विषय सूची (Table of Contents)
- पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI in Traditional Medicine & Ayush): आयुष ग्रिड का विस्तार, 6 प्रमुख एआई चैटबॉट्स, डब्ल्यूएचओ (WHO) तकनीकी रिपोर्ट, आयुष-भाषिणी साझेदारी और 'आयुर्टेक' उत्कृष्टता केंद्र।
(GS Paper II: स्वास्थ्य शासन व डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना; GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - एआई के अनुप्रयोग व बौद्धिक संपदा अधिकार) - अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) तकनीक: सामग्री विज्ञान, M60 ग्रेड कंक्रीट से तुलना, नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग, संरचनात्मक दक्षता और कार्बन फुटप्रिंट में कमी।
(GS Paper III: बुनियादी ढांचा विकास - सड़क व राजमार्ग, सामग्री विज्ञान व सतत अवसंरचना) - निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु (Key Takeaways for UPSC)
- Quick Revision Facts
1. पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI in Traditional Medicine)
(GS Paper II: स्वास्थ्य शासन व डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना; GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - एआई के अनुप्रयोग व बौद्धिक संपदा अधिकार)
संदर्भ (Context)
आयुष ग्रिड (Ayush Grid) के डिजिटल ढांचे पर निर्माण करते हुए आयुष मंत्रालय ने स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा और निवेश सुविधा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मुख्य प्रेरक बल के रूप में अपनाया है। इस दिशा में मंत्रालय ने MeitY के 'IndiaAI मिशन' और 'डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग' (DIBD) के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
तकनीकी व मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- नागरिक एवं अनुसंधान-केंद्रित 6 एआई चैटबॉट्स (Interactive AI Chatbots):
- MAISP Chatbot: आम नागरिकों के लिए संवादात्मक इंटरफेस के माध्यम से आयुर्वेद और आयुष संबंधी सटीक जानकारी प्रदान करता है।
- ARP Research Assistant: यह जनरेटिव एआई (GenAI) आधारित सहायक आयुष रिसर्च पोर्टल (CCRAS द्वारा संचालित, जिसमें 41,000+ शोध पत्र हैं) से प्रासंगिक साहित्य खोजने में मदद करता है।
- eLMS Chatbot: आयुष शिक्षण संस्थानों के लिए एआई-आधारित 'विद्यार्थी जीवन चक्र प्रबंधन' (Student Life Cycle Management) की सुविधा देता है।
- e-CHARAK Chatbot: औषधीय पौधों के व्यापार और आयुर्वेदिक औषध विज्ञान (Pharmacology) के लिए संवादात्मक व्यापार सहायक।
- Yoga Saarthi: व्यक्तिगत योग अभ्यासों के सुझाव देने वाला एआई चैटबॉट।
- Nivesh Saarthi: आयुष क्षेत्र में वैश्विक व घरेलू निवेश को सुगम बनाने वाला एआई सहायक।
- उन्नत अनुसंधान एवं एआई मॉडल (Advanced Research & ML Applications):
- आयुर्जीनोमिक्स (Ayurgenomics): मशीन लर्निंग के माध्यम से आनुवंशिक अनुक्रमण (Genetic Sequencing) को व्यक्ति की आयुर्वेदिक शारीरिक प्रकृति (Prakriti) से जोड़कर जोखिम का पूर्वाभास किया जाता है।
- योग पोस्चर एआई (Yoga Posture AI): कंप्यूटर-विज़न (Computer-vision) तकनीक का उपयोग करके आसनों के सटीक अभ्यास का वास्तविक समय में मूल्यांकन।
- रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) मॉडल: IndiaAI इंपैक्ट समिट में डब्ल्यूएचओ के सहयोग से जारी केसबुक में 'एआई-संचालित निर्णय सहायता' के लिए RAG दृष्टिकोण को शामिल किया गया है।
- वैश्विक मान्यता और बहुभाषी पहुंच (WHO Recognition & Bhashini):
- डब्ल्यूएचओ, आईटीयू (ITU) और विपो (WIPO) द्वारा संयुक्त रूप से जारी तकनीकी रिपोर्ट "Mapping the Application of Artificial Intelligence in Traditional Medicine" में भारत के इन प्रयासों को वैश्विक स्तर पर रेखांकित किया गया है।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA, नई दिल्ली) में डब्ल्यूएचओ की वैश्विक तकनीकी बैठक आयोजित की गई।
- भाषिणी (BHASHINI) एकीकरण के माध्यम से आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं।
- आईआईटी जोधपुर में आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 'आयुर्टेक' (AyurTech) उत्कृष्टता केंद्र (CoE) कार्यरत है।
महत्व (Strategic Significance)
- साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद (Evidence-based Ayurveda): इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान का स्थान लेना नहीं, बल्कि डेटा-संचालित साक्ष्यों के माध्यम से आयुर्वेदिक निदान को मानकीकृत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य बनाना है।
- स्वास्थ्य कूटनीति (Soft Power & Health Diplomacy): डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (जामनगर) के साथ मिलकर भारत पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा में एआई मानक तय करने वाले देश के रूप में उभर रहा है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. आयुष मंत्रालय द्वारा हाल ही में शुरू की गई एआई (AI) पहलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- एआरपी रिसर्च असिस्टेंट (ARP Research Assistant) एक जनरेटिव एआई (GenAI) आधारित सहायक है, जो आयुष रिसर्च पोर्टल के साहित्य को खोजने में मदद करता है।
- ई-चरक (e-CHARAK) चैटबॉट औषधीय पौधों के व्यापार हेतु एक संवादात्मक एआई सहायक है।
- आयुर्टेक (AyurTech) उत्कृष्टता केंद्र आईआईटी दिल्ली में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
व्याख्या:
कथन 1 और 2 सही हैं: ARP रिसर्च असिस्टेंट आयुष रिसर्च पोर्टल (CCRAS) के साहित्य को नेविगेट करता है और e-CHARAK औषधीय पौधों के व्यापार हेतु काम करता है।
कथन 3 गलत है: 'आयुर्टेक' उत्कृष्टता केंद्र (AyurTech CoE) आईआईटी जोधपुर में स्थित है, IIT दिल्ली में नहीं।
2. अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) तकनीक
(GS Paper III: बुनियादी ढांचा विकास - सड़क व राजमार्ग, सामग्री विज्ञान व सतत अवसंरचना)
संदर्भ (Context)
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स—जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग 353D पर निर्मित 8.9 किमी लंबे इंदौरा चौक-दिघोरी फ्लाईओवर प्रोजेक्ट—में अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है।
मुख्य विवरण (Technical Highlights)
- भौतिक एवं यांत्रिक गुण (Material Properties & Compressive Strength):
- UHPFRC की संपीड़न क्षमता (Compressive Strength) मानक M60 ग्रेड कंक्रीट की तुलना में 4 से 6 गुना अधिक होती है।
- इसमें स्टील या सिंथेटिक माइक्रो-फाइबर्स (Fibre Reinforcement) और नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology) का उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी आंतरिक सघनता (Density) अत्यधिक बढ़ जाती है।
- इसकी शेल्फ-लाइफ (Shelf Life) और टिकाऊपन सामान्य कंक्रीट से कई गुना अधिक होता है।
- संरचनात्मक लाभ (Structural Efficiency in Engineering):
- दीर्घ पिलर स्पैन (Longer Spans): इस कंक्रीट के उपयोग से दो पिलरों/पियर्स (Piers) के बीच केवल एक जोड़ी स्ट्रक्चरल सेगमेंट्स का उपयोग करके अधिक दूरी (Longer Span) तय की जा सकती है।
- कम पिलर सपोर्ट (Fewer Supports Required): उच्च भार-वहन क्षमता के कारण संरचना को खड़े करने के लिए कम संख्या में पिलर्स की आवश्यकता होती है।
- पतले सेक्शन (Thinner Sections): गर्डर और स्लैब की मोटाई (Section Thickness) और डेक हाइट (Deck Height) को काफी कम किया जा सकता है, जिससे संरचना का स्वयं का भार (Dead Load) कम होता है।
- पर्यावरण-अनुकूलता और कार्बन फुटप्रिंट में कमी (Carbon Footprint Reduction):
- कम सामग्री की खपत: पतले सेक्शंस और कम पिलर्स के कारण कुल सीमेंट व कंक्रीट की खपत में भारी कमी आती है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: कंक्रीट की कम खपत से विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान जारी होने वाले CO2 उत्सर्जन में सीधी गिरावट आती है, जिससे प्रोजेक्ट का कुल कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) काफी घट जाता है।
(नोट: डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कार्बन फुटप्रिंट जीवाश्म ईंधनों और निर्माण सामग्रियों से उत्पन्न CO2 के वजन की माप है।)
UHPFRC कंक्रीट बनाम मानक M60 कंक्रीट (UHPFRC Concrete vs Standard M60 Concrete):
- सामर्थ्य (Strength): M60 की तुलना में 4 से 6 गुना अधिक।
- नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग: हाँ (माइक्रो-फाइबर्स के साथ)।
- पिलर स्पैन दूरी (Span Length): अधिक दूरी (कम पिलर की जरूरत)।
- सेक्शन मोटाई (Section Thickness): पतले सेक्शंस (Thinner Sections)।
- कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint): अत्यधिक कम (पर्यावरण-अनुकूल)।
रणनीतिक और अवसंरचनात्मक महत्व (Strategic & Engineering Significance)
- तेज निर्माण (Faster Construction): कम सेगमेंट्स और कम पिलर सपोर्ट के कारण घने शहरी क्षेत्रों और कठिन भूभागों में निर्माण समय में 50% से अधिक की बचत होती है।
- जीवन-चक्र लागत में कमी (Lower Life-Cycle Cost): मौसम, नमी और घर्षण के प्रति उच्च प्रतिरोध क्षमता के कारण दीर्घकालिक मरम्मत और रखरखाव (Maintenance) का खर्च बेहद कम हो जाता है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 2. 'अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट' (UHPFRC) तकनीक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह तकनीक मानक M60 ग्रेड कंक्रीट की तुलना में 4 से 6 गुना अधिक संपीड़न सामर्थ्य (Compressive Strength) प्रदान करती है।
- UHPFRC के उपयोग से दो पिलरों (Piers) के बीच की स्पैन दूरी को बढ़ाया जा सकता है, जिससे आवश्यक पिलरों की कुल संख्या कम हो जाती है।
- पतले संरचनात्मक सेक्शंस के निर्माण के कारण यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) को कम करने में मदद करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3 - सभी कथन सही हैं)
व्याख्या:
UHPFRC कंक्रीट M60 से 4-6 गुना अधिक मजबूत होता है, पिलर्स के बीच अधिक दूरी (Longer Span) प्रदान करता है, और सीमेंट व कंक्रीट की कम खपत के कारण कार्बन उत्सर्जन और कार्बन फुटप्रिंट को महत्वपूर्ण रूप से घटाता है।
3. निष्कर्ष / UPSC के लिए मुख्य बिंदु (Key Takeaways for UPSC)
प्रारंभिक परीक्षा हेतु (Prelims Focus)
- आयुष एआई पहल: MAISP, ARP (CCRAS द्वारा प्रबंधित आयुष रिसर्च पोर्टल हेतु), e-CHARAK, Yoga Saarthi चैटबॉट्स।
- 'आयुर्टेक' CoE (IIT जोधपुर); योग पोस्चर एआई (कंप्यूटर विज़न); आयुष-भाषिणी समझौता (22 अनुसूचित भाषाएं)।
- UHPFRC तकनीक: M60 ग्रेड की तुलना में 4-6 गुना अधिक सामर्थ्य; नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग; दो पिलरों के बीच अधिक स्पैन दूरी; पतले सेक्शंस से कार्बन फुटप्रिंट में कमी।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper II & III)
- GS Paper II & III (डिजिटल स्वास्थ्य व एआई): आयुष ग्रिड और एआई मॉडल के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा का मानकीकरण और वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में भारत की भूमिका।
- GS Paper III (बुनियादी ढांचा व सामग्री विज्ञान): स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में नैनो-मटीरियल्स और UHPFRC जैसी उन्नत तकनीकों का योगदान।
Quick Revision Facts
- आयुष मंत्रालय आयुष ग्रिड (Ayush Grid) के डिजिटल ढांचे पर स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा और निवेश सुविधा में एआई को अपना रहा है।
- मंत्रालय ने MeitY के IndiaAI मिशन और डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) के साथ सहयोग किया है।
- छह एआई उपकरण: MAISP Chatbot (नागरिकों के लिए आयुष जानकारी), ARP Research Assistant (GenAI आधारित, आयुष रिसर्च पोर्टल हेतु), eLMS Chatbot (विद्यार्थी जीवन चक्र प्रबंधन), e-CHARAK Chatbot (औषधीय पौधों का व्यापार), Yoga Saarthi (योग सुझाव) और Nivesh Saarthi (निवेश सहायता)।
- भाषिणी (BHASHINI) एकीकरण से आयुष ग्रिड के पोर्टल भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध हैं।
- IndiaAI इंपैक्ट समिट 2026 में डब्ल्यूएचओ के सहयोग से जारी केसबुक में आयुर्वेद के लिए 'एआई-आधारित निर्णय सहायता: रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) दृष्टिकोण' शामिल है।
- 'आयुर्टेक' (AyurTech) उत्कृष्टता केंद्र (CoE) आईआईटी जोधपुर में है।
- इंदौरा चौक-दिघोरी चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट (राष्ट्रीय राजमार्ग 353D, नागपुर) की कुल लंबाई 8.9 किमी है, जिसमें 6.37 किमी फ्लाईओवर है; इसे NHAI बना रहा है।
- UHPFRC की संपीड़न क्षमता मानक M60 ग्रेड कंक्रीट से 4 से 6 गुना अधिक होती है।
- UHPFRC में स्टील या सिंथेटिक माइक्रो-फाइबर्स और नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग होता है।
- UHPFRC से पिलरों के बीच स्पैन अधिक, पिलरों की संख्या कम और सेक्शन पतले होते हैं, जिससे सीमेंट व कंक्रीट की खपत और प्रोजेक्ट का कार्बन फुटप्रिंट घटता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
आयुष ग्रिड (Ayush Grid) क्या है और इसमें एआई का उपयोग कैसे हो रहा है?
आयुष ग्रिड आयुष क्षेत्र का डिजिटल ढांचा है। इसी पर निर्माण करते हुए आयुष मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा और निवेश सुविधा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपना रहा है। इसके लिए मंत्रालय ने MeitY के IndiaAI मिशन और डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (DIBD) के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
आयुष मंत्रालय के 6 एआई चैटबॉट्स कौन-से हैं और वे क्या करते हैं?
- MAISP Chatbot: आम नागरिकों को आयुर्वेद और आयुष संबंधी जानकारी देता है।
- ARP Research Assistant: जनरेटिव एआई (GenAI) आधारित सहायक, जो आयुष रिसर्च पोर्टल से प्रासंगिक साहित्य खोजने में मदद करता है।
- eLMS Chatbot: आयुष शिक्षण संस्थानों के लिए एआई-आधारित विद्यार्थी जीवन चक्र प्रबंधन (Student Life Cycle Management) की सुविधा देता है।
- e-CHARAK Chatbot: औषधीय पौधों के व्यापार और आयुर्वेदिक औषध विज्ञान के लिए संवादात्मक सहायक है।
- Yoga Saarthi: व्यक्तिगत योग अभ्यासों के सुझाव देने वाला एआई चैटबॉट है।
- Nivesh Saarthi: आयुष क्षेत्र में वैश्विक व घरेलू निवेश को सुगम बनाने वाला एआई सहायक है।
भाषिणी (BHASHINI) के साथ साझेदारी से आयुष ग्रिड को क्या लाभ मिला है?
भाषिणी (BHASHINI) एकीकरण के माध्यम से आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। इससे देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के नागरिक, विद्यार्थी और चिकित्सक इन सेवाओं का उपयोग अपनी भाषा में कर सकते हैं।
आयुर्टेक (AyurTech) उत्कृष्टता केंद्र कहां स्थित है?
आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 'आयुर्टेक' (AyurTech) उत्कृष्टता केंद्र (CoE) आईआईटी जोधपुर में स्थित है, आईआईटी दिल्ली में नहीं। प्रारंभिक परीक्षा में इस तरह के स्थान-आधारित तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं।
आयुर्वेद में रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) मॉडल का क्या महत्व है?
IndiaAI इंपैक्ट समिट में डब्ल्यूएचओ के सहयोग से जारी केसबुक में 'एआई-संचालित निर्णय सहायता' के लिए RAG दृष्टिकोण को शामिल किया गया है। इस दृष्टिकोण में एआई मॉडल उत्तर देने से पहले संदर्भ स्रोतों से प्रासंगिक जानकारी खोजता है, जिससे आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित उत्तर साक्ष्य से जुड़े रहते हैं।
अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) क्या है?
UHPFRC एक उन्नत कंक्रीट तकनीक है, जिसमें स्टील या सिंथेटिक माइक्रो-फाइबर्स और नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है। इससे इसकी आंतरिक सघनता बहुत बढ़ जाती है और इसकी संपीड़न क्षमता (Compressive Strength) मानक M60 ग्रेड कंक्रीट की तुलना में 4 से 6 गुना अधिक होती है।
UHPFRC तकनीक से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्या लाभ मिलते हैं?
UHPFRC से दो पिलरों के बीच अधिक दूरी (Longer Span) तय की जा सकती है, जिससे कम पिलरों की आवश्यकता होती है। गर्डर और स्लैब पतले बनाए जा सकते हैं, जिससे संरचना का स्वयं का भार घटता है। कम सीमेंट व कंक्रीट की खपत से प्रोजेक्ट का कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) कम होता है, और टिकाऊपन अधिक होने से रखरखाव का खर्च भी घटता है।
इंदौरा चौक-दिघोरी फ्लाईओवर प्रोजेक्ट में UHPFRC तकनीक का उपयोग कैसे हुआ है?
नागपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग 353D पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाए गए इंदौरा चौक-दिघोरी चौक प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 8.9 किमी है, जिसमें 6.37 किमी का फ्लाईओवर शामिल है। इस प्रोजेक्ट में UHPFRC तकनीक का उपयोग किया गया है।
आयुष एआई पहल और UHPFRC तकनीक UPSC के किन पेपरों से जुड़े हैं?
आयुष एआई पहल GS Paper II (स्वास्थ्य शासन व डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना) और GS Paper III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - एआई के अनुप्रयोग व बौद्धिक संपदा अधिकार) से जुड़ी है। UHPFRC तकनीक GS Paper III (बुनियादी ढांचा विकास - सड़क व राजमार्ग, सामग्री विज्ञान व सतत अवसंरचना) से संबंधित है।
References
1. पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI in Ayush)
- PIB अंग्रेज़ी (PRID 2312436) — Ministry of Ayush Advances Artificial Intelligence for Ayurveda and Traditional Medicine
- PIB हिंदी (PRID 2312491) — आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के लिए एआई के उपयोग को बढ़ाया
2. अल्ट्रा हाई-परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (UHPFRC) तकनीक
- PIB अंग्रेज़ी (PRID 2312604) — Indora Chowk-Dighori Flyover Completed in Record Time Using UHPFRC Technology
