विषय सूची
- भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय
- निकटवर्ती आकाशगंगाओं में मंद ब्लैक होल
विषय 1: भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) का विकास
संदर्भ (Context)
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने हाल ही में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) की प्रगति की समीक्षा की। इस समीक्षा के माध्यम से यह रेखांकित किया गया कि भारत का समुद्री शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र पिछले 12 वर्षों में एक व्यापक परिवर्तन से गुजरा है, जो राष्ट्र की दीर्घकालिक समुद्री महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप है।
स्थापना (Establishment and Historical Milestones)
IMU की नींव और इसके विभिन्न परिसरों का इतिहास दशकों पुरानी विरासत को संजोए हुए है:
- स्थापना: भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में संसद के एक अधिनियम (भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय अधिनियम 2008) के माध्यम से की गई थी। इसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।
- परिसरों की विरासत और समामेलन:
- नवी मुंबई कैंपस: इसकी जड़ें 1927 (TS डफ़रिन) तक जाती हैं, जिसके बाद प्रशिक्षण TS राजेंद्र (1972) और फिर TS चाणक्य (1993) पर जारी रहा, जिसे अंततः IMU में समाहित किया गया।
- मुंबई पोर्ट कैंपस: यह LBS CAMSAR (1948) और MERI (पूर्व में DMET 1949) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के समामेलन से बना है।
- कोलकाता कैंपस: इसमें DMET/MERI (1949/1995) और IIPM (1965) का विलय किया गया।
- चेन्नई कैंपस: इसका इतिहास 1984 (NIPM) से शुरू होता है, जो 2006 में NMA बना और 2008 में IMU का हिस्सा बना।
- विशाखापत्तनम कैंपस: इसकी स्थापना नवंबर 2008 में NSDRC (1991) के समामेलन के साथ हुई।
- कोच्चि कैंपस: इसका विकास METI (1981) और MERI (1993) के माध्यम से हुआ।
मुख्य विवरण (Highlights)
- प्रवेश में वृद्धि: IMU की सामान्य प्रवेश परीक्षा (IMU-CET) के लिए पंजीकरण 2014 के 14,751 से 5 गुना बढ़कर 73,395 हो गए हैं।
- समावेशी विकास: महिला कैडेटों के नामांकन में 18 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।
- नवाचार: विश्वविद्यालय के पेटेंटों की संख्या 1 से बढ़कर 7 हो गई है।
- परामर्श और साझेदारी: तकनीकी परामर्श परियोजनाओं का मूल्य 63.94 लाख रुपये (2014) से बढ़कर 10.78 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2021 से अब तक कुल 60 उद्योग और शैक्षणिक साझेदारियां (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय) स्थापित की गई हैं।
महत्व (Significance)
- वैश्विक प्रतिष्ठा: IMU अब विश्व के शीर्ष 10 समुद्री विश्वविद्यालयों में शामिल है और भारत का सर्वोच्च रैंकिंग वाला समुद्री विश्वविद्यालय है।
- शिक्षा नीति का एकीकरण: संस्थान ने अपने पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के साथ एकीकृत किया है।
- भविष्य की योजनाएं: मुंबई और कोलकाता पोर्ट परिसरों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और जहाज निर्माण में 'उत्कृष्टता केंद्र' (COE) स्थापित करने का प्रस्ताव है।
विषय 2: निकटवर्ती आकाशगंगाओं में मंद ब्लैक होल गतिविधि का अन्वेषण और वैज्ञानिक निहितार्थ
संदर्भ (Context)
हाल ही में 'मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने स्थानीय ब्रह्मांड (Local Universe) में छिपे हुए सुपरमैसिव ब्लैक होल की एक व्यापक आबादी का पता लगाया है। इस अध्ययन में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है, के शोधकर्ता भी शामिल थे। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये ब्लैक होल अत्यंत धुंधले हैं और इनका पता लगाना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- अवलोकन तकनीक: शोधकर्ताओं ने ई-मर्लिन (e-MERLIN) रेडियो टेलीस्कोप सरणी का उपयोग किया, जो ब्रिटेन में स्थित 7 रेडियो दूरबीनों का एक इंटरफेरोमीटर है।
- नमूना चयन: पालोमर नमूने (Palomar sample) से चयनित 280 निकटवर्ती आकाशगंगाओं का पारसेक पैमाने पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो अध्ययन किया गया।
- प्रमुख खोज: लगभग एक-चौथाई (25%) आकाशगंगाओं के केंद्रों में सघन रेडियो उत्सर्जन पाया गया, जो सघन और मंद रूप से संचय करने वाले (weakly accreting) सुपरमैसिव ब्लैक होल की उपस्थिति का संकेत देते हैं।
- डेटा एकीकरण: रेडियो प्रेक्षणों की पुष्टि करने के लिए नासा की चंद्र एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-ray Observatory) से प्राप्त डेटा का भी उपयोग किया गया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि यह उत्सर्जन ब्लैक होल से ही है, न कि तारा निर्माण या सुपरनोवा जैसी प्रक्रियाओं से।
वैज्ञानिक और रणनीतिक महत्व (Scientific Significance)
- आकाशगंगा विकास: ये "छिपे हुए राक्षस" (Hidden monster) जेट और बहिर्वाह के माध्यम से अपने परिवेश में ऊर्जा का संचार करते हैं, जिससे आकाशगंगाओं में तारा निर्माण की दर और उनके दीर्घकालिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
- ब्लैक होल विकास का नया मॉडल: शोध के परिणाम बताते हैं कि वर्तमान ब्रह्मांड में ब्लैक होल के विकास का प्रमुख तरीका शायद 'मंद और निम्न-स्तरीय गतिविधि' ही है।
- उच्च-रिज़ॉल्यूशन का महत्व: यह अध्ययन सिद्ध करता है कि उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो तकनीक उन ब्लैक होल आबादी को उजागर करने में सक्षम है जो पारंपरिक आकाशगंगा सर्वेक्षणों में अनदेखी रह जाती हैं।
MCQ
प्रश्न 1
भारत में समुद्री प्रशिक्षण के ऐतिहासिक विकास और संस्थागत एकीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत में औपचारिक समुद्री प्रशिक्षण की शुरुआत वर्ष 1927 में 'ट्रेनिंग शिप डफ़रिन' (TS Dufferin) के साथ हुई थी, जो कालान्तर में 'TS चाणक्य' के रूप में विकसित हुआ।
- स्वतंत्रता के पश्चात स्थापित 'डायरेक्टरेट ऑफ मरीन इंजीनियरिंग ट्रेनिंग' (DMET) और 'लाल बहादुर शास्त्री सेंटर' (LBS CAMSAR) जैसे संस्थानों को वर्ष 2008 के संसदीय अधिनियम के माध्यम से एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के तहत एकीकृत किया गया।
- भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) का वैधानिक ढांचा इसे अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(A) केवल 2 और 1
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 3, 2 और 1
उत्तर: (D) 1, 2 और 3
कथन 1 का विश्लेषण (ऐतिहासिक विकासक्रम): भारत में समुद्री शिक्षा का प्रस्थान बिंदु औपनिवेशिक काल का 'ट्रेनिंग शिप डफ़रिन' (1927) है। यह केवल एक जहाज नहीं, बल्कि भारत में समुद्री कैडेटों के प्रशिक्षण की औपचारिक नींव थी। इसके सेवामुक्त होने के बाद, यह विरासत TS राजेंद्र (1972) और फिर तट-आधारित अकादमी TS चाणक्य (1993) को हस्तांतरित हुई। यह निरंतरता दर्शाती है कि भारत ने अपनी समुद्री प्रशिक्षण प्रणाली को समय के साथ तकनीकी रूप से उन्नत किया है।
कथन 2 का विश्लेषण (संस्थागत समेकन): स्वतंत्रता के तत्काल बाद, भारत ने समुद्री इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 1948 में LBS CAMSAR और 1949 में DMET (जो बाद में MERI बना) जैसे संस्थानों की स्थापना की। भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय अधिनियम, 2008 का रणनीतिक महत्व यह है कि इसने इन बिखरे हुए लेकिन विशिष्ट संस्थानों को एक 'केंद्रीय विश्वविद्यालय' के वैधानिक ढांचे के तहत एकीकृत किया, जिससे शैक्षिक मानकों में एकरूपता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई।
कथन 3 का विश्लेषण (वैधानिक और भविष्योन्मुखी ढांचा): IMU का वैधानिक स्वरूप इसे केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं बनाता, बल्कि इसे अनुसंधान और नवाचार (R&D) के लिए एक स्वायत्त मंच प्रदान करता है। यह ढांचा इसे 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के उद्देश्यों को आत्मसात करने और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप उद्योग के साथ समन्वय करने की शक्ति देता है।
प्रश्न 2
खगोल भौतिकी के सिद्धांतों के संदर्भ में, 'सुपरमैसिव ब्लैक होल' के अन्वेषण हेतु 'बहु-तरंगदैर्ध्य' (Multi-wavelength) प्रेक्षणों के महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- रेडियो इंटरफेरोमेट्री (जैसे e-MERLIN) का उपयोग केवल सघन रेडियो उत्सर्जन का पता लगाने के लिए किया जाता है, जो मंद ब्लैक होल की उपस्थिति का प्राथमिक संकेत हो सकता है।
- एक्स-रे डेटा (जैसे चन्द्र वेधशाला) का उपयोग रेडियो उत्सर्जन के स्रोतों को 'तारा निर्माण' (Star formation) और 'सुपरनोवा अवशेषों' जैसी तारकीय प्रक्रियाओं से अलग करने के लिए किया जाता है।
- स्थानीय ब्रह्मांड (Local Universe) में ब्लैक होल का विकास केवल 'तीव्र ऊर्जा संचय' (High-rate accretion) के माध्यम से ही संभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (B) केवल 1 और 2
कथन 1 का विश्लेषण (तकनीकी क्रियाविधि): सुपरमैसिव ब्लैक होल, जो अपनी 'मंद' (faint) अवस्था में होते हैं, वे दृश्य प्रकाश में अक्सर अदृश्य रहते हैं। e-MERLIN जैसी रेडियो इंटरफेरोमेट्री तकनीक ब्रिटेन की 7 दूरबीनों के नेटवर्क का उपयोग करके उच्च कोणीय रिज़ॉल्यूशन (High Angular Resolution) प्रदान करती है। यह खगोलविदों को आकाशगंगा के केंद्र में केवल उन सघन रेडियो स्रोतों को पहचानने की अनुमति देती है जो ब्लैक होल की 'कमजोर संचय' (Weak accretion) गतिविधि का संकेत देते हैं।
कथन 2 का विश्लेषण (विभेदक निदान - Differential Diagnosis): अंतरिक्ष विज्ञान में एक प्रमुख चुनौती रेडियो उत्सर्जन के वास्तविक स्रोत की पहचान करना है। आकाशगंगाओं के केंद्र में 'तारा निर्माण' (Star formation) या 'सुपरनोवा अवशेष' भी रेडियो तरंगें उत्सर्जित कर सकते हैं। नासा की 'चन्द्र एक्स-रे वेधशाला' के डेटा का उपयोग यहाँ एक 'फ़िल्टर' के रूप में किया जाता है। चूंकि सक्रिय ब्लैक होल उच्च-ऊर्जा एक्स-रे उत्सर्जित करते हैं, इसलिए रेडियो और एक्स-रे डेटा का मिलान यह सुनिश्चित करता है कि पाया गया स्रोत वास्तव में एक 'सक्रिय गैलेक्टिक न्यूक्लियस' (AGN) है, न कि कोई सामान्य तारकीय प्रक्रिया।
कथन 3 का विश्लेषण (प्रतिमान विस्थापन - Paradigm Shift): लंबे समय तक यह माना जाता था कि ब्लैक होल का विकास केवल 'क्वासर' जैसी तीव्र और उज्ज्वल घटनाओं के माध्यम से होता है। हालांकि, इस शोध का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्ष यह है कि स्थानीय ब्रह्मांड (Local Universe) में ब्लैक होल के विकास का प्रमुख तरीका 'मंद और निम्न-स्तरीय संचय' (Faint and low-level accretion) हो सकता है। कथन में प्रयुक्त शब्द 'केवल' इसे गलत बनाता है, क्योंकि विज्ञान 'तीव्र' और 'मंद' दोनों प्रक्रियाओं को स्वीकार करता है, लेकिन वर्तमान साक्ष्य 'मंद' गतिविधि की व्यापकता को सिद्ध कर रहे हैं।
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