विषय सूची (Table of Contents)
- ब्रिक्स (BRICS) महिला मंत्रिस्तरीय बैठक
- प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया यात्रा: रक्षा, परमाणु ऊर्जा और साइबर सुरक्षा सहित प्रमुख द्विपक्षीय समझौतों एवं परिणामों की सूची
1. ब्रिक्स (BRICS) महिला मंत्रिस्तरीय बैठक, कोच्चि: 'महिला नेतृत्व वाले विकास' के वैश्विक ढांचे का निर्माण
(UPSC GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं सामाजिक न्याय)
संदर्भ (Context)
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता (Chairmanship) के तहत केरल के कोच्चि में आयोजित चार दिवसीय ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक (6-9 जुलाई 2026) का सफल समापन हुआ है। इस बैठक का ऐतिहासिक महत्व इस तथ्य में निहित है कि ब्रिक्स के महिला ट्रैक के इतिहास में पहली बार एक 'संयुक्त वक्तव्य' (Joint Statement) को सर्वसम्मति से अपनाया गया है। यह बैठक भारत के उस 'मानवता-प्रथम' दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है, जिसे प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में प्रतिपादित किया गया था।
तकनीकी/मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- ब्रिक्स का विस्तारित स्वरूप: वर्तमान में ब्रिक्स 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) का समूह है। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया 2025 में इस समूह में शामिल हुआ था।
- भारत का विजन 2026: इस वर्ष की अध्यक्षता का विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) है।
- प्रतीक चिन्ह (Logo) का अर्थ: 2026 के ब्रिक्स लोगो में 'कमल' शुद्धता और प्रगति का प्रतीक है, जबकि 'नमस्ते' की मुद्रा भारत की सौहार्दपूर्ण सहयोग की भावना को दर्शाती है।
- प्रमुख भारतीय पहलें: भारत ने महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए दो दूरगामी डिजिटल प्रस्ताव पेश किए हैं:
- ब्रिक्स डिजिटल रिपॉजिटरी: सफल नीतियों और नवाचारों के साझाकरण हेतु एक डिजिटल मंच।
- ब्रिक्स डिजिटल क्षमता निर्माण दिशा-निर्देश: संस्थागत सहयोग और ज्ञान विनिमय को सुदृढ़ करने हेतु एक मार्गदर्शिका।
नीतिगत महत्व (Significance)
- साझा वैश्विक एजेंडा: यद्यपि ब्रिक्स सदस्य विभिन्न भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, किंतु महिला सशक्तिकरण के प्रति उनके साझा सरोकार इस मंच को सहयोग के लिए एक रणनीतिक आधार प्रदान करते हैं।
- महिला नेतृत्व वाला विकास (Women-led Development): यह बैठक 'महिला सशक्तिकरण' के पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर महिलाओं को विकास के 'प्रमुख चालक' (Key Driver) के रूप में स्थापित करने के भारत के संकल्प को वैश्विक मान्यता देती है।
- डिजिटल समावेशन: नीतिगत चर्चाओं के माध्यम से डिजिटल समावेशन, जलवायु लचीलापन और खाद्य सुरक्षा जैसे समकालीन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच 'पीयर-लर्निंग' (Peer-learning) को बढ़ावा दिया गया है।
2. प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया यात्रा: 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (CSP) का बहुआयामी एवं गहन विश्लेषण
संदर्भ (Context)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर 8-10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न) की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान उन्होंने तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की, जहाँ दोनों नेताओं ने वर्ष 2020 में स्थापित 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (CSP) के छह सफल वर्षों की समीक्षा की और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में रक्षा, ऊर्जा, साइबर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को 'रणनीतिक सम्मेलन' (Strategic Convergence) के माध्यम से नई ऊंचाई देने पर चर्चा की। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष 'परिणामों की सूची' (List of Outcomes) है, जिसमें 18 से अधिक प्रमुख समझौते और घोषणाएं शामिल हैं।
प्रमुख उपलब्धियां और समझौते (Technical Highlights)
A. रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग — संयुक्त घोषणापत्र (JDDSC 2026)
(UPSC GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS-III: आंतरिक सुरक्षा एवं समुद्री सुरक्षा)
- दोनों प्रधानमंत्रियों ने 9 जुलाई, 2026 को 'रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा' (JDDSC - Joint Declaration on Defence and Security Cooperation) को स्वीकार किया, जो वर्ष 2009 की सुरक्षा घोषणा का स्थान लेती है और CSP को अधिक एकीकृत व उच्च स्तरीय बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करती है।
- 'रक्षा मंत्रियों के वार्षिक संवाद' की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
- रक्षा बलों के बीच 'अंतरसंचालनीयता' (Interoperability) और सूचना साझाकरण बढ़ाने पर सहमति, जिसमें एक-दूसरे के सैन्य क्षेत्रों से विमानों की तैनाती का विस्तार शामिल है।
- 'भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप' (MSCR) के माध्यम से समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) और क्षमता निर्माण को सुदृढ़ किया जाएगा।
- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और ऑस्ट्रेलिया के समुद्री सीमा कमान (MBC) के बीच समुद्री कानून प्रवर्तन हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) संपन्न हुआ।
- ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2028-29 के लिए अपने रक्षा महाविद्यालय में एक भारतीय सैन्य प्रशिक्षक की नियुक्ति का ऐतिहासिक निमंत्रण दिया है; 'जनरल रावत युवा अधिकारी आदान-प्रदान कार्यक्रम' के चौथे संस्करण की मेजबानी भी ऑस्ट्रेलिया करेगा।
- आतंकवाद के मुकाबले हेतु ऑनलाइन कट्टरपंथ, आतंकवादी वित्तपोषण और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
B. ऊर्जा सुरक्षा और नागरिक परमाणु सहयोग
(UPSC GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS-III: ऊर्जा सुरक्षा)
- 9 जुलाई 2026 को 'ऊर्जा सुरक्षा पर संयुक्त वक्तव्य' जारी किया गया, जो मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा संप्रभुता सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है।
- वर्ष 2014 में हस्ताक्षरित भारत-ऑस्ट्रेलिया नागरिक परमाणु सहयोग समझौते को कार्यान्वित करने हेतु आवश्यक 'प्रशासनिक व्यवस्थाओं' को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के दीर्घकालिक निर्यात का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
- दोनों देश कोयला, डीजल, अन्य तरल ईंधन और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सुरक्षित व विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने पर सहमत हुए हैं।
- गांधीनगर स्थित पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय में 'रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग अकादमी' का संचालन किया जाएगा। यह परियोजना जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण एवं जल विभाग (DCCEEW), भारत की हरित रोजगार क्षेत्र कौशल परिषद (SSCGJ) और रि-न्यू (Re-New) के सहयोग से स्थापित की गई है, जिसका लक्ष्य 2000 महिलाओं और युवाओं को सौर तकनीशियन/इंस्टॉलर/सहायक के रूप में प्रशिक्षित करना है। यह जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई 'पीएम सूर्यघर योजना' और भारत की हरित ऊर्जा यात्रा में सहयोग करती है।
- कम कार्बन वाले ईंधनों और बढ़ते विद्युतीकरण (Electrification) को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का मूल्यवान स्रोत माना गया है।
- ऑस्ट्रेलिया ने भारत के नेतृत्व वाली ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA) पहल का समर्थन किया है।
- दोनों राष्ट्रों ने प्रशांत द्वीप देशों की विशिष्ट ऊर्जा सुरक्षा कमजोरियों को स्वीकार करते हुए उनकी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
C. साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला भागीदारी (PACTS)
(UPSC GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS-III: विज्ञान व प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा)
दोनों देशों ने 'साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी' (PACTS - Partnership on Cyber, Critical Technologies and Supply Chains) के शुभारंभ की घोषणा की है, जो 2020 के पुराने ढांचे का स्थान लेगी और दो दशकों के सहयोगात्मक अनुसंधान व नीतिगत जुड़ाव की नींव पर आधारित है। PACTS को पाँच स्तंभों में सुव्यवस्थित किया गया है:
- आपूर्ति श्रृंखला उदारता और विविधीकरण: 'डिजाइन द्वारा सुरक्षा', नियम-आधारित तकनीकी व्यापार, तथा अर्धचालक (Semiconductors) व महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं में समन्वित निवेश।
- महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी: AI, अंतरिक्ष, दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री में नवाचार; लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित AI मानक तय करना; भारत के 'गगनयान' कार्यक्रम हेतु अंतरिक्ष ट्रैकिंग सहयोग।
- साइबर सुरक्षा: साइबर अपराध का मुकाबला, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की रक्षा, और 'साइबर तकनीक कौशल इनक्यूबेटर हब' का निर्माण।
- डिजिटल अनुकूलता: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सिद्धांतों का प्रसार और संयुक्त पायलट परियोजनाएं।
- रक्षा अनुसंधान सहयोग: DRDO और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समूह के बीच संस्थागत संबंध, समुद्री निगरानी जैसी क्षमताओं पर ध्यान।
- शासन संरचना: भारत के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और ऑस्ट्रेलिया के उप-सचिव (अंतर्राष्ट्रीय व सुरक्षा समूह) की सह-अध्यक्षता में। भारत की ओर से 'आपूर्ति श्रृंखला' व 'महत्वपूर्ण तकनीक' स्तंभों का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) करेगा, जबकि 'साइबर सुरक्षा' व 'डिजिटल अनुकूलता' का उत्तरदायित्व विदेश मंत्रालय के पास होगा।
- यह ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत (ACITI) जैसी त्रिपक्षीय पहलों के साथ मिलकर एक भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला तंत्र का निर्माण करती है, तथा निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालयों व सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग से बौद्धिक संपदा के वाणिज्यीकरण में सहायता करती है।
D. शिक्षा एवं कौशल विकास
(UPSC GS-II: द्विपक्षीय संबंध एवं शिक्षा से जुड़े सामाजिक क्षेत्रक)
- फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को बेंगलुरु में परिसर स्थापित करने हेतु आशय पत्र (LOI) सौंपा गया, और विक्टोरिया विश्वविद्यालय को गुरुग्राम में परिसर स्थापित व संचालित करने की अनुमति देते हुए स्वीकृति पत्र सौंपा गया।
- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया सरकार के तकनीकी एवं उच्चतर शिक्षा मंत्रालय (TAFE) के बीच खनन एवं खनन उपकरण, प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं (METS) में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु समझौता ज्ञापन हुआ। यह केंद्र भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) में स्थापित होगा, जो खनन कार्यों, खान सुरक्षा, खनिज प्रसंस्करण और खान मशीनरी जैसे उप-क्षेत्रों में अकादमिक उत्कृष्टता विकसित करेगा, तथा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र व पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के TAFE के बीच छात्रों/प्रशिक्षुओं के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा।
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) और ऑस्ट्रेलिया के कौशल गुणवत्ता प्राधिकरण (ASQA) के बीच आशय पत्र (LOI) पर हस्ताक्षर हुए, जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण (TVET) में गुणवत्ता आश्वासन के महत्व को स्वीकार करता है। इससे व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणालियों के नियामक प्रारूप सुदृढ़ होंगे, प्राथमिकता क्षेत्रों में व्यावसायिक मानकों का सह-विकास होगा, और अधिकारियों की क्षमता निर्माण, कर्मचारी आदान-प्रदान व संयुक्त कार्यशालाओं/अनुसंधान को बल मिलेगा।
- सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता और ग्रिफिथ फिल्म स्कूल, साउथ ब्रिस्बेन के बीच समझौता ज्ञापन हुआ, जिसमें संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियां व कार्यशालाएं, सिनेमा क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाएं, तथा अल्पकालिक कार्यशालाओं/ग्रीष्मकालीन विद्यालयों पर सहयोग शामिल है।
E. विज्ञान, अनुसंधान एवं बौद्धिक संपदा सहयोग
(UPSC GS-III: विज्ञान व प्रौद्योगिकी, बौद्धिक संपदा अधिकार)
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और आईपी ऑस्ट्रेलिया के बीच 'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (TKDL) तक पहुंच का समझौता हुआ, जो आईपी ऑस्ट्रेलिया को TKDL डेटाबेस तक पहुंच प्रदान करता है।
- CSIR और मेलबर्न विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन हुआ, जिसमें औषधि लक्ष्य पहचान (drug target identification) की दिशा में सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम, प्रशिक्षु कार्यक्रम और संकाय विनिमय कार्यक्रम शामिल हैं।
- जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया (GA) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के बीच समझौता ज्ञापन हुआ, जो वर्ष 2015 के वैज्ञानिक व तकनीकी सहयोग समझौते पर आधारित है। इसका उद्देश्य उन्नत अन्वेषण पद्धतियों को अपनाना, क्षमता निर्माण (Capacity Building) व कौशल विकास (Skill Development) करना, तथा GSI (Geological Survey of India) अवसंरचना का तकनीकी उन्नयन व आधुनिकीकरण करना है।
- ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार (ACITI) साझेदारी के अंतर्गत समझौता ज्ञापन हुआ, जिसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार में त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
F. सांस्कृतिक कूटनीति
(UPSC GS-I: भारतीय कला व संस्कृति; GS-II: सॉफ्ट पावर व सभ्यतागत कूटनीति)
ऑस्ट्रेलिया ने तमिलनाडु मूल की 3 प्राचीन भारतीय कलाकृतियों को स्वेच्छा से वापस किया है, जो 'सभ्यतागत कूटनीति' (Civilizational Diplomacy) का उत्कृष्ट उदाहरण है:
- शिव के वाहन, पवित्र बैल नंदी — तमिलनाडु, 11वीं-12वीं शताब्दी का ग्रेनाइट।
- शुभ काली (भद्रकाली) के साथ त्रिशूल — तमिलनाडु, 11वीं शताब्दी का कांस्य।
- छह सिर वाले स्कंद (कार्तिकेय) — तमिलनाडु, 12वीं शताब्दी का बेसाल्ट।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
- रणनीतिक सम्मिलन (Strategic Convergence): यह यात्रा जटिल भू-रणनीतिक अनिश्चितता (Complex geostrategic uncertainty ) के दौर में भारत की 'एक्ट ईस्ट ( Act East Policy)' और ऑस्ट्रेलिया की 'इंडो-पैसिफिक (Indo Pacific)' नीतियों के बीच गहरे तालमेल को दर्शाती है।
- हिंद-प्रशांत का साझा विजन: दोनों देशों ने एक 'स्वतंत्र, खुले, नियम-आधारित और समृद्ध हिंद-प्रशांत' के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है, जिसे MSCR के माध्यम से परिचालन समन्वय से बल मिलेगा।
- बहुपक्षीय सहयोग: क्वाड (Quad), IORA, आसियान (ASEAN) और प्रशांत द्वीप समूह फोरम (PIF) जैसे क्षेत्रीय तंत्रों की केंद्रीयता के प्रति साझा प्रतिबद्धता।
- नियम-आधारित व्यवस्था: 1982 के UNCLOS और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) के पालन पर आधारित खुली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन।
- वैश्विक मंच पर सहयोग: ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता हेतु अपना समर्थन दोहराया है।
- मानवीय सहायता (HADR): 'क्वाड इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क' सहित आपदा जोखिम प्रबंधन में सहयोग को गहरा किया जाएगा।
- महिला, शांति और सुरक्षा: संघर्षों की रोकथाम और स्थायी शांति में महिलाओं की सार्थक भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 'महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा' को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता।
- तकनीकी संप्रभुता: PACTS और ACITI (ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत) साझेदारी के माध्यम से उभरती प्रौद्योगिकियों में विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए केंद्रीय माना गया है।
दैनिक प्रश्नोत्तरी (Current Affairs Quiz — CQ)
- 'रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (JDDSC) 2026' ने वर्ष 2009 की पुरानी सुरक्षा घोषणा का स्थान लिया है, जिसका उद्देश्य बदलती रणनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप रक्षा सहयोग को और अधिक एकीकृत करना है।
- 'पीएसीटीएस' (PACTS) एक नई साझेदारी है जो साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर केंद्रित है तथा यह 2020 के पुराने प्रारूप का स्थान लेगी।
- शिखर सम्मेलन के दौरान 2014 के नागरिक परमाणु समझौते के कार्यान्वयन हेतु 'प्रशासनिक व्यवस्थाओं' को अंतिम रूप दिया गया है, जो विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के दीर्घकालिक निर्यात का मार्ग प्रशस्त करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: JDDSC (2026) का उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की गहराई और महत्वाकांक्षा को एक नए स्तर पर ले जाना है, जो 2009 की पुरानी घोषणा का नवीनीकरण है।
कथन 2 सही है: PACTS (Australia-India Partnership on Cyber, Critical Technology and Supply Chains) पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है और यह 2020 की व्यवस्था का स्थान लेती है।
कथन 3 सही है: दोनों देशों ने 2014-15 के परमाणु समझौते के तहत प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देकर यूरेनियम आपूर्ति के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर लिया है।
| पहल/समझौता | मुख्य फोकस/स्तंभ |
|---|---|
| 1. PACTS स्तंभ 4 | डिजिटल अनुकूलता और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) |
| 2. MSCR प्रारूप | सूचना साझाकरण और समुद्री सुरक्षा सहयोग |
| 3. रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग अकादमी | नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग और युवाओं का कौशल विकास |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
व्याख्या:
युग्म 1 सही सुमेलित है: PACTS का चौथा स्तंभ 'डिजिटल अनुकूलता' (Digital Resilience) है, जिसका नेतृत्व भारत की ओर से विदेश मंत्रालय का ओशिनिया प्रभाग करेगा।
युग्म 2 सही सुमेलित है: समुद्री सुरक्षा सहयोग प्रारूप (MSCR) सूचना साझाकरण और परिचालन समन्वय को बढ़ावा देता है।
युग्म 3 सही सुमेलित है: गांधीनगर में स्थित यह अकादमी 2000 महिलाओं और युवाओं को सौर तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए स्थापित की गई है।
- कोच्चि बैठक के दौरान, ब्रिक्स के इतिहास में पहली बार 'महिला ट्रैक' के तहत एक 'संयुक्त वक्तव्य' (Joint Statement) को सर्वसम्मति से अपनाया गया है।
- भारत ने महिला सशक्तिकरण हेतु 'ब्रिक्स डिजिटल रिपॉजिटरी' और 'ब्रिक्स डिजिटल क्षमता निर्माण दिशा-निर्देश' नामक दो नई पहलों का प्रस्ताव दिया है।
- वर्ष 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद, वर्तमान में ब्रिक्स समूह में कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या:
कथन 1 सही है: कोच्चि में आयोजित चार दिवसीय बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम पहली बार 'महिला ट्रैक' पर संयुक्त वक्तव्य को अपनाया जाना था।
कथन 2 सही है: भारत ने सफल नीतियों के साझाकरण हेतु 'डिजिटल रिपॉजिटरी' और संस्थागत सहयोग हेतु 'क्षमता निर्माण दिशा-निर्देश' पेश किए हैं।
कथन 3 सही है: ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई) और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद अब सदस्यों की संख्या 11 हो गई है।
व्याख्या:
विकल्प (C) गलत है: ब्रिक्स को औपचारिक रूप (Formalization) 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के दौरान दिया गया था। 2009 में येकातेरिनबर्ग में पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन (Summit) आयोजित किया गया था।
अन्य सभी विकल्प (A, B और D) स्रोतों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं।
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