विषय सूची (Table of Contents)
- 'निर्भय चेतना' अभियान: 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों का लैंगिक संवेदीकरण
- भारत का पहला कमर्शियल कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट: ओडिशा में आत्मनिर्भरता की नींव
- भारत का एबीएस (ABS) ढांचा: जैव विविधता लाभों के रूप में ₹145 करोड़ का वितरण
- NMDC का 100 MTPA दृष्टिकोण: डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स में डिजिटलीकरण और स्थायी खनन
1. 'निर्भय चेतना' अभियान: 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों का लैंगिक संवेदीकरण
पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में नई दिल्ली में 'निर्भय चेतना' पहल के तहत तीन दिवसीय 'प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण' (Training of Trainers - ToT) कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभियान जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में विश्व के सबसे बड़े प्रयासों में से एक माना जा रहा है।
1.1 अभियान का परिचय और उद्देश्य
- नोडल मंत्रालय: यह पंचायती राज मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है।
- वित्तपोषण: इस कार्यक्रम को 'निर्भया कोष' (Nirbhaya Fund) के तहत वित्त पोषित किया गया है।
- मुख्य लक्ष्य: इसका उद्देश्य देश भर के 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और लैंगिक समानता के मुद्दों के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाना है।
- रणनीतिक विजन: 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और समान भागीदारी को विकास का अनिवार्य आधार बनाना।
1.2 'निर्भय रहो' (Nirbhay Raho) ढांचा
'निर्भय चेतना' वास्तव में 11 मार्च 2026 को शुरू की गई व्यापक 'निर्भय रहो' पहल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस पहल के तीन पूरक घटक हैं:
- निर्भय नेत्री (Nirbhay Netri): लगभग 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) का क्षमता निर्माण और उन्हें कानूनी साक्षरता प्रदान करना।
- निर्भय चेतना (Nirbhay Chetna): पुरुष जनप्रतिनिधियों को लैंगिक मुद्दों पर संवेदनशील बनाना ताकि वे अपने समुदायों में सुरक्षा और समानता के ध्वजवाहक बनें।
- निर्भय दृष्टि (Nirbhay Drishti): रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाकर प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
1.3 कार्यान्वयन मॉडल और प्रशिक्षण पद्धति
- मास्टर ट्रेनर्स का कैडर: इस अभियान के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर प्रशिक्षकों का एक राष्ट्रीय संवर्ग विकसित किया जा रहा है।
- कैस्केडिंग मॉडल: यह एक चरणबद्ध (Cascading) प्रशिक्षण मॉडल है, जहाँ मास्टर ट्रेनर्स आगे चलकर स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे।
- प्रशिक्षण मॉड्यूल: 'ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया' (TRI) द्वारा विकसित इस पाठ्यक्रम में सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामुदायिक भागीदारी और पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों को तोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- सहभागी दृष्टिकोण: प्रशिक्षण के लिए केस स्टडी, रोल-प्ले, सामुदायिक मानचित्रण और अनुभवात्मक शिक्षण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
1.4 यूपीएससी के लिए महत्व (Significance for UPSC)
- लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन (Gender-Responsive Governance): यह पहल शासन के स्थानीय स्तर पर योजना बनाने, बजट बनाने और सार्वजनिक निर्णय लेने में लैंगिक दृष्टिकोण को एकीकृत करने का प्रयास करती है।
- व्यवहार परिवर्तन: केवल कानूनी सुरक्षा या बुनियादी ढांचे के बजाय, यह अभियान पुरुषों के व्यवहार और सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाकर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने पर जोर देता है।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: यह पंचायती राज संस्थाओं को सामाजिक परिवर्तन के सक्रिय केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
- पायलट चरण: इस कार्यक्रम के पहले बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मुख्य प्रशिक्षकों ने भाग लिया।
2. भारत का पहला कमर्शियल कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट: ओडिशा में आत्मनिर्भरता की नींव
20 जून 2026 को भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) के कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
2.1 परियोजना का परिचय और संरचना (Project Structure)
यह परियोजना सार्वजनिक क्षेत्र के दो दिग्गजों के बीच एक रणनीतिक साझेदारी का परिणाम है:
- जॉइंट वेंचर: भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL)
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL): 51% हिस्सेदारी
- भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL): 49% हिस्सेदारी
- स्थान: लखनपुर, झारसुगुड़ा (ओडिशा), जहाँ महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) लगभग 350 एकड़ भूमि प्रदान कर रही है।
- निवेश: इस परियोजना के विकास में ₹25,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है।
2.2 स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमता (Technology & Capacity)
- PFBG तकनीक: यह संयंत्र पूरी तरह से स्वदेशी प्रेसराइज्ड फ्लुइडाइज्ड बेड गैसीफिकेशन (PFBG) तकनीक पर आधारित है, जिसे BHEL द्वारा विशेष रूप से भारत के उच्च-राख (high-ash) वाले कोयले के लिए विकसित किया गया है।
- उत्पादन लक्ष्य: संयंत्र का लक्ष्य सालाना लगभग 0.66 मिलियन टन (MTPA) टेक्निकल ग्रेड अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करना है — दैनिक आधार पर लगभग 2,000 टन के बराबर।
- संसाधन आपूर्ति: MCL अपनी 'इब वैली' (Ib Valley) वाशरी से सालाना 0.79 मिलियन टन धुले हुए कोयले की आपूर्ति करेगी।
2.3 कार्यप्रणाली: कोयले से रसायन तक का सफर
- गैसीफिकेशन: उच्च तापमान और दबाव पर कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे रासायनिक रूप से सिनगैस (Syngas) (कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण) में बदला जाता है।
- शुद्धिकरण: सिनगैस से अशुद्धियों को हटाकर अमोनिया (NH₃) संश्लेषण के लिए तैयार किया जाता है।
- अमोनियम नाइट्रेट निर्माण: उत्पादित अमोनिया को आंशिक रूप से ऑक्सीकृत कर नाइट्रिक एसिड बनाया जाता है, जिसे फिर से अमोनिया के साथ मिलाकर तरल या प्रिल्ड अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) तैयार किया जाता है।
2.4 रणनीतिक और आर्थिक महत्व (Strategic Significance)
- आत्मनिर्भर भारत: घरेलू कोयला भंडार का उपयोग कर अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करने से आयात पर निर्भरता कम होगी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- राष्ट्रीय मिशन: यह परियोजना भारत सरकार के 'नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन' के अनुरूप है और भविष्य की कोयला-से-रसायन परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
- वित्तीय प्रोत्साहन: कोयला मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए ₹1,350 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन को मंजूरी दी है।
- क्षेत्रीय विकास: इससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और झारसुगुड़ा क्षेत्र में सहायक उद्योगों (ancillary industries) का विकास होगा।
2.5 भविष्य की राह
सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त होने के साथ, इस परियोजना के सितंबर 2029 तक चालू होने का लक्ष्य रखा गया है। यह भारत की उस क्षमता का प्रदर्शन करेगा जहाँ कोयले जैसे पारंपरिक संसाधनों को उच्च मूल्य वाले रासायनिक उत्पादों में सफलतापूर्वक बदला जा सकता है।
3. भारत का एबीएस (ABS) ढांचा: जैव विविधता लाभों के रूप में ₹145 करोड़ का वितरण
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत भारत के एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) ढांचे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस प्रणाली ने जैविक संसाधनों और उनके पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण सुनिश्चित करने में वैश्विक नेतृत्व का प्रदर्शन किया है।
3.1 वित्तीय प्रभाव और संग्रहण (Financial Impact & Collection)
- कुल संग्रहण: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 2008 से अब तक एबीएस तंत्र के माध्यम से ₹266 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई है।
- वितरण: इस राशि में से लगभग ₹145 करोड़ सीधे लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।
- हालिया प्रगति: केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ₹21.26 करोड़ प्राप्त हुए और ₹78 करोड़ का वितरण किया गया, जो उद्योग की बढ़ती भागीदारी और अनुपालन को दर्शाता है।
3.2 लाभार्थी और भौगोलिक विस्तार (Beneficiaries & Reach)
एबीएस के माध्यम से मिलने वाले लाभों ने जमीनी स्तर पर संरक्षण के प्रयासों को सशक्त बनाया है:
- BMCs की भागीदारी: 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 10,500 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) तक यह लाभ पहुँचा है।
- व्यक्तिगत लाभार्थी: इसका लाभ 230 से अधिक किसानों, छह राज्य वन विभागों और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों को भी प्राप्त हुआ है।
- अनुसंधान सहायता: इस ढांचे ने लाल चंदन से जुड़ी छह प्रमुख अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
3.3 क्षेत्रवार विश्लेषण (Sector-wise Analysis)
एबीएस राजस्व में कुछ प्रमुख क्षेत्रों का योगदान सबसे अधिक रहा है, जो कुल प्राप्ति का लगभग 91% है:
- लाल चंदन (Red Sanders): ₹120 करोड़ (45% हिस्सा) के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता।
- बीज क्षेत्र (Seed Sector): ₹84.61 करोड़ (32.3% हिस्सा)।
- फार्मास्यूटिकल्स और आयुष: ₹36.61 करोड़ (13.8% हिस्सा)।
3.4 संस्थागत तंत्र और कोष का उपयोग (Institutional Mechanism)
जैव विविधता नियम, 2024 के अनुसार, लाभ वितरण की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी है:
- राशि का हस्तांतरण: एनबीए एकत्रित एबीएस राशि का 85-90% संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों को हस्तांतरित करता है ताकि इसे लाभार्थियों तक पहुँचाया जा सके।
- स्थानीय स्तर पर उपयोग: इस निधि का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है:
- पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) को तैयार करना और अपडेट करना।
- प्राकृतिक आवासों की बहाली और जैव-विविधता का संरक्षण।
- पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण और कम्युनिटी जीन बैंक की स्थापना।
- ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए सतत आजीविका पहल।
3.5 अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ तालमेल
भारत का एबीएस ढांचा केवल घरेलू कानून नहीं है, बल्कि यह वैश्विक प्रतिबद्धताओं को भी पूरा करता है:
- नागोया प्रोटोकॉल: यह एबीएस ढांचे के माध्यम से नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाता है।
- ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क: यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक ढांचे के लक्ष्य 13 (निष्पक्ष और समान लाभ साझा करना) में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- सतत विकास लक्ष्य (SDGs): यह गरीबी उन्मूलन, जलवायु कार्रवाई और 'लाइफ ऑन लैंड' जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
4. NMDC का 100 MTPA दृष्टिकोण: डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स में डिजिटलीकरण और स्थायी खनन
सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख खनन कंपनी NMDC Limited कर्नाटक के डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स में डिजिटल परिवर्तन, क्षमता विस्तार और टिकाऊ खनन पहलों में तेजी ला रही है। यह प्रयास कंपनी के 100 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) उत्पादन क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4.1 उत्पादन लक्ष्य और विस्तार योजना (Production Targets)
- लक्ष्य: NMDC का दीर्घकालिक लक्ष्य 100 MTPA की उत्पादन क्षमता तक पहुँचना है।
- डोनीमलाई का योगदान: कंपनी कुमारस्वामी खदान (Kumaraswamy Mine) से 10 MTPA और पूरे डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स से 17 MTPA उत्पादन हासिल करने की दिशा में बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है।
- रणनीति: भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर (future-ready mining complex) बनाने के लिए परिचालन दक्षता और विस्तार परियोजनाओं की निरंतर समीक्षा की जा रही है।
4.2 संसाधन दक्षता और निम्न-ग्रेड अयस्क का उपयोग (Resource Efficiency)
NMDC अब उन संसाधनों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिन्हें पहले अपशिष्ट (waste) माना जाता था:
- निम्न-ग्रेड लौह अयस्क: 35% Fe (लोहा) तक की मात्रा वाले अयस्क का उपयोग।
- वैज्ञानिक प्रसंस्करण: BHJ (Banded Hematite Jasper) और BHQ (Banded Hematite Quartzite) जैसे खनिजों का वैज्ञानिक रूप से लाभकारी प्रसंस्करण (beneficiation) किया जा रहा है।
- पर्यावरणीय लाभ: इस पहल से खनिज संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, अपशिष्ट उत्पादन कम होता है और खनन कार्यों के पर्यावरणीय प्रभाव (environmental footprint) में कमी आती है।
4.3 डिजिटल परिवर्तन: स्वचालित गेट प्रबंधन (Digital Transformation)
खनन कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है:
- ऑटोमेटेड गेट मैनेजमेंट सिस्टम: कुमारस्वामी खदान में इस नई डिजिटल प्रणाली को लागू किया गया है।
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: यह प्लेटफॉर्म लौह अयस्क के प्रेषण (dispatches) की रीयल-टाइम निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित करता है।
- लाभ: इससे मानवीय हस्तक्षेप (manual intervention) कम होता है, लॉजिस्टिक्स में सुधार होता है और संसाधनों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित होता है।
4.4 कर्मचारी कल्याण और सतत विकास (Employee Welfare & Sustainability)
NMDC की विकास रणनीति में उत्पादन लक्ष्यों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और कर्मचारी कल्याण भी शामिल है:
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए आधुनिक हाई-राइज आवासीय टावरों का विकास किया गया है।
- जिम्मेदार खनन: कंपनी का लक्ष्य डोनीमलाई को एक मॉडल माइनिंग कॉम्प्लेक्स बनाना है जो नवाचार और जिम्मेदार खनन के उच्चतम मानकों को दर्शाता हो।
4.5 रणनीतिक महत्व (Strategic Significance)
PIB संदर्भ लिंक (Reference Links)
-
'निर्भय चेतना' अभियान (Ministry of Panchayati Raj)
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275610 -
भारत कोल गैसीफिकेशन एवं केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) प्रोजेक्ट (Ministry of Coal)
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275757 -
भारत का एबीएस (ABS) ढांचा और लाभ वितरण (Ministry of Environment, Forest and Climate Change)
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275777 -
NMDC का डिजिटलीकरण और 100 MTPA विजन (Ministry of Steel)
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2275755





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