पद्म पुरस्कार: UPSC CSE के लिए सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
1. परिचय एवं महत्व
पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं। प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की पूर्व संध्या पर इन पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। वर्ष 1954 में स्थापित इन पुरस्कारों का प्राथमिक उद्देश्य ऐसी किसी भी गतिविधि या विषय में विशिष्ट व असाधारण उपलब्धियों अथवा सेवा को मान्यता देना है, जिसमें लोक सेवा का तत्व शामिल हो।
UPSC की दृष्टि से यह विषय सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I (भारतीय संस्कृति एवं विरासत) तथा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-II (राजव्यवस्था एवं संविधान – अनुच्छेद 18) दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. पदानुक्रम (Order of Precedence)
| क्रम | पुरस्कार | श्रेणी |
|---|---|---|
| 1 | भारत रत्न | देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान |
| 2 | पद्म विभूषण | असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए |
| 3 | पद्म भूषण | उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए |
| 4 | पद्म श्री | विशिष्ट सेवा के लिए |
3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं निलंबन
यद्यपि इन पुरस्कारों की स्थापना 1954 में हुई, परंतु यह यात्रा निर्बाध नहीं रही। अब तक दो बार इन पुरस्कारों को निलंबित किया जा चुका है।
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1954 | नेहरू सरकार के कार्यकाल में पुरस्कारों की स्थापना |
| 1977–1980 | प्रथम निलंबन – जनता पार्टी (मोरारजी देसाई) सरकार |
| 1980 | इंदिरा गांधी सरकार द्वारा पुनः बहाली (25 जनवरी 1980) |
| 1993–1997 | द्वितीय निलंबन – संवैधानिक चुनौती एवं न्यायिक समीक्षा |
| 1996 | सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय: बालाजी राघवन बनाम भारत संघ |
| 1998 | प्रतिवर्ष नियमित वितरण की शुरुआत |
| 25 मई 2026 | राष्ट्रपति भवन में प्रथम नागरिक अलंकरण समारोह |
क. प्रथम निलंबन (1977–1980)
आपातकाल की समाप्ति के बाद सत्ता में आई पहली गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी सरकार (प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई) ने इन पुरस्कारों को निलंबित किया। इसके तीन प्रमुख कारण थे:
- संवैधानिक आपत्ति (अनुच्छेद 18): सरकार का मानना था कि ये पुरस्कार संविधान के अनुच्छेद 18(1) का उल्लंघन करते हैं, जो सैन्य और शैक्षणिक विशिष्टताओं को छोड़कर अन्य सभी 'उपाधियों' के उन्मूलन की घोषणा करता है।
- राजनीतिकरण का आरोप: पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को "मूल्यहीन और अत्यधिक राजनीतिक" करार दिया गया।
- समानता का लोकतांत्रिक सिद्धांत: सरकार का तर्क था कि ये पुरस्कार एक कृत्रिम "विशिष्ट वर्ग" बनाते हैं, जो समानता के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है।
वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पुनः कांग्रेस सरकार बनते ही इन पुरस्कारों को बहाल कर दिया गया।
ख. द्वितीय निलंबन (1993–1997)
वर्ष 1992 में दो महत्वपूर्ण जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गईं:
- बालाजी राघवन द्वारा केरल उच्च न्यायालय में
- सत्यपाल आनंद द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि भारत रत्न और पद्म पुरस्कार अनुच्छेद 18(1) के तहत प्रतिबंधित 'उपाधियां' हैं। साथ ही, कई पुरस्कार विजेताओं द्वारा इन्हें नाम के आगे या पीछे 'prefix/suffix' के रूप में उपयोग करने के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
अगस्त 1992 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित कर लिया और मामला लंबित रहने तक 1993 से 1997 तक कोई पुरस्कार घोषित नहीं हुआ।
4. ऐतिहासिक निर्णय: बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996)
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ए.एम. अहमदी की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने 15 दिसंबर 1995 को यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया (1996 में प्रकाशित)। यह निर्णय आज भी भारत में नागरिक पुरस्कारों के नियमन का आधार है।
सर्वोच्च न्यायालय के तीन प्रमुख नीतिगत निर्देश
- 'उपाधि' और 'राष्ट्रीय सम्मान' में अंतर: भारत रत्न और पद्म पुरस्कार अनुच्छेद 18(1) के तहत प्रतिबंधित 'उपाधियां' नहीं हैं, बल्कि ये 'राष्ट्रीय सम्मान' हैं। अनुच्छेद 18(1) का उद्देश्य औपनिवेशिक व सामंती वंशानुगत उपाधियों (सर, राय बहादुर, महाराजा आदि) को समाप्त करना था। योग्यता को सम्मानित करना अनुच्छेद 51A(j) के अनुकूल है।
- नाम के साथ प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध: इन पुरस्कारों का उपयोग किसी भी परिस्थिति में नाम के आगे (Prefix) या पीछे (Suffix) के रूप में नहीं किया जा सकता। उल्लंघन पर सम्मान वापस लिया जा सकता है।
- संस्थागत चयन प्रक्रिया: प्रधानमंत्री द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश। वर्तमान में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में पद्म पुरस्कार समिति का गठन होता है।
5. पात्रता, चयन प्रक्रिया एवं नियम
पात्रता मानदंड
| पहलू | नियम |
|---|---|
| सार्वभौमिकता | जाति, व्यवसाय, पद, लिंग या राष्ट्रीयता के बिना भेद सभी पात्र |
| सरकारी कर्मचारी | PSU कर्मचारियों सहित अपात्र; डॉक्टर एवं वैज्ञानिक इससे मुक्त |
| मरणोपरांत पुरस्कार | सामान्यतः नहीं; अत्यंत असाधारण मामलों में छूट संभव |
| समयांतराल | उच्च श्रेणी पुरस्कार के लिए पिछले पुरस्कार से न्यूनतम 5 वर्ष अनिवार्य |
| वार्षिक सीमा | अधिकतम 120 (मरणोपरांत एवं विदेशी श्रेणी को छोड़कर) |
चयन समिति का स्वरूप
- गठन: प्रतिवर्ष प्रधानमंत्री द्वारा
- अध्यक्ष: कैबिनेट सचिव (पदेन)
- सदस्य: केंद्रीय गृह सचिव, राष्ट्रपति के सचिव और नागरिक समाज से 4–6 प्रतिष्ठित व्यक्ति
- अंतिम स्वीकृति: प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति
- नामांकन: कोई भी नागरिक नामांकित कर सकता है; स्व-नामांकन भी मान्य
6. पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ): UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2021
प्रश्न: भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत रत्न और पद्म पुरस्कार संविधान के अनुच्छेद 18(1) के तहत 'उपाधियां' हैं।
- पद्म पुरस्कार, जिन्हें 1954 में स्थापित किया गया था, केवल एक बार निलंबित किए गए थे।
- किसी विशेष वर्ष में भारत रत्न पुरस्कारों की संख्या अधिकतम पांच तक सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही नहीं हैं?
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3सही उत्तर: (d) – तीनों कथन गलत हैं
विस्तृत व्याख्या
- कथन 1 गलत: बालाजी राघवन (1996) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ये 'उपाधि' नहीं बल्कि 'राष्ट्रीय अलंकरण' हैं।
- कथन 2 गलत: पद्म पुरस्कार दो बार निलंबित हुए – 1977–1980 और 1993–1997।
- कथन 3 गलत: भारत रत्न की संख्या पर कोई वैधानिक सीमा नहीं है। 2024 में पांच व्यक्तियों को भारत रत्न दिया गया।
7. पद्म पुरस्कार 2026: मुख्य आंकड़े
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में 25 मई 2026 को आयोजित प्रथम नागरिक अलंकरण समारोह के अनुसार:
| श्रेणी | संख्या |
|---|---|
| पद्म विभूषण | 05 |
| पद्म भूषण | 13 |
| पद्म श्री | 113 |
| कुल घोषित | 131 |
इस सूची में 19 महिलाएं, विदेशी/अनिवासी भारतीय/OCI श्रेणी के 6 व्यक्ति और 16 मरणोपरांत सम्मानित होने वाले व्यक्ति शामिल हैं।
List of all Padam Awards 2026 Awardees - https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2218547®=3&lang=2
8. पद्म विभूषण प्राप्तकर्ता 2026
1. श्री धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) – कला (भारतीय सिनेमा), महाराष्ट्र/पंजाब
भारतीय सिनेमा के "ही-मैन" के रूप में विख्यात धर्मेंद्र का सिनेमाई सफर छह दशकों से अधिक लंबा रहा। 300 से अधिक फिल्में, वर्ष 1960 में 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से पदार्पण, 'बंदिनी' (1963), 'सत्यकाम' (1969) और 1975 की ब्लॉकबस्टर 'शोले' में 'वीरू' की अविस्मरणीय भूमिका। 14वीं लोकसभा (2004–2009) में राजस्थान के बीकानेर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व। 'विजेता फिल्म्स' के बैनर तले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'घायल' का निर्माण। पूर्व में पद्म भूषण (2012) से सम्मानित। निधन: 24 नवंबर 2025।
2. डॉ. (श्रीमती) एन. राजम – कला (शास्त्रीय संगीत – वायलिन), उत्तर प्रदेश/तमिलनाडु
विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक, जिन्होंने "गायकी अंग" तकनीक की खोज कर वायलिन पर मानव कंठ की बारीकियां प्रस्तुत कीं। वैश्विक स्तर पर "सिंगिंग वायलिन" के नाम से जानी जाती हैं। जन्म: 16 मार्च 1939, केरल के एर्नाकुलम में। तीन वर्ष की आयु में पिता ए. नारायण अय्यर के संरक्षण में वायलिन शिक्षा। पंडित ओंकारनाथ ठाकुर के सानिध्य में बनारस घराने की हिंदुस्तानी परंपरा आत्मसात। BHU में लगभग चार दशक प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष एवं डीन। पूर्व में पद्म श्री (1984), पद्म भूषण (2004) और संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (2012)।
9. पद्म भूषण प्राप्तकर्ता 2026
1. शतावधानी डॉ. आर. गणेश – कला और साहित्य (अवधान कला), कर्नाटक
भारत की प्राचीन 'अवधान' कला के अद्वितीय हस्ताक्षर — जिसमें बिना कागज-कलम के काव्यात्मक चुनौतियों का तात्कालिक समाधान संस्कृत या कन्नड़ छंदों में दिया जाता है। कन्नड़ में इस लुप्तप्राय कला को पुनर्जीवित करने का श्रेय इन्हें। अब तक 1,300 से अधिक अष्टावधान और 5 शतावधान प्रस्तुत। मैकेनिकल इंजीनियरिंग से लेकर संस्कृत में स्नातकोत्तर और कन्नड़ में डी.लिट — 10 भाषाओं के प्रकांड विद्वान। 70 से अधिक पुस्तकों के लेखक।
2. श्री भगत सिंह कोश्यारी – सार्वजनिक मामले, उत्तराखंड
जन्म: 17 जून 1942, बागेश्वर। आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर। 1966 में पिथौरागढ़ में 'सरस्वती शिशु मंदिर' की स्थापना। आपातकाल में MISA के तहत 19 माह कारागार। नवगठित उत्तराखंड राज्य के पहले कैबिनेट मंत्री और द्वितीय मुख्यमंत्री (2001–2002)। 2008 में राज्यसभा, 2014 में लोकसभा सांसद। ऊर्जा मंत्री के रूप में 2400 मेगावाट की टिहरी जलविद्युत परियोजना को साकार किया। 5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त।
3. श्री उदय सुरेशकुमार कोटक – व्यापार और उद्योग (बैंकिंग), महाराष्ट्र
जन्म: 15 मार्च 1959। 1985 में 'कोटक महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड' की स्थापना। मार्च 2003 में RBI से वाणिज्यिक बैंक का लाइसेंस पाने वाली पहली NBFC — भारतीय बैंकिंग इतिहास में ऐतिहासिक उपलब्धि। 2018 में दिवालिया IL&FS के पुनरुद्धार में केंद्रीय भूमिका। 2017 में SEBI की कॉरपोरेट गवर्नेंस समिति के अध्यक्ष।
4. प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (मरणोपरांत) – सार्वजनिक मामले एवं खेल प्रशासन, दिल्ली
जन्म: 3 दिसंबर 1931, लाहौर। 1967 में मात्र 35 वर्ष की आयु में दिल्ली के सबसे युवा 'मुख्य कार्यकारी पार्षद'। पांच बार लोकसभा सांसद। 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पराजित किया। 40 वर्षों तक भारतीय तीरंदाजी संघ (AAI) के अध्यक्ष। 2011–12 में IOA के कार्यकारी अध्यक्ष। निधन: 30 सितंबर 2025।
5. डॉ. कल्पट्टि रामासामी पलानिस्वामी – चिकित्सा (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी), तमिलनाडु
जन्म: 15 मार्च 1949, इरोड जिला। 1986 में स्टेनली मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की स्थापना। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन को शामिल कराने में केंद्रीय भूमिका। 2008 में भारत में पहली बार जीवित मॉडलों पर एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) कार्यशाला। चेन्नई के रामकृष्ण मठ औषधालय में तीन दशकों से निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं। 2022 में 'वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन' का सर्वोच्च 'मास्टर्स अवार्ड'।
6. श्री पीयूष पांडेय (मरणोपरांत) – व्यापार और उद्योग (विज्ञापन), महाराष्ट्र/राजस्थान
जन्म: 5 सितंबर 1955। आधुनिक भारतीय विज्ञापन के "पितामह"। ओगिल्वी इंडिया के प्रमुख के रूप में कालजयी अभियान: "दो बूंद जिंदगी की" (पल्स पोलियो उन्मूलन), "मिले सुर मेरा तुम्हारा" (राष्ट्रीय एकता), फेविकोल, कैडबरी, एशियन पेंट्स। कांस लायंस 2002 में डबल गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय। 2018 में 'लायन ऑफ सेंट मार्क' लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान। पूर्व में पद्म श्री (2016)। निधन: 24 अक्टूबर 2025।
10. UPSC परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण तथ्य-सारांश
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थापना वर्ष | 1954 |
| निलंबन की संख्या | दो बार (1977–80 और 1993–97) |
| संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 18(1) और अनुच्छेद 51A(j) |
| ऐतिहासिक वाद | बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996) |
| चयन समिति के अध्यक्ष | कैबिनेट सचिव (पदेन) |
| वार्षिक अधिकतम सीमा | 120 (मरणोपरांत एवं विदेशी को छोड़कर) |
| भारत रत्न की वैधानिक सीमा | कोई वैधानिक सीमा नहीं |
| 2026 में कुल पुरस्कार | 131 |
| घोषणा का अवसर | गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की पूर्व संध्या |

Comments
Post a Comment