 को अधिसूचित किया गया था। ये नियम लाइसेंसिंग, निर्माण, परीक्षण (GMP), लेबलिंग और प्रवर्तन के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं प्रदान करते हैं।
महत्व (Significance)
- सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा: अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों के 'नशे' के लिए होने वाले अवैध डायवर्जन को रोककर सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है।
- आपूर्ति श्रृंखला की अखंडता: इन उत्पादों को अनिवार्य लाइसेंसिंग और विनियामक दवा आपूर्ति श्रृंखला के अधीन लाने से इनकी जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
- तर्कसंगत उपयोग: यह पहल औषधीय उत्पादों के तर्कसंगत और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के सरकार के विजन 2047 के अनुरूप है।
FIU-IND की वैश्विक उपलब्धि: 'बेस्ट एग्मोंट केस अवार्ड'
(GS III: आंतरिक सुरक्षा / मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर सुरक्षा)
चर्चा में क्यों? (Context)
भारत की वित्तीय सूचना इकाई (FIU-IND) ने बाकू, अज़रबैजान में आयोजित 'एग्मोंट ग्रुप प्लेनरी' (Egmont Group Plenary) के दौरान अपनी उत्कृष्ट जांच क्षमता का प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्री अमित मोहन गोयल (निदेशक, FIU-IND) के नेतृत्व में, भारत को एक बड़े पैमाने के साइबर धोखाधड़ी मामले को सुलझाने के लिए प्रतिष्ठित 'बेस्ट एग्मोंट केस अवार्ड' (BECA) 2026 में उप-विजेता (Runner-up) घोषित किया गया है। यह पुरस्कार वित्तीय आसूचना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और धन शोधन (Money Laundering) के विरुद्ध लड़ाई में उत्कृष्टता के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च वैश्विक सम्मानों में से एक है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
FIU-IND द्वारा उजागर किए गए इस नेटवर्क के तकनीकी पहलू अत्यंत जटिल थे, जिनका विवरण निम्न है:
- नेटवर्क का आकार: जांच में लगभग ₹868 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त आय (Proceeds of Crime) का पता चला।
- कार्यप्रणाली: इस नेटवर्क में 5,000 से अधिक 'म्यूल' (Mule) बैंक खातों का उपयोग किया गया था, जिनके माध्यम से धन को विभिन्न स्तरों पर घुमाया गया।
- क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग: अपराधियों ने धन को छिपाने के लिए कई देशों के अधिकार क्षेत्रों में फैले जटिल क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का सहारा लिया था।
- एजेंसियों का समन्वय: यह मामला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त खुफिया जानकारी पर आधारित था, जिसका FIU-IND ने गहन विश्लेषण किया।
- प्रवर्तन कार्रवाई: FIU-IND की रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें ₹47 लाख नकद, ₹13.6 करोड़ मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी (USDT) और ₹8.67 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। साथ ही, PMLA, 2002 के तहत दो अभियोजन शिकायतें भी दर्ज की गईं।
संस्थागत ढांचा: FIU-IND और एग्मोंट ग्रुप (History and Institutions)
इस उपलब्धि को समझने के लिए संबंधित संस्थाओं का ऐतिहासिक और विनियामक संदर्भ महत्वपूर्ण है:
- वित्तीय सूचना इकाई-भारत (FIU-IND): यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है। इसका गठन संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित सूचना प्राप्त करने, उनका प्रसंस्करण, विश्लेषण और प्रसार करने के लिए किया गया है ताकि धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण (AML/CFT) का मुकाबला किया जा सके।
- एग्मोंट ग्रुप (Egmont Group): यह 182 सदस्य देशों की वित्तीय सूचना इकाइयों (FIUs) का एक वैश्विक मंच है। यह सदस्य देशों को विशेषज्ञता और वित्तीय आसूचना के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए एग्मोंट सिक्योर वेब (ESW) जैसा मंच प्रदान करता है। भारत द्वारा इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए इसी वेब (ESW) का प्रभावी उपयोग किया गया था।
महत्व (Significance)
- वैश्विक नेतृत्व: 182 देशों के बीच फाइनलिस्ट के रूप में चुना जाना वित्तीय आसूचना के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: यह मामला सिद्ध करता है कि सीमा पार साइबर अपराधों और 'ट्रांसनेशनल' वित्तीय अपराधों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी साझा करना कितना महत्वपूर्ण है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की सुरक्षा: ₹868 करोड़ के नेटवर्क को ध्वस्त करना भारत के डिजिटल और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
औषध (दसवां संशोधन) नियम, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- नए नियमों के अनुसार, 12% v/v से अधिक एथिल अल्कोहल युक्त और 30 मिलीलीटर से अधिक मात्रा वाले सभी मुखलेव्य (Oral Formulations) अब विनियामक दायरे में होंगे।
- इन औषधीय उत्पादों को 'अनुसूची के' (Schedule K) के तहत दी जाने वाली लाइसेंसिंग छूट से हटाकर 'अनुसूची एच1' (Schedule H1) में स्थानांतरित कर दिया गया है।
- अनुसूची H1 में शामिल होने के बाद, इन दवाओं को पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे के बिना (OTC) बेचा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
व्याख्या/तर्क:
कथन 1 और 2 सही हैं। सरकार ने उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए 12% अल्कोहल और 30ml से अधिक की पैकिंग वाले उत्पादों को अनुसूची 'के' (जो लाइसेंस से छूट देती है) से हटाकर अनुसूची 'एच1' में डाल दिया है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुसूची H1 के अंतर्गत दवाओं को केवल पंजीकृत चिकित्सा पेशेवर (RMP) के पर्चे पर ही बेचा जा सकता है और इनका सख्त रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
औषध और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं इसके तहत बने नियमों के विनियामक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- 'अनुसूची के' (Schedule K) उन दवाओं की सूची प्रदान करती है जिन्हें अधिनियम के अध्याय IV के तहत निर्माण और बिक्री के लाइसेंस की कुछ आवश्यकताओं से छूट प्राप्त है।
- औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) एक वैधानिक निकाय है जो दवाओं के विनियामक परिवर्तनों पर केंद्र सरकार को परामर्श देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
व्याख्या/तर्क:
कथन 1 सही है क्योंकि अनुसूची 'के' विशिष्ट दवाओं को लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं से छूट प्रदान करती है, जिसका हालिया संशोधन में उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं के लिए उपयोग किया गया। कथन 2 भी सही है क्योंकि औषध नियम, 1945 में कोई भी महत्वपूर्ण संशोधन (जैसे वर्तमान संशोधन) DTAB के साथ परामर्श के बाद ही किया जाता है।
'एग्मोंट ग्रुप' (Egmont Group) और वित्तीय सूचना इकाई-भारत (FIU-IND) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- FIU-IND भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली एक प्रमुख एजेंसी है।
- 'बेस्ट एग्मोंट केस अवार्ड' (BECA) उन परिचालन मामलों को मान्यता देता है जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के विरुद्ध लड़ाई में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं।
- 'एग्मोंट सिक्योर वेब' (ESW) सदस्य देशों के बीच वित्तीय आसूचना के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए एक मंच है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
व्याख्या/तर्क:
कथन 1 गलत है क्योंकि FIU-IND वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अंतर्गत कार्य करती है, न कि गृह मंत्रालय के। कथन 2 सही है क्योंकि BECA पुरस्कार 182 सदस्य देशों की FIUs के बीच उत्कृष्ट जांच मामलों के लिए दिया जाता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि एग्मोंट सिक्योर वेब (ESW) का उपयोग भारत ने सीमा पार क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन को ट्रैक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने हेतु किया था।
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