विषय सूची (Table of Contents)
- विश्व हाथी दिवस 2026 और गज गौरव पुरस्कार (World Elephant Day & Gaj Gaurav Awards): विशाखापत्तनम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह; 'Conflict to Coexistence' दृष्टिकोण; आंध्र प्रदेश की तकनीकी H.A.N.U.M.A.N. पहल; प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant) के तीन दशक और '30 Giant Steps' का विमोचन; तथा दक्षिणी राज्यों में मानव-हाथी संघर्ष (Human–Elephant Conflict - HEC) शमन हेतु ₹500 करोड़ की Regional Action Plan (UPSC GS Paper III: पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता संरक्षण)।
- डॉ. पद्मा गुरमेत को लद्दाख राज्य पुरस्कार और सोवा-रिग्पा चिकित्सा का संवर्धन (Sowa-Rigpa System of Medicine): राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (National Institute of Sowa-Rigpa, Leh) के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेत को राज्य सम्मान; 'Amchi' प्रणाली और इसका ऐतिहासिक उद्भव; भोट्टी भाषा की पांडुलिपियों (Bhoti-Language Manuscripts) में सन्निहित पारंपरिक ज्ञान; अष्टांग हृदय (Ayurveda) के साथ इसका अंतर्संबंध; तथा भारत के Ayush Framework में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति का विनियामक महत्व (UPSC GS Paper II: सामाजिक क्षेत्र - स्वास्थ्य एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणाली)।
1. विश्व हाथी दिवस 2026 और भारत में वन्यजीव संरक्षण की रणनीतिक दिशा
संदर्भ (Context)
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में World Elephant Day (विश्व हाथी दिवस) 2026 के राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री कोनिडाला पवन कल्याण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
इस गरिमामयी अवसर पर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को Gaj Gaurav Awards (गज गौरव पुरस्कार) 2026 प्रदान किए गए। समारोह के दौरान नीतिगत सुधारों को गति देने के लिए दक्षिण भारत में मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान हेतु ₹500 करोड़ की क्षेत्रीय कार्य योजना सहित कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध पत्र और दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
विवरण (Highlights)
भारत में हाथियों और उनके पर्यावास के संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए इस समारोह में कई महत्वपूर्ण नीतिगत एवं तकनीकी सुधार प्रस्तुत किए गए:
भारत में हाथी संपदा की स्थिति: वर्तमान में भारत 33 Elephant Reserves (हाथी अभ्यारण्यों) और वैज्ञानिक रूप से पहचाने गए 150 Elephant Corridors (हाथी गलियारों) के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा पर्यावास तंत्र प्रदान करता है। विश्व की जंगली एशियाई हाथियों (Asian Elephants) की कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है।
प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant) के तीन दशक: वर्ष 1992 में एक Centrally Sponsored Scheme (केंद्र प्रायोजित योजना) के रूप में शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' ने अपने सफल संचालन के तीन दशक से अधिक का समय पूरा कर लिया है। इस अवसर पर वर्ष 2020 से 2026 के बीच हासिल की गई 30 प्रमुख विकासात्मक पहलों को रेखांकित करने वाली रिपोर्ट "30 Giant Steps" का विमोचन किया गया।
दक्षिण भारत हेतु ₹500 करोड़ की Regional Action Plan (क्षेत्रीय कार्य योजना): प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत दक्षिणी सीमावर्ती राज्यों (कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के परामर्श से एक व्यापक Landscape-level approach (भू-दृश्य स्तर दृष्टिकोण) पर आधारित कार्य योजना जारी की गई है। भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित ₹500 करोड़ की यह योजना निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- पर्यावास संपर्क (Habitat connectivity) और गलियारा संरक्षण।
- अर्ली-वार्निंग सिस्टम (Early-warning systems) और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (Rapid response mechanisms)।
- मानव-हाथी संघर्ष शमन अवसंरचना (Conflict mitigation infrastructure) का विकास।
- अंतरराज्यीय समन्वय (Interstate coordination) और सीमावर्ती राज्यों के वन विभागों के बीच रियल-टाइम डेटा साझा करना।
H.A.N.U.M.A.N. पहल: आंध्र प्रदेश सरकार ने वन्यजीवों की निगरानी, त्वरित प्राथमिक चिकित्सा और सुदृढ़ उपचार सुनिश्चित करने के लिए H.A.N.U.M.A.N. (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife) नामक एक अभिनव तकनीकी पहल की घोषणा की है, जिसमें फ्रंटलाइन स्टाफ का क्षमता निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल है।
नवीनतम वैज्ञानिक प्रकाशन:
'Asian Elephants in Central India Before 1947': मध्य भारत में हाथियों के ऐतिहासिक वितरण और मानव-हाथी संबंधों का प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करने वाला एक विशेष मोनोग्राफ।
Journal of Wildlife Science का विशेष अंक: भारत में पिछले तीन दशकों के दौरान हाथी संरक्षण से जुड़े शोध और वैज्ञानिक ज्ञान का संकलन।
प्रोजेक्ट एलीफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक के तहत विमोचित सामग्री: समाचार पत्रिका 'The Trumpet' (खंड VI, अंक 01), नीलगिरी हाथी अभ्यारण्य के लिए 'Model Elephant Conservation Plan', तथा बंदी हाथियों के वैज्ञानिक कल्याण के लिए दिशा-निर्देशिका 'Captive Elephant Husbandry: Science, Welfare and Practice'।
व्यापक जन-जागरूकता अभियान: राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के सहयोग से देश भर के 21,450 विद्यालयों के 20 लाख से अधिक छात्रों को वन्यजीव संरक्षण के युवा राजदूत (young ambassadors) के रूप में जोड़ने के लिए सामूहिक जागरूकता गतिविधियों और प्रतिज्ञा कार्यक्रमों का संचालन किया गया।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
प्रौद्योगिकी का एकीकरण: भारत सरकार हाथी अभ्यारण्यों और गलियारों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों जैसे कि Artificial Intelligence (AI), रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक मानचित्रण (Geospatial Mapping) को पारंपरिक वन ज्ञान के साथ एकीकृत कर रही है ताकि मानव-हाथी संघर्ष (HEC) को समय रहते न्यूनतम किया जा सके।
'Conflict to Coexistence' का विजन: सरकार का मुख्य दृष्टिकोण केवल संघर्ष का प्रबंधन करना नहीं है, बल्कि 'संघर्ष से सह-अस्तित्व' (Conflict to Coexistence) की ओर बढ़ना है। इसे प्रशासनिक सीमाओं से परे एक साझा और सामूहिक पारिस्थितिक जिम्मेदारी माना गया है।
सभ्यतागत मूल्यों का प्रदर्शन: हाथियों का संरक्षण केवल एक विनियामक या नीतिगत विकल्प नहीं है, बल्कि यह भारत के प्राचीन सभ्यतागत मूल्यों, प्रकृति के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और गहरी पारिस्थितिक जिम्मेदारी (ecological responsibility) का एक जीवंत प्रतिबिंब है।
2. डॉ. पद्मा गुरमेत को लद्दाख राज्य पुरस्कार और सोवा-रिग्पा (Sowa-Rigpa) चिकित्सा प्रणाली का वैश्विक व विनियामक महत्व
संदर्भ (Context)
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने UT State Awards समारोह के दौरान लेह स्थित National Institute of Sowa-Rigpa के निदेशक Dr. Padma Gurmet को वर्ष 2025 का UT Ladakh State Award प्रदान किया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार डॉ. गुरमेत को लद्दाख क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली Sowa-Rigpa के संरक्षण, संवर्धन (promotion) और विकास में उनके अनुकरणीय व निरंतर योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
इस पुरस्कार समारोह में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा देने वाली 36 विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश के आयुष ढांचे (Ayush Framework) के अंतर्गत इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली के बढ़ते संस्थागत महत्व को रेखांकित करता है।
सोवा-रिग्पा (Sowa-Rigpa) चिकित्सा प्रणाली: दार्शनिक और तकनीकी विवरण
परिभाषा और उत्पत्ति (Terminology & Origin):
'Sowa-Rigpa' का शाब्दिक अर्थ "Knowledge of Healing" (उपचार का ज्ञान) होता है। यह शब्द मूलतः Bhoti Language (भोट्टी भाषा) से लिया गया है।
इस चिकित्सा पद्धति को Amchi System of medicine, 'Men-Tsee-Khang' या Tibetan medicine के नाम से भी जाना जाता है।
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, The Buddha को इस तिब्बती चिकित्सा प्रणाली का मूल प्रवर्तक (originator) माना जाता है।
भौगोलिक प्रसार (Geographical Practice):
यह प्रणाली भारत के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र (Trans-Himalayan region) जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (लाहौल और स्पीति), जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के हिमालयी समाजों में अत्यधिक लोकप्रिय है।
भारत के अलावा यह तिब्बत, चीन के कुछ हिस्सों, नेपाल, भूटान, मंगोलिया और रूस में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
मूल सिद्धांत और त्रिदोष (Core Principles & Three Humors):
सोवा-रिग्पा के अधिकांश सिद्धांत और व्यावहारिक अनुप्रयोग भारतीय 'आयुर्वेद' (Ayurveda) के समान हैं।
आयुर्वेद की भाँति यह प्रणाली भी शरीर के भीतर तीन प्रमुख दोषों (Three Humors / Doshas) के संतुलन पर काम करती है, जिन्हें स्थानीय भाषा में rLung, mKhris-pa और Bad-kan कहा जाता है।
रोग निदान पद्धति (Method of Diagnosis):
इस प्रणाली में रोगों की पहचान किसी मशीन के बजाय पूरी तरह से पारंपरिक और शारीरिक परीक्षणों के माध्यम से की जाती है।
इसके मुख्य स्तंभों में Pulse Testing (नाड़ी परीक्षण), आँख, जीभ, मूत्र परीक्षण (Urine Testing) और रोगी के साथ गहन साक्षात्कार (interaction) शामिल हैं।
चिकित्सीय औषधियां (Medicines and Treatment):
चिकित्सा के लिए मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र में उगने वाली जड़ी-बूटियों के अर्क (extracts of herbs) का उपयोग किया जाता है।
इसमें भारतीय मूल की प्रसिद्ध औषधियों जैसे Ashwagandha, Guggulu, Triphala, Ashok, Haridra आदि का प्रचुरता से उपयोग होता है।
कुछ विशिष्ट दवाओं में सोने, चांदी और मोतियों की भस्म (ashes of gold, silver and pearls) का भी मिश्रण किया जाता है।
इस पद्धति का मुख्य ध्यान रोग को जड़ से खत्म करने (rooting out the disease completely) पर होता है; इसलिए उपचार की अवधि लंबी होती है। इसके साथ ही Meditation (ध्यान) भी इस उपचार प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है।
साहित्यिक धरोहर और विनियामक सुदृढ़ता (Literature & Regulatory Landscape)
Gyud-Zi (The Four Tantras):
Gyud-Zi या Four Tantras (चार तंत्र) को इस चिकित्सा पद्धति का मूलभूत और सबसे प्रामाणिक पाठ्यपुस्तक (fundamental textbook) माना जाता है।
सोवा-रिग्पा के 75 प्रतिशत से अधिक परीक्षण और सिद्धांत प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रंथ Ashtanga Hridaya (अष्टांग हृदय) से लिए गए हैं।
Bhoti-Language Manuscripts (भोट्टी पांडुलिपियां):
भोट्टी भाषा की प्राचीन पांडुलिपियां, जो पारंपरिक भोट्टी लिपि (तिब्बती लिपि से व्युत्पन्न) में लिखी गई हैं, बौद्ध धर्म के मठों (monasteries) में संरक्षित ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथ हैं।
इन सदियों पुरानी पांडुलिपियों में सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली का अमूल्य ज्ञान संकलित और सुरक्षित है।
सरकारी मान्यता और विनियामक ढांचा:
भारत सरकार द्वारा इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आधिकारिक रूप से September 2010 में कानूनी मान्यता प्रदान की गई थी।
वर्तमान में यह भारत के Ayush Framework के तहत मान्यता प्राप्त प्रणालियों में से एक है।
लेह (लद्दाख) में स्थापित National Institute of Sowa-Rigpa देश में इस प्रणाली के शिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान (research) और चिकित्सा सेवाओं के विकास के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्थान (apex institution) है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. विश्व हाथी दिवस 2026 का राष्ट्रीय समारोह कहाँ आयोजित हुआ?
यह 13 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की और इस दौरान Gaj Gaurav Awards 2026 प्रदान किए गए।
2. दक्षिण भारत के लिए ₹500 करोड़ की Regional Action Plan किस उद्देश्य से जारी की गई?
यह कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान हेतु प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत जारी की गई है, जो पर्यावास संपर्क, अर्ली-वार्निंग सिस्टम और अंतरराज्यीय समन्वय पर केंद्रित है।
3. H.A.N.U.M.A.N. पहल क्या है?
यह आंध्र प्रदेश सरकार की एक तकनीकी पहल है (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife), जो वन्यजीवों की निगरानी, त्वरित प्राथमिक चिकित्सा और उपचार सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है।
4. सोवा-रिग्पा (Sowa-Rigpa) चिकित्सा प्रणाली क्या है?
यह हिमालयी क्षेत्र की एक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसे 'अमची' या तिब्बती चिकित्सा भी कहा जाता है। इसका अर्थ "उपचार का ज्ञान" है और यह आयुर्वेद के सिद्धांतों से मिलती-जुलती है। इसे सितंबर 2010 में भारत सरकार से आधिकारिक मान्यता मिली।
5. डॉ. पद्मा गुरमेत को किस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया?
लेह स्थित राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेत को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली के संरक्षण और संवर्धन में उनके योगदान के लिए वर्ष 2025 का UT Ladakh State Award प्रदान किया।
Practice MCQ for UPSC CSE Prelims
प्रश्न 1
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति 'सोवा-रिग्पा' (Sowa-Rigpa) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. इस चिकित्सा प्रणाली के 75 प्रतिशत से अधिक परीक्षण आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ 'अष्टांग हृदय' (Ashtanga Hridaya) से लिए गए हैं।
3. इस पद्धति का मूलभूत और सबसे प्रामाणिक ग्रंथ 'ग्यूद-जी' या चार तंत्र (Gyud-Zi or the Four Tantras) है।
4. भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस चिकित्सा पद्धति को सितंबर 2010 में मान्यता प्रदान की थी और यह देश के आयुष (Ayush) ढांचे के तहत पंजीकृत है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1, 2 और 3
- B. केवल 2, 3 और 4
- C. केवल 1, 3 और 4
- D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: D (1, 2, 3 और 4)
कथन 1 सही है: सोवा-रिग्पा (Sowa-Rigpa) जिसे 'अमची' (Amchi) या तिब्बती चिकित्सा पद्धति भी कहा जाता है, में 'सोवा-रिग्पा' का अर्थ "Knowledge of Healing" है और इसकी उत्पत्ति भोट्टी भाषा से हुई है।
कथन 2 सही है: यह प्रणाली आयुर्वेद के सिद्धांतों के अत्यधिक निकट है और इसके 75% से अधिक परीक्षण प्रसिद्ध आयुर्वेदिक पाठ 'अष्टांग हृदय' से उद्धृत हैं।
कथन 3 सही है: 'ग्यूद-जी' या 'फोर तंत्रास' (Gyud-Zi or the Four Tantras) को सोवा-रिग्पा का आधारभूत पाठ्यपुस्तक माना जाता है।
कथन 4 सही है: इसे भारत सरकार द्वारा सितंबर 2010 में आधिकारिक कानूनी मान्यता दी गई थी और वर्तमान में यह आयुष मंत्रालय के ढांचे के अंतर्गत संचालित है।
प्रश्न 2
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के प्रशासनिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
2. पारंपरिक भोट्टी लिपि (Bhoti script), जो कि तिब्बती लिपि से व्युत्पन्न है, में लिखित सदियों पुरानी पांडुलिपियों में सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली का अमूल्य ज्ञान संरक्षित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1
- B. केवल 2
- C. 1 और 2 दोनों
- D. न तो 1 और न ही 2
उत्तर: C (1 और 2 दोनों)
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेत को लद्दाख में इस पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के संवर्धन और विकास के लिए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा वर्ष 2025 का 'UT Ladakh State Award' प्रदान किया गया।
कथन 2 सही है: तिब्बती लिपि से विकसित हुई पारंपरिक भोट्टी लिपि में लिखित ऐतिहासिक और धार्मिक पांडुलिपियां (Bhoti-language manuscripts) बौद्ध मठों में संरक्षित हैं और इनमें सदियों पुराना सोवा-रिग्पा का चिकित्सा ज्ञान भी संकलित है।
प्रश्न 3
प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant) और हाल ही में आयोजित 'विश्व हाथी दिवस 2026' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. दक्षिण भारतीय राज्यों में मानव-हाथी संघर्ष (Human–Elephant Conflict) के भू-दृश्य स्तर पर प्रबंधन के लिए भारत सरकार द्वारा ₹500 करोड़ के वित्तीय सहयोग से निर्मित एक Regional Action Plan जारी की गई है।
3. आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा वन्यजीवों की त्वरित निगरानी, चिकित्सा सहायता और उपचार सुनिश्चित करने के लिए 'H.A.N.U.M.A.N.' नामक एक अभिनव तकनीकी पहल शुरू की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3 - सभी कथन सही हैं)
कथन 1 सही है: प्रोजेक्ट एलीफेंट एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है जिसे 1992 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत हाल ही में '30 Giant Steps' नामक रिपोर्ट जारी की गई जो वर्ष 2020 से 2026 के बीच की प्रमुख संरक्षण पहलों को प्रदर्शित करती है।
कथन 2 सही है: दक्षिण भारत (कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के लिए तैयार की गई 'क्षेत्रीय कार्य योजना' को भारत सरकार द्वारा ₹500 करोड़ की बजटीय सहायता दी गई है, जो लैंडस्केप-लेवल दृष्टिकोण पर काम करेगी।
कथन 3 सही है: 'H.A.N.U.M.A.N.' (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife) आंध्र प्रदेश सरकार की एक अत्याधुनिक तकनीकी और स्टाफ क्षमता निर्माण पहल है जिसका लक्ष्य वन्यजीवों की सुरक्षा और संघर्ष का शमन करना है।