संक्षिप्त विषय सूची (Table of Contents)
- 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस और जनजातीय वस्त्र विरासत: (UPSC GS Paper I: भारतीय संस्कृति और UPSC GS Paper III: ग्रामीण प्रीमियम अर्थव्यवस्था)।
- MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: (UPSC GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार सुगमता)।
1. 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस और जनजातीय वस्त्र विरासत का प्रदर्शन
संदर्भ (Context)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में प्रतिवर्ष 07 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह ऐतिहासिक दिन वर्ष 1905 में इसी तिथि को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसे बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी वस्तुओं, घरेलू उद्योगों और विशेष रूप से हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया था।
राष्ट्रीय घोषणा और गौरव: भारत सरकार ने वर्ष 2015 में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में घोषित किया था।
12वाँ आयोजन: 07 अगस्त 2026 को भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC) में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह की अध्यक्षता की और देश के उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान (Sant Kabir & National Awards): राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट बुनकरों को उनके असाधारण कौशल और नवाचार के लिए वर्ष 2025 के 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए। 'संत कबीर पुरस्कार' बुनकरों के असाधारण कौशल और बुनाई परंपराओं के प्रति उनके आजीवन समर्पण के लिए दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है।
स्मारक डाक टिकट एवं विशिष्ट प्रकाशन: समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्वारा भारतीय हथकरघा बुनावटों पर आधारित चार स्मारक डाक टिकट जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक "Earth. Root. Thread – Aal Dyed Handloom Textiles of Central India" का विमोचन किया गया, जो भारत की विविध बुनाई परंपराओं को प्रलेखित करती है।
सजीव प्रदर्शनियाँ: समारोह के साथ आयोजित प्रदर्शनी में आगंतुकों के लिए पारंपरिक कानी (Kani) बुनाई और वॉल हैंगिंग बुनाई का सजीव प्रदर्शन किया गया।
जनजातीय वस्त्र उत्सव ("Tribal Weaves of India"): जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड (TRIFED) ने नई दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित रीसा (RISA) फ्लैगशिप स्टोर पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।
भौगोलिक संकेतक (GI-Tagged) उत्पाद: प्रदर्शनी में कोटपाड कॉटन, टसर सिल्क, एरी सिल्क, मूगा सिल्क, टोडा कढ़ाई और डोंगरिया कढ़ाई जैसी उत्कृष्ट विरासत बुनावटों का प्रदर्शन किया गया।
पारंपरिक हस्तशिल्प: मणिपुर की लॉन्गपी पॉटरी (Longpi Pottery), लद्दाख की तुरतुक ब्रास कटलरी (Turtuk Brass Cutlery), महाराष्ट्र की वारली कला (Warli Art) और छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध ढोकरा कला (Dokhra Art) का विशेष प्रदर्शन हुआ।
रीसा (RISA: Timeless Tribal): यह जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रारंभ और ट्राइफेड द्वारा संचालित एक प्रीमियम ब्रांड है, जो पारंपरिक बुनावटों को आधुनिक ट्रेंड्स के साथ संयोजित कर वैश्विक स्तर पर प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित कर रहा है।
महत्व (Significance)
प्रमाणित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था (Verified Cultural Economy): सरकार के नीतिगत प्रयासों के माध्यम से भारतीय हथकरघा क्षेत्र को एक 'प्रमाणित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था' में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि निखर रही है और यह आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार बन रहा है।
प्रौद्योगिकी और युवा उद्यमिता (Heritage meets Tech): युवाओं को विरासत के साथ प्रौद्योगिकी, रचनात्मकता और उद्यमशीलता को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। VisioNXT जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म मांग का पूर्वानुमान लगाने, डिजाइन रुझानों की पहचान करने और वास्तविक हथकरघा उत्पादों को प्रमाणित करने में सहायक हैं।
आजीविका और महिला सशक्तीकरण: हथकरघा भारत का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है, जो 35 लाख से अधिक बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों की आजीविका का समर्थन करता है, जिनमें लगभग 72% महिलाएं हैं।
आय का महत्वाकांक्षी लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बुनकर को एक गरिमापूर्ण आजीविका सुनिश्चित करते हुए आने वाले वर्षों में ₹50,000 प्रति माह की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है।
हथकरघा 4.0 (Handloom 4.0): उत्पादकता, गुणवत्ता और रखरखाव की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जिसका पायलट परीक्षण 100 करघों (Looms) पर शुरू किया गया है।
बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय कार्यक्रम:
देश में 29 बुनकर सेवा केंद्र (WSC) और 11 भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHT) प्रशिक्षण और डिजाइन सहायता प्रदान कर रहे हैं। इनके अंतर्गत स्थापित डिजाइन संसाधन केंद्र (Design Resource Centres) युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
भावी राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (National Handloom and Handicraft Programme) के तहत 500 से अधिक जिलों में 1,800 क्लस्टरों को मजबूत किया जाएगा, जिससे 65 लाख बुनकर और शिल्पकार लाभान्वित होंगे और वैश्विक स्तर पर "Handmade in India" ब्रांड स्थापित होगा।
तकनीकी नवाचार: असम का 'मैना लूम' (Maina Loom), शिवसागर में विकसित 'चितरंजन हथकरघा' (Chitranjan Handloom), और आईआईटी के साथ मिलकर स्थापित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी' द्वारा हल्के, मजबूत और संचालित करने में आसान करघे विकसित किए जा रहे हैं ताकि बुनकरों का शारीरिक श्रम कम हो सके।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की ऐतिहासिक तिथि और पृष्ठभूमि (स्वदेशी आंदोलन - 1905); संत कबीर पुरस्कार का महत्व; 'रीसा' प्रीमियम ब्रांड और ट्राइफेड (TRIFED) की भूमिका; महत्वपूर्ण जीआई-टैग वस्त्र और हस्तशिल्प के उत्पादक क्षेत्र; 'हथकरघा 4.0' और 'VisioNXT' की संकल्पना।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper I & III):
कला एवं संस्कृति: स्वदेशी हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पुनरुद्धार और संरक्षण।
ग्रामीण और समावेशी विकास: महिला-नेतृत्व वाले कुटीर उद्योग, बुनकरों की आय में वृद्धि, और भारत की ग्रामीण प्रीमियम अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण।
औद्योगिक नवाचार (Tech & Craft Interventions): प्रौद्योगिकी द्वारा कारीगरों के विस्थापन के बजाय उन्हें सशक्त बनाना (Technology should empower, not replace)।
2. MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: विनियामक सुधार और नीतिगत विश्लेषण
संदर्भ (Context)
संसदीय स्वीकृति: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को 07 अगस्त 2026 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया, जबकि इसे 03 अगस्त 2026 को राज्यसभा द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी।
अधिनियम की पृष्ठभूमि: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (MSMED Act) को पहली बार वर्ष 2006 में अधिसूचित किया गया था। पिछले दो दशकों में हुए तकनीकी बदलावों, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के विकास और कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस कानून में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।
आर्थिक भूमिका: वर्तमान में MSME क्षेत्र देश में 40 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
मुख्य विनियामक प्रावधान (Technical and Regulatory Highlights)
इस संशोधन विधेयक के माध्यम से MSME पारिस्थितिकी तंत्र के नियामक ढांचे में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
दोहरे वर्गीकरण मानदंड (Twin Criterion Classification): MSMEs के वर्गीकरण हेतु "संयंत्र और मशीनरी में निवेश" (Investment in plant/machinery) तथा "टर्नओवर" (Turnover) के दोहरे मापदंड को अब औपचारिक रूप से अधिनियम में शामिल किया गया है।
उद्यम पोर्टल (Udyam Portal) का विनियामक स्थायित्व: यह विधेयक उद्यम पंजीकरण पोर्टल को एक डिजिटल, निःशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी विनियामक दर्जा प्रदान करता है। उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत MSMEs की संख्या 01 अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में 9.16 करोड़ हो गई है।
विलंबित भुगतान समाधान हेतु कड़े समय-सीमा मानक (Strict SLA-driven Timelines): सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लंबित भुगतानों को समय पर निपटाने के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) को संस्थागत रूप दिया गया है और निम्नलिखित सख्त समय-सीमा लागू की गई है:
मध्यस्थता (Mediation): सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) या मध्यस्थता सेवा प्रदाता को पहली उपस्थिति की तारीख से 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मध्यस्थता के बाद रेफ़रल: मध्यस्थता विफल होने या समाप्त होने की स्थिति में, सुविधा परिषद को अगले 30 दिनों के भीतर मामले को औपचारिक मध्यस्थता (Arbitration) के लिए प्रेषित करना होगा।
अंतिम निर्णय (Arbitral Award): मध्यस्थता या वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र को लिखित दलीलें (Pleadings) पूरी होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर अपना अंतिम निर्णय सुनाना अनिवार्य होगा।
अदालती डिक्री पर रोक और आपूर्तिकर्ताओं का संरक्षण: यदि आपूर्तिकर्ता के पक्ष में दिए गए किसी निर्णय या आदेश को खरीदार द्वारा अदालत में चुनौती दी जाती है, और वह याचिका 6 महीने से अधिक समय से लंबित रहती है, तो अदालतों के लिए अनिवार्य होगा कि वे खरीदार को कुल विवादित राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत तुरंत आपूर्तिकर्ता को भुगतान करने का आदेश दें।
भू-राजस्व बकाए के रूप में वसूली (Recovery as Land Revenue): सुविधा परिषद या मध्यस्थता सेवा प्रदाता द्वारा किए गए किसी भी समझौते या मध्यस्थ निर्णय के तहत बकाया राशि को संबंधित क्षेत्राधिकार के जिला कलेक्टर या अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से 'भू-राजस्व के बकाए' की तरह वसूल किया जा सकेगा।
TReDS प्लेटफॉर्म का अनिवार्य उपयोग: सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए MSMEs से की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के इनवॉइस का निपटान Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को भी अपने सार्वजनिक उपक्रमों (PSEs) को इस मंच का उपयोग करने के लिए प्रेरित करने का अधिकार दिया गया है।
आर्थिक संकेतक: TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग की मात्रा वित्त वर्ष 2022-23 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ हो चुकी है।
नीतिगत महत्व (Policy Significance)
विश्वास-आधारित विनियमन (Trust-based Regulation): यह संशोधन विनियामक गैर-अनुपालन के मामलों में आपराधिक सजा के प्रावधानों को निरस्त करके विश्वास-आधारित विनियामक वातावरण को बढ़ावा देता है।
गैर-अपराधीकरण (Decriminalisation): पंजीकरण न कराने या जानकारी साझा न करने पर पूर्व में लागू दोषसिद्धि और आपराधिक जुर्माने को समाप्त कर श्रेणीबद्ध नागरिक दंड (Graded Civil Penalties) में बदल दिया गया है।
गलत जानकारी प्रस्तुत करने के पहले मामले में केवल औपचारिक चेतावनी दी जाएगी, जबकि दूसरे या आगामी मामलों में नागरिक जुर्माना लगाया जाएगा।
खरीदारों द्वारा अपने वार्षिक खातों में एमएसएमई के बकाया ब्याजों का खुलासा न करने पर भी पहली बार चेतावनी, दूसरी बार जुर्माना और केवल तीसरी बार से आगे आर्थिक दंड का प्रावधान है।
प्रशासनिक लचीलापन: राज्य सरकारों को सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) की संरचना तय करने और राज्यों में एक से अधिक ऐसी परिषदों का गठन करने की स्वायत्तता दी गई है ताकि स्थानीय स्तर पर विवादों का शीघ्र निपटारा हो सके।
विकसित भारत @2047 दृष्टिकोण: यह संशोधन उद्यमों के औपचारिकरण (Formalisation) को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्रतिस्पर्धी बनाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुकूल है।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: MSMED अधिनियम (2006) में किया गया संशोधन; दोहरे वर्गीकरण का विनियामक आधार; उद्यम पोर्टल की विशेषताएं; मध्यस्थता और अधिनिर्णय की समय-सीमा; न्यायालयों द्वारा 50% भुगतान का नियम; और TReDS पर CPSEs की अनिवार्यता।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III):
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): विनियामक गैर-अपराधीकरण और श्रेणीबद्ध नागरिक दंड द्वारा विश्वास-आधारित निवेश माहौल का निर्माण।
तरलता संकट और विलंबित भुगतान: अर्थव्यवस्था में MSMEs के समक्ष आने वाले 'कार्यशील पूंजी संकट' (Working Capital Crisis) को दूर करने में TReDS और सख्त विवाद समाधान अवधियों का नीतिगत योगदान।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 07 अगस्त को क्यों मनाया जाता है?
यह दिन वर्ष 1905 में इसी तिथि को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जो बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी वस्तुओं और हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू हुआ था। भारत सरकार ने 2015 में इसे राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया।
2. 'संत कबीर पुरस्कार' क्या है?
यह बुनकरों के असाधारण कौशल और बुनाई परंपराओं के प्रति आजीवन समर्पण के लिए दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च हथकरघा सम्मान है। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2025 के 3 संत कबीर पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए।
3. 'MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' कब पारित हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसे 07 अगस्त 2026 को लोकसभा और 03 अगस्त 2026 को राज्यसभा ने पारित किया। इसका उद्देश्य 2006 के MSMED अधिनियम को आधुनिक बनाना, विलंबित भुगतान की समस्या को हल करना और व्यापार सुगमता बढ़ाना है।
4. विलंबित भुगतान विवादों के समाधान की समय-सीमा क्या है?
मध्यस्थता 90 दिनों में पूरी करनी होगी, विफल होने पर 30 दिनों के भीतर औपचारिक मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा, और लिखित दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय देना अनिवार्य होगा। यदि खरीदार अदालत में चुनौती देता है और मामला 6 महीने से अधिक लंबित रहता है, तो न्यूनतम 50% राशि तुरंत आपूर्तिकर्ता को देनी होगी।
5. TReDS प्लेटफॉर्म पर CPSEs के लिए क्या अनिवार्यता लागू की गई है?
सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए MSMEs से खरीद के इनवॉइस का निपटान TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है। TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग वित्त वर्ष 2022-23 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ हो चुकी है।
अवधारणा-आधारित अभ्यास प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1
राष्ट्रीय हथकरघा नीति और जनजातीय वस्त्र विरासत के संरक्षण में 'प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक समन्वय' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. 'रीसा' (RISA: Timeless Tribal) जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रारंभ और ट्राइफेड (TRIFED) द्वारा संचालित एक प्रीमियम ब्रांड है, जिसका उद्देश्य प्रामाणिकता और समकालीन डिजाइन के समन्वय से जनजातीय वस्त्रों को प्रीमियम उत्पादों के रूप में स्थापित करना है।
3. डिजिटल प्लेटफॉर्म 'VisioNXT' भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (IIHT) द्वारा स्थापित एक भौतिक वितरण केंद्र है, जो बुनकरों को प्रत्यक्ष रूप से रियायती दरों पर कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: 'हथकरघा 4.0' (Handloom 4.0) पहल डिजिटल उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके करघों की कार्यप्रणाली और उत्पादकता की निगरानी करती है। इस पहल का मूल आधार यह है कि तकनीकी हस्तक्षेपों को कारीगरों का विस्थापन नहीं, बल्कि उनका सशक्तिकरण करना चाहिए।
कथन 2 सही है: 'रीसा: टाइमलेस ट्राइबल' जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक विशेष पहल है जिसे ट्राइफेड (TRIFED) के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। यह ब्रांड जनजातीय वस्त्रों और हस्तशिल्प की मौलिकता को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाता है।
कथन 3 गलत है: 'VisioNXT' कोई भौतिक वितरण केंद्र या कच्चा माल आपूर्ति डिपो नहीं है। यह मांग का पूर्वानुमान लगाने, डिजाइन रुझानों की पहचान करने, वास्तविक हथकरघा उत्पादों को प्रमाणित करने और बुनकरों को वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। बुनकरों को प्रशिक्षण, डिजाइन सहायता और कौशल विकास प्रदान करने का कार्य बुनकर सेवा केंद्रों के तहत स्थापित डिजाइन संसाधन केंद्र करते हैं।
प्रश्न 2
'MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत विवाद समाधान और अनुपालन संरचना (Compliance Architecture) के संबंध में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
2. संशोधित प्रावधानों के तहत, मध्यस्थता (Mediation) प्रक्रिया को पहली उपस्थिति की तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा, और इसके विफल होने पर अगले 30 दिनों के भीतर मामले को औपचारिक मध्यस्थता (Arbitration) के लिए संदर्भित करना अनिवार्य है।
3. विश्वास-आधारित विनियामक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए, विनियामक गैर-अनुपालन (जैसे गलत जानकारी साझा करना या पंजीकरण न कराना) के पहले और दूसरे दोनों ही मामलों में खरीदारों के लिए कठोर कारावास और आपराधिक दंड का प्रावधान यथावत रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1 और 3
- B. केवल 1 और 2
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: आपूर्तिकर्ताओं (सूक्ष्म और लघु उद्यमों) के हितों की रक्षा और उनकी कार्यशील पूंजी को सुरक्षित करने के लिए यह कड़ा प्रावधान किया गया है कि यदि मध्यस्थ निर्णय के विरुद्ध दायर याचिका न्यायालय में 6 महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो खरीदार को कुल विवादित राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत आपूर्तिकर्ता को तुरंत भुगतान करना होगा।
कथन 2 सही है: विधेयक विवाद निपटारे में तेजी लाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा (SLA) निर्धारित करता है। सुविधा परिषद या मध्यस्थता सेवा प्रदाता को 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता पूरी करनी होगी। मध्यस्थता समाप्त होने या विफल होने की स्थिति में, 30 दिनों के भीतर मामले को औपचारिक मध्यस्थता (Arbitration) के लिए संदर्भित करना होगा, और लिखित दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिनों के भीतर मध्यस्थ न्यायाधिकरण को अपना निर्णय सुनाना होगा।
कथन 3 गलत है: विधेयक ने विश्वास-आधारित विनियमन के हिस्से के रूप में विनियामक गैर-अनुपालन को पूरी तरह से गैर-अपराधीकृत (decriminalised) कर दिया है। अब कारावास या दोषसिद्धि आधारित जुर्मानों के स्थान पर श्रेणीबद्ध नागरिक दंड (Graded Civil Penalties) लागू किए गए हैं। उदाहरण के लिए, गलत जानकारी प्रस्तुत करने के पहले मामले में केवल चेतावनी दी जाएगी, तथा केवल दूसरे और आगामी मामलों में ही नागरिक जुर्माना लगाया जाएगा।