1. भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROIs) के लिए निवेश का उदारीकरण (Liberalisation of investment by individual PROIs)
सरकार ने पूंजी बाजारों में व्यापार सुगमता (Ease of doing business) बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए व्यक्तिगत विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को उदार बनाया है।
बजट घोषणा और कार्यान्वयन
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट (Union Budget FY2026-27) में इसकी घोषणा की थी। इसे प्रभावी बनाने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs - DEA) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण उपकरण) (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 (Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) (Third Amendment) Rules, 2026) को अधिसूचित किया है।
पोर्टफोलियो निवेश योजना (Portfolio Investment Scheme - PIS)
अब तक यह योजना केवल अनिवासी भारतीयों (NRIs) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCIs) के लिए उपलब्ध थी। अब, भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत व्यक्तियों (individual PROIs) को भी सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों (Listed Indian companies) की इक्विटी में निवेश करने की अनुमति दी गई है।
निवेश सीमा में वृद्धि (Increase in Investment Limits)
- एक व्यक्तिगत पीआरओआई (individual PROI) के लिए किसी भी कंपनी में निवेश की सीमा को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
- सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा (Overall investment limit) को वर्तमान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दिया गया है।
लाभ और प्रभाव
यह अधिसूचना एनआरआई/ओसीआई निवेशकों के लिए पहले से मौजूद ऑनबोर्डिंग प्रणालियों (Onboarding systems) का लाभ उठाकर विदेशी पोर्टफोलियो पूंजी को अधिक सक्रिय रूप से जुटाने में मदद करेगी। सरलीकृत ऑनबोर्डिंग और कम अनुपालन आवश्यकताओं (Reduced compliance requirements) से न केवल व्यापार सुगमता बढ़ेगी, बल्कि यह अपेक्षाकृत स्थिर विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों के एक व्यापक आधार को भी आकर्षित करेगा।
2. सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में FPI निवेश के लिए नियामक ढांचे की समीक्षा (Review of regulatory framework for FPI investment in Government securities)
सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities - G-Secs) में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने व्यापक सुधार किए हैं।
पूर्णतः सुलभ मार्ग (Fully Accessible Route - FAR) का विस्तार
सरकार ने FAR के तहत निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की सूची को बड़ा करने का निर्णय लिया है। इसमें अब निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा:
- 15, 30 और 40 वर्षों की अवधि के सरकारी प्रतिभूतियों के नए निर्गम (New issuances)।
- FAR-पात्र प्रतिभूतियों की अवधि के संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds - SGrBs)।
सामान्य मार्ग (General Route) के तहत प्रतिबंधों को हटाना
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर लागू निम्नलिखित तीन प्रतिबंधों को हटा दिया गया है:
- अल्पकालिक निवेश सीमा (Short-term investment limit)।
- एकाग्रता सीमा (Concentration limit)।
- प्रतिभूति-वार सीमा (Security-wise limit)।
मात्रात्मक निवेश सीमाएं (Quantitative Investment Limits)
हालांकि कुछ प्रतिबंध हटाए गए हैं, लेकिन समग्र मात्रात्मक निवेश सीमा को बरकरार रखा गया है:
- केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों का 6 प्रतिशत।
- राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (State Government Securities - SGSs) का 2 प्रतिशत।
श्रेणियों का विलय (Merging of Categories)
निवेश की उप-श्रेणियों, जैसे कि 'सामान्य' (General) और 'दीर्घकालिक' (Long-term), को अब क्रमशः सरकारी प्रतिभूतियों और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के लिए एक ही सीमा (Single limit) में मिला दिया जाएगा।
रणनीतिक उद्देश्य
इन उपायों से एक सुचारू उपज वक्र (Smooth yield curve) विकसित करने में मदद मिलेगी और पेंशन फंड, बीमा कंपनियां और संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds - SWFs) जैसे दीर्घकालिक और धैर्यवान विदेशी पूंजी (Patient foreign capital) के स्थिर प्रवाह को आकर्षित किया जा सकेगा।
3. जी-सेक (G-Secs) पर कर लाभ और रियायतें (Tax benefits and exemptions on G-Secs)
एक प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था (Competitive tax regime) के महत्व को समझते हुए, सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले FPIs के लिए कर नियमों को युक्तिसंगत (Rationalise) बनाया है।
आयकर से छूट (Exemption from Income Tax)
सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में FPIs द्वारा किए गए निवेश से प्राप्त होने वाले किसी भी ब्याज (Interest) या पूंजीगत लाभ (Capital gain) को आयकर से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
प्रभावी तिथि
यह छूट 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। इसका मतलब है कि इस तारीख को या उसके बाद प्राप्त होने वाले किसी भी लाभ पर यह छूट लागू होगी।
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को लाभ
इसी तरह की आयकर छूट बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (Bank for International Settlements - BIS) को भी उनके जी-सेक निवेशों पर प्रदान की गई है।
महत्व
यह कदम भारत की कराधान व्यवस्था को कई अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के अनुरूप बनाता है, जिससे टिकाऊ और निरंतर विदेशी पूंजी प्रवाह सुनिश्चित होगा।
4. इन सुधारों का व्यापक प्रभाव और भविष्य की दृष्टि (Broader impact and future vision)
इन सभी सुधारों को मिलाकर देखने पर, सरकार का लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था के निवेश परिदृश्य को बदलना है।
परिचालन संबंधी जटिलताओं में कमी (Reduction in operational complexities)
इन सुधारों से विदेशी निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और बाजार तक पहुंच को आसान बनाया गया है।
समान निवेश अनुभव (Seamless investment experience)
भारत अब अग्रणी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के समान एक सुगम निवेश अनुभव प्रदान करने की ओर बढ़ रहा है।
निवेशक आधार का विस्तार (Expansion of investor base)
इन उपायों से भारतीय इक्विटी और सरकारी प्रतिभूतियों के लिए निवेशकों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि (Boost to foreign exchange inflows)
स्थिर और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार और प्रवाह को भी मजबूती मिलेगी।

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