विषय सूची (Table of Contents)
- लाकाडोंग हल्दी के लिए मिशन "गोल्डन स्पाइस": (GS Paper III: अर्थव्यवस्था और कृषि - पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास एवं मूल्य श्रृंखला संवर्धन)।
- भारत के पहले डेंगू टीके (Qdenga®) को CDSCO की मंजूरी: (GS Paper II: सामाजिक न्याय और शासन - स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे; GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - विकास और उनके अनुप्रयोग)।
1. मेघालय की लाकाडोंग हल्दी के लिए मिशन "गोल्डन स्पाइस"
संदर्भ (Context)
21 जुलाई 2026 को केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री (MDoNER) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के संगमा ने मेघालय में ₹175.45 करोड़ के निवेश वाली "मिशन गोल्डन स्पाइस - एकीकृत लाकाडोंग हल्दी मूल्य श्रृंखला संवर्धन परियोजना" (Mission "Golden Spice" for Meghalaya's Lakadong Turmeric) का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट' और 'अष्टलक्ष्मी' विज़न के अंतर्गत पूर्वोत्तर के विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- रणनीतिक रोडमैप: यह 5-वर्षीय मिशन (2025–2030) दो चरणों में लागू किया जाएगा: चरण 1 (मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण) और चरण 2 (विस्तार एवं बड़े पैमाने पर संचालन)।
- लाकाडोंग हल्दी की विशिष्टता: मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स की इस हल्दी में 7-10% करक्यूमिन (Curcumin) सामग्री होती है, जो वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है।
- भौगोलिक संकेतक (GI) टैग: इस हल्दी को प्राप्त GI टैग इसकी विशिष्ट गुणवत्ता और भौगोलिक प्रामाणिकता को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम मूल्य दिलाने में मदद करता है।
- लक्ष्य और विस्तार: मिशन का उद्देश्य खेती के दायरे को 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर करना और किसानों के पारिश्रमिक को ₹30-40 प्रति किलो से बढ़ाकर 2030 तक ₹80 प्रति किलो करना है।
- बुनियादी ढांचा: परियोजना के तहत पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी एकीकृत जैविक हल्दी प्रसंस्करण और करक्यूमिन निष्कर्षण सुविधा स्थापित की जाएगी।
महत्व (Significance)
- "बॉटम-अप" दृष्टिकोण: मिशन का उद्देश्य प्रत्येक पूर्वोत्तर राज्य के 'विशिष्ट विक्रय प्रस्ताव' (USP - unique selling proposition) को जमीनी स्तर से बढ़ावा देना है।
- वैश्विक ब्रांडिंग: लाकाडोंग हल्दी को 'लक्जरी स्पाइस ब्रांड' के रूप में स्थापित कर इसे वैश्विक 'ब्रांड नॉर्थ ईस्ट' का प्रमुख उत्पाद बनाना है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में G7 शिखर सम्मेलन में भी इसे प्रदर्शित किया था।
- महिलाओं की भूमिका: हल्दी उत्पादन और प्रसंस्करण की "असली संरक्षक" के रूप में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को मिशन के संस्थानों और उद्यमों के केंद्र में रखा गया है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष
- अभिसरण (Convergence): यह मिशन MDoNER और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के नेतृत्व में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वाणिज्य मंत्रालयों, APEDA, मसाला बोर्ड और राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड जैसी संस्थाओं के साथ तालमेल पर आधारित है।
- संरचनात्मक सुधार: मिशन का मुख्य ध्यान फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने, एकीकृत कोल्ड चेन और वाणिज्यिक प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी को दूर करने पर है।
2. भारत के पहले डेंगू टीके (Qdenga®) को CDSCO की मंजूरी
संदर्भ (Context)
भारत में डेंगू के बढ़ते प्रकोप और स्वास्थ्य सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए, केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश के पहले डेंगू टीके Qdenga® (TAK-003) को बाजार प्राधिकरण (Marketing Authorisation) प्रदान कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत यह निर्णय भारत में डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह टीका जापानी कंपनी टाकेडा (Takeda) द्वारा विकसित किया गया है, जिसे भारत में इसकी इकाई टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया द्वारा आयात किया जाएगा।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- वैक्सीन का प्रकार: यह एक रिकॉम्बिनेंट लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन (Live Attenuated Tetravalent Vaccine) है, जिसे रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।
- लक्षित आयु वर्ग: इसे 4 से 60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में डेंगू की बीमारी से बचाव के लिए अनुमोदित किया गया है।
- खुराक अनुसूची: इसकी 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें दी जाती हैं, जिनके बीच तीन महीने का अंतराल (0 और 3 महीने) रखा जाता है।
- प्रशासन पद्धति: इसे त्वचा के नीचे (Subcutaneous) इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।
- व्यापक सुरक्षा: यह डेंगू वायरस के सभी चारों सेरोटाइप्स (DENV-1, 2, 3, और 4) के खिलाफ प्रतिरक्षा उत्पन्न करने में सक्षम है।
- प्री-स्क्रीनिंग: इस टीके की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पिछले डेंगू संक्रमण के इतिहास की जांच (Pre-vaccination Screening) के बिना ही दिया जा सकता है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
- निवारक स्वास्थ्य देखभाल: यह टीका भारत की निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) रणनीति को मज़बूत करेगा और अस्पतालों पर डेंगू के कारण पड़ने वाले अत्यधिक बोझ को कम करने में सहायक होगा।
- वैश्विक विश्वसनीयता: Qdenga® पहले से ही 42 से अधिक देशों (जैसे यूरोपीय संघ, यूके, थाईलैंड) में स्वीकृत है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफिकेशन प्राप्त है।
- चुनौतियां: बड़े पैमाने पर टीकाकरण के लिए कोल्ड-चेन रखरखाव, ग्रामीण क्षेत्रों में समान पहुंच सुनिश्चित करना और कार्यान्वयन की उच्च लागत प्रमुख चुनौतियां होंगी।
- पूरक रणनीति: विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण को मच्छर नियंत्रण (Vector Control), पर्यावरण स्वच्छता और जन जागरूकता के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनके पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष
- डेंगू का आर्थिक बोझ: भारत दुनिया के डेंगू बोझ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वहन करता है। पिछले दो दशकों में मामलों में 11 गुना वृद्धि हुई है, जिससे महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान होता है। यह टीका इस आर्थिक प्रभाव को कम करने में प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
- संस्थागत एकीकरण: इस टीके को भविष्य में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) के साथ एकीकृत करने की संभावना है, जिससे इसे लक्षित जिलों में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
- क्लिनिकल साक्ष्य: इसकी मंजूरी 28,000 से अधिक प्रतिभागियों पर किए गए व्यापक वैश्विक परीक्षणों और भारत में आयोजित चरण-III के सुरक्षा अध्ययन पर आधारित है।
MCQ
प्रश्न 1.
भारत में हाल ही में स्वीकृत पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा® (Qdenga®)' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे 4 से 60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में डेंगू की रोकथाम हेतु मंजूरी दी है।
- यह एक 'रिकॉम्बिनेंट लाइव एटिन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन' है, जिसे जापानी कंपनी टाकेडा (Takeda) द्वारा विकसित किया गया है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस टीके को लगाने से पहले डेंगू संक्रमण की पूर्व-जांच (Pre-vaccination screening) अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
स्पष्टीकरण:
- कथन 1 सही है: CDSCO ने Qdenga® (TAK-003) को 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के लिए बाजार प्राधिकरण प्रदान किया है। यह भारत में स्वीकृत होने वाला पहला डेंगू टीका है।
- कथन 2 सही है: यह टीका रिकॉम्बिनेंट डीएनए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह एक टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसका अर्थ है कि यह डेंगू वायरस के चारों सेरोटाइप्स (DENV-1, 2, 3 और 4) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।
- कथन 3 गलत है: Qdenga® की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पिछले डेंगू संक्रमण के इतिहास की परवाह किए बिना दिया जा सकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार की टीकाकरण-पूर्व जांच की आवश्यकता नहीं है।
- अतिरिक्त तथ्य: इसकी अनुशंसित खुराक अनुसूची में 0.5 मिलीलीटर के दो इंजेक्शन शामिल हैं, जिन्हें तीन महीने के अंतराल पर दिया जाता है।
प्रश्न 2.
मेघालय में शुरू किए गए "मिशन गोल्डन स्पाइस" (Mission Golden Spice) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसका मुख्य उद्देश्य ₹175.45 करोड़ के निवेश के माध्यम से जीआई-टैग्ड (GI-tagged) लाकाडोंग हल्दी का मूल्य श्रृंखला संवर्धन करना है।
- लाकाडोंग हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) की मात्रा लगभग 7-10% होती है, जो वैश्विक औसत से करीब चार गुना अधिक है।
- यह मिशन पूर्णतः केवल मेघालय सरकार की एक स्वतंत्र पहल है और इसमें केंद्र सरकार का कोई वित्तीय या रणनीतिक समन्वय नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 2
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
स्पष्टीकरण:
- कथन 1 सही है: मिशन गोल्डन स्पाइस एक ₹175.45 करोड़ की समन्वित पहल है, जिसे मेघालय की विशिष्ट लाकाडोंग हल्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और लक्जरी मसाला ब्रांड के रूप में विकसित करने के लिए शुरू किया गया है।
- कथन 2 सही है: लाकाडोंग हल्दी अपनी असाधारण उच्च करक्यूमिन सामग्री (7-10%) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यही गुण इसे औषधीय और पोषक तत्वों के मामले में वैश्विक स्तर पर "प्रीमियम" उत्पाद बनाता है।
- कथन 3 गलत है: यह मिशन पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के नेतृत्व में एक अभिसरण-आधारित (Convergence-led) पहल है। इसमें कृषि मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, APEDA और मसाला बोर्ड जैसे कई केंद्रीय संस्थान मेघालय सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
- रणनीतिक महत्व: यह पहल प्रधानमंत्री के 'अष्टलक्ष्मी' और 'आत्मनिर्भर नॉर्थ ईस्ट' विज़न का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक किसानों के पारिश्रमिक को वर्तमान के ₹30-40 से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो करना है।
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