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| Jai Prakash Narayan Bird Sanctuary |
1. परिचय और वर्तमान संदर्भ (Context)
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, 5 जून 2026 को केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (जिसे सुरहा ताल के नाम से जाना जाता है) को भारत के 100वें रामसर स्थल के रूप में नामित किया है।
2. जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) का विस्तृत विवरण
भौगोलिक अवस्थिति और विस्तार
- स्थान: यह अभयारण्य उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित है, जो बलिया शहर से लगभग 10 किमी की दूरी पर है।
- क्षेत्रफल: इसका मुख्य क्षेत्रफल 3,432.93 हेक्टेयर है। मानसून के दौरान, यह लगभग 25,000 हेक्टेयर तक फैल जाता है, जो भारत के बहुत कम आर्द्रभूमि क्षेत्रों में देखने को मिलता है।
- सीमाएँ: यह पश्चिम में भीखमपुर गांव, उत्तर-पूर्व में सिंघाउली और दक्षिण-पूर्व में दुलवारा गांव से घिरा हुआ है।
उत्पत्ति और पारिस्थितिक प्रकृति
- गोखुर झील (Oxbow Lake): सुरहा ताल एक प्राकृतिक बारहमासी (perennial) गोखुर झील है, जिसका निर्माण गंगा नदी के विसर्पण (meandering) से हुआ है।
- नदी प्रणाली: यह गंगा और घाघरा नदी प्रणालियों के संगम के निकट स्थित है और विशाल गंगा के मैदानी पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न हिस्सा है।
इतिहास और नामकरण
- स्थापना: इसे वर्ष 1991 में 45 गांवों की भूमि को मिलाकर पक्षी अभयारण्य (Bird Sanctuary) के रूप में स्थापित किया गया था।
- नाम परिवर्तन: वर्ष 2002 में, इसका नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर प्रसिद्ध समाजवादी नेता के सम्मान में "जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य" कर दिया गया।
जैव विविधता का महत्व
- सेंट्रल एशियन फ्लाईवे: यह आर्द्रभूमि सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway) के साथ यात्रा करने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन आवास (wintering ground) के रूप में कार्य करती है।
- प्रजातियाँ: यहाँ पक्षियों की अनेक प्रवासी और निवासी प्रजातियों के साथ-साथ मछलियों, सरीसृपों और जलीय वनस्पतियों की समृद्ध विविधता पाई जाती है।
3. रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention): एक अवलोकन
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| नाम | आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन |
| प्रकृति | एक अंतर-सरकारी संधि जो विशेष रूप से आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है |
| स्थापना/दत्तक ग्रहण | 2 फरवरी 1971, रामसर (ईरान) |
| प्रभावी तिथि | 1975 |
| भारत का शामिल होना | 1 फरवरी 1982 |
| मुख्य स्तंभ (Three Pillars) |
1. अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का संरक्षण। 2. आर्द्रभूमियों का "बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग" (Wise Use)। 3. साझा आर्द्रभूमि प्रणालियों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग। |
आर्द्रभूमि की परिभाषा (Ramsar vs India)
4. भारत की उपलब्धियाँ और सांख्यिकी (Data & Facts)
वैश्विक और क्षेत्रीय रैंकिंग
- एशिया में स्थान: भारत अब एशिया में सबसे अधिक रामसर स्थलों वाला देश बन गया है।
- वैश्विक स्थान: भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
- प्रथम: यूनाइटेड किंगडम (176 स्थल)।
- द्वितीय: मैक्सिको (144 स्थल)।
भारत में राज्यवार स्थिति
- सर्वाधिक रामसर स्थल: तमिलनाडु (20 स्थल)।
- दूसरा स्थान: उत्तर प्रदेश (13 स्थल)।
महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)
- सबसे बड़ा रामसर स्थल: सुंदरवन आर्द्रभूमि (wetland), पश्चिम बंगाल (4,230 वर्ग किमी)।
- सबसे छोटा रामसर स्थल: रेणुका झील, हिमाचल प्रदेश (0.2 वर्ग किमी)।
- भारत के पहले रामसर स्थल (1982): चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)।
5. नवीनतम रामसर स्थलों की सूची (2025–2026)
हाल के वर्षों में भारत ने तेजी से नए स्थलों को शामिल किया है:
| संख्या | रामसर स्थल | राज्य | तिथि/वर्ष |
|---|---|---|---|
| 100वाँ | जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) | उत्तर प्रदेश | 5 जून 2026 |
| 99वाँ | शेखा झील पक्षी अभयारण्य | उत्तर प्रदेश | अप्रैल 2026 |
| 98वाँ | छारी-ढांढ आर्द्रभूमि | गुजरात | जनवरी 2026 |
| 97वाँ | पटना पक्षी अभयारण्य | उत्तर प्रदेश | जनवरी 2026 |
6. आर्द्रभूमियों का महत्व (Significance)
आर्द्रभूमियों को अक्सर 'परिदृश्य के गुर्दे' (Kidneys of the Landscape) कहा जाता है। इनका महत्व निम्न प्रकार है:
- जैव विविधता का समर्थन: यद्यपि आर्द्रभूमियाँ पृथ्वी की सतह का केवल 6% हिस्सा हैं, लेकिन वे लगभग 40% पौधों और पशु प्रजातियों का समर्थन करती हैं।
- जल सुरक्षा: ये भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) में मदद करती हैं और प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करते हुए बाढ़ के जोखिम को कम करती हैं।
- जल शुद्धिकरण: ये प्रदूषकों को फिल्टर करने और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में सक्षम हैं।
- कार्बन सिंक: आर्द्रभूमियाँ मिट्टी और बायोमास में बड़ी मात्रा में कार्बन संग्रहीत करती हैं, जो जलवायु परिवर्तन के शमन में महत्वपूर्ण है।
- तटीय सुरक्षा: मैंग्रोव जैसी आर्द्रभूमियाँ तूफान, चक्रवात और सुनामी के प्रभाव को कम करके तटीय समुदायों (लगभग 60% वैश्विक जनसंख्या) को सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- आजीविका: ये मत्स्य पालन, कृषि और पारिस्थितिकी पर्यटन (eco-tourism) के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं।
7. आर्द्रभूमियों के लिए खतरे (Threats)
ग्लोबल वेटलैंड आउटलुक (2025) के अनुसार, आर्द्रभूमियाँ पृथ्वी के सबसे संकटग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं:
- क्षेत्रफल में गिरावट: 1970 के बाद से कम से कम 400 मिलियन हेक्टेयर आर्द्रभूमियाँ नष्ट हो चुकी हैं।
- नुकसान की दर: वर्तमान में आर्द्रभूमियों के नुकसान की वार्षिक दर 0.52% है।
- प्रमुख कारण: कृषि के लिए भूमि परिवर्तन, शहरीकरण, बुनियादी ढांचा विकास, औद्योगिक प्रदूषण, और जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में बदलाव।
8. मैंग्रोव संरक्षण और MISHTI योजना
यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए मैंग्रोव से संबंधित विशेष जानकारी:
- परिभाषा: मैंग्रोव लवण-सहिष्णु (salt-tolerant) पेड़ और झाड़ियाँ हैं जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय मुहाने (estuarine) क्षेत्रों में उगते हैं।
- MISHTI योजना (2023): 'मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम' का उद्देश्य मैंग्रोव का संरक्षण करना, कार्बन पृथक्करण को बढ़ावा देना और तटीय समुदायों की आजीविका में सुधार करना है। यह योजना भारत के 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करती है।
- महत्वपूर्ण दिवस: 26 जुलाई को 'मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है।
9. भारत में कानूनी और विनियामक ढांचा
भारत में आर्द्रभूमियों को निम्नलिखित कानूनों के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है:
- आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017: यह आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए वर्तमान प्राथमिक ढांचा है।
- वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986।
- भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972।
10. निष्कर्ष और महत्वपूर्ण बिंदु (Takeaways)
- 100 का आंकड़ा: भारत द्वारा 100 रामसर स्थलों तक पहुँचना न केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि है, बल्कि यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और जलवायु लचीलापन (climate resilience) के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
- सामुदायिक भागीदारी: प्रधानमंत्री ने आर्द्रभूमियों के पुनरुद्धार के लिए विज्ञान, नवाचार और समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया है।
- Reference : https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2269189®=3&lang=1
मुख्य तिथियाँ
- विश्व आर्द्रभूमि दिवस: 2 फरवरी (इस वर्ष की थीम: "Wetlands and traditional knowledge: Celebrating cultural heritage")।
- विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून।

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