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PIB Analysis 11 August 2026 | UPSC Current Affairs | Aarambh Times

11 अगस्त 2026 | PIB Analysis UPSC Current Affairs
आज के पीआईबी विश्लेषण में हम देश के शहरी अवसंरचनात्मक विकास और सामाजिक न्याय से जुड़े दो महत्वपूर्ण नीतिगत घटनाक्रमों का संक्षेप में विश्लेषण करेंगे: Ministry of Housing and Urban Affairs द्वारा शुरू किया गया जीआईएस आधारित शहरी नियोजन और मास्टर प्लानों का आधुनिकीकरण (GIS-Based Urban Planning & Modernisation of Master Plans) कार्यक्रम, और Ministry of Social Justice and Empowerment की SMILE (स्माइल) योजना के अंतर्गत भीख मांगने के काम में लगे 2,824 बच्चों की पहचान, बचाव और उनके व्यापक पुनर्वास (Rescue & Rehabilitation) की प्रगति रिपोर्ट।

संक्षिप्त विषय सूची (Table of Contents)

  1. जीआईएस-आधारित शहरी नियोजन और डिजिटल मास्टर प्लान (GIS-Based Urban Planning): डिजिटल मास्टर प्लानिंग, भू-स्थानिक डेटाबेस का एकीकरण, और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) का क्षमता निर्माण (GS Paper II: शासन - सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप; UPSC GS Paper III: बुनियादी ढांचा - शहरी नियोजन)।
  2. SMILE योजना के तहत बच्चों का पुनर्वास (Rehabilitation under SMILE Scheme): भीख मांगने में लगे बच्चों के बचाव और पुनर्वास के आंकड़े, राज्यवार प्रदर्शन (उत्तर प्रदेश शीर्ष पर), और ट्रांसजेंडर एवं वंचित व्यक्तियों के व्यापक सामाजिक कल्याण का नीतिगत ढांचा (UPSC GS Paper II: सामाजिक न्याय - कमजोर वर्गों का कल्याण)।

1. जीआईएस-आधारित शहरी नियोजन और डिजिटल मास्टर प्लान (GIS-Based Urban Planning)

संदर्भ (Context)

संवैधानिक प्रावधान: भारत के संविधान की 12वीं अनुसूची (12th Schedule) के अनुसार, शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने सहित शहरी नियोजन (Urban Planning) मुख्य रूप से शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और शहरी विकास प्राधिकरणों का कार्य है।

केंद्र सरकार की सहायता: भारत सरकार विभिन्न योजनाबद्ध हस्तक्षेपों, दिशा-निर्देशों और सलाह के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के इन प्रयासों में सहयोग करती है।

संसदीय जानकारी: आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से डिजिटल मास्टर प्लानिंग के सुधारों की जानकारी साझा की।

विवरण

AMRUT के तहत वित्त पोषण: 'AMRUT शहरों के लिए जीआईएस-आधारित मास्टर प्लान का निर्माण' उप-योजना 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित (Centrally Funded Sub-Scheme) है। इसके तहत 461 Class-I शहरों को शामिल किया गया है:

437 शहरों के लिए अंतिम Geospatial Databases तैयार कर लिए गए हैं।

404 शहरों के लिए Draft digital master plans तैयार किए गए हैं, जिनमें से 292 को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

AMRUT 2.0 का विस्तार: इस योजना के तहत 50,000 से 99,999 की जनसंख्या वाले Class-II कस्बों में भी इसे शुरू किया गया है, जिसके दायरे में 875 शहर आते हैं।

399 कस्बों के लिए ड्राफ्ट भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार किए गए हैं, जिनमें से 100 को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

136 कस्बों के लिए ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार किए गए हैं, जिनमें से 93 को अंतिम रूप दिया गया है।

उन्नत तकनीकी मानक (High-Resolution Mapping):

AMRUT के तहत Very High Resolution Satellite (VHRS) इमेजरी का उपयोग 1:4000 स्केल पर किया जा रहा है।

AMRUT 2.0 के तहत 1:4000 स्केल पर VHRS इमेजरी के साथ-साथ 1:1000 स्केल पर ड्रोन/UAV मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है।

PM Gati Shakti के साथ एकीकरण: एकीकृत नियोजन को बढ़ावा देने के लिए इन डेटाबेस को PM Gati Shakti National Master Plan Portal के साथ जोड़ा गया है, जिसके तहत अब तक 343 शहरों का भू-डेटाबेस पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

चुनौतियाँ

क्रियान्वयन की सीमा: जीआईएस आधारित नियोजन से भूमि उपयोग, परिवहन नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवरेज, पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे का विश्लेषण संभव होता है।

राज्यों की जिम्मेदारी: हालांकि, मास्टर प्लान का प्रवर्तन (Enforcement of Master Plans), बिल्डिंग बाय-लॉ (Building Bye-laws) और अनधिकृत निर्माण (Unauthorized Construction) के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय प्राधिकरणों (State and local authorities) के अधिकार क्षेत्र में आती है।

Capacity Building (क्षमता निर्माण):

AMRUT GIS उप-योजना के तहत 79 प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा 2,968 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

AMRUT 2.0 GIS उप-योजना के तहत 34 क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से 2,648 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

2. SMILE योजना के तहत बच्चों का पुनर्वास (Rehabilitation under SMILE Scheme)

संदर्भ (Context)

संसदीय वक्तव्य: सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने लोकसभा को सूचित किया कि मंत्रालय द्वारा SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना के तहत भीख मांगने के कृत्य में लगे व्यक्तियों और बच्चों के लिए व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

भौगोलिक दायरा: यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) 23 अक्टूबर 2023 से 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 216 प्रमुख शहरों और कस्बों में लागू की जा रही है।

मूल योजना का ढांचा (Core Scheme Framework)

SMILE के दो उप-घटक (Sub-schemes):

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास योजना (Central Sector Scheme for Comprehensive Rehabilitation for Welfare of Transgender Persons)।

भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास की योजना (Central Sector Scheme for Comprehensive Rehabilitation of Persons Engaged in the Act of Begging)।

बजटीय आवंटन: योजना के लिए मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक ₹365 करोड़ आवंटित किए हैं।

अभिनव प्रावधान:

PM-DAKSH योजना के तहत कौशल विकास (Skill Development) और आजीविका के अवसर प्रदान करना।

PM Jan Arogya Yojana (PM-JAY) के साथ मिलकर ट्रांसजेंडर समुदाय को लिंग-पुष्टि सर्जरी (Gender-Reaffirmation Surgeries) के लिए व्यापक स्वास्थ्य पैकेज प्रदान करना।

'Garima Greh' (गरिमा गृह): ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में लगे लोगों को भोजन, वस्त्र, चिकित्सा सहायता और कौशल प्रशिक्षण के साथ आश्रय स्थल प्रदान करना।

अपराधों की निगरानी और जांच के लिए राज्यवार Transgender Protection Cell की स्थापना करना।

बच्चों के पुनर्वास की प्रगति

प्रगति (30 जून 2026 तक): योजना के तहत कुल 2,824 बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास किए गए हैं:

1,549 बच्चों को उनके माता-पिता या परिवारों से मिलाया गया है।

676 बच्चों को नियमित स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है।

309 बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया है।

290 बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee - CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

वैधानिक प्रक्रिया: संस्थागत देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत CWC के माध्यम से बाल देखभाल संस्थानों (Child Care Institutions - CCIs) से जोड़ा जाता है।

राज्यवार प्रदर्शन: बच्चों की पहचान और पुनर्वास के मामले में राज्यवार आंकड़े इस प्रकार हैं:

उत्तर प्रदेश: 927 बच्चे (देश में सर्वाधिक)।

चंडीगढ़: 313 बच्चे।

दिल्ली: 233 बच्चे।

महाराष्ट्र: 208 बच्चे।

आंध्र प्रदेश: 191 बच्चे।

नीतिगत स्पष्टता: सरकार भीख मांगने वाले बच्चों के लिए कोई अलग योजना नहीं चला रही है, क्योंकि SMILE योजना का ढांचा ही इन बच्चों के 100% पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने (100% rehabilitation and mainstreaming) के लिए पूरी तरह से सक्षम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - For UPSC Prelims(FAQs)

1. 'AMRUT शहरों के लिए जीआईएस-आधारित मास्टर प्लान का निर्माण' उप-योजना क्या है?

यह AMRUT के तहत 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित उप-योजना है, जिसमें 461 Class-I शहरों को शामिल किया गया है। इसके तहत 437 शहरों के लिए अंतिम भू-स्थानिक डेटाबेस और 292 मास्टर प्लान अंतिम रूप दिए जा चुके हैं।

2. AMRUT 2.0 के तहत मानचित्रण के लिए किन तकनीकी मानकों का उपयोग किया जाता है?

AMRUT 2.0 में 1:4000 स्केल पर Very High Resolution Satellite (VHRS) इमेजरी के साथ-साथ 1:1000 स्केल पर ड्रोन/UAV मैपिंग का उपयोग किया जाता है, जो AMRUT की तुलना में अधिक सटीक मानचित्रण सुनिश्चित करता है।

3. SMILE योजना क्या है और इसके दो उप-घटक कौन-से हैं?

SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) सामाजिक न्याय मंत्रालय की योजना है, जिसके दो उप-घटक हैं: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास योजना, और भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास की योजना। यह 33 राज्यों/UTs के 216 शहरों में लागू है।

4. SMILE योजना के तहत अब तक कितने बच्चों का पुनर्वास हुआ है?

30 जून 2026 तक कुल 2,824 बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास किया गया है, जिनमें से 1,549 को परिवारों से मिलाया गया, 676 को स्कूलों में दाखिला मिला, और उत्तर प्रदेश 927 बच्चों के साथ राज्यों में शीर्ष पर है।

5. क्या भीख मांगने वाले बच्चों के लिए कोई अलग योजना है?

नहीं, सरकार भीख मांगने वाले बच्चों के लिए कोई अलग योजना नहीं चलाती। SMILE योजना का ढांचा ही इन बच्चों के 100% पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

अवधारणा-आधारित अभ्यास प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1

जीआईएस-आधारित शहरी नियोजन (GIS-Based Urban Planning) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. संविधान की 12वीं अनुसूची के अनुसार, शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने सहित शहरी नियोजन मुख्य रूप से राज्य सरकारों का प्रत्यक्ष कार्य है।
2. 'AMRUT शहरों के लिए जीआईएस-आधारित मास्टर प्लान का निर्माण' उप-योजना 100% केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित की जा रही है।
3. AMRUT 2.0 जीआईएस उप-योजना के तहत 1:4000 स्केल पर उपग्रह इमेजरी के साथ-साथ 1:1000 स्केल पर ड्रोन/UAV मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A. केवल 1 और 2   B. केवल 2 और 3   C. केवल 1 और 3   D. 1, 2 और 3

उत्तर: B (केवल 2 और 3)

व्याख्या (Explanation):

कथन 1 गलत है: संविधान की 12वीं अनुसूची के अनुसार, मास्टर प्लान तैयार करने सहित शहरी नियोजन शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और शहरी विकास प्राधिकरणों का कार्य है, न कि राज्य सरकारों का प्रत्यक्ष कार्य (हालांकि केंद्र राज्यों के माध्यम से सहयोग करता है)।

कथन 2 सही है: यह उप-योजना AMRUT के तहत 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित (100% centrally funded) उप-योजना है।

कथन 3 सही है: तकनीकी मानकों के अनुसार, AMRUT 2.0 में जीआईएस बेस लेयर बनाने के लिए 1:4000 स्केल पर VHRS इमेजरी और 1:1000 स्केल पर ड्रोन/UAV मैपिंग दोनों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 2

'स्माइल' (SMILE) योजना के तहत बच्चों के पुनर्वास से जुड़े निम्नलिखित कथनों का विश्लेषण कीजिए:

1. इस योजना के तहत 30 जून 2026 तक देश भर में 2,824 बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास किया गया है, जिसमें सबसे अधिक बच्चे उत्तर प्रदेश में पुनर्वासित किए गए हैं।

2. भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों के लिए केंद्र सरकार द्वारा 'SMILE' से इतर एक विशेष स्वतंत्र राष्ट्रीय कल्याणकारी योजना का संचालन किया जा रहा है।
3. जिन बच्चों को संस्थागत देखभाल की आवश्यकता होती है, उन्हें किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत कर बाल देखभाल संस्थानों से जोड़ा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल 1 और 2   B. केवल 2 और 3   C. केवल 1 और 3   D. 1, 2 और 3

उत्तर: C (केवल 1 और 3)

व्याख्या (Explanation):

कथन 1 सही है: 30 जून 2026 तक कुल 2,824 बच्चों का पुनर्वास हुआ है, जिसमें उत्तर प्रदेश 927 बच्चों के साथ शीर्ष स्थान पर है।

कथन 2 गलत है: सरकार भीख मांगने में लगे बच्चों के लिए कोई अलग या स्वतंत्र योजना नहीं चला रही है, क्योंकि 'SMILE - भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास' योजना के भीतर ही बच्चों के 100% पुनर्वास और मुख्यधारा में जोड़ने के पर्याप्त प्रावधान शामिल हैं।

कथन 3 सही है: संस्थागत देखभाल की श्रेणी वाले बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के विनियामक प्रावधानों के तहत CWC के समक्ष पेश कर CCIs से जोड़ा जाता है।

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