विषय सूची (Table of Contents)
- पनडुब्बी रोधी नौका 'मैंग्रोल': संदर्भ और पृष्ठभूमि: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा सुपुर्दगी, माहे-वर्ग (Mahe-class) कार्यक्रम और नामकरण की विरासत (UPSC GS Paper III: सुरक्षा - तटीय सुरक्षा और विभिन्न नौसैनिक कार्यक्रम)।
- तकनीकी विशिष्टताएँ और संरचना: डिट नॉर्स्के वेरिटास (Det Norske Veritas - DNV) वर्गीकरण मानक, भौतिक आयाम, परिचालन क्षमता और वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion System) (UPSC GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तकनीक)।
- हथियार प्रणाली और सेंसर सुइट (Weapons & Sensors Suite): स्वदेशी सोनार (Sonar), रॉकेट लॉन्चर (Rocket Launcher), टॉरपीडो (Torpedoes) और रक्षात्मक प्रणालियां (UPSC GS Paper III: सैन्य आधुनिकीकरण और आंतरिक सुरक्षा)।
- रणनीतिक और आर्थिक प्रासंगिकता: तटीय क्षेत्रों (Littoral Zone) में परिचालन सुगमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्थानीय सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर प्रभाव (UPSC GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था और ढांचागत विकास)।
1. पनडुब्बी रोधी नौका 'मैंग्रोल': संदर्भ और पृष्ठभूमि
भारतीय नौसेना ने उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियानों को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए अपने नए युद्धपोत 'मैंग्रोल' को शामिल किया है।
आठ जहाजों का कार्यक्रम: यह नौका भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित किए जा रहे आठ माहे-वर्ग (Mahe-class) जहाजों के कार्यक्रम का तीसरा पोत है। इसके समानांतर, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers - GRSE) के नेतृत्व में भी आठ अरनाला-वर्ग (Arnala-class) जहाजों का निर्माण किया जा रहा है।
नामकरण का स्रोत: 'मैंग्रोल' का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित एक तटीय शहर और छोटे बंदरगाह (minor port) के नाम पर रखा गया है, जो स्थानीय स्तर पर समुद्री मत्स्य पालन उद्योग (marine fishing industry) का एक प्रमुख केंद्र है।
नौसैनिक परंपरा का संरक्षण: यह नाम भारतीय नौसेना के पूर्व माइनस्वीपर (Minesweeper) 'आईएनएस मैंग्रोल' की विरासत को भी जारी रखता है, जिसने वर्ष 2004 तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं। यह स्थापित युद्धपोतों के नामों को संजोने की नौसैनिक परंपरा के अनुकूल है।
2. तकनीकी विशिष्टताएँ और संरचना (Technical Specifications & Structure)
'मैंग्रोल' को विशेष रूप से उथले तटीय जलक्षेत्र में मूक संचालन और उच्च गतिशीलता के लिए अनुकूलित किया गया है:
वर्गीकरण मानक: इस जहाज का निर्माण डिट नॉर्स्के वेरिटास (Det Norske Veritas - DNV) वर्गीकरण मानकों के अनुसार किया गया है, जो पोत को संतुलित गतिशीलता (maneuverability) और बहुत कम ध्वनिक हस्ताक्षर (low acoustic signatures) प्रदान करता है। न्यूनतम ध्वनिक हस्ताक्षर होने से दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए इसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है।
भौतिक आयाम और क्षमता: जहाज की लंबाई 78 मीटर, चौड़ाई (beam) 11.26 मीटर और ड्राफ्ट (draft) 2.7 मीटर है। इसका कुल विस्थापन (displacement) 896 से 1,100 टन के बीच है।
परिचालन मानक:
गति (Speed): यह जहाज अधिकतम 25 नॉट (knots) (लगभग 46 किमी/घंटा) की गति से चलने में सक्षम है।
परिचालन सीमा (Range): 14 नॉट की क्रूज़िंग गति (cruising speed) पर इसकी परिचालन सीमा 1,800 समुद्री मील (nautical miles) (लगभग 3,300 किमी) है।
सहनशीलता (Endurance): यह लगातार 14 दिनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है।
चालक दल का आकार (Crew Size): इसमें 7 अधिकारियों और 50 नाविकों सहित कुल 57 सैन्य कर्मियों के रहने की व्यवस्था है।
वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion System): यह पोत तीन मरीन डीजल इंजनों (marine diesel engines) द्वारा संचालित होता है, जो तीन उन्नत वाटरजेट प्रोपल्सर (waterjet propulsors) (कुल उत्पादन 6 मेगावाट - MW) से जुड़े हैं। पारंपरिक प्रोपेलर (propellers) के स्थान पर यह तकनीक पानी को जहाज के तल (hull) से खींचकर तीव्र गति से बाहर छोड़ती है। इससे पानी के भीतर शोर का स्तर (underwater noise level) काफी कम हो जाता है और जहाज उथले पानी में भी बिना किसी बाधा के गति कर सकता है।
3. हथियार प्रणाली और सेंसर सुइट (Weapons & Sensors Suite)
उथले पानी में खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए 'मैंग्रोल' में विशिष्ट स्वदेशी रक्षा प्रणालियां स्थापित की गई हैं:
सोनार और सेंसर तकनीक (Sensors & Sonar Technology): यह जहाज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation - DRDO) द्वारा विकसित 'अभय' (Abhay) कॉम्पैक्ट हल-माउंटेड सोनार (Compact Hull–Mounted Sonar) और एक लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (Low Frequency Variable Depth Sonar) से लैस है, जो विभिन्न गहराइयों पर छिपी पनडुब्बियों का सटीक पता लगाने में सक्षम हैं।
पनडुब्बी रोधी हथियार (Anti-Submarine Warfare - ASW Weapons):
जहाज के अग्रभाग (forward-mounted) में 1 × RBU-6000 पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर (Anti-Submarine Rocket Launcher) लगाया गया है।
इसमें उन्नत हल्के टॉरपीडो दागने के लिए 2 × ट्रिपल लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर (Triple Lightweight Torpedo Launchers) (324 मिमी) शामिल हैं।
यह एकीकृत रेल प्रणालियों (integrated rails) के माध्यम से बारूदी सुरंगें बिछाने (mine-laying) में भी सक्षम है।
सुरक्षात्मक और सतह हथियार (Surface Weaponry): इसमें मलबे और अन्य हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए 1 × 30 mm नौसैनिक सतह गन (Naval Surface Gun) और 2 × 12.7 mm स्थिर रिमोट-कंट्रोल गन (Stabilized Remote-Controlled Guns) लगाई गई हैं। आत्मरक्षा के लिए इसमें महिंद्रा का टॉरपीडो डिकॉय लॉन्चिंग सिस्टम (Torpedo Decoy Launching System) शामिल है। इसके अलावा, संचालन दक्षता बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म Management System (Integrated Platform Management System) और बैटल डैमेज कंट्रोल सिस्टम (Battle Damage Control System) जैसे स्वचालित कमांड सिस्टम मौजूद हैं।
4. रणनीतिक और आर्थिक प्रासंगिकता (Strategic & Economic Significance)
तटीय क्षेत्रों (Littoral Zone) में परिचालन सुगमता: बड़े युद्धपोतों को उनकी बड़ी संरचना के कारण तटीय उथले पानी में संचालन करने में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वहाँ ध्वनिक परावर्तन (acoustic reflections) अधिक होता है और गहराई सीमित होती है। 'मैंग्रोल' तटीय गश्त और उथले पानी में छोटे आकार की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की निगरानी के इस अंतर (critical gap) को दूर करता है।
समुद्री संचार लाइनों (Sea Lines of Communication - SLOC) की सुरक्षा: यह पोत भारत के प्रमुख व्यावसायिक और रणनीतिक बंदरगाहों के निकट सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करता है और देश की समुद्री संचार लाइनों (SLOC) को जलमग्न खतरों से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
बहुउद्देशीय भूमिका (Multi-purpose Capability): पनडुब्बी रोधी अभियानों के अलावा, यह खोज और बचाव (Search and Rescue - SAR), कम-तीव्रता वाले समुद्री संचालन (Low-Intensity Maritime Operations - LIMO) और समुद्री डकैती रोधी (counter-maritime piracy) अभियानों के संपादन में भी सक्षम है।
आत्मनिर्भरता और एमएसएमई का विकास (Aatmanirbhar Bharat & MSME Growth): इस पोत के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग किया गया है। इसमें डीआरडीओ सोनार, भारतीय मिसाइल और कोचीन शिपयार्ड की निर्माण तकनीकों का समन्वय है। इससे स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (Micro, Small and Medium Enterprises - MSMEs) को सहयोग मिलता है और अंतरराष्ट्रीय सैन्य मूल्य श्रृंखलाओं (international military value chains) पर निर्भरता कम होती है।
निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: 'मैंग्रोल' का वर्ग (ASW-SWC); निर्माता (कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड); माहे-वर्ग बनाम अरनाला-वर्ग; वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion System) के लाभ; 'अभय' सोनार (Abhay Sonar) की भूमिका।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III - Security & Economy): उथले पानी के युद्धक जहाजों का तटीय सुरक्षा नीतियों में रणनीतिक महत्व; रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता और स्थानीय एमएसएमई (MSMEs) का एकीकरण; हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region - IOR) में समुद्री संचार मार्गों (SLOC) की रक्षा प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ASW-SWC 'मैंग्रोल' (Mangrol) क्या है?
यह कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित माहे-वर्ग के आठ पनडुब्बी रोधी उथले जल की नौकाओं (ASW-SWC) की श्रृंखला का तीसरा पोत है, जिसे 21 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया।
2. 'मैंग्रोल' नाम कहाँ से लिया गया है?
इसका नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित तटीय शहर और छोटे बंदरगाह मैंग्रोल के नाम पर रखा गया है, जो समुद्री मत्स्य पालन उद्योग का प्रमुख केंद्र है। यह नाम पूर्व नौसैनिक माइनस्वीपर 'आईएनएस मैंग्रोल' की विरासत को भी आगे बढ़ाता है।
3. वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion System) का क्या लाभ है?
यह प्रणाली पारंपरिक प्रोपेलर के बजाय पानी को हल से खींचकर तेज गति से बाहर छोड़ती है, जिससे पानी के भीतर शोर का स्तर कम होता है और जहाज उथले पानी में बिना बाधा के गति कर सकता है।
4. 'मैंग्रोल' किन प्रमुख हथियार प्रणालियों से लैस है?
इसमें RBU-6000 पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर, 2 ट्रिपल लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर, 30mm नौसैनिक सतह गन, 12.7mm स्थिर रिमोट-कंट्रोल गन, और DRDO का 'अभय' कॉम्पैक्ट हल-माउंटेड सोनार शामिल हैं।
5. इस पोत में स्वदेशीकरण का स्तर कितना है?
'मैंग्रोल' के निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिसमें DRDO सोनार और कोचीन शिपयार्ड की निर्माण तकनीकों का समन्वय शामिल है, जो स्थानीय MSMEs को भी सहयोग देता है।
UPSC CSE Prelims Practice MCQs
प्रश्न 1
हाल ही में भारतीय नौसेना को सौंपी गई पनडुब्बी रोधी उथले जल की नौका 'मैंग्रोल' (Mangrol) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इस जहाज का विस्थापन (displacement) लगभग 896 से 1,100 टन के बीच है और इसका निर्माण डिट नॉर्स्के वेरिटास (DNV) मानकों के अनुसार किया गया है।
3. इसका नामकरण गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह शहर 'मैंग्रोल' के नाम पर किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3 - सभी कथन सही हैं)
कथन 1 सही है: 'मैंग्रोल' भारतीय नौसेना के आठ माहे-वर्ग जहाजों के कार्यक्रम के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया तीसरा स्वदेशी पनडुब्बी रोधी पोत है।
कथन 2 सही है: यह पोत डिट नॉर्स्के वेरिटास (DNV) वर्गीकरण मानकों के अनुसार निर्मित है, जिसका विस्थापन 896 से 1,100 टन के बीच है।
कथन 3 सही है: इसका नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय मछली पकड़ने वाले बंदरगाह शहर 'मैंग्रोल' से लिया गया है और यह पूर्व नौसैनिक माइनस्वीपर (minesweeper) 'आईएनएस मैंग्रोल' की विरासत को दर्शाता है।
प्रश्न 2
माहे-वर्ग (Mahe-class) जहाजों की तकनीकी प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इसकी प्रणोदन प्रणाली (propulsion system) में तीन उन्नत वाटरजेट प्रोपल्सर शामिल हैं, जो पारंपरिक प्रोपेलर की तुलना में पानी के नीचे के शोर के स्तर को कम करते हैं।
3. यह पोत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित 'अभय' कॉम्पैक्ट हल-माउंटेड सोनार (Compact Hull–Mounted Sonar) से सुसज्जित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 2 और 3)
कथन 1 गलत है: ये जहाज गैस टरबाइन से नहीं, बल्कि तीन मरीन डीजल इंजनों (marine diesel engines) द्वारा संचालित होते हैं।
कथन 2 सही है: वाटरजेट प्रणोदन तकनीक उथले पानी में जहाज की गतिशीलता को बेहतर बनाती है और पारंपरिक प्रोपेलर की तुलना में शोर कम करती है।
कथन 3 सही है: इस वर्ग के जहाजों में डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित 'अभय' कॉम्पैक्ट हल-माउंटेड सोनार स्थापित किया गया है।