PIB Analysis 15 October 2026 | IDBI Bank Fairfax Deal, PM Samajik Sahayata Yojana, Coir Exports

प्रकाशन तिथि: 15 October 2026 | स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) | श्रेणी: UPSC करेंट अफेयर्स

नमस्कार। 14 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार के तीन निर्णय और घोषणाएं UPSC की दृष्टि से अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय और ग्रामीण आजीविका, तीनों आयामों को छूती हैं। पहला, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में कुल 60.72% इक्विटी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. (मूल कंपनी: फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड) को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी, जिसका मूल्य ₹52,878.08 करोड़ है और जो पूर्ण होने पर वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा। दूसरा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹53,428 करोड़ के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी, इसका नाम 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' किया और दिव्यांगता पेंशन के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी। तीसरा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने बताया कि भारत का कॉयर (नारियल रेशा) निर्यात 2014-15 के ₹1,630.33 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹6,614.40 करोड़ हो गया है।


Aarambh Times Daily PIB Analysis and Current Affairs Update

1. आईडीबीआई बैंक लिमिटेड का रणनीतिक पुनर्गठन: फेयरफैक्स को 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी

(GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, विनिवेश एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश)

संदर्भ (Context)

14 अक्टूबर 2026 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन (Strategic Restructuring) को मंजूरी दी। निर्णय के अनुसार बैंक की कुल इक्विटी का 60.72% हिस्सा रणनीतिक खरीदार को बेचा जाएगा, जिसमें भारत सरकार (GoI) की 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। रणनीतिक खरीदार के रूप में मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. को स्वीकृत किया गया है, जिसकी मूल कंपनी (Parent Entity) मेसर्स फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड है।

पृष्ठभूमि: आईडीबीआई बैंक की वित्तीय यात्रा

  • PIB के अनुसार आईडीबीआई बैंक लिमिटेड भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक है। खराब वित्तीय स्थिति के कारण बैंक को बार-बार पूंजी की आवश्यकता पड़ी, जो पहले भारत सरकार ने और बाद में LIC ने उपलब्ध कराई।
  • 5 मई 2017 को RBI ने बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) और उसे हुए घाटे को देखते हुए इसे त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (Prompt Corrective Action, PCA) ढांचे के अंतर्गत रखा और कई प्रतिबंध लगाए।
  • अगस्त 2018 में मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद LIC ने बैंक में 51% हिस्सेदारी अर्जित की। इसके परिणामस्वरूप RBI ने नियामकीय उद्देश्यों के लिए 21 जनवरी 2019 से आईडीबीआई बैंक को 'निजी क्षेत्र के बैंक' के रूप में वर्गीकृत किया।
  • वित्तीय स्थिति में सुधार को देखते हुए RBI ने 10 मार्च 2021 के अपने पत्र द्वारा कुछ शर्तों और सतत निगरानी के साथ ये प्रतिबंध हटा दिए।
  • 5 मई 2021 को CCEA ने बैंक में रणनीतिक विनिवेश तथा प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण को सैद्धांतिक मंजूरी दी। उस समय LIC बैंक की प्रमोटर (प्रबंधन नियंत्रण सहित) और भारत सरकार सह-प्रमोटर थी, तथा सरकार के पास 45.48% और LIC के पास 49.24% हिस्सेदारी थी।

मुख्य विवरण: सौदे के प्रमुख तथ्य

  • सफल बोलीदाता: मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. (मूल कंपनी: फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड)।
  • क्रय प्रतिफल (Purchase Consideration): ₹52,878.0806181 करोड़, अर्थात लगभग ₹52,878.08 करोड़।
  • बिक्री योग्य हिस्सेदारी: कुल 60.72%, जिसमें भारत सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी है। बिक्री से प्राप्त राशि दोनों के बीच इसी अनुपात में बांटी जाएगी।
  • विजेता बोली: ₹81 प्रति शेयर, जो ₹75.99 प्रति शेयर के बेंचमार्क मूल्य से ₹5.01 अधिक है।
  • अवशिष्ट हिस्सेदारी: भारत सरकार के पास 15% और LIC के पास 19%, यानी दोनों के पास संयुक्त रूप से 34%। दोनों अपने नामित निदेशकों को बोर्ड से हटाएंगे और सार्वजनिक शेयरधारक बन जाएंगे।
  • ऐतिहासिक महत्व: PIB के अनुसार प्रक्रिया पूर्ण होने पर यह देश के वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा।

बोली प्रक्रिया: दो-चरणीय प्रतिस्पर्धी व्यवस्था

CCEA के निर्णय को दो-चरणीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Two-stage Competitive Bidding Process) के माध्यम से लागू किया गया, जिसे एक बहु-स्तरीय सामूहिक निर्णय तंत्र का समर्थन प्राप्त था। इस तंत्र में तीन स्तर थे:

  • अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group, IMG): प्रारंभिक स्तर का समन्वय निकाय।
  • विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह (Core Group of Secretaries on Disinvestment, CGD): बोलियों का व्यापक मूल्यांकन करने वाला निकाय।
  • वैकल्पिक तंत्र (Alternative Mechanism, AM): कैबिनेट मंत्रियों का एक अधिकार-प्राप्त समूह, जिसकी सिफारिशों पर CCEA ने अंतिम निर्णय लिया।

प्रक्रिया की प्रमुख तिथियां और चरण इस प्रकार हैं:

  • 7 अक्टूबर 2022: प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (Preliminary Information Memorandum, PIM) जारी कर सभी इच्छुक पक्षों से रुचि की अभिव्यक्ति (Expression of Interest, EoI) आमंत्रित की गई।
  • पात्रता की शर्त: बोली चरण में केवल वही पक्ष भाग ले सकते थे जिन्हें RBI ने 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) पाया हो और जिन्हें गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी मिली हो। ऐसे पात्र पक्षों (Qualified Interested Parties) से तकनीकी और वित्तीय बोलियां मांगने के लिए प्रस्ताव अनुरोध (Request for Proposal) जारी किया गया।
  • प्रतिभागिता का क्रम: पांच पक्षों ने शुरू में रुचि दिखाई, चार पात्रता मानदंडों पर खरे उतरे और अंततः दो ने तकनीकी-वित्तीय बोलियां जमा कीं तथा 'योग्य बोलीदाता' (Qualified Bidders) बने।
  • 8 जनवरी 2026 (वित्त वर्ष 2025-26): प्रारंभिक बोलियां आमंत्रित की गईं। उस समय ₹94.42 प्रति शेयर का आरक्षित मूल्य (Reserve Price) तय किया गया था, लेकिन प्रारंभिक बोलियां इससे कम रहीं और स्वीकृत नहीं हुईं।
  • 18 मई 2026 (वित्त वर्ष 2026-27): लेनदेन का मूल्य यथासंभव बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य बोलीदाताओं से सीलबंद 'सर्वोत्तम प्रस्ताव' (Best Offer) बोलियां आमंत्रित की गईं।
  • 14 अक्टूबर 2026: CGD के मूल्यांकन और वैकल्पिक तंत्र की सिफारिशों पर विचार के बाद CCEA ने मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी।

मूल्यांकन पद्धति और बेंचमार्क मूल्य

PIB ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लेनदेन में बोली लगाने के लिए कोई पूर्व-निर्धारित मानक (A-priori Benchmark) नहीं होता। बोलीदाता अपना स्वतंत्र मूल्यांकन करके सीलबंद लिफाफे में गोपनीय रूप से बोली देते हैं। साथ ही उसी समय स्वतंत्र एजेंसियों को उद्यम का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए नियुक्त किया जाता है, और उस मूल्यांकन का उपयोग प्राप्त बोलियों की उचितता परखने के लिए तुलनात्मक आधार के रूप में किया जाता है।

  • शेयर बाजार मूल्य की अनदेखी क्यों: आईडीबीआई बैंक का शेयर सीमित कारोबार वाला (Narrowly Traded) है और मूल्यांकन अवधि में उसका बाजार भाव ₹61.01 से ₹118.38 के बीच ऊपर-नीचे होता रहा। इस अस्थिरता से मूल्यांकन उद्यम के आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) से भटक सकता था, इसलिए बाजार भाव को आधार नहीं बनाया गया।
  • प्रभावित बनाम अप्रभावित मूल्य: PIB के अनुसार 7 अक्टूबर 2022 को EoI जारी होने से पहले अंतिम कारोबारी दिन शेयर का 'अप्रभावित' (Unimpacted) मूल्य ₹42.40 था, जबकि 8 जनवरी 2026 को प्रारंभिक बोलियां आमंत्रित करने से पहले का 'प्रभावित' (Impacted) मूल्य ₹108.12 था। प्रारंभिक बोलियां असफल होने की जानकारी सामने आने पर बाजार मूल्य स्वयं गिरकर ₹75 प्रति शेयर की खोजी गई बोली कीमत से काफी नीचे आ गया। 18 मई 2026 को सर्वोत्तम प्रस्ताव आमंत्रित करने से पहले अंतिम कारोबारी दिन शेयर ₹70.38 पर था।
  • बाजार गुणक पद्धति (Market Multiple Method): यह सापेक्ष मूल्यांकन (Relative Valuation) की विधि है, जिसमें सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 31 मार्च 2026 के समापन खातों के आधार पर उद्यम का उचित बाजार मूल्य निकाला गया।
  • परिसंपत्ति मूल्यांकन पद्धति (Asset Valuation Method): इसमें मूर्त और अमूर्त दोनों परिसंपत्तियों, जिनमें भूमि और संपत्तियां भी शामिल हैं, तथा देनदारियों को ध्यान में रखकर आईडीबीआई बैंक के 31 मार्च 2026 के अंकेक्षित (Audited) खातों के आधार पर उचित शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य निकाला गया।
  • मूल्यांकनकर्ता: यह मूल्यांकन दो स्वतंत्र पेशेवर मूल्यांकन एजेंसियों ने किया। प्रक्रिया में निहित गोपनीयता की गारंटी के कारण इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
  • बेंचमार्क मूल्य: दोनों पद्धतियों से प्राप्त उचित मूल्यों का औसत, ₹75.99 प्रति शेयर, बोलियों के मूल्यांकन का बेंचमार्क बना। विजेता बोली ₹81 प्रति शेयर इस बेंचमार्क के साथ-साथ दोनों एजेंसियों के अलग-अलग आकलनों से भी ऊपर थी, इसलिए इसे उचित मानकर स्वीकृत किया गया।

शेयरधारिता: बिक्री से पहले और बाद

  • बिक्री से पहले: भारत सरकार 45.48%, LIC 49.24% और सार्वजनिक एवं अन्य शेयरधारक 5.28%।
  • बिक्री से बिकने वाली हिस्सेदारी: भारत सरकार से 30.48% और LIC से 30.24%, कुल 60.72%।
  • बिक्री के बाद: रणनीतिक खरीदार 60.72%, LIC 19%, भारत सरकार 15% और सार्वजनिक एवं अन्य शेयरधारक 5.28%।

आगे की प्रक्रिया और नियामकीय शर्तें

  • RBI के समक्ष प्रस्तुति: सफल बोलीदाता को EoI चरण में किए गए 'फिट एंड प्रॉपर' आकलन के अनुसार अपनी साख (Credentials) RBI के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी और वहां निर्धारित नियामकीय शर्तों के अनुपालन की रूपरेखा (Roadmap) जमा करनी होगी। सौदा इन्हीं शर्तों के पूरे होने के बाद पूर्ण माना जाएगा।
  • सरकार की अवशिष्ट 15% हिस्सेदारी: CCEA ने वैकल्पिक तंत्र को मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) के अनुसार इस 15% हिस्सेदारी की खुले बाजार में अल्पांश बिक्री (Minority Stake Sale) करने का अधिकार सौंपा है।
  • LIC की अवशिष्ट 19% हिस्सेदारी: LIC अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुसार और अपने नियामकों के निर्देशों का पालन करते हुए इस हिस्सेदारी का प्रबंधन करने के लिए स्वतंत्र होगी।

रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic & Policy Significance)

PIB द्वारा जारी FAQ के अनुसार इस निर्णय के प्रभाव इस प्रकार अपेक्षित हैं:

  • बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र पर प्रभाव: सरकार का आकलन है कि इसका बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर उल्लेखनीय सकारात्मक असर होगा। निजीकरण के बाद आईडीबीआई बैंक पहले के अनुभव के विपरीत सरकारी सहायता पर निर्भर हुए बिना धन जुटा सकेगा।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता: रणनीतिक खरीदार से निजी पूंजी, नई प्रौद्योगिकी और बेहतर प्रबंधन पद्धतियां लाने की अपेक्षा है, जिससे बैंक की कारोबारी क्षमता बढ़ेगी और वह ऋण तथा जमा, दोनों की वृद्धि में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
  • बाह्य क्षेत्र पर प्रभाव: यह वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा FDI होगा। इससे आर्थिक सुधारों के प्रति सकारात्मक धारणा बनेगी और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में देश का निवेश वातावरण बेहतर होगा।

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषणात्मक बिंदु

  • शब्दावली का अंतर: PIB ने इसे 'रणनीतिक पुनर्गठन' कहा है, क्योंकि बिक्री के बाद भी भारत सरकार (15%) और LIC (19%) संयुक्त रूप से 34% हिस्सेदारी रखेंगी। दूसरी ओर बहुमत हिस्सेदारी (60.72%) और उसके साथ बैंक का प्रबंधन नियंत्रण निजी खरीदार को जाएगा।
  • मूल्य-खोज (Price Discovery) की चुनौती: सीमित कारोबार वाले शेयर में बाजार भाव को आधार बनाना जोखिम भरा था। इसी कारण दो वैकल्पिक पद्धतियों से स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया, जो सार्वजनिक संपत्ति की बिक्री में पारदर्शिता का एक मॉडल है।
  • मूल्य अधिकतमीकरण: प्रारंभिक बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहने पर उन्हें अस्वीकार करके 'सर्वोत्तम प्रस्ताव' का नया दौर चलाया गया। यह सरकार के मूल्य अधिकतमीकरण के प्रयास को दर्शाता है।
  • विचारणीय चिंताएं: मूल्यांकन की पारदर्शिता, कर्मचारियों और ग्राहकों के हित तथा अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हित जैसे प्रश्न ऐसे सौदों में उठते रहे हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार कर्मचारी संगठनों ने सौदे की समीक्षा की मांग की है।
  • RBI की भूमिका: बैंकिंग क्षेत्र में स्वामित्व परिवर्तन के लिए RBI का 'फिट एंड प्रॉपर' आकलन अनिवार्य है, जो वित्तीय स्थिरता और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा का नियामकीय उपकरण है।

2. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का विस्तार और 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' के रूप में पुनर्नामकरण

(GS Paper II: सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएं एवं दिव्यांगजन)

संदर्भ (Context)

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए जारी रखने की स्वीकृति दी है। इसके लिए कुल परिव्यय ₹53,428 करोड़ निर्धारित किया गया है। निर्णय में योजना और उसकी उप-योजनाओं का पुनर्नामकरण, दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता, कवरेज और सहायता दर में संशोधन, तथा वृद्धजन पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना को मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।

पृष्ठभूमि: NSAP क्या है

  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) 15 अगस्त 1995 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को सहायता देना है, ताकि केंद्र सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति निदेशक तत्वों के प्रति अपना दायित्व निभा सके।
  • संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य को अपनी आर्थिक सामर्थ्य की सीमाओं के भीतर बेरोजगारी, बुढ़ापा, बीमारी और अशक्तता की दशा में लोक सहायता दिलाने के प्रभावी उपाय करने का निर्देश देता है।
  • कार्यक्रम के तहत 100% केंद्रीय सहायता दी जाती है। इसका आशय यह सुनिश्चित करना है कि देश में हर जगह लाभार्थियों को सहायता एक समान रूप से उपलब्ध हो।
  • कार्यक्रम का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाता है।

मुख्य विवरण: पुनर्नामकरण और बदलाव

कार्यक्रम और उप-योजनाओं के नए नाम:

  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का नया नाम 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' (PMSSY) होगा।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) अब 'प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना' के नाम से जानी जाएगी।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS) अब 'प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना' होगी।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना (IGNDPS) अब 'प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना' होगी।
  • राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS) अब 'प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना' होगी।

दिव्यांगजन पेंशन में संशोधन:

  • पात्रता मानदंड: बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disability) की शर्त पहले के 80% से घटाकर 40% कर दी गई है।
  • न्यूनतम आयु: अब दिव्यांगता पेंशन जन्म से ही मिल सकेगी। पहले यह योजना 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों तक सीमित थी।
  • सहायता राशि: 0 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लिए ₹375 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लिए ₹625 मासिक।
  • लाभार्थी: कार्यक्रम से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलने की अपेक्षा है।
  • क्रियान्वयन समयसीमा: पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दर में बदलाव से संबंधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएंगे।

जो योजनाएं यथावत रहेंगी: वृद्धजन पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।

वैधानिक आधार: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016

PIB के अनुसार दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) ने दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में बदलाव आवश्यक बना दिया और इसे 40% की 'बेंचमार्क दिव्यांगता' से जोड़ दिया। इसके अलावा अधिनियम यह भी अनिवार्य करता है कि दिव्यांगता से संबंधित सहायता अन्य श्रेणियों के लिए चलाई जा रही समान स्थिति वाली योजनाओं की तुलना में सदैव 25% अधिक हो।

रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic & Policy Significance)

  • समावेशन का विस्तार: पहले 80% दिव्यांगता की शर्त के कारण 40% से 79% दिव्यांगता वाले व्यक्ति इस पेंशन से बाहर थे। नई सीमा से वे पहली बार प्रत्यक्ष सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे। साथ ही 'जन्म से' पात्रता बच्चों को भी शामिल करती है।
  • संवैधानिक और वैधानिक अनुरूपता: यह कदम अनुच्छेद 41 के निर्देशक तत्व और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप है, जो संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय (UNCRPD) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को लागू करने वाला कानून है।
  • एकरूप सहायता: 100% केंद्रीय सहायता का मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों की वित्तीय क्षमता में अंतर के बावजूद लाभार्थी को देश में कहीं भी समान सहायता मिले।
  • नामकरण में परिवर्तन: पूर्व में 'इंदिरा गांधी' नाम से चल रही उप-योजनाएं अब 'प्रधानमंत्री' नाम से जानी जाएंगी। परीक्षा की दृष्टि से पुराने और नए, दोनों नाम याद रखना आवश्यक है।

3. भारत का कॉयर (नारियल रेशा) क्षेत्र: निर्यात में 305.70% वृद्धि और ग्रामीण आजीविका

(GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था, MSME, निर्यात एवं सतत विकास)

संदर्भ (Context)

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने भारत के कॉयर क्षेत्र की उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी जारी की है। इसमें बताया गया है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा कॉयर उत्पादक और निर्यातक है तथा यह क्षेत्र टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और समावेशी आर्थिक वृद्धि का वाहक बन रहा है। मंत्रालय ने इस क्षेत्र को 'विकसित भारत @2047' की यात्रा में महत्वपूर्ण बताया है।

पृष्ठभूमि: कॉयर क्या है

  • कॉयर (Coir) नारियल के बाहरी, कठोर छिलके (Husk) से निकाला जाने वाला प्राकृतिक रेशेदार पदार्थ है। इन रेशों को संसाधित करके व्यावसायिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला बनाई जाती है, जैसे मैट, गद्दे, रस्सियां, ब्रश और अन्य उपयोगी वस्तुएं।
  • कॉयर क्षेत्र भारत के सबसे पुराने पारंपरिक उद्योगों में से एक है और एक पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण क्षेत्र है, जो नारियल के छिलके के रेशों को निकालकर, संसाधित करके मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलता है।
  • कॉयर बोर्ड कॉयर उद्योग अधिनियम, 1953 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जो MSME मंत्रालय के अधीन इस उद्योग के संवर्धन और विकास का कार्य करता है।

मुख्य विवरण: क्षेत्र का आकार और निर्यात

  • वैश्विक स्थिति: भारत कॉयर और कॉयर उत्पादों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है तथा वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है।
  • उद्योग का आकार: भारतीय कॉयर उद्योग का कारोबार लगभग ₹16,000 करोड़ है और यह भारत के GDP में लगभग 1% का योगदान देता है।
  • निर्यात मूल्य: वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात ₹6,614.40 करोड़ रहा। प्रमुख निर्यात गंतव्य अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम हैं।
  • प्रमुख निर्यात उत्पाद: कॉयर पिथ (Coir Pith), कॉयर रेशा, कॉयर धागा (Yarn) और टफ्टेड मैट।
  • निर्यात वृद्धि: निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 के ₹1,630.33 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹6,614.40 करोड़ हो गया, यानी चार गुना से अधिक। यह 305.70% की वृद्धि है, जो पिछले 12 वर्षों की अवधि में दर्ज हुई है।
  • रोजगार: कॉयर क्षेत्र में 21,000 से अधिक इकाइयां हैं और यह प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 7 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें 80% ग्रामीण परिवारों की महिलाएं हैं।

कॉयर विकास योजना (Coir Vikas Yojana, CVY)

MSME मंत्रालय 'कॉयर विकास योजना' नामक केंद्रीय क्षेत्र की योजना चलाता है, जिसका उद्देश्य कॉयर क्षेत्र का सतत विकास और कॉयर कारीगरों तथा उद्योग को सहायता देना है। योजना के प्रमुख केंद्र बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कॉयर उद्योग के लिए नई प्रौद्योगिकी, मशीनों और उत्पादों का विकास।
  • कौशल प्रशिक्षण और प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कॉयर तथा कॉयर उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा।
  • प्रचार गतिविधियों और व्यापार मेलों व प्रदर्शनियों में भागीदारी के माध्यम से जागरूकता सृजन।
  • बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता।
  • कॉयर निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी को सुगम बनाना।
  • कॉयर क्षेत्र के आंकड़ों का संकलन और प्रकाशन।

पिछले 12 वर्षों (2014-15 से) की प्रमुख उपलब्धियां

  • उद्यम (Udyam) पंजीकरण पोर्टल पर 21,000 से अधिक कॉयर इकाइयां पंजीकृत हैं, जो 2.3 लाख व्यक्तियों को रोजगार देती हैं और इस प्रकार औपचारिक MSME नीति पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन चुकी हैं।
  • विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 68,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें 80% से अधिक महिलाएं हैं।
  • कॉयर क्षेत्र में 150 से अधिक नवाचारी मशीनें, प्रौद्योगिकियां और मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित हुए।
  • 1,000 से अधिक निर्यातकों की विदेशी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुगम बनाई गई और निर्यात बाजार संवर्धन (Export Market Promotion) के तहत 850 से अधिक उद्यमियों को ₹20 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई।
  • देशभर में 1,400 से अधिक प्रचार कार्यक्रम आयोजित हुए और 950 से अधिक प्रदर्शनियों में भागीदारी की गई।

उद्यमिता की सफलता कहानियां

PIB की विज्ञप्ति में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और कॉयर बोर्ड के मार्गदर्शन से खड़ी हुई इकाइयों के उदाहरण दिए गए हैं:

  • महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में PMEGP की सहायता से कॉयर इकाई स्थापित हुई, जो कॉयर रस्सियां, तकिए और दरवाजे की मैट बनाकर छह लोगों को पूर्णकालिक रोजगार देती है।
  • केरल के कोझिकोड में कॉयर बोर्ड और केंद्रीय कॉयर अनुसंधान संस्थान (CCRI), कलावूर के प्रशिक्षण से एक उद्यम ने कॉयर पिथ जैव-उर्वरक (Bio-fertiliser) का कारोबार खड़ा किया, जिसकी एक वर्ष में 20 टन से अधिक बिक्री हुई।
  • आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में एक महिला उद्यमी की इकाई का वार्षिक कारोबार लगभग ₹35 लाख है और उसने छह महिलाओं को रोजगार दिया है। उन्होंने स्वयं भी लगभग 120 महिलाओं को प्रशिक्षित किया।
  • केरल के अलप्पुझा में PMEGP के तहत शुरू की गई कॉयर कताई इकाई ने मुख्यतः आसपास के गांवों की महिलाओं सहित 8 से 10 स्थानीय श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया।

रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic & Policy Significance)

  • सर्कुलर इकोनॉमी: नारियल के छिलके जैसे कृषि अपशिष्ट को मैट, रस्सी, कॉयर पिथ और जैव-उर्वरक जैसे उपयोगी उत्पादों में बदलना सर्कुलर इकोनॉमी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • महिला सशक्तीकरण: 80% महिला कार्यबल और प्रशिक्षण में 80% से अधिक महिला भागीदारी इस क्षेत्र को ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाती है।
  • औपचारिकीकरण: उद्यम पोर्टल पर 21,000 से अधिक इकाइयों का पंजीकरण पारंपरिक क्षेत्र को औपचारिक MSME ढांचे में लाता है, जिससे ऋण, योजनाओं और बाजार तक उनकी पहुंच बेहतर होती है।
  • निर्यात और विदेशी मुद्रा: चार गुना से अधिक निर्यात वृद्धि कम पूंजी वाले, श्रम-प्रधान उद्योग की निर्यात क्षमता दर्शाती है। जियो-टेक्सटाइल जैसे कॉयर उत्पाद मृदा अपरदन रोकने जैसे हरित उपयोगों में भी काम आते हैं।

निष्कर्ष एवं UPSC के लिए मुख्य बिंदु

आज के तीनों निर्णय भारत की आर्थिक और सामाजिक नीति के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं। आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक पुनर्गठन सरकारी स्वामित्व वाले वित्तीय संस्थानों में निजी पूंजी और FDI के प्रवेश तथा पारदर्शी मूल्य-खोज की मिसाल है। NSAP का विस्तार और बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा का 40% होना सामाजिक सुरक्षा के समावेशी विस्तार को दर्शाता है। कॉयर क्षेत्र की उपलब्धियां पारंपरिक ग्रामीण उद्योग को निर्यात और आजीविका का इंजन बनाने की संभावनाएं उजागर करती हैं।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु (Prelims Focus)

  • आईडीबीआई बैंक: CCEA की मंजूरी 14 अक्टूबर 2026 को; 60.72% हिस्सेदारी (GoI 30.48% और LIC 30.24%); रणनीतिक खरीदार मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. (मूल कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स); कुल मूल्य ₹52,878.08 करोड़; बोली ₹81 प्रति शेयर बनाम बेंचमार्क ₹75.99; अवशिष्ट हिस्सेदारी GoI 15% और LIC 19%; मूल्यांकन पद्धतियां: बाजार गुणक और परिसंपत्ति मूल्यांकन।
  • बोली तंत्र: IMG, CGD और वैकल्पिक तंत्र (AM); PIM की तिथि 7 अक्टूबर 2022; 5 EoI, 4 पात्र और 2 अंतिम बोलीदाता।
  • PMSSY (पूर्व NSAP): परिव्यय ₹53,428 करोड़; अवधि 2026-27 से 2030-31; दिव्यांगता पेंशन में बेंचमार्क दिव्यांगता 80% से 40%; आयु सीमा जन्म से; राशि ₹375 (0 से 79 वर्ष) और ₹625 (80 वर्ष और अधिक); अनुच्छेद 41; 100% केंद्रीय सहायता।
  • कॉयर क्षेत्र: भारत विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक (लगभग दो-तिहाई उत्पादन); 2025-26 में निर्यात ₹6,614.40 करोड़ (2014-15 के ₹1,630.33 करोड़ से 305.70% अधिक); कॉयर विकास योजना (MSME मंत्रालय); 21,000 से अधिक इकाइयां उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत।

मुख्य परीक्षा हेतु (Mains Focus)

  • GS Paper III (अर्थव्यवस्था): सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में रणनीतिक विनिवेश बनाम पुनर्गठन; सीमित कारोबार वाले शेयरों में मूल्य-खोज; सरकार के राजकोषीय लक्ष्य और सार्वजनिक हित का संतुलन; बैंकिंग में FDI के लाभ और जोखिम; नियामक (RBI) की भूमिका।
  • GS Paper II (सामाजिक न्याय): दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और कल्याणकारी योजनाओं के बीच तालमेल; सार्वभौमिक पात्रता बनाम लक्षित सहायता; 100% केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं का संघवाद पर प्रभाव।
  • GS Paper III (MSME और सतत विकास): कॉयर जैसे पारंपरिक उद्योगों का औपचारिकीकरण, सर्कुलर इकोनॉमी, ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक समावेशन और निर्यात संवर्धन की नीतियां।

UPSC CSE अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

प्रश्न 1. आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. बैंक की कुल 60.72% इक्विटी हिस्सेदारी की बिक्री में भारत सरकार की हिस्सेदारी 30.48% तथा LIC की हिस्सेदारी 30.24% है।
2. बेंचमार्क मूल्य (₹75.99 प्रति शेयर) का निर्धारण बैंक के शेयर के औसत बाजार भाव के आधार पर किया गया है।
3. भारत सरकार की अवशिष्ट 15% हिस्सेदारी की खुले बाजार में बिक्री के लिए वैकल्पिक तंत्र (Alternative Mechanism) को अधिकृत किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 1 और 3
  • C. केवल 2 और 3
  • D. 1, 2 और 3

उत्तर: B (केवल 1 और 3)

कथन 1 सही है: 60.72% की कुल बिक्री में GoI की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है।

कथन 2 गलत है: शेयर बाजार भाव को अस्थिरता के कारण नजरअंदाज किया गया। ₹75.99 प्रति शेयर का बेंचमार्क दो स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा बाजार गुणक पद्धति और परिसंपत्ति मूल्यांकन पद्धति से निकाले गए उचित मूल्यों का औसत है।

कथन 3 सही है: CCEA ने वैकल्पिक तंत्र को मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सरकार की अवशिष्ट 15% हिस्सेदारी की खुले बाजार में अल्पांश बिक्री का अधिकार सौंपा है।

प्रश्न 2. हाल ही में स्वीकृत 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' (पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इसके अंतर्गत दिव्यांगता पेंशन के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी गई है।
2. दिव्यांगता पेंशन के लिए न्यूनतम आयु मानदंड अब जन्म से लागू होगा।
3. इस कार्यक्रम का वित्तपोषण केंद्र और राज्य सरकारें 60:40 के अनुपात में करती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3

उत्तर: A (केवल 1 और 2)

कथन 1 और 2 सही हैं: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 40% की गई है और न्यूनतम आयु मानदंड जन्म से कर दिया गया है।

कथन 3 गलत है: कार्यक्रम में 100% केंद्रीय सहायता दी जाती है, ताकि देश में हर जगह लाभार्थियों को सहायता एक समान रूप से उपलब्ध हो। इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 3. भारत के कॉयर क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारत विश्व का सबसे बड़ा कॉयर उत्पादक और निर्यातक है तथा वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है।
2. 'कॉयर विकास योजना' कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
3. वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों के निर्यात मूल्य में लगभग 305% की वृद्धि हुई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3

उत्तर: C (केवल 1 और 3)

कथन 1 और 3 सही हैं: भारत वैश्विक कॉयर उत्पादन का लगभग दो-तिहाई उत्पादित करता है और निर्यात ₹1,630.33 करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹6,614.40 करोड़ (2025-26) हो गया है, जो 305.70% की वृद्धि है।

कथन 2 गलत है: कॉयर विकास योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय द्वारा संचालित केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।

त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य (Quick Revision Facts)

  • CCEA ने 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक की 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी।
  • बिकने वाली हिस्सेदारी: भारत सरकार 30.48% और LIC 30.24%।
  • रणनीतिक खरीदार: मेसर्स 10955230 कनाडा इंक., मूल कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड।
  • क्रय प्रतिफल: ₹52,878.0806181 करोड़ (लगभग ₹52,878.08 करोड़)।
  • विजेता बोली ₹81 प्रति शेयर; बेंचमार्क मूल्य ₹75.99 प्रति शेयर (दो स्वतंत्र मूल्यांकनों का औसत)।
  • मूल्यांकन पद्धतियां: बाजार गुणक पद्धति और परिसंपत्ति मूल्यांकन पद्धति (31 मार्च 2026 के खातों पर आधारित)।
  • आईडीबीआई शेयर की मूल्यांकन अवधि की ऊंच-नीच सीमा: ₹61.01 से ₹118.38; बाजार भाव को नजरअंदाज किया गया।
  • अप्रभावित मूल्य (EoI से पहले) ₹42.40; प्रभावित मूल्य (8 जनवरी 2026 से पहले) ₹108.12; प्रारंभिक बोलियों के समय आरक्षित मूल्य ₹94.42।
  • PIM जारी: 7 अक्टूबर 2022; 5 EoI, 4 पात्र, 2 योग्य बोलीदाता।
  • बोली तंत्र: अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG), विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह (CGD) और वैकल्पिक तंत्र (AM)।
  • सौदे के बाद GoI की हिस्सेदारी 15% और LIC की 19% रहेगी; दोनों बोर्ड से नामित निदेशक हटाएंगे।
  • प्रक्रिया पूर्ण होने पर यह वित्तीय क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा FDI होगा।
  • RBI ने 5 मई 2017 को आईडीबीआई बैंक को PCA ढांचे में रखा और 10 मार्च 2021 को प्रतिबंध हटाए।
  • NSAP का नया नाम 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना'; परिव्यय ₹53,428 करोड़; अवधि 2026-27 से 2030-31।
  • उप-योजनाओं के नए नाम: प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना, प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना और प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना।
  • दिव्यांगजन पेंशन: बेंचमार्क दिव्यांगता 80% से 40%; न्यूनतम आयु जन्म से; ₹375 (0 से 79 वर्ष) और ₹625 (80 वर्ष और अधिक)।
  • NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई; अनुच्छेद 41; 100% केंद्रीय सहायता; लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थी।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016: बेंचमार्क दिव्यांगता 40%; दिव्यांगता संबंधी सहायता समान स्थिति वाली योजनाओं से 25% अधिक।
  • कॉयर निर्यात: ₹1,630.33 करोड़ (2014-15) से ₹6,614.40 करोड़ (2025-26), वृद्धि 305.70%।
  • कॉयर उद्योग का कारोबार लगभग ₹16,000 करोड़, GDP में लगभग 1% योगदान।
  • कॉयर क्षेत्र में 7 लाख से अधिक श्रमिक, 80% ग्रामीण महिलाएं; 21,000 से अधिक इकाइयां उद्यम पोर्टल पर, 2.3 लाख को रोजगार।
  • कॉयर के प्रमुख निर्यात गंतव्य: अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम।
  • कॉयर विकास योजना: MSME मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना; 68,000 से अधिक प्रशिक्षित, 80% से अधिक महिलाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक पुनर्गठन क्या है?

आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक पुनर्गठन वह प्रक्रिया है जिसमें भारत सरकार और LIC बैंक की कुल 60.72% इक्विटी हिस्सेदारी एक रणनीतिक खरीदार को बेच रहे हैं। इसमें भारत सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। CCEA ने 14 अक्टूबर 2026 को इसके लिए मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. को स्वीकृति दी। बिक्री के बाद भी भारत सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी रहेगी, लेकिन बैंक का प्रबंधन नियंत्रण खरीदार के हाथ में जाएगा।

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स क्या है?

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड कनाडा की एक वित्तीय होल्डिंग कंपनी है, जिसका मुख्यालय टोरंटो में है और जो मुख्य रूप से बीमा, पुनर्बीमा तथा निवेश प्रबंधन के क्षेत्र में काम करती है। आईडीबीआई बैंक के सौदे में रणनीतिक खरीदार मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. है, जिसकी मूल कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड है।

'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) आकलन क्या है?

'फिट एंड प्रॉपर' आकलन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वह जांच है जिसमें यह परखा जाता है कि बैंक में बड़ी हिस्सेदारी लेने वाले पक्ष की साख, पृष्ठभूमि और वित्तीय स्थिति इस दायित्व के योग्य है या नहीं। आईडीबीआई बैंक की बिक्री में केवल वही पक्ष बोली चरण तक पहुंच सके जिन्हें EoI चरण में RBI ने 'फिट एंड प्रॉपर' पाया और जिन्हें गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी मिली। अब सफल बोलीदाता को RBI के समक्ष अपनी साख प्रस्तुत करनी होगी।

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी किस मूल्य पर बिकी और बेंचमार्क मूल्य कितना था?

60.72% हिस्सेदारी के लिए कुल क्रय प्रतिफल ₹52,878.0806181 करोड़ तय हुआ, जो ₹81 प्रति शेयर की विजेता बोली पर आधारित है। दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों के आकलनों का औसत ₹75.99 प्रति शेयर बेंचमार्क मूल्य बना। विजेता बोली इस बेंचमार्क और दोनों एजेंसियों के अलग-अलग आकलनों से ऊपर थी, इसलिए इसे उचित माना गया।

बिक्री के बाद सरकार और LIC के पास आईडीबीआई बैंक की कितनी हिस्सेदारी रहेगी?

बिक्री के बाद भारत सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी रहेगी, यानी संयुक्त रूप से 34%। दोनों बोर्ड से अपने नामित निदेशक हटाकर सार्वजनिक शेयरधारक बन जाएंगे। सरकार की 15% हिस्सेदारी की खुले बाजार में बिक्री के लिए CCEA ने वैकल्पिक तंत्र को अधिकृत किया है, जबकि LIC अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और नियामकों के निर्देशों के अनुसार अपनी हिस्सेदारी का प्रबंधन करेगी।

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना (PMSSY) क्या है?

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) का नया नाम है। NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी और यह गरीब परिवारों को वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगता पेंशन और पारिवारिक लाभ के रूप में सहायता देता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे ₹53,428 करोड़ के परिव्यय के साथ 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम में 100% केंद्रीय सहायता दी जाती है।

बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disability) क्या है और पेंशन के लिए अब क्या सीमा है?

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार बेंचमार्क दिव्यांगता वह स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति में निर्दिष्ट दिव्यांगता कम से कम 40% हो। पहले दिव्यांगता पेंशन के लिए 80% दिव्यांगता की शर्त थी, जिसे अब घटाकर 40% कर दिया गया है। साथ ही पेंशन के लिए न्यूनतम आयु का मानदंड अब जन्म से लागू होगा।

कॉयर (Coir) क्या है और भारत में इसका क्या महत्व है?

कॉयर नारियल के बाहरी कठोर छिलके से निकाला जाने वाला प्राकृतिक रेशा है, जिससे मैट, गद्दे, रस्सियां, ब्रश और कॉयर पिथ जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। भारत कॉयर और कॉयर उत्पादों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है तथा वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। यह क्षेत्र 7 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें 80% ग्रामीण महिलाएं हैं।

भारत का कॉयर निर्यात कितना है और प्रमुख खरीदार देश कौन-से हैं?

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात ₹6,614.40 करोड़ रहा, जो 2014-15 के ₹1,630.33 करोड़ की तुलना में 305.70% अधिक है। इसके प्रमुख निर्यात गंतव्य अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम हैं। कॉयर पिथ, रेशा, धागा और टफ्टेड मैट प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं।

कॉयर विकास योजना (CVY) क्या है?

कॉयर विकास योजना MSME मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य कॉयर क्षेत्र का सतत विकास और कॉयर कारीगरों तथा उद्योग को सहायता देना है। यह योजना नई प्रौद्योगिकी और उत्पादों के विकास, कौशल प्रशिक्षण, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री संवर्धन, प्रदर्शनियों में भागीदारी और क्षेत्र के आंकड़ों के संकलन पर केंद्रित है।

संदर्भ (References)

आईडीबीआई बैंक लिमिटेड का रणनीतिक पुनर्गठन (वित्त मंत्रालय)

  1. PIB अंग्रेज़ी (PRID 2323468): Government Approves Strategic Restructuring of IDBI Bank Ltd.

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम / प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना (ग्रामीण विकास मंत्रालय)

  1. PIB अंग्रेज़ी (PRID 2323264): Cabinet approves continuation of the National Social Assistance Programme for five years from 2026-27 to 2030-31

भारत का कॉयर (नारियल रेशा) क्षेत्र (MSME मंत्रालय)

  1. PIB अंग्रेज़ी (PRID 2323051): India's Coir Sector: Creating Livelihoods, Promoting Entrepreneurship and Driving Sustainable Growth