विषय सूची (Table of Contents)
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और संवैधानिक प्रावधान: (GS Paper II: शासन व्यवस्था, संविधान - संघ की कार्यपालिका और मंत्रिपरिषद)।
- सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल: (GS Paper I: भारतीय संस्कृति - प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूप, साहित्य और वास्तुकला; GS Paper II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध)।
1. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और संवैधानिक प्रावधान: परीक्षा सुधार और जवाबदेही की दिशा में एक कदम
संदर्भ (Context)
25 जुलाई 2026 को भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की विफलताओं के खिलाफ देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों और जवाबदेही की मांग के बीच आया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका इस्तीफा प्राप्त कर लिया है, जो देश के शिक्षा क्षेत्र और शासन में एक बड़ी राजनीतिक घटना है।
विवरण (Highlights)
इस्तीफे की तिथि: 25 जुलाई 2026।
संवैधानिक प्रक्रिया: राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के परामर्श पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत श्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है।
अतिरिक्त प्रभार: राष्ट्रपति के निर्देशानुसार, कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है।
छात्र विरोध: प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय और NTA पर पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया था।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
संवैधानिक जवाबदेही: यह इस्तीफा कार्यपालिका की लोकतांत्रिक जवाबदेही को दर्शाता है। अनुच्छेद 75(3) के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जहाँ प्रत्येक मंत्री से अपने विभाग के प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेने की अपेक्षा की जाती है।
परीक्षा सुधारों में तेजी: नेतृत्व परिवर्तन से भारत के परीक्षा ढांचे में सुधार, NTA की निगरानी को मज़बूत करने और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सार्वजनिक विश्वास बहाल करने की प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
अनुच्छेद 75 का संवैधानिक विश्लेषण (Constitutional Analysis)
अनुच्छेद 75(1): मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
अनुच्छेद 75(2): मंत्री राष्ट्रपति के 'प्रसादपर्यंत' (Pleasure) पद धारण करते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति किसी भी समय मंत्री को हटा सकते हैं या उनका इस्तीफा स्वीकार कर सकते हैं।
अनुच्छेद 75(4): पद ग्रहण करने से पहले प्रत्येक मंत्री को राष्ट्रपति के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ लेनी होती है।
2. सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल: भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मान्यता
संदर्भ (Context)
25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित "सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल" को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। यह सम्मान पाने वाली यह भारत की 45वीं धरोहर बन गई है। यह उपलब्धि भारत की प्राचीन वास्तुकला, ऐतिहासिक निरंतरता और वैश्विक आध्यात्मिक महत्व को प्रदर्शित करती है।
मुख्य विवरण (Technical Highlights)
स्थल के मुख्य भाग: इस धरोहर में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं— चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (धमेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ)।
ऐतिहासिक कालखंड: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई खुदाई से पता चलता है कि यहाँ 5वीं-4थी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी ईस्वी तक (लगभग 16 सदियों तक) निरंतर मानव बस्तियां और धार्मिक गतिविधियां मौजूद थीं।
चयन के मानदंड: सारनाथ को यूनेस्को के मानदंड (iii) (असाधारण सांस्कृतिक परंपरा का प्रमाण) और मानदंड (vi) (महत्वपूर्ण घटनाओं और जीवित परंपराओं से सीधा जुड़ाव) के तहत नामांकित किया गया है।
प्रक्रिया: इस स्थल को 1998 में संभावित सूची में शामिल किया गया था और जनवरी 2025 में आधिकारिक प्रस्ताव भेजा गया था।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy): विश्व धरोहर का यह दर्जा जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार और वियतनाम जैसे बौद्ध बाहुल्य देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों और सॉफ्ट पावर को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
वैश्विक रैंकिंग: इस नई प्रविष्टि के साथ, भारत अब दुनिया भर में छठे और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है जहाँ सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं।
तीर्थयात्रा नेटवर्क: सारनाथ के शामिल होने के बाद, बुद्ध के जीवन से जुड़े चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से तीन (लुंबिनी, महाबोधि मंदिर और सारनाथ) अब यूनेस्को की सूची में शामिल हो चुके हैं।
संस्थागत पक्ष
सतत पर्यटन (Sustainable Tourism): सरकार ने इस स्थल की प्रामाणिकता और अखंडता बनाए रखने के लिए बफर ज़ोन में अनियोजित विकास को रोकने और पर्यटन के टिकाऊ प्रबंधन की प्रतिबद्धता दोहराई है।
ASI की भूमिका: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पिछले 150 से अधिक वर्षों से यहाँ खुदाई और संरक्षण का कार्य कर रहा है, जिसने आधुनिक भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष) की खोज में भी भूमिका निभाई।
संरक्षण प्रयास: वर्तमान में यहाँ ईंटों से बने मन्नत वाले स्तूपों के वैज्ञानिक संरक्षण का कार्य प्रगति पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
NEET सहित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की विफलताओं को लेकर देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच 25 जुलाई 2026 को उन्होंने इस्तीफा दिया, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीकार कर लिया।
2. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किस संवैधानिक प्रावधान के तहत स्वीकार किया गया?
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के परामर्श पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया।
3. शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अब किसके पास है?
राष्ट्रपति के निर्देशानुसार, कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है।
4. सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में कब और कहां शामिल किया गया?
25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में "सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल" को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जो भारत की 45वीं धरोहर है।
5. सारनाथ की यूनेस्को सूची में शामिल होने के बाद भारत की वैश्विक रैंकिंग क्या है?
इस नई प्रविष्टि के साथ भारत अब दुनिया भर में सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थलों वाले देशों में छठे स्थान पर और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
MCQ
प्रश्न 1
"सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल" को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इस धरोहर में मुख्य रूप से चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (जैसे धमेक और धर्मराजिका स्तूप) शामिल हैं।
3. इस प्रविष्टि के साथ, भारत अब दुनिया भर में सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थलों वाले देशों में चौथे स्थान पर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: 25 जुलाई 2026 को सारनाथ को भारत की 45वीं विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी गई।
कथन 2 सही है: इस सूची में शामिल स्थल के दो प्रमुख भाग हैं—चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक अवशेष (धमेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ)।
कथन 3 गलत है: इस सूची में 45 स्थलों के साथ भारत दुनिया भर में छठे (6th) और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
प्रश्न 2
केंद्रीय मंत्रिपरिषद और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
3. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद, प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 1 और 3
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 3)
कथन 1 सही है: राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के परामर्श पर अनुच्छेद 75(2) के अंतर्गत श्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, न कि राज्यसभा के प्रति।
कथन 3 सही है: राष्ट्रपति के निर्देशानुसार, कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा प्रभार के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है।
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