विषय सूची (Table of Contents)
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भाग 1: चेन्नई जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा और सीवरेज परियोजना (भारत-एडीबी $230 मिलियन ऋण समझौता)
- GS Paper II (महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान): एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की भूमिका, संरचना और कार्यप्रणाली।
- GS Paper III (बुनियादी ढांचा और आपदा प्रबंधन): शहरी बुनियादी ढांचा (जल और स्वच्छता), जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा नियंत्रण।
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भाग 2: 'मल्हार 2026' का भव्य उद्घाटन (भारतीय शास्त्रीय संगीत विरासत का संवर्धन)
- GS Paper I (भारतीय संस्कृति): प्राचीन काल से आधुनिक काल तक कला रूपों (शास्त्रीय संगीत एवं राग परंपरा) के मुख्य पहलू।
- GS Paper II (सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति): वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक संबंध।
भाग 1: चेन्नई जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा और सीवरेज परियोजना
(भारत-एडीबी $230 मिलियन ऋण समझौता)
1. संदर्भ (Context)
भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चेन्नई की जल आपूर्ति और स्वच्छता अवसंरचना के व्यापक आधुनिकीकरण एवं विस्तार के लिए $230 मिलियन के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य चेन्नई महानगर की जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य व जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना और शहर में अधिक कुशल, टिकाऊ तथा आर्थिक रूप से सुदृढ़ शहरी जल प्रणाली के विकास को बढ़ावा देना है।
इस ऋण समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) में संयुक्त सचिव (एडीबी और जापान) श्री बलदेव पुरुषार्थ के मार्गदर्शन में बातचीत संपन्न हुई। तत्पश्चात, आर्थिक मामलों के विभाग के उप सचिव श्री सौरभ सिंह और एडीबी की ओर से भारत स्थित रेजिडेंट मिशन की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका ने ऋण दस्तावेजों पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
2. मुख्य विवरण (Highlights)
अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण
परियोजना के अंतर्गत चेन्नई में 170 किलोमीटर से अधिक लंबी जल आपूर्ति और सीवर पाइपों का निर्माण किया जाएगा।
पंपिंग स्टेशनों का उन्नयन
शहरी क्षेत्रों में सीवरेज और जलापूर्ति प्रबंधन के लिए 7 जल पंपिंग स्टेशनों और 38 सीवर पंपिंग स्टेशनों का आधुनिकीकरण व उन्नयन किया जाएगा।
देश का पहला 'रिंग-मेन' समाधान
चेन्नई व्यापक रिंग-मेन समाधान (Ring-Main Solution) लागू करने वाला भारत का पहला शहर बन जाएगा। यह एक बंद-लूप प्लंबिंग प्रणाली (Closed-loop plumbing system) है, जिसे संतुलित जल दाब बनाए रखने और सेवा क्षेत्रों में अत्यंत कुशलतापूर्वक जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इससे शहरी जल प्रणालियों की विश्वसनीयता, समानता और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation)
एडीबी की सहायता से जल एवं स्वच्छता सेवाओं के डिजिटल आधुनिकीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग (सीधी निगरानी), डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता और बेहतर ग्राहक प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल है।
श्रमिक सुरक्षा और रोबोटिक तकनीक
सीवर लाइनों के पारंपरिक और खतरनाक मैनुअल निरीक्षण की प्रथा को समाप्त करने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे अवरोधों (Blockages) की पहचान अधिक तेज व सुरक्षित होगी तथा सफाई कर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, ग्रेटर चेन्नई के कम से कम दो क्षेत्रों में वितरण नेटवर्क को भविष्य के निवेशों के लिए अधिक सक्षम और तैयार बनाया जाएगा।
3. महत्व (Strategic Significance)
यह परियोजना संवेदनशील तटीय महानगरों के लिए "जलवायु-अनुकूलन" (Climate Resilience) की दिशा में एक आदर्श विजन प्रस्तुत करती है। बंद-लूप प्रणाली के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति शहरी सहनशीलता बढ़ाना भारत के भावी नीतिगत शहरी विकास लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
4. आर्थिक और संस्थागत पक्ष (Economic and Institutional Aspects)
प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं से संरेखण
एडीबी का यह नवीनतम निवेश शहर में सुरक्षित और न्यायसंगत जल और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं के विस्तार के लिए पूर्व की परियोजनाओं पर आधारित है, जो भारत सरकार के प्रमुख शहरी विकास पहलों जैसे अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 (AMRUT 2.0) और अर्बन चैलेंज फंड के पूर्णतः अनुकूल है।
परिसंपत्ति प्रबंधन में सुधार
परियोजना के तहत प्रदर्शन-आधारित अनुबंधों (Performance-based contracts) के माध्यम से जल उपयोगिता परिसंपत्तियों (Water Utility Assets) और संचालन प्रबंधन को संस्थागत रूप से सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे यह जल प्रणाली दीर्घकालिक रूप से वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सकेगी।
भाग 2: 'मल्हार 2026' का भव्य उद्घाटन
(भारतीय शास्त्रीय संगीत विरासत का संवर्धन)
1. संदर्भ (Context)
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को अक्षुण्ण रखने तथा देश की युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से नई दिल्ली में 'मल्हार 2026' का भव्य शुभारंभ किया गया है। इस युवा-केंद्रित तथा मानसून-थीम आधारित सांस्कृतिक उत्सव का उद्घाटन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा किया गया।
'अंतर हृदय कनेक्ट' (Antar Hriday Connect) द्वारा आयोजित यह समारोह केवल कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक प्रभाव (सॉफ्ट पावर) को सुदृढ़ करने की दिशा में एक गंभीर और रणनीतिक प्रयास है।
2. मुख्य विवरण (Highlights)
आयोजक एवं मूल अवधारणा
यह उत्सव 'अंतर हृदय कनेक्ट' द्वारा प्रस्तुत एक अनूठा आयोजन है। 'मल्हार' राग परिवार पारंपरिक रूप से वर्षा ऋतु (मानसून) से संबद्ध है, जो प्रकृति और मानव चेतना के नवीनीकरण, रचनात्मक कल्पना को जागृत करने तथा जीवन में नई आशा का संचार करने का प्रतीक है।
सांस्कृतिक कूटनीति पुरस्कार
उद्घाटन समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने नेपाल के श्री सौरव शर्मा को प्रतिष्ठित 'अंतर हृदय सांस्कृतिक कूटनीति पुरस्कार' (Antar Hriday Cultural Diplomacy Award) प्रदान किया।
प्रतिष्ठित कलाकारों का सम्मान
भारतीय कला और संस्कृति में अमूल्य योगदान देने वाले देश के दो दिग्गज कलाकारों को उनके उत्कृष्ट सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया:
- मूर्धन्य गायक पंडित उल्हास कशालकर।
- सुप्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित राजेंद्र गंगानी।
लोकोपकारी दृष्टिकोण — निःशुल्क संगीतमय सभाएं
युवाओं को भारतीय शास्त्रीय विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कराने और उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए इस उत्सव के तहत निःशुल्क शास्त्रीय संगीत समारोहों का आयोजन किया जा रहा है।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस राष्ट्रीय समारोह में निम्नलिखित विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे:
- राज्यसभा सांसद और 'अंतर हृदय' के मुख्य संरक्षक श्री हर्ष वर्धन श्रृंगला।
- आईटीसी (ITC) के कॉर्पोरेट मामलों के अध्यक्ष श्री अनिल राजपूत।
- गैलेक्सी और सवास्दी ग्रुप के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार।
- अनेक प्रबुद्ध राजनयिक, कलाकार और विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति।
3. महत्व (Strategic Significance)
सॉफ्ट पावर के रूप में सांस्कृतिक कूटनीति
उपराष्ट्रपति ने शास्त्रीय संगीत को भारत की संप्रभु सांस्कृतिक संपदा और सबसे प्रभावी 'सॉफ्ट पावर' (सांस्कृतिक प्रभाव) के रूप में रेखांकित किया, जो भौगोलिक सीमाओं और भाषाई बाधाओं को लांघकर वैश्विक स्तर पर मित्रता, आपसी समझ और सद्भावना को प्रगाढ़ बनाता है।
सभ्यतागत विरासत के युवा राजदूत
नई पीढ़ी का आह्वान किया गया है कि वे भारत की प्राचीन सभ्यतागत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक (Custodians) और वैश्विक राजदूत (Ambassadors) बनें, ताकि हमारी शास्त्रीय परंपराएं विश्व के कोने-कोने तक पहुंच सकें।
एकता का जीवंत माध्यम
भारत की व्यापक विविधता को एक सूत्र में पिरोते हुए उपराष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि विभिन्न क्षेत्रीय शैलियों के बावजूद संगीत हमारी राष्ट्रीय अखंडता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
4. आर्थिक और संस्थागत पक्ष (Economic and Institutional Aspects)
संस्थागत सहयोग (Public-Private-Social Collaboration)
शास्त्रीय कलाओं के दीर्घकालिक अस्तित्व और उनके सतत विकास के लिए निम्नलिखित के बीच त्रिपक्षीय संस्थागत सहयोग की महत्ता को प्रदर्शित किया गया है:
- गैर-लाभकारी संस्थाएं — जैसे अंतर हृदय कनेक्ट।
- निजी क्षेत्र — जैसे आईटीसी और गैलेक्सी व सवास्दी समूह।
- नीति-निर्माता — सरकार और वरिष्ठ राजनयिक।
कला का लोकतंत्रीकरण
शास्त्रीय कॉन्सर्ट्स को निःशुल्क और युवाओं के लिए सुलभ बनाकर कला के क्षेत्र में व्यापक भागीदारी और समावेशिता सुनिश्चित की जा रही है।
Aarambh Times | PIB Analysis | UPSC Current Affairs
स्रोत: PIB (Press Information Bureau), आर्थिक मामलों का विभाग (DEA), एशियाई विकास बैंक (ADB), PIB India