PIB Analysis 8 September 2026 | Next-Gen Aquaculture, 5th Swachh Vayu Sarvekshan Awards & NITI Aayog's PACT Launch
भारत के सतत विकास (sustainable development), पर्यावरण संरक्षण, नीली अर्थव्यवस्था (blue economy) और हरित गतिशीलता (green mobility) के क्षेत्रों में हाल ही में तीन प्रमुख नीतिगत और तकनीकी निर्णय लिए गए हैं। देश की खाद्य सुरक्षा और निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इसके अलावा, 'स्वच्छ वायु दिवस 2026' के अवसर पर प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। वहीं, माल ढुलाई क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से नीति आयोग ने 'पीएसीटी' (PACT) नामक एक मांग एकत्रीकरण मंच की शुरुआत की है।
1. भारत में आधुनिक मत्स्य पालन और जलीय खेती (Next-Gen Aquaculture)
संदर्भ (Context)
मत्स्य पालन और जलीय खेती का क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है, जो लगभग तीन करोड़ मछुआरों और जलीय कृषकों की आजीविका को प्रत्यक्ष संबल प्रदान करता है। भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक (वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान), दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक, और झींगा (shrimp) का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक है।
मुख्य विवरण (Highlights)
ऐतिहासिक सार्वजनिक निवेश: वर्ष 2015 के बाद से भारत सरकार ने इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत ₹39,272 करोड़ से अधिक के संचयी निवेश को मंजूरी दी है।
उत्पादन में तीव्र वृद्धि: इस रणनीतिक निवेश के परिणामस्वरूप देश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन वर्ष 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन (दोगुने से अधिक) तक पहुँच गया है। इस विकास में आंतरिक मत्स्य पालन (inland fisheries) और जलीय खेती का सबसे बड़ा योगदान रहा है, जिसका उत्पादन इसी अवधि में 147% बढ़कर 61.36 लाख टन से 151.60 लाख टन हो गया है।
समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood Exports): जटिल वैश्विक व्यापारिक माहौल और टैरिफ चुनौतियों के बावजूद, भारत का समुद्री खाद्य निर्यात वर्ष 2013-14 के ₹30,213 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।
प्रौद्योगिकी का समावेश (Technology Infusion): प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत दो प्रमुख गहन उत्पादन तकनीकों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है:
- पुनर्चक्रिय जलीय खेती प्रणाली (RAS): यह प्रणाली नियंत्रित वातावरण में मछलियों को पालने के लिए जल उपचार और पुनःसंचरण प्रणालियों का उपयोग करती है। यह 90% से 95% तक पानी का पुनर्चक्रण करती है, जिससे पानी की भारी बचत होती है।
- बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Technology): यह प्रणाली जल की गुणवत्ता में सुधार करने और मछलियों के प्राकृतिक पोषण का समर्थन करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों (beneficial microorganisms) का उपयोग करती है।
स्वीकृत इकाइयाँ: पीएमएमएसवाई (PMMSY) के अंतर्गत अब तक 9,467 आरएएस (RAS) इकाइयों और 4,573 बायोफ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन्हें ₹4,120 करोड़ के समर्पित तकनीकी निवेश का समर्थन प्राप्त है।
महत्व (Strategic Significance)
भौगोलिक सीमाओं से परे विस्तार: आरएएस (RAS) और बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकियों की बहुमुखी प्रतिभा के कारण अब उन क्षेत्रों में भी मत्स्य पालन संभव हो गया है जहाँ पारंपरिक जलीय खेती के लिए अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ नहीं थीं।
विशिष्ट मत्स्य क्लस्टर: इन तकनीकों को जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ठंडे पानी वाले क्लस्टरों में ट्राउट (trout) जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के पालन के लिए सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। इसके अलावा, यह देश के लवणीय और खारे पानी वाले क्षेत्रों में निर्यात-उन्मुख झींगा उत्पादन का भी समर्थन कर रही है।
जैव-सुरक्षा और पता लगाने योग्यता (Traceability & Biosecurity): नियंत्रित प्रणालियों में उत्पादन होने के कारण निर्यात बाजार में मांग के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता, निरंतरता और सख्त जैव-सुरक्षा मानकों को बनाए रखना आसान हो जाता है, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय सीफूड की प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ होती है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष
चक्रीय नीली अर्थव्यवस्था (Circular Blue Economy): आरएएस प्रणाली पानी को रीसायकल कर शहरी उपभोग केंद्रों और बड़े निर्यात हबों के समीप मत्स्य इकाइयों की स्थापना को व्यावहारिक बनाती है, जिससे परिवहन लागत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आती है।
नवाचारों का अभिसरण: भविष्य के रोडमैप के तहत इन जलीय खेती प्रणालियों को डिजिटल निगरानी प्लेटफार्मों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन-सक्षम सेवाओं और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के साथ एकीकृत किया जा रहा है।
1. आरएएस (RAS) प्रणाली नियंत्रित वातावरण में लगभग 90% से 95% तक पानी का पुनर्चक्रण करके अत्यधिक संसाधन-कुशल मत्स्य पालन को संभव बनाती है।
2. बायोफ्लॉक तकनीक जलीय कृषि प्रणालियों में जल की गुणवत्ता को दुरुस्त करने के लिए रासायनिक उर्वरकों के बजाय मुख्य रूप से लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर निर्भर करती है।
3. भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा मछली उत्पादक और सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 2
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं: आरएएस (RAS) प्रणाली अपनी कुशल जल उपचार प्रक्रिया से 90-95% जल का पुनर्चक्रण करती है। वहीं, बायोफ्लॉक तकनीक मछलियों को पालने के दौरान जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है। कथन 3 गलत है: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा (पहला नहीं) मछली उत्पादक है और दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश है, यद्यपि यह झींगा का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक अवश्य है।
2. 5वां स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)
संदर्भ (Context)
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 'नीले आकाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' पर 'स्वच्छ वायु दिवस 2026' का आयोजन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि के रूप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए।
तकनीकी व मुख्य विवरण (Technical Highlights)
वित्तीय परिव्यय: 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 नामित शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से इस प्रमुख राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत ₹16,425 करोड़ का प्रदर्शन-आधारित अनुदान (performance-linked grant) प्रदान किया गया है।
पीएम10 (PM10) सांद्रता में सुधार के ठोस परिणाम (2017-18 की तुलना में 2025-26):
- 130 शहरों में से 108 शहरों ने पीएम10 के स्तर में सकारात्मक सुधार दर्ज किया है।
- 72 शहरों ने पीएम10 सांद्रता में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की है।
- 26 शहरों ने 40 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की है।
- 14 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) के सख्त मानदंडों को पूरा कर लिया है।
मूल्यांकन पद्धति (Evaluation Framework): वर्ष 2022-23 में जारी मूल्यांकन ढांचे के तहत शहरों को तीन जनसंख्या समूहों (3 लाख से कम; 3 से 10 लाख; और 10 लाख से अधिक) में विभाजित कर स्व-मूल्यांकन कराया जाता है। यह रैंकिंग मुख्य रूप से सड़क की धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM), वाहनों से उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता गतिविधियों पर आधारित होती है।
प्राण (PRANA) पोर्टल: इस ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल के माध्यम से एनसीएपी के सभी 130 शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न मापदंडों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग की जा रही है।
सर्वोत्तम पद्धतियों का संकलन: इस अवसर पर "एनसीएपी के अंतर्गत सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का संकलन" (Compendium of Best Management Practices under NCAP) जारी किया गया, ताकि विभिन्न शहरों द्वारा सड़क की धूल को नियंत्रित करने, खुले में कचरा जलाने पर रोक और हरित पहलों की सफल केस स्टडीज को देश के अन्य शहर भी दोहरा (replicate) सकें।
महत्व (Strategic Significance)
मूल अधिकार के रूप में स्वच्छ वायु: एनजीटी के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ हवा कोई विलासिता नहीं बल्कि नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को संतुलित नियोजन के साथ एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
अग्रणी संस्थाओं की भूमिका: चूंकि वायु प्रदूषण किसी राजनीतिक सीमा को नहीं पहचानता और इसके कई जटिल स्रोत हैं, इसलिए स्थानीय शहरी और ग्रामीण निकाय (ULBs/RLBs) इस राष्ट्रीय दृष्टिकोण को धरातल पर क्रियान्वित करने वाली अग्रणी संस्थाएँ हैं।
1. वर्ष 2017-18 के स्तरों की तुलना में 2025-26 में कुल 130 एनसीएपी शहरों में से 108 शहरों ने पीएम10 (PM10) सांद्रता के स्तरों में सकारात्मक सुधार प्रदर्शित किया है।
2. प्राण (PRANA) पोर्टल का उपयोग विशेष रूप से केवल तटीय क्षेत्रों में समुद्री प्रदूषण और तटीय अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी के लिए किया जाता है।
3. एनसीएपी के अंतर्गत आने वाले शहरों को वायु प्रदूषण निवारण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय कमियों को पूरा करने हेतु प्रदर्शन-आधारित अनुदान प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 3 सही हैं: हालिया सर्वेक्षण परिणामों के अनुसार, 130 में से 108 शहरों में पीएम10 स्तरों में सुधार देखा गया है। साथ ही, इन शहरों को पर्यावरण उपायों के क्रियान्वयन के लिए कुल ₹16,425 करोड़ का प्रदर्शन-आधारित अनुदान आवंटित किया गया है। कथन 2 गलत है: प्राण (PRANA) पोर्टल का उपयोग एनसीएपी के तहत आने वाले 130 शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न मापदंडों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए किया जाता है, न कि समुद्री प्रदूषण के लिए।
3. नीति आयोग द्वारा पीएसीटी (PACT) का शुभारंभ
संदर्भ (Context)
नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 (5th e-FAST India Summit) के अवसर पर भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई (zero-emission freight) को बढ़ावा देने के लिए 'पीएसीटी' (Platform for Aggregating Clean Transport - PACT) और 'जेडईटी मार्केटप्लेस' (ZET Marketplace) का उद्घाटन किया।
तकनीकी व मुख्य विवरण (Technical Highlights)
इलेक्ट्रिक माल ढुलाई बाजार की तीव्र प्रगति: भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई के उपयोग में चार गुना से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। ई-फ्रेट वाहनों की संख्या वित्त वर्ष 2025 के केवल 201 वाहनों से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 826 वाहन हो गई है। वर्तमान में देश भर की सड़कों पर 3,000 से अधिक मध्यम और भारी-शुल्क वाले इलेक्ट्रिक ट्रक (e-MHD trucks) सक्रिय रूप से संचालित हैं।
पीएसीटी (PACT) का मुख्य कार्य: यह ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म के तहत एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जो बड़े पैमाने पर शिपर्स (shippers), लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं (LSPs) और अन्य हितधारकों की माल ढुलाई मांग को एक जगह एकीकृत (aggregate) करेगी। यह मांग एकत्रीकरण चिन्हित माल ढुलाई गलियारों (freight corridors) में मांग की स्पष्टता को बढ़ाएगा और चार्जिंग बुनियादी ढांचे की रणनीतिक योजना में सहायता प्रदान करेगा।
जैडईटी (ZET) मार्केटप्लेस: यह एक संवादपरक व्यावसायिक मंच है जो ई-ट्रक निर्माताओं, सीपीओ (CPOs), वित्तीय संस्थानों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को एक मंच पर लाकर माल ढुलाई परियोजनाओं को केवल कागजी योजनाओं से सीधे व्यावसायिक कार्यान्वयन तक ले जाने में मदद करेगा।
नियामक सुधार: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव श्री वी. उमाशंकर ने सुझाव दिया कि उच्च उपयोग वाले इन इलेक्ट्रिक ट्रकों के वित्तीय जोखिम को कम करने और उनके पुनर्विक्रय मूल्य (resale value) को सुनिश्चित करने के लिए 'बैटरी स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों' (Battery Health Monitoring Systems) जैसे पारदर्शी विनियामक मॉडल आवश्यक हैं।
महत्व (Strategic Significance)
ऊर्जा सुरक्षा और रसद प्रतिस्पर्धात्मकता: भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने और घरेलू रसद (logistics) लागत को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भारी वाहनों का विद्युतीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभिनव वित्तपोषण मॉडल: यह मंच स्वच्छ परिवहन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवीन वित्तीय जोखिम कम करने के मॉडल (de-risking models) और कॉरिडोर-आधारित बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्रोत्साहित करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: RAS और बायोफ्लॉक तकनीक में क्या अंतर है?
उत्तर: RAS (पुनर्चक्रिय जलीय खेती प्रणाली) जल उपचार और पुनःसंचरण के माध्यम से 90-95% पानी का पुनर्चक्रण करती है, जबकि बायोफ्लॉक तकनीक जल गुणवत्ता सुधारने और मछलियों को पोषण देने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है।
प्रश्न: भारत का समुद्री खाद्य निर्यात कितना बढ़ा है?
उत्तर: भारत का समुद्री खाद्य निर्यात वर्ष 2013-14 के ₹30,213 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।
प्रश्न: 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के तहत NCAP शहरों को कितना अनुदान दिया गया?
उत्तर: 24 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों को वायु गुणवत्ता सुधार के लिए ₹16,425 करोड़ का प्रदर्शन-आधारित अनुदान प्रदान किया गया है।
प्रश्न: प्राण (PRANA) पोर्टल किसलिए उपयोग किया जाता है?
उत्तर: प्राण पोर्टल NCAP के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न मापदंडों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रश्न: नीति आयोग द्वारा शुरू किया गया PACT प्लेटफॉर्म क्या है?
उत्तर: PACT (Platform for Aggregating Clean Transport) एक डिजिटल मंच है जो शिपर्स, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं और अन्य हितधारकों की माल ढुलाई मांग को एकीकृत कर शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई को बढ़ावा देता है।
त्वरित पुनरावृत्ति तथ्य (Quick Revision Facts)
- मत्स्य उत्पादन: 2013-14 में 95.79 लाख टन → 2024-25 में 198 लाख टन; निवेश ₹39,272 करोड़+ (2015 से)
- RAS: 90-95% जल पुनर्चक्रण; बायोफ्लॉक: लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित; स्वीकृत इकाइयां — 9,467 RAS, 4,573 बायोफ्लॉक
- समुद्री खाद्य निर्यात: ₹30,213 करोड़ (2013-14) → ₹73,890 करोड़ (2025-26)
- 5वां स्वच्छ वायु सर्वेक्षण: NCAP के 130 शहरों को ₹16,425 करोड़ अनुदान; 108 शहरों में PM10 सुधार
- PRANA पोर्टल: NCAP के 130 शहरों की वास्तविक समय वायु गुणवत्ता ट्रैकिंग
- PACT व ZET Marketplace: नीति आयोग, शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई; e-MHD ट्रक — FY25 में 201 → FY26 में 826
