1. संदर्भ (Context)
हाल ही में, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (MoPSW) श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (Logistics Port Performance Index-LPPI) और चार प्रमुख डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (JNPA) के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जो भारत के समुद्री क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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| Logistics Port Performance Index 2024-25 |
2. लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) 2024-25
यह भारतीय बंदरगाहों के परिचालन प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रीय मानक (Benchmarking) तंत्र है।
- ढांचा (Framework): इसे 'सागर आंकलन' (Sagar Aankalan) ढांचे के तहत विकसित किया गया है।
- रणनीतिक संरेखण (Strategic Alignment): यह सूचकांक 'प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान', 'समुद्री भारत विजन 2030' और 'समुद्री अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप है।
- मूल्यांकन की श्रेणियां: यह तीन मुख्य कार्गो क्षेत्रों में बंदरगाहों का मूल्यांकन करता है— ड्राई बल्क, लिक्विड बल्क और कंटेनर कार्गो।
- प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPIs):
- कार्गो हैंडलिंग (Cargo Handled)।
- वेसल टर्नअराउंड टाइम (Vessel Turnaround Time)।
- बर्थ आइडल टाइम (Berth Idle Time)।
- कंटेनर ड्वेल टाइम (Container Dwell Time)।
- शिप बर्थ डे आउटपुट (Ship Berth Day Output)।
- महत्व: यह फ्रेमवर्क 'पूर्ण प्रदर्शन' और 'साल-दर-साल सुधार' को समान महत्व देता है, जिससे बंदरगाहों के बीच निरंतर सुधार की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
3. चार प्रमुख डिजिटल पहल (Four Major Digital Initiatives)
जहाजरानी महानिदेशालय (DGS) द्वारा विकसित ये पहल प्रशासन को कागजी कार्रवाई से हटाकर क्लाउड-आधारित और एआई-रेडी (AI-ready) ढांचे में बदलती हैं।
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24×7 ई-नाविक शिकायत निवारण मॉड्यूल (e-Navik Grievance Redressal Module):
- उद्देश्य: दुनिया भर में काम कर रहे भारतीय नाविकों के कल्याण को सुनिश्चित करना।
- विशेषता: नाविक व्हाट्सएप, ईमेल, ई-नाविक पोर्टल और टोल-फ्री हेल्पलाइन के माध्यम से कहीं से भी अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।
- वैश्विक अनुपालन: यह भारत की 'समुद्री श्रमिक सम्मेलन (MLC), 2006' के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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ई-समुद्र जहाज पंजीकरण मॉड्यूल (e-Samudra Ship Registration Module):
- उद्देश्य: भारतीय ध्वज के तहत जहाजों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सरल बनाना।
- प्रभाव: यह प्रशासनिक देरी को खत्म करता है और भारत के समुद्री प्रशासन को प्रमुख वैश्विक शिपिंग देशों के स्तर पर लाता है।
-
मेडिकल प्रैक्टिशनर मॉड्यूल (Medical Practitioner Module):
- उद्देश्य: नाविकों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टरों की निगरानी और पंजीकरण करना।
- लाभ: यह एक सुरक्षित डेटाबेस बनाता है जिससे फर्जी स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों के जोखिम को कम किया जा सके और केवल फिट कर्मियों को ही जहाजों पर भेजा जाए।
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एकीकृत शिप रिसाइक्लिंग पोर्टल - क्रेडिट नोट मॉड्यूल (Unified Ship Recycling Portal):
- उद्देश्य: स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देना।
- वित्तीय प्रोत्साहन: 'हांगकांग कन्वेंशन' का पालन करने वाले भारतीय शिपयार्डों में जहाज रिसाइकिल करने वाले मालिकों को जहाज के स्क्रैप मूल्य का 40% क्रेडिट नोट प्राप्त होगा, जिसका उपयोग भारत में नए जहाज निर्माण के लिए किया जा सकता है।
4. भारत की वैश्विक स्थिति और उपलब्धियां
भारत ने हाल के वर्षों में वैश्विक रसद और समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत की है:
- विश्व बैंक का लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स: भारत 'अंतर्राष्ट्रीय शिपमेंट' श्रेणी में 44वें स्थान से 22वें स्थान पर पहुंच गया है।
- कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2024: विश्व बैंक के इस सूचकांक में भारत के सात बंदरगाह दुनिया के शीर्ष 100 में शामिल हैं।
- JNPA का प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह ने 8 मिलियन TEU को पार किया और 102 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो का संचालन किया।
5. प्रमुख बंदरगाहों का प्रदर्शन (LPPI के अनुसार)
- पारादीप पोर्ट अथॉरिटी: ड्राई बल्क कार्गो श्रेणी में शीर्ष स्थान (5 मिलियन टन से अधिक)।
- सिक्का पोर्ट एंड टर्मिनल्स: लिक्विड बल्क कार्गो श्रेणी में नेतृत्व।
- मुंद्रा बंदरगाह: कंटेनर कार्गो श्रेणी में सर्वोच्च स्थान।
- जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (JNPA): प्रमुख कंटेनर बंदरगाहों में दूसरा स्थान।
6. मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए विश्लेषण बिंदु (Insights)
- इज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business): डिजिटल जहाज पंजीकरण और एकीकृत पोर्टल लालफीताशाही (Red tape) को कम करते हैं, जिससे विदेशी निवेश और स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन मिलता है।
- तकनीकी नवाचार: स्वदेशी पोत यातायात सेवा (VTS) और एआई-संचालित निविदा मूल्यांकन मंच (NIVIDA) का शुभारंभ भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और तकनीकी आधुनिकीकरण के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- ब्लू इकोनॉमी और नाविक कल्याण: ई-नाविक और मेडिकल मॉड्यूल के माध्यम से नाविकों के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा करना भारत को एक "जिम्मेदार समुद्री महाशक्ति" के रूप में स्थापित करता है।
- पर्यावरणीय स्थिरता: शिप रिसाइक्लिंग क्रेडिट योजना पुराने जहाजों के वैज्ञानिक निपटान (हांगकांग कन्वेंशन के तहत) और हरित जहाज निर्माण (Green Shipbuilding) को प्रोत्साहित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. लॉजिस्टिक्स पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPPI) 2024-25 क्या है?
यह भारतीय बंदरगाहों के परिचालन प्रदर्शन का आकलन करने के लिए 'सागर आंकलन' ढांचे के तहत विकसित एक राष्ट्रीय मानक तंत्र है। यह ड्राई बल्क, लिक्विड बल्क और कंटेनर कार्गो जैसे क्षेत्रों में बंदरगाहों की दक्षता को मापता है।
2. समुद्री क्षेत्र के लिए शुरू की गई चार प्रमुख डिजिटल पहलें कौन सी हैं?
जहाजरानी महानिदेशालय (DGS) द्वारा विकसित चार पहलें हैं: e-Navik (नाविक शिकायत निवारण), e-Samudra (जहाज पंजीकरण), मेडिकल प्रैक्टिशनर मॉड्यूल (स्वास्थ्य प्रमाणन), और एकीकृत शिप रिसाइक्लिंग पोर्टल।
3. e-Navik शिकायत निवारण मॉड्यूल से नाविकों को क्या लाभ होगा?
यह एक 24/7 वैश्विक पोर्टल है जिसके माध्यम से भारतीय नाविक दुनिया के किसी भी कोने से व्हाट्सएप, ईमेल या टोल-फ्री हेल्पलाइन के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। यह समुद्री श्रमिक सम्मेलन (MLC), 2006 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
4. शिप रिसाइक्लिंग क्रेडिट योजना क्या है?
इस योजना के तहत, जो जहाज मालिक अपने पुराने जहाजों को भारत के प्रमाणित यार्डों में रिसाइकिल करते हैं, उन्हें जहाज के स्क्रैप मूल्य का 40% क्रेडिट नोट मिलता है। इस राशि का उपयोग भारत में नए जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है।
5. प्रदर्शन के मामले में कौन से भारतीय बंदरगाह अग्रणी हैं?
पारादीप पोर्ट अथॉरिटी ड्राई बल्क कार्गो में शीर्ष पर है, सिक्का पोर्ट लिक्विड बल्क में अग्रणी है, और मुंद्रा बंदरगाह कंटेनर कार्गो श्रेणी में पहले स्थान पर है, जिसके बाद JNPA का स्थान आता है।

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