कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) ने सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं (Surface Coal/Lignite Gasification Projects) को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई बहु-वर्षीय रणनीतिक योजना के क्रियान्वयन की वर्तमान कूटनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को स्पष्ट किया है। इस व्यापक स्पष्टीकरण के माध्यम से मंत्रालय ने योजना के प्रति उद्योग जगत की मजबूत रुचि को प्रमाणित किया है और समय से पहले लगाए जा रहे अनुमानों का तथ्यात्मक खंडन किया है।
1. सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण योजना: पृष्ठभूमि और उद्देश्य
नीतिगत संदर्भ (Policy Context)
कैबिनेट मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना को मंजूरी प्रदान की थी।
वित्तीय परिव्यय: इस योजना का कुल स्वीकृत वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है।
रणनीतिक उद्देश्य: इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के विकास में तेजी लाना है। इसके तहत घरेलू कोयले और लिग्नाइट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों, जैसे सिनगैस (syngas), मेथनॉल (methanol), अमोनिया (ammonia) और यूरिया (urea) में परिवर्तित करने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा: मूल्यवर्धित उत्पादों (value-added products) के निर्माण के लिए घरेलू संसाधनों का प्रचुरता से उपयोग करके, यह योजना आयातित कच्चे माल (imported feedstock) पर भारत की निर्भरता को कम करेगी, जिससे देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
1. इस योजना के तहत केवल निजी क्षेत्र की कंपनियों को ही वित्तीय प्रोत्साहन के लिए आवेदन करने की अनुमति है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इसके दायरे से बाहर हैं।
2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य कोयला और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलने को बढ़ावा देना है।
3. इस योजना के तहत वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 गलत है: इस योजना में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) और एनटीपीसी (NTPC) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने पहले ही इसके तहत आवेदन जमा किए हैं। कथन 2 सही है: यह योजना कोयला और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने को बढ़ावा देती है। कथन 3 सही है: सरकार ने इस योजना के माध्यम से वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता प्राप्त करने का व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया है।
2. क्रियान्वयन के प्रमुख चरण और वर्तमान प्रगति
कोयला मंत्रालय ने योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए निरंतर और व्यवस्थित प्रयास किए हैं:
हितधारक संपर्क और रोड शो
योजना की मंजूरी के बाद संभावित परियोजना विकासकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में रोड शो आयोजित किए गए — नई दिल्ली (28 मई 2026), हैदराबाद (11 जून 2026) और मुंबई (18 जून 2026)। इन आयोजनों में राज्य सरकारों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्यमों, वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, वित्तीय संस्थानों और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री ने भाग लिया।
प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP)
योजना के तहत 7 जुलाई 2026 को औपचारिक प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया गया और ऑनलाइन आवेदन पोर्टल शुरू किया गया।
पूर्व-आवेदन सम्मेलन (Pre-Application Conference)
आवेदकों की तकनीकी व विनियामक स्पष्टता के लिए 20 जुलाई 2026 को एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न तकनीकी प्रावधानों और पात्रता मानदंडों पर चर्चा की गई।
वर्तमान आवेदन स्थिति
पहले दौर के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित है। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) और एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) जैसी दिग्गज सार्वजनिक कंपनियों ने पहले ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन जमा कर दिए हैं।
3. रोलिंग-राउंड तंत्र की संरचना (Rolling-Round Mechanism)
इस योजना की सबसे अनूठी विनियामक विशेषता इसका लचीला और सुगम आवेदन ढांचा है:
परियोजनाओं की जटिलता
कोयला गैसीकरण परियोजनाएं अत्यधिक पूंजी-गहन (capital-intensive) और तकनीकी रूप से जटिल होती हैं। आवेदकों को पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (Pre-Feasibility Reports - PFRs) तैयार करने, सर्वोत्तम प्रौद्योगिकी विकल्पों का चयन करने, फीडस्टॉक व्यवस्था सुनिश्चित करने और विस्तृत परियोजना प्रस्ताव बनाने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है।
रोलिंग-राउंड प्रक्रिया (Rolling-Round Process)
कंपनियों को आवेदन से बाहर होने से बचाने के लिए निरंतर चलने वाली आवेदन प्रक्रिया (rolling basis) अपनाई गई है। इसके तहत, एक दौर की अवधि समाप्त होने के अगले ही दिन से दूसरा दौर शुरू हो जाएगा, जो दो महीने की अवधि तक खुला रहेगा। यह लचीलापन उन उद्योगों के लिए अत्यंत मूल्यवान है जिन्हें वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए।
1. इसके तहत आवेदन की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें एक चरण की अवधि समाप्त होने के अगले ही दिन से अगला दौर शुरू हो जाता है।
2. प्रत्येक दौर की आवेदन अवधि लगभग दो महीने तक खुली रहती है।
3. यह तंत्र केवल पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं तक ही सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं: परियोजनाओं की तकनीकी जटिलता और तैयारी की भारी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कोयला मंत्रालय ने रोलिंग-राउंड प्रक्रिया को अपनाया है, जिसमें एक चरण समाप्त होने पर अगला दौर अगले ही दिन से शुरू होकर दो महीने तक खुला रहता है। कथन 3 गलत है: यह तंत्र किसी विशेष क्षेत्र या राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर की पात्र कंपनियों के लिए खुला है।
4. आर्थिक, निवेश और रोजगार क्षमता
यह योजना भारत की औद्योगिक और सामाजिक प्रगति के लिए एक नए युग का सूत्रपात करेगी:
विशाल निवेश का उत्प्रेरण
कोयला मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, यह योजना लगभग 25 नवीन परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये तक के कुल निवेश को आकर्षित करेगी।
रोजगार सृजन
इस विशाल औद्योगिक विस्तार के माध्यम से देश भर में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय गैसीकरण लक्ष्य
यह पहल वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन (100 million tonnes) कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने के भारत सरकार के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण में निर्णायक योगदान देगी।
5. निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु (Prelims Focus)
सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण योजना का कुल परिव्यय (₹37,500 करोड़); केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी की तिथि (13 मई 2026); इस योजना के तहत उत्पादित किए जाने वाले रासायनिक घटक (सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया); पहले दौर के आवेदन की अंतिम तिथि (7 सितंबर 2026); रोलिंग-राउंड आवेदन तंत्र की समय-सीमा (2 महीने); वर्ष 2030 तक का राष्ट्रीय गैसीकरण लक्ष्य (100 मिलियन टन)।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III - Economy & Energy Security)
भारत में कोयले के स्वच्छ उपयोग (clean coal technologies) को बढ़ावा देने में गैसीकरण की भूमिका; किस प्रकार स्वदेशी सिनगैस और यूरिया उत्पादन देश के चालू खाता घाटे (CAD) और उर्वरक सब्सिडी के बोझ को कम करने में सहायता कर सकते हैं; विनिर्माण क्षेत्र में 'रोलिंग-राउंड' जैसे लचीले विनियामक दृष्टिकोणों का नीतिगत प्रभाव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?
उत्तर: इस योजना का कुल स्वीकृत वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को मंजूरी दी थी।
प्रश्न: इस योजना के तहत कोयला और लिग्नाइट से कौन-से उत्पाद बनाए जाएंगे?
उत्तर: घरेलू कोयले और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रश्न: पहले दौर के आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
उत्तर: पहले दौर के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित है।
प्रश्न: रोलिंग-राउंड तंत्र कैसे काम करता है?
उत्तर: यह एक निरंतर चलने वाली आवेदन प्रक्रिया है, जिसमें एक दौर समाप्त होने के अगले ही दिन से अगला दौर शुरू होकर दो महीने तक खुला रहता है, ताकि कंपनियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
प्रश्न: इस योजना से कितना निवेश और रोजगार सृजन अपेक्षित है?
उत्तर: इस योजना से लगभग 25 परियोजनाओं में 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 50,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
Quick Revision Facts
- कैबिनेट मंजूरी: 13 मई 2026; कुल परिव्यय: ₹37,500 करोड़
- उत्पाद: सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया
- रोड शो: नई दिल्ली (28 मई), हैदराबाद (11 जून), मुंबई (18 जून 2026)
- RFP जारी: 7 जुलाई 2026; पूर्व-आवेदन सम्मेलन: 20 जुलाई 2026; पहले दौर की अंतिम तिथि: 7 सितंबर 2026
- रोलिंग-राउंड: प्रत्येक दौर 2 महीने तक खुला; आवेदक: TFL, NTPC सहित अन्य
- अपेक्षित निवेश: ₹2.5–3 लाख करोड़ (~25 परियोजनाएं); रोजगार: ~50,000; 2030 तक लक्ष्य: 100 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता
