PIB Analysis 03 August 2026 | UPSC Current Affairs | Aarambh Times

03 अगस्त 2026 | PIB Analysis UPSC Current Affairs
नमस्कार। आज के PIB Analysis में हम सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना 'अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष' (Venture Capital Fund for Scheduled Castes - VCF-SC) को समझेंगे, और इसके तहत सामने आए दो प्रेरणादायक सफलता उदाहरणों — बेंगलुरु स्थित त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज (डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स) तथा विशाखापत्तनम स्थित स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज (रबर रीसाइक्लिंग) — के माध्यम से इस योजना के व्यावहारिक प्रभाव का विश्लेषण करेंगे।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC): योजना की पृष्ठभूमि, पात्रता व वित्तीय ढांचा तथा त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज (डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स) एवं स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज (रबर रीसाइक्लिंग) की सफलता का विश्लेषण (UPSC GS Paper II: शासन व्यवस्था और सामाजिक न्याय; UPSC GS Paper III: अर्थव्यवस्था, उद्यमिता और समावेशी विकास)।

1. अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC): योजना और सफलता की कहानियां

संदर्भ (Context)

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 02 अगस्त 2026 को 'अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष' (Venture Capital Fund for Scheduled Castes - VCF-SC) के तहत दो प्रेरणादायक सफलता उदाहरण साझा किए, जो इस योजना के व्यावहारिक प्रभाव को दर्शाते हैं। इनमें बेंगलुरु स्थित त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एवं EDGE AI विनिर्माण) तथा विशाखापत्तनम स्थित स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (सतत रबर रीसाइक्लिंग) शामिल हैं।

VCF-SC योजना की शुरुआत तत्कालीन वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2014-15 के बजट भाषण (फरवरी 2014) में की गई घोषणा से हुई थी, जिसके तहत अनुसूचित जाति समुदाय में उद्यमिता को बढ़ावा देने और उन्हें रियायती वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से IFCI के माध्यम से इस कोष की स्थापना की गई, जिसके लिए प्रारंभिक रूप से ₹200 करोड़ की पूंजी आवंटित की गई थी। यह योजना 'सामाजिक क्षेत्र पहल' (Social Sector Initiatives) के अंतर्गत रखी गई थी। यह कोष नवाचार और विकासोन्मुखी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है, तथा इसका संचालन IFCI वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है।

मुख्य विवरण (Highlights)

वित्तीय सहायता का आकार: योजना के तहत न्यूनतम ₹10,00,000 से अधिकतम ₹15,00,00,000 तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है। कुल सहायता राशि कंपनी की मौजूदा नेटवर्थ के दोगुने से अधिक नहीं हो सकती।

वित्तपोषण के स्वरूप: सहायता दो तरीकों से दी जाती है — ऋण/परिवर्तनीय लिखत (Debt/Convertible Instruments) पर 4% वार्षिक ब्याज दर (अनुसूचित जाति की महिला/दिव्यांग उद्यमियों के लिए 3.75% वार्षिक), अथवा इक्विटी निवेश, जिसमें निकास (Exit) के समय 8% वार्षिक रिटर्न या वैल्यूएशन, जो भी अधिक हो, दिया जाता है।

अवधि (Tenure): वित्तीय सहायता की अधिकतम अवधि 10 वर्ष (डिबेंचर के मामले में मोरेटोरियम अवधि सहित) है। इक्विटी के मामले में निकास का निर्णय केस-दर-केस आधार पर लिया जाता है।

कार्यशील पूंजी सहायता (Working Capital Gap Funding): कुल वित्तीय सहायता के अधिकतम 20% हिस्से को अगले 10 वर्षों के लिए कार्यशील पूंजी अंतर हेतु निर्धारित किया जा सकता है।

टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (TBI) फंडिंग: TBI द्वारा चयनित नवाचारी विचारों को संचालन एवं रखरखाव लागत हेतु प्रति वर्ष औसतन ₹10,00,000 तक की सीमा में, अधिकतम 3 वर्षों के लिए फंडिंग दी जा सकती है।

मोरेटोरियम अवधि: डिबेंचर के मामले में मूलधन की अदायगी हेतु मोरेटोरियम अवधि केस-दर-केस आधार पर होती है, परंतु निवेश की तिथि से 36 महीनों से अधिक नहीं हो सकती।

डिस्बर्समेंट (संवितरण): ₹5,00,00,000 तक की सहायता के लिए परियोजना लागत का अधिकतम 75% निवेश के रूप में दिया जाता है, शेष 25% प्रमोटरों या सरकारी सब्सिडी से आना चाहिए। ₹5,00,00,000 से अधिक की सहायता के लिए अधिकतम 50% परियोजना लागत निवेश के रूप में दी जाती है। संवितरण किश्तों (Tranches) में तथा पूर्ण कानूनी दस्तावेज़ीकरण के बाद किया जाता है।

पात्रता (Eligibility):

₹50 लाख तक की सहायता हेतु: कंपनी में विगत 6 माह से अनुसूचित जाति उद्यमियों की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी एवं प्रबंधन नियंत्रण आवश्यक।

₹50 लाख से अधिक की सहायता हेतु: यही शर्त विगत 12 माह की अवधि के लिए लागू है।

प्रौद्योगिकी-उन्मुख नवाचारी परियोजनाओं हेतु: IIT/NIT/प्रमुख बिजनेस स्कूल/विश्वविद्यालयों के इन्क्यूबेशन सेंटरों के समर्थन वाली, या पेटेंट/कॉपीराइट धारक, या भारत सरकार के विभागों द्वारा स्वीकृत परियोजनाएं पात्र हैं।

अपवर्जन (Exclusions): अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के उद्यमी इस कोष के तहत पात्र नहीं हैं। प्रोप्राइटरी फर्म, पार्टनरशिप फर्म, OPC या LLP जैसी संस्थाएं प्रत्यक्ष वित्तपोषण हेतु पात्र नहीं हैं।

रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance) — दो केस स्टडीज़ के माध्यम से

केस स्टडी 1: त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स)

बेंगलुरु स्थित इस कंपनी की स्थापना श्री सुनील कुमार सिरिगिरी ने की थी। कंपनी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), रडार सिस्टम और EDGE AI डिवाइस के उत्पादन हेतु अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन एवं विनिर्माण सुविधा संचालित करती है, तथा L&T, BEL, DRDO प्रयोगशालाओं, ECIL, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स लिमिटेड, कैपजेमिनी, विप्रो और साइप्रस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को सेवाएं प्रदान करती है। परियोजना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए VCF-SC ने 2022 में इक्विटी एवं वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से ₹4.47 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे कंपनी ने KIADB हाई-टेक डिफेंस एंड एयरोस्पेस पार्क में विश्वस्तरीय विनिर्माण केंद्र स्थापित किया।

आज इस उद्यम से 30 पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है (8 अनुसूचित जाति, 22 गैर-अनुसूचित जाति), ₹7 करोड़ की परिसंपत्तियां बनी हैं, ₹3.92 करोड़ की नेटवर्थ हासिल हुई है, ₹2.85 करोड़ का राजस्व और लगभग ₹4 लाख का लाभ दर्ज हुआ है। यह उदाहरण 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न में SC उद्यमिता के योगदान को दर्शाता है, विशेष रूप से रक्षा स्वदेशीकरण के क्षेत्र में।

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केस स्टडी 2: स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (सर्कुलर इकोनॉमी)

विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश स्थित इस कंपनी की स्थापना श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी ने की, जो अनुसूचित जाति समुदाय की पहली पीढ़ी की महिला उद्यमी हैं। कंपनी ने बेकार टायरों को 10 से 40 मेश तक के उच्च-गुणवत्ता वाले क्रम्ब रबर पाउडर में बदलने हेतु स्वचालित रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित किया है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 6,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। VCF-SC ने 2023 में इक्विटी एवं वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से ₹5 करोड़ की सहायता प्रदान की, जिससे कंपनी को SIDBI से दूसरे दौर का वित्तपोषण प्राप्त करने में भी मदद मिली।

इस उद्यम ने अब तक दो लाख से अधिक बेकार टायर रीसायकल किए हैं, TVS सुंदरम और हिन्कोल जैसी कंपनियों के साथ औद्योगिक संबंध स्थापित किए हैं, तथा 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है (5 अनुसूचित जाति, 10 गैर-अनुसूचित जाति)। कंपनी ने ₹8 करोड़ की परिसंपत्तियां, ₹2.09 करोड़ की नेटवर्थ, ₹4.36 करोड़ का राजस्व और ₹4.60 करोड़ का लाभ अर्जित किया है। यह उदाहरण चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), पर्यावरणीय स्थिरता और महिला उद्यमिता — तीनों के समन्वय को दर्शाता है।

समग्र नीतिगत निष्कर्ष: दोनों उदाहरण दिखाते हैं कि VCF-SC केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि उच्च-प्रौद्योगिकी रक्षा क्षेत्र से लेकर सतत विनिर्माण तक विविध क्षेत्रों में SC उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का माध्यम बन रहा है, जो समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के दोहरे उद्देश्यों की पूर्ति करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC) क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?

VCF-SC सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक योजना है, जिसकी घोषणा वित्त वर्ष 2014-15 के बजट भाषण (फरवरी 2014) में की गई थी। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति उद्यमियों को रियायती वित्त उपलब्ध कराना है, और इसे IFCI के माध्यम से ₹200 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी के साथ स्थापित किया गया।

2. VCF-SC के तहत कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है और किस दर पर?

न्यूनतम ₹10 लाख से अधिकतम ₹15 करोड़ तक सहायता उपलब्ध है। यह ऋण/परिवर्तनीय लिखत पर 4% वार्षिक ब्याज दर (SC महिला/दिव्यांग उद्यमियों हेतु 3.75%), या इक्विटी निवेश पर 8% वार्षिक रिटर्न अथवा वैल्यूएशन (जो अधिक हो) के रूप में दी जाती है।

3. VCF-SC के तहत सहायता पाने हेतु पात्रता क्या है?

₹50 लाख तक की सहायता हेतु कंपनी में विगत 6 माह से, और ₹50 लाख से अधिक की सहायता हेतु विगत 12 माह से अनुसूचित जाति उद्यमियों की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी व प्रबंधन नियंत्रण आवश्यक है। तकनीकी नवाचारी परियोजनाओं हेतु अलग प्रावधान हैं।

4. त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज को VCF-SC से क्या सहायता मिली और इसका क्या प्रभाव रहा?

बेंगलुरु स्थित त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज को 2022 में ₹4.47 करोड़ की सहायता मिली, जिससे कंपनी ने डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एवं EDGE AI विनिर्माण सुविधा स्थापित की। आज इससे 30 लोगों को रोजगार मिला है और कंपनी L&T, BEL, DRDO जैसे संस्थानों को सेवाएं दे रही है।

5. स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज को VCF-SC से क्या सहायता मिली और इसका क्या प्रभाव रहा?

विशाखापत्तनम स्थित इस कंपनी को 2023 में ₹5 करोड़ की सहायता मिली, जिससे स्वचालित रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित हुआ। कंपनी ने अब तक दो लाख से अधिक बेकार टायर रीसायकल किए हैं और 15 लोगों को रोजगार दिया है।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1

अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इस योजना की घोषणा वित्त वर्ष 2014-15 के बजट भाषण में की गई थी और इसे IFCI के माध्यम से ₹200 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी के साथ स्थापित किया गया।
2. इस कोष के तहत इक्विटी निवेश पर निकास के समय 8% वार्षिक रिटर्न या वैल्यूएशन, जो भी अधिक हो, दिया जाता है, जबकि ऋण लिखत पर सामान्यतः 4% वार्षिक ब्याज दर लागू होती है।
3. अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उद्यमी भी इस कोष के तहत समान शर्तों पर पात्र हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल 1 और 2   B. केवल 2 और 3   C. केवल 1 और 3   D. 1, 2 और 3

उत्तर: A (केवल 1 और 2)

व्याख्या (Explanation):

VCF-SC योजना की घोषणा फरवरी 2014 के बजट भाषण में हुई थी और IFCI के माध्यम से ₹200 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी से इसकी स्थापना की गई थी, अतः कथन 1 सही है। इक्विटी निवेश पर 8% वार्षिक रिटर्न या वैल्यूएशन (जो अधिक हो), तथा ऋण/परिवर्तनीय लिखत पर 4% वार्षिक ब्याज दर (SC महिला/दिव्यांग उद्यमियों हेतु 3.75%) का प्रावधान है, अतः कथन 2 सही है। हालांकि, यह कोष विशेष रूप से केवल अनुसूचित जाति (SC) उद्यमियों के लिए है — अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के उद्यमी इसके तहत पात्र नहीं हैं, अतः कथन 3 गलत है।

प्रश्न 2

हाल ही में सामने आई VCF-SC की लाभार्थी कंपनियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

1. त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज - डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एवं EDGE AI विनिर्माण
2. स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज - बेकार टायरों का रीसाइक्लिंग (सर्कुलर इकोनॉमी)

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

A. केवल 1   B. केवल 2   C. 1 और 2 दोनों   D. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: C (1 और 2 दोनों)

व्याख्या (Explanation):

बेंगलुरु स्थित त्रिशंकु टेक्नोलॉजीज को 2022 में ₹4.47 करोड़ की VCF-SC सहायता मिली, जिससे PCB, रडार सिस्टम और EDGE AI विनिर्माण सुविधा स्थापित हुई तथा L&T, BEL, DRDO जैसे संस्थानों को सेवाएं दी जा रही हैं। विशाखापत्तनम स्थित स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज, जिसकी स्थापना एक प्रथम-पीढ़ी की SC महिला उद्यमी ने की, को 2023 में ₹5 करोड़ की सहायता मिली, जिससे स्वचालित रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित हुआ और अब तक दो लाख से अधिक बेकार टायर रीसायकल किए जा चुके हैं। दोनों उदाहरण VCF-SC के तहत विविध क्षेत्रों में SC उद्यमिता को मिल रहे बढ़ावे को दर्शाते हैं।