विषय सूची (Table of Contents)
- डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम 3.0 (DILRMP 3.0): राष्ट्रीय लैंड स्टैक, 14-अंकीय भू-आधार (ULPIN) और आधुनिक पंजीकरण सेवा केंद्र (RSKs)।
(GS Paper II: शासन व्यवस्था - ई-गवर्नेंस और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना; GS Paper III: भूमि सुधार एवं कृषि ऋण) - असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र के जिला-स्तरीय अनुमान (ASUSE 2025): उप-राज्य स्तर की आर्थिक उत्पादकता, क्षेत्रीय संकेंद्रण और महिला उद्यमिता का विश्लेषण।
(GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था - असंगठित क्षेत्र, रोजगार, आर्थिक उत्पादकता एवं प्रादेशिक असमानता) - उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियमावली, 2026: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) का अभिसरण, डार्क पैटर्न (Dark Patterns) पर अंकुश और मूल्य पारदर्शिता।
(GS Paper II: शासन व्यवस्था - उपभोक्ता संरक्षण; GS Paper III: डिजिटल अर्थव्यवस्था व ई-कॉमर्स विनियम)
1. डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम 3.0 (DILRMP 3.0)
संदर्भ (Context)
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 सितंबर 2026 को कृषि भवन से आयोजित एक हाइब्रिड कार्यक्रम के दौरान डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) 3.0 के परिचालन दिशा-निर्देशों का औपचारिक शुभारंभ किया। केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) के रूप में अनुमोदित इस कार्यक्रम के लिए वर्ष 2026-2031 की अवधि हेतु ₹565.50 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।
मुख्य विवरण (Highlights)
डिजिटल यात्रा की प्रगति: पूर्ववर्ती चरणों के दौरान 99.90% अधिकारों के अभिलेखों (Records of Rights - RoR) और 97% कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण तथा 99% सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों (SROs) का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। DILRMP 3.0 पृथक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर पूर्ण प्रणाली एकीकरण (system integration) पर केंद्रित है।
- जीआईएस-इनेबल्ड 'लैंड स्टैक' (Land Stack): यह एक एकीकृत डिजिटल ढांचा है जो कैडस्ट्रल मानचित्रों, अधिकारों के रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और अदालती मामलों को जीआईएस (GIS) इंटरफेस से जोड़ेगा। राज्य-स्तरीय लैंड स्टैक मिलकर एक 'राष्ट्रीय लैंड स्टैक' (National Land Stack) का निर्माण करेंगे।
- यूनिवर्सल भू-आधार (ULPIN): देश के प्रत्येक भू-खंड को 14-अंकों का एक यूनिक आइडेंटिफायर (Unique Land Parcel Identification Number) प्रदान किया जाएगा, जिससे संपत्ति की स्पष्ट पहचान स्थापित होगी और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
- पंजीकरण सेवा केंद्र (RSKs): पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर अधिक भीड़-भाड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को डिजिटल कतार प्रबंधन और नागरिक-अनुकूल सुविधाओं के साथ आधुनिक 'पंजीकरण सेवा केंद्रों' में बदला जाएगा।
- पेपरलेस राजस्व अदालतें (Paperless Revenue Courts): राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) को सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा ताकि म्यूटेशन मुकदमों का निपटारा तेजी से हो सके।
- अर्बन लैंड मैपिंग (NAKSHA): शहरी क्षेत्रों में जीआईएस-आधारित भूमि अभिलेख तैयार करके अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड (UrPro Cards) जारी किए जाएंगे।
- वित्तपोषण व्यवस्था: यह योजना 100% केंद्रीय वित्तपोषण के साथ PFMS के माध्यम से चरणबद्ध और प्रदर्शन-आधारित तरीके से लागू की जाएगी।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
संस्थागत ऋण तक आसान पहुंच: एकीकृत रिकॉर्ड से किसानों और संपत्ति मालिकों को बिना सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाए आसानी से संस्थागत ऋण (institutional credit) प्राप्त हो सकेगा।
पुश्तैनी विवादों में कमी: ऐतिहासिक पंजीकरण अभिलेखों की डिजिटल स्कैनिंग और रिपॉजिटरी से विरासत के अधिकारों की सुरक्षा होगी और अदालती मुकदमों में भारी कमी आएगी।
प्रश्न 1. हाल ही में शुरू किए गए 'डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) 3.0' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अनुमोदित 100% केंद्रीय वित्तपोषित एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
2. इसके अंतर्गत प्रत्येक भू-खंड को 14-अंकों का एक विशिष्ट पहचान अंक 'भू-आधार' (ULPIN) प्रदान किया जाएगा।
3. यह कार्यक्रम अलग-अलग स्तर पर डिजिटलीकरण के स्थान पर जीआईएस-आधारित एकीकृत 'राष्ट्रीय लैंड स्टैक' स्थापित करने पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: सभी तीनों कथन सही हैं। DILRMP 3.0 ₹565.50 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ 100% केंद्रीय वित्तपोषित योजना है। यह प्रत्येक भू-खंड को 14-अंकीय भू-आधार (ULPIN) आवंटित करती है तथा राज्यों के डेटासेट को जोड़कर एक एकीकृत 'राष्ट्रीय लैंड स्टैक' का निर्माण करती है।
2. असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र के जिला-स्तरीय अनुमान (ASUSE 2025)
संदर्भ (Context)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE 2025) के आधार पर पहली बार भारत के असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र के जिला-स्तरीय अनुमान जारी किए हैं। यह सर्वेक्षण 757 जिलों (नमूना ढाँचे में उपलब्ध 770 में से) को कवर करता है।
मुख्य विवरण (Highlights)
आर्थिक गतिविधियों का क्षेत्रीय संकेंद्रण:
- गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की संख्या के आधार पर शीर्ष 50 जिले देश के कुल असंगठित प्रतिष्ठानों, कार्यबल और सकल मूल्य वर्धित (GVA) का लगभग एक-तिहाई (1/3rd) हिस्सा संचालित करते हैं।
- शीर्ष 10 जिले (जो कुल GVA और प्रतिष्ठानों का ~1/10वां हिस्सा हैं) गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं।
- केवल 16 जिलों में प्रति जिला 5 लाख से अधिक असंगठित प्रतिष्ठान दर्ज किए गए हैं।
उत्पादकता प्रदर्शन (Productivity Performance):
- 280 जिलों में प्रति कार्यकर्ता GVA अखिल भारतीय औसत (₹1,56,539) से अधिक है, जो उच्च आर्थिक उत्पादकता को दर्शाता है।
- 331 जिलों में प्रति कार्यकर्ता GVA ₹1 लाख से ₹1.5 लाख के बीच अनुमानित है।
महिला उद्यमिता व कार्यबल (Female Participation):
- 237 जिलों में असंगठित क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी कम से कम एक-तिहाई (33.3%) है, जबकि 25 जिलों में यह 50% से अधिक है।
- महिला नेतृत्व वाले प्रतिष्ठानों और महिला कार्यबल की उच्चतम हिस्सेदारी वाले शीर्ष जिले तेलंगाना, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में हैं। मिजोरम के प्रत्येक जिले में कम से कम 50% प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में हैं।
महत्व (Strategic Significance)
लक्षित नीति निर्माण (Evidence-based Policymaking): जिला-स्तरीय सूक्ष्म डेटा से राज्यों के भीतर मौजूद प्रादेशिक विषमताओं (regional disparities) को पहचानना और स्थानीय स्तर पर रोजगार व कौशल विकास की लक्षित योजनाएं बनाना संभव होगा।
प्रश्न 2. असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र के जिला-स्तरीय अनुमान (ASUSE 2025) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा पहली बार जारी किया गया है और यह 757 जिलों को कवर करता है।
2. देश के केवल 16 जिलों में प्रति जिला 5 लाख से अधिक असंगठित प्रतिष्ठान दर्ज किए गए हैं।
3. सर्वेक्षण के अनुसार, मिजोरम के प्रत्येक जिले में कम से कम 50% असंगठित प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: सभी तीनों कथन सही हैं। NSO (MoSPI) ने पहली बार ASUSE 2025 के आधार पर जिला-स्तरीय अनुमान जारी किए हैं, जो 757 जिलों को कवर करते हैं। केवल 16 जिलों में 5 लाख से अधिक असंगठित प्रतिष्ठान दर्ज हैं। साथ ही, मिजोरम के हर जिले में कम से कम आधे प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में पाए गए हैं।
3. उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियमावली, 2026
संदर्भ (Context)
उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 की अधिसूचना जारी की है। ये नए संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
मुख्य विवरण (Highlights)
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) से अनिवार्य एकीकरण: प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई के लिए NCH की अभिसरण (convergence) प्रक्रिया में भागीदार बनना अनिवार्य किया गया है। वर्ष 2025 में NCH को प्राप्त कुल 17.71 लाख शिकायतों में से 29% (5.11 लाख से अधिक) केवल ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।
- डार्क पैटर्न (Dark Patterns) पर रोक: ई-कॉमर्स संस्थाओं को 'डार्क पैटर्न की रोकथाम के दिशानिर्देश 2023' का अनुपालन करना होगा, वार्षिक स्व-लेखापरीक्षा (yearly self-audit) करनी होगी और अनुपालन प्रमाणपत्र प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
- मूल्य कटौती पारदर्शिता (Price Reductions): मूल्य में कमी की घोषणा करते समय वर्तमान कम कीमत के साथ 'पूर्व मूल्य' (Prior Price) भी प्रदर्शित करना होगा। 'पूर्व मूल्य' का अर्थ घोषणा से पूर्व के 30 दिनों के दौरान न्यूनतम प्रस्तावित मूल्य होगा।
- खोज परिणामों में हेरफेर पर प्रतिबंध: ई-कॉमर्स संस्थाएं सर्च एल्गोरिदम में ऐसा बदलाव नहीं करेंगी जो उपयोगकर्ताओं को गुमराह करे या खोज परिणामों की प्रासंगिकता को प्रभावित करे। प्रायोजित लिस्टिंग (sponsored listings) का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक होगा।
- असंगत बंडल शुल्क (Bundled Fees): प्लेटफॉर्म से असंबद्ध सेवाओं के लिए उपभोक्ता से कोई अप्रत्यक्ष या बंडल शुल्क नहीं लिया जा सकेगा (वफादारी/सदस्यता कार्यक्रमों के अपवाद को छोड़कर)।
- उत्पाद विवरण व आयातित सामान: विक्रेता को उत्पाद की 'बेस्ट बिफोर/यूज बिफोर' तिथि, रिटर्न/रिफंड, वारंटी और आयातित सामान के लिए आयातक विवरण व मूल देश (Country of Origin) की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।
महत्व (Strategic Significance)
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और उपभोक्ता सुरक्षा का संतुलन: यह नियामक ढांचा डिजिटल मार्केटप्लेस में निष्पक्ष व्यापार पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों और अनैतिक डिजिटल तकनीकों से सुरक्षित बनाता है।
प्रश्न 3. उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियमावली, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
1. संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई का राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) के साथ अभिसरण (convergence) अनिवार्य किया गया है।
2. मूल्य में कटौती प्रदर्शित करते समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को 'पूर्व मूल्य' के रूप में पिछले 1 वर्ष के दौरान की न्यूनतम कीमत प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
3. ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए डार्क पैटर्न की रोकथाम हेतु वार्षिक स्व-लेखापरीक्षा (yearly self-audit) करना और उसका प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 3
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 3 सही हैं। ई-कॉमर्स संस्थाओं का NCH के साथ एकीकरण अनिवार्य है। साथ ही, डार्क पैटर्न के अनुपालन हेतु वार्षिक स्व-लेखापरीक्षा आवश्यक बनाई गई है। कथन 2 गलत है, क्योंकि 'पूर्व मूल्य' (Prior Price) की गणना घोषणा से पूर्व के 30 दिनों के दौरान (न कि 1 वर्ष) पेश की गई न्यूनतम कीमत के आधार पर की जाएगी।
4. निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु (Prelims Focus)
DILRMP 3.0 का परिव्यय (₹565.50 करोड़, 2026-2031) व 100% केंद्रीय वित्तपोषण; ULPIN की संख्या (14-अंकीय भू-आधार); NAKSHA और UrPro कार्ड; ASUSE 2025 के जिला अनुमान जारीकर्ता संस्था (NSO, MoSPI); शीर्ष 50 जिलों का असंगठित GVA व प्रतिष्ठानों में योगदान (~1/3rd); उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियमावली 2026 की कार्यान्वयन तिथि (1 जनवरी 2027); पूर्व मूल्य निर्धारण की 30-दिवसीय अवधि।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper II & III - Governance, DPI & Economy)
- भूमि प्रशासन को 'राष्ट्रीय लैंड स्टैक' और DPI से जोड़कर कृषि ऋण व ग्रामीण 'ईज ऑफ लिविंग' को सुदृढ़ करने की रणनीति।
- उप-राज्य (जिला) स्तरीय आर्थिक डेटा के माध्यम से असंगठित क्षेत्र की उत्पादकता और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने का नीतिगत रोडमैप।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था में 'डार्क पैटर्न' और एल्गोरिद्मिक हेरफेर को नियंत्रित करने में ई-कॉमर्स (संशोधन) नियमों का प्रभाव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: DILRMP 3.0 के तहत ULPIN क्या है?
उत्तर: ULPIN (भू-आधार) देश के प्रत्येक भू-खंड को दिया जाने वाला 14-अंकों का यूनिक पहचान संख्या है, जो संपत्ति की स्पष्ट पहचान स्थापित करता है और भूमि धोखाधड़ी पर रोक लगाता है।
प्रश्न: ASUSE 2025 का जिला-स्तरीय सर्वेक्षण किस संस्था द्वारा जारी किया गया है?
उत्तर: यह सर्वेक्षण सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया गया है, जो देश के 757 जिलों को कवर करता है।
प्रश्न: उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियमावली 2026 कब से लागू होगी?
उत्तर: यह संशोधित नियमावली 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी और इसके तहत NCH अभिसरण, डार्क पैटर्न रोकथाम तथा मूल्य पारदर्शिता जैसे प्रावधान अनिवार्य किए गए हैं।
प्रश्न: 'पूर्व मूल्य' (Prior Price) की गणना कैसे की जाएगी?
उत्तर: 'पूर्व मूल्य' का अर्थ मूल्य कटौती की घोषणा से पूर्व के 30 दिनों के दौरान प्रस्तावित न्यूनतम कीमत होगा, जिसे मौजूदा कीमत के साथ प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
