विषय सूची (Table of Contents)
- कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23): औद्योगिक विकास के सटीक मापन हेतु आधार वर्ष का आधिकारिक संशोधन और संरचनात्मक सुधार। (GS Paper III: अर्थव्यवस्था - औद्योगिक नीति और बुनियादी ढांचा)।
- भारतीय शहरों में अर्बन हीट आइलैंड (UHI) प्रभाव का शमन: (GS Paper III: पर्यावरण - प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन; GS Paper I: भूगोल - शहरीकरण की समस्याएँ)।
- कौशल भारत मिशन (Skill India Mission): पीएमकेवीवाई (PMKVY), जेएसएस (JSS) और नैप्स (NAPS) के रोजगार परिणामों और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन। (GS Paper II: सामाजिक न्याय - मानव संसाधन विकास; GS Paper III: अर्थव्यवस्था - रोजगार)।
- जनजातीय क्षेत्रों में कौशल केंद्रों की स्थापना: डीएजेजीयूए (DAJGUA) और कौशल प्रयोगशालाओं के माध्यम से जनजातीय समुदायों का आजीविका संवर्धन। (GS Paper II: शासन - कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं)।
- राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (मेरा गांव मेरी धरोहर): ग्राम स्तर पर भारत की लोक विरासत, कलाकारों और सांस्कृतिक संपदा का व्यापक दस्तावेजीकरण। (GS Paper I: भारतीय संस्कृति - कला रूप और सांस्कृतिक संसाधन)।
- स्माइल (SMILE) योजना: (GS Paper II: सामाजिक न्याय - कमजोर वर्गों का संरक्षण)।
1. कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23): औद्योगिक विकास के मापन में संरचनात्मक सुधार
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA - Office of the Economic Adviser) ने 20 जुलाई 2026 को आधार वर्ष 2022-23 के साथ कोर उद्योगों के सूचकांक (Index of Core Industries - ICI) की संशोधित श्रृंखला जारी की है। यह नई श्रृंखला मौजूदा आधार वर्ष 2011-12 का स्थान लेगी। आधार वर्ष में यह परिवर्तन भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती औद्योगिक संरचना को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने और सांख्यिकीय डेटा को अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए किया गया है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (संशोधित श्रृंखला की विशेषताएं)
- नौवें उद्योग का समावेश: औद्योगिक विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए 'लौह अयस्क' (Iron Ore) को एक नए आइटम (item) के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही कोर उद्योगों की कुल संख्या अब आठ (8) से बढ़कर नौ (9) हो गई है।
- इस्पात सूचकांक में बदलाव: स्टील इंडेक्स के संकलन के लिए अब 'शुद्ध उत्पादन' (Net Production) के स्थान पर 'सकल उत्पादन डेटा' (Gross Production Data) का उपयोग किया गया है ताकि इसे औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुरूप बनाया जा सके।
- दोहरी गणना का समाधान: कोयला क्षेत्र में 'कोयला मिडलिंग' और 'वॉश किए गए कोयले' को हटाकर केवल 'कच्चे कोयले' (Raw Coal) को बरकरार रखा गया है ताकि दोहरी गणना (Double Counting) की समस्या को समाप्त किया जा सके।
- भार (Weightage) का निर्धारण: नई श्रृंखला के भार IIP (2022-23) श्रृंखला के संबंधित मदों के भार से प्राप्त किए गए हैं, जिन्हें 100 के पैमाने पर प्रो-रटा आधार पर वितरित किया गया है।
- लिंकिंग फैक्टर: पुरानी (2011-12) और नई (2022-23) श्रृंखला के बीच तुलनात्मकता सुनिश्चित करने के लिए समग्र सूचकांक हेतु 1.47 का लिंकिंग फैक्टर निर्धारित किया गया है।
जून 2026 के अनंतिम अनुमान (Provisional Estimates)
- समग्र वृद्धि: जून 2025 की तुलना में जून 2026 में कोर उद्योगों के सूचकांक में 5.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह मई 2026 की 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।
- प्रमुख चालक: जून 2026 में समग्र वृद्धि के मुख्य चालक लौह अयस्क (43.9%), बिजली (9.8%) और सीमेंट (9.8%) रहे हैं।
- नकारात्मक वृद्धि: इस समय अंतराल में प्राकृतिक गैस, कच्चे तेल, रिफाइनरी उत्पादों और उर्वरक के क्षेत्रों में कमी दर्ज की गई है।
- त्रैमासिक प्रदर्शन: अप्रैल-जून 2026 की अवधि में संचयी वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत (Cumulative growth rate) रही है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (~1.0%) की तुलना में अधिक है।
महत्व
- तथ्यात्मक सटीकता: नया आधार वर्ष वास्तविक समय के आर्थिक रुझानों को पकड़ने में मदद करेगा, जिससे नीति निर्माताओं को औद्योगिक बुनियादी ढांचे के लिए अधिक प्रभावी योजनाएं बनाने में सहायता मिलेगी।
- बुनियादी ढांचे का मापन: चूंकि कोर उद्योग समग्र औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के लगभग 40 प्रतिशत से अधिक भार का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए ICI में सुधार सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था की विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक संप्रभुता को मापने की प्रक्रिया को उन्नत करता है।
2. भारतीय शहरों में अर्बन हीट आइलैंड (UHI) प्रभाव का शमन: शहरी जलवायु अनुकूलनशीलता की रणनीतियाँ
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
वर्तमान में बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण 'अर्बन हीट आइलैंड' (UHI - Urban Heat Island) का प्रभाव एक गंभीर चुनौती बन गया है, जिसे कम करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA - National Disaster Management Authority) और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA - Ministry ofHousing & Urban Affairs) सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची के अनुसार, नगर नियोजन का विषय राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs - Urban local bodies) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (NDMA के दिशा-निर्देश)
- राष्ट्रीय कार्य योजना: NDMA ने 2019 में 'हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश' तैयार किए हैं। इसके तहत शहरों को उन कारकों की पहचान करने के लिए संवेदनशीलता मूल्यांकन (Vulnerability Assessment) करने की सलाह दी गई है जो UHI प्रभाव को बढ़ाते हैं।
- प्रसार और कवरेज: अब तक देश के 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों द्वारा हीट एक्शन प्लान (HAPs) तैयार किए जा चुके हैं।
- अनौपचारिक श्रमिकों का संरक्षण: NDMA ने विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स और बाहरी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें छायादार वेंडिंग ज़ोन, पेयजल सुविधाओं और काम के लचीले घंटों जैसे उपायों को HAPs में शामिल करने की सिफारिश की गई है।
महत्व (दिल्ली केस स्टडी और ICAP)
- दिल्ली SAPCC 2.0: दिल्ली ने अपने संशोधित जलवायु कार्य योजना के तहत पाया है कि सदी के मध्य तक अधिकतम तापमान में 1.5°C से 2.1°C तक की वृद्धि हो सकती है। दक्षिण दिल्ली को सबसे अधिक संवेदनशील जिला पहचाना गया है।
- शमन रणनीतियाँ: दिल्ली में कूल रूफ (Cool Roofs), कूलिंग कॉरिडोर का विकास, वेटलैंड्स का पुनरुद्धार और बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने पर बल दिया जा रहा है।
- इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP): पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी यह योजना सभी के लिए स्थायी कूलिंग (Sustainable Cooling) और थर्मल आराम प्रदान करने का एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसका लक्ष्य कूलिंग की मांग को कम करना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष (AMRUT और विशेष प्रोत्साहन)
- योजनागत हस्तक्षेप: MoHUA ने अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0 के तहत 3,458 पार्क विकसित किए हैं और 1,104 वाटरबॉडी परियोजनाओं को पूरा किया है। साथ ही 99 लाख LED स्ट्रीटलाइट्स लगाई गई हैं जिससे कार्बन उत्सर्जन में 46 लाख टन की कमी आई है।
- अमृत मित्र (AMRUT MITRA): 'वुमन फॉर ट्रीज़' पहल के तहत 2025-26 में 7.65 लाख पौधे लगाए गए हैं।
- पायलट कार्यक्रम: 'बिल्डिंग हीट रेजिलिएंट सिटीज' कार्यक्रम के तहत 12 प्रमुख शहरों (जैसे बेंगलुरु, भोपाल, गुवाहाटी) में ऊष्मा शमन का वैज्ञानिक आकलन शुरू किया गया है।
- वित्तीय सहायता: राज्यों को 'पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना' (SSASCI) के तहत स्पंज सिटी प्लानिंग और ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
3. कौशल भारत मिशन (Skill India Mission): युवाओं के सशक्तिकरण और रोजगार क्षमता का व्यापक मूल्यांकन
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (SIM) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान (JSS), और राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) जैसी योजनाओं के माध्यम से देश भर में कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। हाल ही में, अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (AJNIFM) द्वारा इन प्रमुख योजनाओं का स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन (Independent Third-Party Evaluation) किया गया है, जो इनके रोजगार परिणामों और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को रेखांकित करता है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (योजनावार प्रभाव)
- PMKVY 4.0 का प्रभाव: मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद रोजगार और स्व-रोजगार भागीदारी 26.6% से बढ़कर 45.4% हो गई है, जो 18.8 प्रतिशत अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। लगभग 41.4% एसटीटी उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण के बाद अपनी आय में वृद्धि दर्ज की है।
- जन शिक्षण संस्थान (JSS): इस योजना ने 99 प्रतिशत की समग्र सफलता दर (प्रमाणन) प्राप्त की है। इसमें 82 प्रतिशत महिला भागीदारी रही और 73 प्रतिशत लाभार्थी हाशिए पर स्थित वर्गों (SC/ST/OBC) से थे। लगभग 82 प्रतिशत छात्र प्रशिक्षण के छह महीने के भीतर आर्थिक रूप से नियोजित हो गए।
- NAPS (शिक्षुता): मूल्यांकन अवधि के दौरान 34.69 लाख प्रशिक्षुओं को शामिल किया गया है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के लागू होने से वित्तीय पारदर्शिता और पूर्वानुमान में सुधार हुआ है।
- प्लेसमेंट रिकॉर्ड: PMKVY के पहले तीन संस्करणों (1.0-3.0) में प्रमाणित 56.89 लाख उम्मीदवारों में से 24.3 लाख को प्लेसमेंट प्राप्त हुआ, जो 42.8% की दर को दर्शाता है।
महत्व (भविष्य की तैयारी)
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ: मिशन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मेकाट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
- वैश्विक साझेदारी: डीजीटी (DGT) ने IBM, Microsoft, AWS और Google जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ आधुनिक कौशल प्रशिक्षण हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा: 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (SIDH) एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रहा है जो पाठ्यक्रम खोज, नामांकन और प्रमाणन की प्रक्रियाओं को सुगम बनाता है।
संस्थागत पक्ष और सुधार
- नियामक ढांचा: तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा (TVET) में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) की स्थापना की गई है।
- पीपीपी मोड: अहमदाबाद और मुंबई में भारतीय कौशल संस्थान (IIS) सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड में स्थापित किए गए हैं।
- क्षेत्रीय कौशल परिषदें (SSCs): उद्योग जगत के नेतृत्व में 36 एसएससी की स्थापना की गई है जो कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।
4. जनजातीय क्षेत्रों में कौशल केंद्रों की स्थापना
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
भारत सरकार जनजातीय समुदायों के समग्र उत्थान और उन्हें अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' (DAJGUA) और 'प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान' (PM-JANMAN) जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों का संचालन कर रही है। इन पहलों का प्राथमिक उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में अवसंरचना, शिक्षा और आजीविका से संबंधित महत्वपूर्ण कमियों को दूर करना है। इसी क्रम में, जनजातीय आबादी के लिए उद्यमिता और कौशल विकास के अवसरों को सुलभ बनाने हेतु देश भर में 'जनजातीय कौशल केंद्रों' और आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जा रहा है।
तकनीकी और मुख्य विवरण
- जनजातीय कौशल केंद्र (TSC): जन शिक्षण संस्थान (JSS) के तहत अभिसरण पहल के माध्यम से देश के 15 राज्यों के 30 जनजातीय जिलों में 30 जनजातीय कौशल केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाएँ: 'कौशल भारत मिशन' के तहत 400 जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) और 200 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (EMRS) में कुल 1,200 कौशल प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। प्रत्येक चयनित विद्यालय में दो प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
- प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण: परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 1,200 कौशल शिक्षकों का क्षमता-निर्माण (capacity-building) किया गया है।
- कौशल हब (Skill Hubs): शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदा अवसंरचना का उपयोग करते हुए युवाओं को उद्योग-अनुकूल ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- विशिष्ट ट्रेड: प्रशिक्षण में किसान ड्रोन संचालक, पारंपरिक जनजातीय कौशल, इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन अनुरक्षण और फैशन/मेकअप आर्टिस्ट जैसे आधुनिक एवं पारंपरिक दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
महत्व
- अंतिम मील तक पहुँच (Last Mile Delivery): DAJGUA के माध्यम से 17 मंत्रालयों/विभागों द्वारा समन्वित 25 पहलों के जरिए सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में विकास की पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।
- उद्यमिता का संवर्धन: 'प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन' (PM-JVM) के तहत लघु वनोपज और स्थानीय कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन (Value Addition), ब्रांडिंग और विपणन पर ध्यान केंद्रित किया गया है ताकि जनजातीय आबादी के लिए स्थायी आजीविका सृजित की जा सके।
- डिजिटल और तकनीकी समावेशन: जनजातीय युवाओं को 'किसान ड्रोन' जैसे आधुनिक उपकरणों के संचालन में प्रशिक्षित कर उन्हें कृषि-तकनीकी (Agri-tech) क्षेत्र के अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष
- TRIFED की भूमिका: जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ट्राइफेड के माध्यम से देशभर में 4,172 वन धन विकास केंद्र (VDVK) स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे लगभग 12.48 लाख सदस्य जुड़े हुए हैं।
- आकांक्षी जिलों पर ध्यान: पीएमकेवीवाई (PMKVY) 4.0 के तहत दाहोद (गुजरात) जैसे 111 आकांक्षी जिलों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर अल्पावधि प्रशिक्षण (STT) और पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) प्रदान की जा रही है।
- पूँजीगत निवेश: इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय कौशल विकास निधि (NSDF - National Skill Development Fund) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
5. राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (मेरा गांव मेरी धरोहर): ग्रामीण विरासत का दस्तावेजीकरण
संदर्भ (Context)
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने लोकसभा में राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (NMCM) के अंतर्गत 'मेरा गांव मेरी धरोहर' (MGMD) पहल के कार्यान्वयन की अद्यतन स्थिति साझा की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण स्तर पर सांस्कृतिक संसाधनों का विस्तृत मानचित्रण करना और भारत की समृद्ध लोक विरासत को एक डिजिटल मंच प्रदान करना है।
तकनीकी/मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- ग्राम सांस्कृतिक प्रोफाइल: कलाकारों, शिल्पकारों और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतकर्ताओं से संबंधित विशिष्ट जानकारी को 'ग्राम सांस्कृतिक प्रोफाइल' के भाग के रूप में प्रलेखित किया जाता है।
- डेटाबेस की संरचना: MGMD पोर्टल पर डेटा श्रेणी-वार या राज्य-वार के बजाय ग्राम-वार (Village-wise) व्यवस्थित किया जाता है।
- दस्तावेजीकरण का दायरा: इस डेटाबेस में गांवों की लोक परंपराएं, स्थानीय कला रूप, ऐतिहासिक महत्व और अन्य सांस्कृतिक संपदाओं की विस्तृत जानकारी शामिल की जाती है।
- पंजीकरण और सहायता: मिशन में कलाकारों के सीधे पंजीकरण या उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता, बीमा या सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान नहीं है।
- प्रलेखित कला रूप: इसमें गोवा के ज़गोर लोक रंगमंच, राजस्थान की कावड़ कला, पश्चिम बंगाल के बाउल गायन और मध्य प्रदेश की गोंड कला जैसे विविध रूपों को शामिल किया गया है।
- लोक कला समूह: सीमा महतो महिला छऊ समिति (पश्चिम बंगाल) और रूपायन संस्थान (राजस्थान) जैसे सांस्कृतिक संस्थानों को भी इस दस्तावेजीकरण प्रक्रिया में सूचीबद्ध किया गया है।
प्रमुख कलाकारों और कलाओं की सूची (अनुलग्नक-I)
| कलाकार | कला रूप | राज्य |
|---|---|---|
| तुलसी वेलिंगकर | ज़गोर लोक रंगमंच | गोवा |
| सत्य नारायण सुथार | कावड़ कला | राजस्थान |
| दुर्गा बाई व्याम | गोंड कला | मध्य प्रदेश |
| अब्दुल हलीम | बाउल गायक | पश्चिम बंगाल |
| चित्तानी रामचंद्र हेगड़े | यक्षगान (बडागुटिट्टू) | कर्नाटक |
| नथुनी पासवान | पखावज वादक | उत्तर प्रदेश |
| पेरुवनम कुट्टन मारार | चेंडा (मेलम) | केरल |
सांस्कृतिक संस्थानों और लोक कला समूहों की सूची (अनुलग्नक-II)
| संस्था/समूह | कला रूप | राज्य |
|---|---|---|
| सीमा महतो महिला छऊ समिति | छऊ नृत्य | पश्चिम बंगाल |
| राजकी सपेरा मंडली | कालबेलिया, चरी, घूमर और भवई नृत्य | राजस्थान |
| वदेया ब्रदर्स | वारली चित्रकला | महाराष्ट्र |
| आदि सांस्कृतिक समूह | पोनुंग नृत्य | अरुणाचल प्रदेश |
यह डेटाबेस ग्राम-वार (Village-wise) व्यवस्थित किया जाता है ताकि भारत की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासत का एक व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) तैयार किया जा सके।
महत्व (Strategic Significance)
- सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण: यह मिशन भारत की 'अमूर्त विरासत' (Intangible Heritage) को भविष्य के लिए सुरक्षित करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो 'रणनीतिक संप्रभुता' के सांस्कृतिक आयाम को सुदृढ़ करती है।
- ग्राम-केंद्रित विकास: ग्रामीण भारत की लोक कलाओं और हस्तशिल्प का दस्तावेजीकरण करके यह मिशन स्थानीय समुदायों के गौरव और आत्मविश्वास को उन्नत करने का कार्य कर रहा है।
- भविष्य का एकीकरण: वर्तमान में इस डेटाबेस को पर्यटन, शिक्षा या कौशल विकास के साथ जोड़ने का प्रावधान नहीं है, परंतु यह 'विश्व गुरु' के रूप में भारत की सांस्कृतिक छवि को वैश्विक पटल पर रखने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।
6. स्माइल (SMILE) योजना: व्यापक पुनर्वास के माध्यम से 'भिक्षावृत्ति मुक्त भारत' की प्रतिबद्धता
संदर्भ और रणनीतिक पृष्ठभूमि
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कमजोर समुदायों के सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने हेतु आजीविका एवं उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए सहायता (SMILE - Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना कार्यान्वित की जा रही है। इस अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत 'भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास हेतु केंद्रीय क्षेत्र की योजना' शामिल है, जिसका प्राथमिक विजन भारत को 'भिक्षावृत्ति मुक्त' बनाना है।
तकनीकी और मुख्य विवरण
- प्रसार और कवरेज: यह योजना वर्तमान में देश के 216 शहरों में संचालित है।
- भावी लक्ष्य: वित्त वर्ष 2030-31 तक इसका विस्तार 295 शहरों तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- पुनर्वास का लक्ष्य: योजना के तहत कुल 35,000 व्यक्तियों के पुनर्वास का लक्ष्य है, जिसमें से अब तक 10,200 से अधिक लोगों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है।
- केंद्रित क्षेत्र: वित्तीय वर्ष 2026-32 के दौरान यह योजना विशेष रूप से मेट्रो शहरों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और ऐतिहासिक स्थलों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
- बहुआयामी सहायता: लाभार्थियों को कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, परामर्श (Counseling) और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जाता है।
रणनीतिक और संस्थागत पक्ष
- सहयोगात्मक दृष्टिकोण: 'भिक्षावृत्ति मुक्त भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के बीच निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
- डिजिटल निगरानी: प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'स्माइल-भिक्षावृत्ति राष्ट्रीय पोर्टल' विकसित किया गया है। यह पोर्टल आश्रय गृहों के पंजीकरण, लाभार्थियों की ट्रैकिंग और पुनर्वास केंद्रों की निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।
- क्षमता निर्माण: कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए संशोधित संचालन दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
नीतिगत महत्व
यह पहल केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने के अवसर प्रदान कर उनके दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। यह सरकारी नीतियों के माध्यम से 'अंतिम व्यक्ति' (Last Mile) तक पहुँचने और सामाजिक समावेशन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।







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