विषय सूची (Table of Contents)
- पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास: नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय की नई रिपोर्ट - विनियामक सुधार और 'विकसित भारत 2047' का रोडमैप।
- ग्राम सभाओं में जनभागीदारी का सुदृढ़ीकरण: पंचायती राज मंत्रालय का राष्ट्रीय अध्ययन - जमीनी लोकतंत्र की चुनौतियां और संस्थागत सुधार के उपाय।
पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास: विनियामक सुधार और 'विकसित भारत 2047' का रोडमैप
संदर्भ (Context)
जून 2026 में, नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय ने संयुक्त रूप से "पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को खोलना" (Unlocking Growth in Tourism and Hospitality Sector) शीर्षक से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बाधित करने वाली गैर-वित्तीय विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण करती है और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (EoDB) में सुधार के लिए रणनीतिक सिफारिशें प्रदान करती है. 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप, यह दस्तावेज इस क्षेत्र को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के एक प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है.
तकनीकी एवं मुख्य विवरण (Technical Highlights)
रिपोर्ट में विनियामक ढांचे को 'तर्कसंगत' बनाने के लिए उप-क्षेत्रों के अनुसार निम्नलिखित प्रमुख सुधार प्रस्तावित किए गए हैं:
आवास प्रदाता (Accommodation):
- बिल्डिंग मानकों का उदारीकरण: होटलों की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए फर्श क्षेत्र अनुपात (FAR) और ग्राउंड कवरेज मानदंडों को उदार बनाने का सुझाव दिया गया है.
- अनुमोदन में दोहराव की समाप्ति: परियोजना स्तर पर पर्यटन मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली अनिवार्य मंजूरी को हटाने और होटलों के 'स्टार वर्गीकरण' को ऋण या अन्य लाइसेंसों की पात्रता से अलग (De-link) करने की सिफारिश की गई है.
- होमस्टे (Homestays): होमस्टे इकाइयों के लिए कमरों की अधिकतम संख्या को 6 से बढ़ाकर 9 करने का प्रस्ताव है.
एनओसी (NOC) संबंधी विशिष्ट सुधार:
- होमस्टे: पंजीकरण के लिए स्थानीय निकायों (नगर पालिका या पंचायत) से ली जाने वाली NOC की अनिवार्यता को समाप्त करना और स्व-पंजीकरण (Self-registration) मॉडल अपनाना.
- होटल निर्माण: विभिन्न विभागीय NOC (जैसे PWD, जल संसाधन विभाग) को समाप्त करने के बजाय उन्हें एक ही ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट पोर्टल (Auto-DCR) में एकीकृत (Integrate) करना.
खाद्य एवं पेय पदार्थ (Food & Beverage):
- FSSAI सुधार: खाद्य सुरक्षा पंजीकरण के लिए टर्नओवर सीमा को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ करना. इसके अतिरिक्त, लाइसेंस की 'निरंतर वैधता' (Perpetual Validity) शुरू करना, जिसमें शुल्क का भुगतान वार्षिक आधार पर किया जाए.
- पुलिस लाइसेंस: कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को अन्य माध्यमों से संबोधित करते हुए, पुलिस द्वारा जारी 'ईटिंग हाउस लाइसेंस' की आवश्यकता को समाप्त करना.
परिवहन एवं वीजा (Transport & VISA):
- अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (AITP): परमिट की वैधता को तर्कसंगत बनाना और पर्यटक वाहनों पर लागू होने वाले राज्य-स्तरीय प्रवेश करों/शुल्कों को समाप्त करना.
- वीजा सरलीकरण: विशिष्ट श्रेणियों के लिए 'वीजा-ऑन-अराइवल' (VoA) ढांचे की ओर संक्रमण करना और दोहराव वाले आवेदनों को कम करने के लिए 'बहु-प्रवेश' (Multiple Entry) की सुविधा देना.
महत्व (Significance)
- निवेश संवेदनशीलता: पर्यटन निवेश समय, लागत और विनियामक पूर्वानुमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं; इसलिए बहु-स्तरीय जटिलताओं को कम करना अनिवार्य है.
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत की 'ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स' (TTDI) रैंकिंग में सुधार के लिए विनियामक सरलीकरण को एक महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता (Critical Enabler) माना गया है.
- संस्थागत समन्वय: रिपोर्ट केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तरों पर 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के सिद्धांत को लागू करने पर जोर देती है.
पर्यावरण एवं सतत विकास (Sustainability)
- त्वरित मंजूरी: पर्यटन परियोजनाओं के लिए राज्य स्तर पर एक समर्पित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) का गठन करना ताकि पर्यावरणीय मंजूरी (EC) की प्रक्रिया में होने वाले विलंब को कम किया जा सके.
- मैपिंग और पारदर्शिता: तटीय (CRZ) और वन क्षेत्रों का सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करना ताकि निवेशकों को परियोजना की शुरुआत में ही नियामक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके.
ग्राम सभाओं में जनभागीदारी का सुदृढ़ीकरण: पंचायती राज मंत्रालय का राष्ट्रीय अध्ययन
संदर्भ (Context)
30 जून 2026 को नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम द्वारा "राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन" रिपोर्ट जारी की गई। यह अध्ययन राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान (NIRD&PR) द्वारा तैयार किया गया है, जो 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 213 जिलों और लगभग 400 ग्राम पंचायतों को कवर करता है।
तकनीकी एवं मुख्य विवरण (Technical Findings)
अध्ययन में ग्रामीण शासन की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करने वाले निम्नलिखित महत्वपूर्ण आँकड़े प्रस्तुत किए गए हैं:
संचार की प्रभावशीलता (Communication):
- 66.4% उत्तरदाताओं ने संचार प्रणालियों को नागरिकों को संगठित करने में प्रभावी माना है।
- ग्राम सभा की बैठकों की जानकारी का प्राथमिक स्रोत आज भी सार्वजनिक घोषणाएँ (67.32%) हैं।
शिकायत निवारण (Grievance Redressal):
- 86.78% नागरिकों ने बताया कि ग्राम सभा की बैठकों में शिकायतें प्राप्त होती हैं।
- हालांकि, इनमें से केवल 63.29% शिकायतों का ही बैठकों के बाद औपचारिक रूप से फॉलो-अप किया जाता है।
डिजिटल उपकरणों का उपयोग:
- ग्राम सभा की कार्यवाहियों को रिकॉर्ड करने के लिए SABHASAAR का उपयोग 48.9% पंचायतों में हो रहा है।
- 53.0% कार्यवाहियां NIRNAY ऐप पर अपलोड की जा रही हैं।
अवसंरचनात्मक स्थिति (Infrastructure):
- बैठकों के लिए आवश्यक भौतिक बुनियादी ढांचे की औसत उपलब्धता 61.9% है।
- डिजिटल तत्परता (Digital Readiness) के मामले में यह आंकड़ा और भी कम, मात्र 48.2% है।
जनभागीदारी में बाधाएँ (Key Barriers)
रिपोर्ट 'भागीदारी थकान' (Participation Fatigue) के कारणों का श्रेणीवार विश्लेषण करती है:
- आजीविका और समय का दबाव (40-55%): दैनिक मजदूरी का नुकसान और कृषि कार्यों का व्यस्त समय बैठकों में बाधा बनता है।
- जागरूकता का अभाव (25-35%): ग्राम सभा के महत्व और अधिकारों की सीमित समझ।
- शासन संबंधी मुद्दे (18-28%): बैठकों के परिणामों का दिखाई न देना (Lack of visible outcomes) और निर्णय प्रक्रिया में भरोसे की कमी।
- सामाजिक बाधाएं (8-15%): महिलाओं और हाशिए के समुदायों को प्रोत्साहित करने में कमी।
रणनीतिक और नीतिगत सिफारिशें (Strategic Recommendations)
- परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण: बैठकों को केवल औपचारिकता (Formality) बनने से रोकने के लिए चर्चा किए गए मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई और फॉलो-अप सुनिश्चित करना।
- क्षमता निर्माण: निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिकों के लिए निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: ग्राम सभा को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से अधिक सशक्त बनाना ताकि वह जमीनी विकास योजनाओं (GPDP) का वास्तविक केंद्र बन सके।
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