विषय सूची (Table of Contents)
- असम में जंगली धान (ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन) का संरक्षण: बोरजुली बना जैव विविधता धरोहर स्थल
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई): चावल की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार और राजकोषीय लाभ
1. असम में जंगली धान (ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन) का संरक्षण: बोरजुली बना जैव विविधता धरोहर स्थल
संदर्भ: असम के सोनितपुर जिले के बोरजुली गांव में स्थित 0.41 हेक्टेयर के एक लघु आर्द्रभूमि क्षेत्र को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा 'जैव विविधता धरोहर स्थल' (Biodiversity Heritage Site) के रूप में अधिसूचित किया गया है। यह स्थल खेती योग्य धान (Oryza sativa) के जंगली पूर्वज, 'ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन' (Oryza rufipogon) के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विवरण:
- प्रजाति की विशेषताएं: ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन एक बारहमासी (perennial) पौधा है जो मुख्य रूप से दक्षिण और पूर्वी एशिया के दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है। यह पौधा प्रकाश-संवेदी (photosensitive) है और नवंबर-दिसंबर के दौरान पुष्पित होता है।
- प्राकृतिक अनुकूलन: यह प्रजाति बाढ़ और अम्लीय मिट्टी के प्रति अत्यधिक सहनशील है। इसके बीज परिपक्व होने के तुरंत बाद झड़ जाते हैं, जो इसके प्राकृतिक प्रसार में सहायक है।
- संरक्षण विधि: इस स्थल पर 'यथास्थान (in-situ) संरक्षण' मॉडल अपनाया गया है, जो प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास में विकसित होने और बदलते जलवायु के अनुकूल ढलने की अनुमति देता है।
- महत्व: जंगली धान की ये प्रजातियां भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए एक अमूल्य आनुवंशिक संपदा हैं। राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) के अनुसार, इन जंगली किस्मों के जीन का उपयोग जलवायु-सहिष्णु (climate-resilient), अधिक उपज देने वाली और उच्च पोषण गुणवत्ता वाली नई धान की किस्में विकसित करने के लिए किया जा सकता है। यह पहल भारतीय कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और 'विजन 2047' के खाद्य सुरक्षा लक्ष्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष:
- वित्त पोषण: इस परियोजना को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) द्वारा वित्त पोषित किया गया है।
- कार्यान्वयन: इसका क्रियान्वयन वर्ष 2022 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBPGR) द्वारा असम राज्य जैव विविधता बोर्ड के सहयोग से किया जा रहा है।
- प्रशासनिक उपलब्धि: असम सरकार ने वर्ष 2022 में ही इसे मान्यता दी थी, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया गया है।
बिंदु:
- जैव विविधता धरोहर स्थल (BHS): जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 के तहत अधिसूचित क्षेत्र जो अद्वितीय और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील होते हैं।
- इन-सिटू (In-situ) संरक्षण: प्रजातियों का उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षण, जो जीन बैंक (Ex-situ) की तुलना में प्राकृतिक विकास के लिए अधिक प्रभावी है।
- जर्मप्लाज्म का महत्व: जंगली फसल संबंधी प्रजातियां (Crop Wild Relatives) भविष्य की कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए 'जेनेटिक लाइब्रेरी' का कार्य करती हैं।
2. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई): चावल की गुणवत्ता में सुधार
संदर्भ: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक सुधार को मंजूरी दी है। लगभग तीन दशकों (30 वर्षों) में यह पहली बार है जब सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल की गुणवत्ता संबंधी विशिष्टताओं में संशोधन किया है।
तकनीकी एवं मुख्य विवरण:
- टूटे दानों की संशोधित सीमा:
- कच्चा चावल: टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है।
- उसना (Parboiled) चावल: टूटे दानों की सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है।
- कार्यान्वयन: यह नई व्यवस्था खरीफ विपणन सत्र (KMS) 2027-28 तक सभी राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
- लाभार्थी: इस निर्णय से देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला, दिखने में अच्छा और अधिक स्वीकार्य चावल प्राप्त होगा।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष:
- वित्तीय बचत: इस सुधार से परिवहन, भंडारण और रखरखाव लागत में कमी के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
- कुशल संसाधन प्रबंधन: कुटाई के दौरान अलग किए गए टूटे चावल का औद्योगिक और उत्पादक कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और खाद्य सब्सिडी का बोझ कम होगा।
- पैकेजिंग सुधार: अब जूट के बोरों के स्थान पर चावल को एचडीपीई (HDPE) बैगों में संग्रहित किया जाएगा, जिससे पैकेजिंग लागत में युक्तिसंगत कमी आएगी।
महत्व:
- पारदर्शिता और जवाबदेही: आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड (QR-code) आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे कालाबाज़ारी की गुंजाइश खत्म होगी।
- पायलट सफलता: इस प्रस्ताव का हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पहले ही सफल परीक्षण किया जा चुका है।
- सम्मान के साथ पोषण: यह पहल केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को "सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता" का भोजन प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बिंदु:
- राजकोषीय विवेक: परिचालन दक्षता में सुधार कर सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ कम करना।
- डिजिटल गवर्नेंस: सार्वजनिक वितरण प्रणाली में क्यूआर-कोड जैसी तकनीक का उपयोग कर जवाबदेही तय करना।
- मानक सुधार: पुराने मानकों को आधुनिक पोषण और गुणवत्ता आवश्यकताओं के अनुरूप बदलना।
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न 1
जंगली धान की प्रजाति 'ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन' (Oryza rufipogon) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह खेती योग्य धान (Oryza sativa) का जंगली पूर्वज है।
- यह प्रजाति बाढ़ और अम्लीय मिट्टी के प्रति सहनशील है।
- इसका संरक्षण 'यथास्थान' (In-situ) विधि से किया जा रहा है।
सही कूट चुनें:
- A. केवल i और ii
- B. केवल ii और iii
- C. केवल i और iii
- D. उपर्युक्त सभी
सही उत्तर: (D)
व्याख्या:
कथन 1 और 2 सही हैं: ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन खेती वाले धान का पूर्वज है और इसमें जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ने के लिए प्राकृतिक गुण (बाढ़ और मिट्टी की अम्लता के प्रति सहनशीलता) मौजूद हैं। कथन 3 सही है: राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य 'जंगली धान (ओरिज़ा रूफ़ीपोगोन) का यथास्थान (In-situ) संरक्षण और प्रबंधन' करना है , । कथन 4 सही है: असम के सोनितपुर जिले में स्थित बोरजुली क्षेत्र को इसके आनुवंशिक संसाधनों के महत्व के कारण 'जैव विविधता धरोहर स्थल' अधिसूचित किया गया है
प्रश्न 2
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह योजना 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज' के एक भाग के रूप में कोविड-19 महामारी के दौरान गरीब और संवेदनशील वर्गों की सहायता के लिए शुरू की गई थी।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के लाभार्थियों को उनके नियमित 5 किलोग्राम सब्सिडी वाले अनाज के अतिरिक्त 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज प्रदान करना है।
- योजना का कार्यान्वयन उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जबकि वित्त मंत्रालय इसके लिए नोडल मंत्रालय है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या (75% ग्रामीण और 50% शहरी) को कवर किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- (A) केवल दो
- (B) केवल तीन
- (C) सभी चार
- (D) कोई भी नहीं
सही उत्तर: (C)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: पीएमजीकेएवाई की शुरुआत कोविड-19 संकट के दौरान 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज' के तहत की गई थी।
कथन 2 सही है: यह योजना पीडीएस के तहत पहले से मिल रहे अनाज के अलावा 5 किलो अतिरिक्त मुफ्त गेहूँ या चावल प्रदान करती है।
कथन 3 सही है: इसका कार्यान्वयन खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (उपभोक्ता मामले मंत्रालय) द्वारा किया जाता है और वित्त मंत्रालय नोडल मंत्रालय की भूमिका निभाता है।
कथन 4 सही है: NFSA 2013 के प्रावधानों के अनुसार, यह 75% ग्रामीण और 50% शहरी आबादी को कवर करता है, जो कुल जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई है।
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