विषय सूची (Table of Contents)
- वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 और कौशल विकास का वैश्विक विस्तार: 11 नए कौशलों में भारत का पदार्पण, वैश्विक रैंकिंग में सुधार और औद्योगिक साझेदारी।
(GS Paper II: शासन व्यवस्था - मानव संसाधन विकास एवं कौशल नीतियां; GS Paper III: रोजगार एवं औद्योगिक प्रतिस्पर्धा) - प्रथम इनोप्रॉम इंडिया 2026 और एनआईसीडीसी (NICDC) का औद्योगिक इकोसिस्टम: भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, ₹9.45 लाख करोड़ का व्यापार लक्ष्य, स्मार्ट सिटीज और डिजिटल लॉजिस्टिक्स।
(GS Paper III: बुनियादी ढांचा - औद्योगिक गलियारे, निवेश एवं विनिर्माण; GS Paper II: द्विपक्षीय संबंध) - उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर मंथन' का शुभारंभ: दीप महासागर मिशन (DOM), स्वदेशी समुद्री अनुसंधान और 'सागर कन्या' का प्रतिस्थापन।
(GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - स्वदेशी तकनीक, दीप महासागर मिशन एवं नीली अर्थव्यवस्था)
1. वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 और कौशल विकास का वैश्विक विस्तार
संदर्भ (Context)
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के नेतृत्व में भारत 22 से 27 सितंबर 2026 तक शंघाई (चीन) में आयोजित होने वाली 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता (48th WorldSkills Competition) में ग्यारह (11) नए कौशल क्षेत्रों में पहली बार पदार्पण करने जा रहा है। टीम स्किल इंडिया 64 में से 63 कौशलों में कुल 70 प्रतियोगियों के सबसे बड़े और विविध दल के साथ भाग लेगी।
मुख्य विवरण (Technical Highlights)
11 नई कौशल श्रेणियां: भारत जिन 11 नए क्षेत्रों में पहली बार भाग ले रहा है, वे हैं — डेंटल प्रोस्थेटिक्स, डिजिटल इंटरेक्टिव मीडिया डिजाइन, इंटेलिजेंट सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, लैंडस्केप गार्डनिंग, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी, रिटेल सेल्स, मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS/Drones), औद्योगिक यांत्रिकी, सॉफ्टवेयर परीक्षण, भारी वाहन प्रौद्योगिकी, और विमान रखरखाव (Aircraft Maintenance)।
प्रमुख नए कौशलों का तकनीकी फोकस:
- इंटेलिजेंट सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी: एआई-सक्षम निगरानी (AI-enabled surveillance), इंटेलिजेंट सेंसर और स्वचालित प्रतिक्रिया प्रणालियों के माध्यम से परिसंपत्तियों की सुरक्षा।
- ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी: प्रकाश और विद्युत विज्ञान का एकीकरण, जिसका उपयोग उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और संचार प्रणालियों में होता है।
- मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS): कृषि, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और स्वायत्त निगरानी में ड्रोन प्रौद्योगिकियों का अनुप्रयोग।
- विमान रखरखाव: एयरवर्थनेस प्रमाणन (airworthiness certification), यांत्रिक व विद्युत प्रणालियों का सूक्ष्म निरीक्षण और सुरक्षा अनुपालन।
- डेंटल प्रोस्थेटिक्स: डेंटल क्राउन, डेंचर और इम्प्लांट्स का शुद्धता से निर्माण।
वैश्विक प्रदर्शन में प्रगति की प्रक्षेपवक्र (Ranking Trajectory)
वर्ष 2015 के वर्ल्डस्किल्स में भारत की रैंकिंग 29वीं थी, जो 2024 में सुधरकर 13वीं रैंक पर आ गई। भारत ने वर्ल्डस्किल्स एशिया 2025 में 8वां स्थान हासिल किया और ताइपे कैपिटल कप 2026 में 5 पदक जीते हैं।
औद्योगिक व संस्थागत साझेदार: जीटीटीसी (GTTC) कर्नाटक, नामटेक (NAMTECH) गांधीनगर, बेनेट यूनिवर्सिटी, टाइटन (तनिष्क), रिलायंस ट्रेंड्स, शॉपर्स स्टॉप, सैनी हेवी इंडस्ट्री और प्रखर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस जैसे अग्रणी संस्थान इन प्रतियोगियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रशिक्षित कर रहे हैं।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
पारंपरिक से आधुनिक कौशल की ओर परिवर्तन: पारंपरिक व्यवसायों से निकलकर एआई, ड्रोन, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस रखरखाव जैसे भविष्योन्मुखी (future-facing) क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करना भारत को "ग्लोबल स्किल हब" (Global Hub for Skilled Talent) बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
वैश्विक उद्योग मानकों के साथ संरेखण: एमएसडीई सचिव देबाश्री मुखर्जी के अनुसार, यह भागीदारी भारतीय युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ बेंचमार्क करने और भविष्य के कार्यस्थल (future of work) की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।
प्रश्न 1. वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारत की भागीदारी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में पहली बार 11 नई कौशल श्रेणियों (जैसे डेंटल प्रोस्थेटिक्स, मानवरहित हवाई प्रणाली और विमान रखरखाव) में पदार्पण कर रहा है।
2. वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत की रैंकिंग में सुधार दर्ज किया गया है, जहाँ भारत 2015 की 29वीं रैंक से बढ़कर 2024 में 13वें स्थान पर पहुँच गया है।
3. इस भागीदारी का नेतृत्व नीति आयोग द्वारा भारतीय नौसेना के सहयोग से किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। भारत वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में 11 नई श्रेणियों में पहली बार भाग ले रहा है। साथ ही, भारत की वैश्विक रैंकिंग 2015 में 29वीं से सुधरकर 2024 में 13वीं हो गई है। कथन 3 गलत है, क्योंकि इस पूरी भागीदारी का नेतृत्व कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा किया जा रहा है, न कि नीति आयोग द्वारा।
2. प्रथम इनोप्रॉम इंडिया 2026 और एनआईसीडीसी का औद्योगिक इकोसिस्टम
संदर्भ (Context)
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) ने भारत मंडपम (नई दिल्ली) में 9 से 11 सितंबर 2026 के दौरान आयोजित प्रथम 'इनोप्रॉम इंडिया 2026' (INNOPROM India 2026) में अपनी नेक्स्ट-जनरेशन औद्योगिक परियोजनाओं का प्रदर्शन किया है।
मुख्य विवरण (Highlights)
भारत-रूस आर्थिक लक्ष्य: भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹9.45 लाख करोड़ ($100 बिलियन) तक पहुँचाने का रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें विनिर्माण, निवेश, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्लस्टरों पर विशेष बल दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP):
- यह कार्यक्रम 11 औद्योगिक गलियारों, 13 राज्यों और 20 ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज में फैला हुआ है।
- यह पूरी परियोजना 19,878 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें ₹5.35 लाख करोड़ ($56.6 बिलियन) के निवेश की संभावना और 14 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की क्षमता है।
- अब तक 469 औद्योगिक भूखंड (2,109 हेक्टेयर) आवंटित किए जा चुके हैं, जिनसे ₹2.21 लाख करोड़ का निवेश संबद्ध है।
4 विकसित औद्योगिक स्मार्ट शहर:
- धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (Dholera SIR), गुजरात
- शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र (AURIC), महाराष्ट्र
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप विक्रम उद्योगपुरी, मध्य प्रदेश
अन्य संबद्ध राष्ट्रीय योजनाएं और प्लेटफॉर्म
भव्य (BHAVYA - भारत औद्योगिक विकास योजना): एनआईसीडीसी वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 के दौरान ₹33,660 करोड़ के परिव्यय से 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास कर रहा है।
पीएम मित्र (PM MITRA) टेक्सटाइल पार्क: कपड़ा मंत्रालय के तहत 7 एकीकृत टेक्सटाइल पार्कों का प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में प्रबंधन।
आईसीएलपी (ICLP) और डिजिटल लॉजिस्टिक्स: जीआईएस-आधारित 'औद्योगिक कॉरिडोर भूमि मंच' (ICLP) 4,000 से अधिक पार्कों की जानकारी देता है। वहीं, एलडीबी (Logistics Data Bank) ने 10 करोड़ से अधिक एग्जिम (EXIM) कंटेनरों को ट्रैक किया है। लॉजिस्टिक्स दृश्यता बढ़ाने के लिए 'कोयला शक्ति' एनालिटिक्स डैशबोर्ड विकसित किया गया है।
महत्व (Strategic Significance)
प्लग-एंड-प्ले विनिर्माण और पीएम गतिशक्ति: एनआईसीडीसी द्वारा विकसित शहर प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, सतत पावर/जल आपूर्ति और पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से लैस हैं।
रूसी औद्योगिक क्लस्टर की संभावना: एनआईसीडीसी ने मास्को सरकार और रूसी हितधारकों के साथ चर्चा के दौरान एनआईसीडीसी स्मार्ट सिटी (जैसे आंध्र प्रदेश में कृष्णपटनम या कर्नाटक में तुमकुरु) में एक समर्पित रूसी औद्योगिक क्लस्टर (Russian Industrial Cluster) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाएगा।
प्रश्न 2. प्रथम इनोप्रॉम इंडिया 2026 और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹9.45 लाख करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
2. एनआईसीडीपी 11 औद्योगिक गलियारों, 13 राज्यों और 20 ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज में फैला हुआ है।
3. 'भव्य' (BHAVYA) योजना के तहत एनआईसीडीसी वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक ₹33,660 करोड़ के परिव्यय से 50 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास कर रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। भारत-रूस 2030 व्यापार लक्ष्य ₹9.45 लाख करोड़ है, और एनआईसीडीपी वास्तव में 11 गलियारों, 13 राज्यों तथा 20 ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटीज में फैला है। कथन 3 गलत है, क्योंकि भव्य (BHAVYA) योजना के तहत ₹33,660 करोड़ के परिव्यय से 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास किया जा रहा है, न कि 50 का।
3. उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर मंथन' का शुभारंभ
संदर्भ (Context)
समुद्र विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी में स्वदेशी आत्मनिर्भरता को रेखांकित करते हुए 9 सितंबर 2026 को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में उन्नत महासागर अनुसंधान पोत (यार्ड 3041) 'ओआरवी सागर मंथन' (ORV Sagar Manthan) को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया, और उनकी पत्नी श्रीमती मंजू सिंह ने परंपरा के अनुसार पोत का नामकरण किया।
तकनीकी व मुख्य विवरण (Technical Highlights)
निर्माता व मालिक: इस अत्याधुनिक पोत का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए किया गया है।
दीप महासागर मिशन (DOM) और लागत: केंद्र सरकार के फ्लैगशिप 'दीप महासागर मिशन' के वर्टिकल-4 (गहन महासागर सर्वेक्षण और अन्वेषण) के तहत इस पोत का निर्माण लगभग ₹840 करोड़ की लागत से किया गया है।
सेवा अवधि व परिचालन क्षेत्र: यह 30 वर्षों की सेवा अवधि के साथ दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) सहित विषम और चरम समुद्री वातावरण में कार्य करने में सक्षम एक सर्व-मौसम अनुकूल (all-weather) बहुविषयक मंच है।
प्रतिष्ठित पोत का प्रतिस्थापन: ओआरवी सागर मंथन धीरे-धीरे 43 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर कन्या' (जिसे 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था) का स्थान लेगा।
उन्नत उपकरण व अनुसंधान दायरा:
- इसमें डायनामिक पोजिशनिंग, मल्टीबीम बाथिमेट्री, मल्टीचैनल भूकंपीय प्रणाली, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग, वेदर रडार, ड्रॉप कील्स और स्वायत्त पानी के नीचे वाहनों (AUV) व रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROV) की तैनाती की सुविधाएं हैं।
- यह हिंद महासागर के मध्य-महासागरीय कटकों में बहु-धातु हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजों (multi-metal hydrothermal sulphide mineralisation) की पहचान करने, सीटीडी प्रोफाइलिंग करने और वायुमंडलीय अवलोकन एकत्र करने में सहायता करेगा।
दोहरी श्रेणी प्रमाणन: यह पोत इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) और अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग (ABS) द्वारा दोहरे वर्ग प्रमाणन के तहत निर्मित है। इसका अंतिम कमीशनिंग 2028 तक निर्धारित है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
विदेशों से निर्भरता की समाप्ति: पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार के अनुसार, अनुसंधान प्लेटफार्मों को विदेशों से खरीदने के बजाय घरेलू स्तर पर निर्माण करने की नीति में आया यह बदलाव भारत की स्वदेशी तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है।
वैश्विक महासागरीय भू-राजनीति और जलवायु डेटा: ध्रुवीय ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्री प्रभाव और जलवायु गतिशीलता पर ओआरवी सागर मंथन द्वारा एकत्र ठोस डेटा भारत को वैश्विक आपदा निवारण और महासागरीय भू-राजनीति में अग्रणी भूमिका प्रदान करेगा।
प्रश्न 3. हाल ही में लॉन्च किए गए उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर मंथन' (ORV Sagar Manthan) के संबंध में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
1. इस पोत का निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड' (GRSE) द्वारा राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए किया गया है।
2. इसे भारत सरकार के 'दीप महासागर मिशन' (Deep Ocean Mission) के वर्टिकल-4 के अंतर्गत लगभग ₹840 करोड़ की लागत से निर्मित किया गया है।
3. यह पोत 43 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर कन्या' का स्थान लेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
व्याख्या: सभी तीनों कथन सही हैं। ओआरवी सागर मंथन को GRSE द्वारा NCPOR (MoES) के लिए बनाया गया है। इसे दीप महासागर मिशन के तहत लगभग ₹840 करोड़ में निर्मित किया गया है। यह 1983 में जर्मनी से अधिग्रहित किए गए 43 साल पुराने पोत 'ओआरवी सागर कन्या' की जगह लेगा।
4. निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु (Prelims Focus)
48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता का स्थल (शंघाई, चीन); भारत द्वारा पदार्पण की जाने वाली 11 नई कौशल श्रेणियां; इनोप्रॉम इंडिया 2026 की मेजबानी (भारत मंडपम, नई दिल्ली); भारत-रूस 2030 व्यापार लक्ष्य (₹9.45 लाख करोड़ / $100 बिलियन); एनआईसीडीसी के 4 विकसित स्मार्ट शहर (धोलेरा, औरिक, ग्रेटर नोएडा, विक्रम उद्योगपुरी); भव्य (BHAVYA) योजना का बजट (₹33,660 करोड़); ओआरवी सागर मंथन का निर्माण (GRSE कोलकाता); दीप महासागर मिशन का वर्टिकल-4 और लागत (₹840 करोड़); सागर कन्या का प्रतिस्थापन।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper II & III - Skills, Infrastructure, Ocean Mission)
- 'स्किल इंडिया मिशन' के तहत पारंपरिक व्यवसायों से निकलकर एआई, ड्रोन और एयरोस्पेस जैसे उभरते कौशलों (future of work) में युवाओं को प्रशिक्षित करने की कूटनीतिक आवश्यकता।
- राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) और पीएम गतिशक्ति के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र में 'प्लग्ड-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका।
- 'दीप महासागर मिशन' (DOM) के अंतर्गत स्वदेशी अनुसंधान पोतों के निर्माण का भारत की समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था और जलवायु डेटा कूटनीति पर रणनीतिक प्रभाव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: भारत वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में कितनी नई कौशल श्रेणियों में पहली बार भाग ले रहा है?
उत्तर: भारत 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता, शंघाई (चीन) में डेंटल प्रोस्थेटिक्स, मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS) और विमान रखरखाव सहित 11 नई तकनीक-उन्मुख श्रेणियों में पहली बार पदार्पण कर रहा है।
प्रश्न: इनोप्रॉम इंडिया 2026 में भारत-रूस व्यापार का लक्ष्य क्या रखा गया है?
उत्तर: भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹9.45 लाख करोड़ ($100 बिलियन) तक पहुँचाने का रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रश्न: ओआरवी सागर मंथन का निर्माण किसने और किसके लिए किया है?
उत्तर: ओआरवी सागर मंथन का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए किया गया है।
प्रश्न: ओआरवी सागर मंथन किस पुराने पोत का स्थान लेगा?
उत्तर: यह 1983 में जर्मनी से खरीदे गए 43 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर कन्या' का स्थान लेगा।

