विषय सूची (Table of Contents)
- सिल्क्यारा सुरंग रैट माइनर्स को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक: बचाव अभियान में असाधारण वीरता के लिए 12 नायकों को सम्मान; नागरिक साहस, आपदा प्रबंधन रणनीति और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण (UPSC GS Paper IV: नीतिशास्त्र - मानवीय मूल्य और सहानुभूति; एवं UPSC GS Paper III: आपदा प्रबंधन)।
- कोयला क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार (2021-2026): विगत पांच वर्षों के व्यापक संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और तकनीकी सुधार; व्यापार सुगमता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता (UPSC GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचा - ऊर्जा और खनिज संसाधन)।
1. सिल्क्यारा सुरंग रैट माइनर्स को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक: नागरिक वीरता और आपदा प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण
संदर्भ (Context)
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने 05 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष अलंकरण समारोह (Investiture ceremony) में सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान (Silkyara Tunnel Rescue Operation) के दौरान असाधारण वीरता और निस्वार्थ सेवा प्रदर्शित करने वाले 12 रैट माइनर्स (Rat Miners) को देश के प्रतिष्ठित नागरिक वीरता पुरस्कार 'सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक' (Sarvottam Jeevan Raksha Padak) से सम्मानित किया। सिल्क्यारा सुरंग का ढहना हाल के वर्षों के सबसे चुनौतीपूर्ण और जटिल बचाव अभियानों में से एक था। इस जटिल बहु-एजेंसी ऑपरेशन (Multi-agency operation) के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में रैट माइनर्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर मैन्युअल रूप से मलबे को हटाया और फंसे हुए सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मुख्य विवरण (Highlights)
पुरस्कार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: जीवन रक्षा पदक श्रृंखला के पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1961 में अशोक चक्र श्रृंखला के वीरता पुरस्कारों के एक हिस्से (Offshoot) के रूप में की गई थी।
पुरस्कार की श्रेणियाँ: यह पुरस्कार मानवीय प्रकृति के सराहनीय कार्यों और दूसरों के प्राण बचाने के लिए व्यक्तिगत जोखिम उठाने पर तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है:
सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक: बचावकर्ता की जान को अत्यधिक गंभीर खतरे की स्थिति में दिखाई गई असाधारण वीरता हेतु।
उत्तम जीवन रक्षा पदक: गंभीर खतरे की स्थिति में प्रदर्शित साहस और तत्परता हेतु।
जीवन रक्षा पदक: गंभीर शारीरिक चोट के जोखिम के बावजूद दिखाया गया साहस और तत्परता।
सम्मानित 12 नायक (रैट माइनर्स): इस अवसर पर सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक प्राप्त करने वाले रैट माइनर्स के नाम निम्नलिखित हैं: श्री वकील हसन, श्री मुन्ना, श्री अंकुर कुमार, श्री मोनू कुमार, श्री देवेंद्र, श्री मो. राशिद, श्री फिरोज कुरैशी, श्री जतिन कश्यप, श्री सौरभ कश्यप, श्री मो. इरशाद, श्री नसरुद्दीन, श्री नसीम।
अलंकरण और वित्तीय विवरण: प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक मुख्य पदक (Medallion), एक प्रमाणपत्र (जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री के हस्ताक्षर होते हैं), एक लघु पदक (Miniature medal) और ₹2,00,000 की एकमुश्त नकद राशि ऑनलाइन माध्यम से प्रदान की गई है।
महत्व (Strategic Significance)
नागरिक साहस और परोपकारिता का प्रोत्साहन: यह पुरस्कार समाज में नागरिक साहस (Civic courage), परोपकारिता (Altruism) और मानवीय मूल्यों (Humanitarian values) को बढ़ावा देता है। यह सामान्य नागरिकों द्वारा किए गए असाधारण कार्यों को औपचारिक मान्यता देकर समाज में करुणा और सार्वजनिक जिम्मेदारी (Public responsibility) की संस्कृति को सुदृढ़ करता है।
आपदा प्रबंधन में स्थानीय कौशल की भूमिका: यह बचाव अभियान अत्याधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों (जैसे वर्टिकल ड्रिलिंग) और पारंपरिक कौशल (रैट-होल माइनिंग) के अद्भुत समन्वय का प्रमाण था। जब भारी मशीनरी विफल हो गई, तब इन रैट माइनर्स ने बेहद तंग और खतरनाक स्थानों (Confined and hazardous spaces) में प्रवेश कर मानवीय कौशल का लोहा मनवाया।
एजेंसी समन्वय (Inter-agency Coordination): इस ऑपरेशन ने सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचआईडीसीएल (NHIDCL), सीमा सड़क संगठन (BRO), भारतीय सेना, उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच प्रभावी रणनीतिक और परिचालन तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
संस्थागत पक्ष
पात्रता और नामांकन: यह पुरस्कार लिंग, वर्ग या पेशे के भेदभाव के बिना जीवन के सभी क्षेत्रों के नागरिकों के लिए खुला है और इसे मरणोपरांत (Posthumously) भी प्रदान किया जा सकता है। इसके दायरे में डूबने, आग, दुर्घटनाओं, बिजली के झटके, भूस्खलन, खान बचाव (Mine rescues) और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किए गए बचाव कार्य शामिल हैं।
मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया: राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों से वार्षिक रूप से नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। इन सिफारिशों की जांच जीवन रक्षा पदक पुरस्कार समिति द्वारा की जाती है। अंतिम मंजूरी भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा प्रदान की जाती है।
सेवा रियायतों का अभाव: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन पुरस्कारों के साथ कोई अतिरिक्त सेवा रियायतें (जैसे रेल टिकट या हवाई यात्रा में छूट) संलग्न नहीं होती हैं।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: जीवन रक्षा पदक श्रृंखला की उत्पत्ति (1961), इसकी श्रेणियां और संबंधित वित्तीय पुरस्कार की राशि। इसके चयन और अनुमोदन की द्विवर्षीय समय-सीमा तथा सर्वोच्च प्राधिकारियों की भूमिका।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III - आपदा प्रबंधन): भारत में आपदा प्रतिक्रिया अवसंरचना (Disaster Response Infrastructure) की प्रभावशीलता; तकनीकी प्रगति बनाम पारंपरिक मानवीय कौशल; और बहु-एजेंसी ऑपरेशन्स का प्रबंधन।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper IV - नीतिशास्त्र और मानवीय मूल्य): दूसरों की रक्षा के लिए स्वयं के जीवन को संकट में डालना (अल्ट्रुइज्म/परोपकारिता) और लोक सेवा के प्रति सर्वोच्च प्रतिबद्धता का नैतिक विश्लेषण।
2. कोयला क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार (2021-2026): ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में नीतिगत बदलाव
संदर्भ (Context)
भारत सरकार ने देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पिछले पांच वर्षों (2021-2026) के दौरान कोयला क्षेत्र में व्यापक संरचनात्मक (Structural), प्रक्रियात्मक (Procedural) और तकनीकी (Technological) सुधार किए हैं। पारंपरिक प्रशासनिक आवंटन प्रणाली (Administrative allotment system) के स्थान पर खुली प्रतिस्पर्धी नीलामी (Open competitive auction) और वर्ष 2020 में बिना किसी अंतिम-उपयोग प्रतिबंध के शुरू किए गए वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial coal mining) ने इस क्षेत्र का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया है। इन दूरदर्शी सुधारों के परिणामस्वरूप भारत का घरेलू कोयला उत्पादन (Domestic coal production) वित्त वर्ष 2019-20 के लगभग 731 मिलियन टन से बढ़कर लगातार दो वर्षों तक 1 बिलियन टन से अधिक रहा है। यह उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.52 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1039 मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है।
मुख्य विवरण (Highlights)
क. पारदर्शिता और बाजार-आधारित सुधार (Transparency and Market-Based Reforms):
वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial Coal Mining): बिना किसी तकनीकी या वित्तीय पात्रता शर्तों के स्वचालित मार्ग (Automatic route) के तहत शत-प्रतिशत (100%) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment - FDI) की अनुमति दी गई है।
राजस्व-साझाकरण मॉडल (Revenue-Sharing Model): पुरानी निश्चित-भुगतान प्रणाली (Fixed-payment system) को समाप्त कर नीलामी को प्रतिशत राजस्व-साझाकरण मॉडल में परिवर्तित किया गया है। इसे और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय कोयला सूचकांक (National Coal Index - NCI) की शुरुआत की गई है।
सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक नीलामी (Single Window Mode Agnostic - SWMA): कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के सभी गैर-लिंकेज कोयले को एक ही विंडो के माध्यम से बेचने के लिए इसे शुरू किया गया है, ताकि बाजार की विसंगतियां दूर हों और खरीदारों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बढ़े।
शक्ति नीति का सरलीकरण (SHAKTI Policy Simplification): कोयला लिंकेज आवंटन को दो विंडो में सरल बनाया गया है—प्रथम अधिसूचित मूल्य (Notified Price) पर और द्वितीय अधिसूचित मूल्य से अधिक प्रीमियम पर।
कोलसेतु विंडो (CoalSETU Window): गैर-विनियमित क्षेत्र (Non-Regulated Sector - NRS) लिंकेज नीलामी नीति के तहत शुरू की गई यह विंडो उपभोक्ताओं को बिना किसी अंतिम उपयोग प्रतिबंध के कोयले की धुलाई, स्व-उपभोग या निर्यात के लिए पूर्ण लचीलापन प्रदान करती है।
ख. कार्यकुशलता और व्यापार सुगमता (Efficiency and Ease of Doing Business):
एकल खिड़की स्वीकृति प्रणाली (Single Window Clearance System): खदानों के त्वरित संचालन के लिए इस एकीकृत प्रणाली को परिवेश 2.0 (PARIVESH 2.0) पोर्टल के माध्यम से जोड़ा गया है।
अन्वेषण का उदारीकरण (Liberalisation of Exploration): 44 निजी संस्थाओं को मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों (Accredited Prospecting Agencies - APA) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे अन्वेषण लाइसेंस (Prospecting License) की अनिवार्यता समाप्त हो गई है।
वैधानिक संशोधन (Statutory Amendments): कोकिंग कोयले (Coking Coal) को माइन्स एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (MMDR) अधिनियम, 1957 के तहत एक 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज' (Critical and Strategic Mineral) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे पर्यावरण और वन मंजूरी प्रक्रिया तीव्र होगी। इसके साथ ही कोलीयरी नियंत्रण नियमों (Colliery Control Rules) में संशोधन कर कोयला कंपनियों के बोर्ड को खदान खोलने की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है।
बीमा गारंटी बांड (Insurance Surety Bonds): बैंक गारंटी पर निर्भरता कम करने और कंपनियों की कार्यशील पूंजी (Working capital) को मुक्त करने के लिए इन्हें प्रदर्शन सुरक्षा (Performance security) के रूप में स्वीकार्य साधन बनाया गया है।
कोयला विनिमय नियम, 2026 (Coal Exchange Rules, 2026): इसके तहत कोयला और उसके प्रसंस्कृत रूपों के व्यापार के लिए एक विनियमित ऑनलाइन मंच (Regulated online platform) स्थापित किया गया है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत आयातित कोयले (Imported coal) पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर रहा है, जिससे देश की रणनीतिक ऊर्जा संप्रभुता (Strategic energy sovereignty) सुदृढ़ हो रही है।
पारिस्थितिक स्थिरता (Environmental Sustainability): पारंपरिक ड्रिलिंग के स्थान पर विस्फोट-रहित खनन प्रौद्योगिकियों (जैसे सरफेस माइनर्स) का उपयोग, वृक्षारोपण और खदान जल उपयोग जैसी हरित पहलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी (Clean Coal Technologies):
कोयला गैसीकरण (Coal Gasification): वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन गैसीकरण क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ₹8,500 करोड़ (8 परियोजनाएं स्वीकृत) और ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी गई है।
मिशन कोकिंग कोल (Mission Coking Coal): इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक देश की कोयला धुलाई क्षमता (Coal washery capacity) को बढ़ाकर 58 मीट्रिक टन करना है।
शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य (Net-Zero Carbon Emission): कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट (GW) और वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता (Net-zero renewable capacity) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से 558 मेगावाट (MW) क्षमता पहले ही स्थापित की जा चुकी है।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष (Economic and Institutional Side)
लॉजिस्टिक्स अवसंरचना (Logistics Infrastructure): बहुआयामी लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के लिए एकीकृत कोयला लॉजिस्टिक्स योजना (Integrated Coal Logistics Plan) शुरू की गई है। इसके तहत कुल 1,319 मिलियन टन क्षमता वाली 139 फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (First Mile Connectivity - FMC) परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 589 मिलियन टन क्षमता वाली 72 परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं।
डिजिटल खदान निगरानी (Digital Mine Monitoring): उत्पादन और परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी (Real-time monitoring) के लिए कोयला शक्ति डैशबोर्ड (Koyla Shakti Dashboard) लॉन्च किया गया है। अवैध खनन की रोकथाम के लिए खनन प्रहरी ऐप (Khanan Prahari App) और सीएमएसएमएस (CMSMS) वेब ऐप संचालित हैं।
खान विकासकर्ता और संचालक (Mine Developer and Operator - MDO) मॉडल: निजी निवेश को आकर्षित करने और संसाधन निष्कर्षण को अधिकतम करने के लिए बंद या परित्यक्त खदानों को राजस्व-साझाकरण मॉडल के तहत फिर से संचालित किया जा रहा है।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: कोयला उत्पादन के आंकड़े (1 बिलियन टन से अधिक); कोल एक्सचेंज नियम 2026; कोकिंग कोयले को रणनीतिक खनिज का दर्जा देना; राष्ट्रीय कोयला सूचकांक (NCI); और फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) परियोजनाएं।
मुख्य परीक्षा हेतु (GS Paper III - आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा): भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग बनाम सतत विकास लक्ष्य (SDGs); कोयला क्षेत्र के उदारीकरण का राजकोषीय और व्यापारिक प्रभाव; स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों (गैसीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा रोडमैप) का महत्व; और बुनियादी ढांचा विकास में बहुआयामी परिवहन प्रणालियों की भूमिका।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 'सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक' किसे और क्यों प्रदान किया गया?
यह पुरस्कार सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान में असाधारण वीरता दिखाने वाले 12 रैट माइनर्स को 05 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में दिया गया, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर फंसे हुए श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
2. जीवन रक्षा पदक श्रृंखला की तीन श्रेणियां क्या हैं?
इस श्रृंखला में सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक (अत्यधिक गंभीर खतरे में असाधारण वीरता), उत्तम जीवन रक्षा पदक (गंभीर खतरे में साहस), और जीवन रक्षा पदक (शारीरिक चोट के जोखिम में साहस) शामिल हैं। इसकी स्थापना 1961 में अशोक चक्र श्रृंखला के हिस्से के रूप में हुई थी।
3. पिछले पांच वर्षों में भारत का घरेलू कोयला उत्पादन कितना बढ़ा है?
भारत का घरेलू कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 2019-20 के लगभग 731 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.52 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1039 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, यानी लगातार दो वर्षों तक 1 बिलियन टन से अधिक।
4. कोकिंग कोयले को 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज' का दर्जा क्यों दिया गया?
कोकिंग कोयले को MMDR अधिनियम, 1957 के तहत यह दर्जा देने का उद्देश्य कोकिंग कोयला परियोजनाओं के लिए पर्यावरण और वन मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना है।
5. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य क्या है?
CIL ने वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट और वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 558 मेगावाट क्षमता पहले ही स्थापित की जा चुकी है।
अभ्यास प्रश्न (MCQs for UPSC CSE Prelims)
प्रश्न 1
'जीवन रक्षा पदक श्रृंखला' के पुरस्कारों की पात्रता और संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. यह पुरस्कार केवल भारत के उन सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए सीमित है जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपनी जान जोखिम में डाली हो।
3. गृह मंत्रालय की पुरस्कार समिति की सिफारिशों की जांच के बाद, इन पुरस्कारों को अंतिम मंजूरी भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा दी जाती है।
4. 'सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक' विजेताओं को ₹2,00,000 की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाती है, परंतु इसके साथ रेल या हवाई यात्रा में छूट जैसी कोई अतिरिक्त सेवा रियायतें संलग्न नहीं होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A. केवल 1, 2 और 3
- B. केवल 1, 3 और 4
- C. केवल 2, 3 और 4
- D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B (केवल 1, 3 और 4)
कथन 1 सही है: इस जीवन-रक्षक नागरिक वीरता पुरस्कार श्रृंखला की स्थापना वर्ष 1961 में अशोक चक्र श्रृंखला के वीरता पुरस्कारों के एक हिस्से के रूप में की गई थी।
कथन 2 गलत है: स्रोत स्पष्ट करते हैं कि यह पुरस्कार जीवन के सभी क्षेत्रों के नागरिकों (Persons of all walks of life) और सभी लिंगों के लिए खुला है, और इसे मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है। यह केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है।
कथन 3 सही है: राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों से प्राप्त नामांकन की समीक्षा जीवन रक्षा पदक पुरस्कार समिति द्वारा की जाती है और अंतिम अनुमोदन प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
कथन 4 सही है: सर्वोत्तम श्रेणी के विजेताओं को ₹2 लाख की राशि ऑनलाइन प्रदान की जाती है। इस पुरस्कार के साथ कोई भी अन्य रियायतें (जैसे रेल टिकट या हवाई किराए में छूट) नहीं दी जाती हैं।
प्रश्न 2
कोयला क्षेत्र में किए गए विनियामक (Regulatory) और प्रशासनिक सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. कोलीयरी नियंत्रण नियमों (Colliery Control Rules) में संशोधन के माध्यम से अब पर्यावरण मंत्रालय को सीधे नई खदानों को तत्काल शुरू करने की अनुमति देने का अंतिम अधिकार दिया गया है।
3. कोयला ब्लॉक समझौतों में कंपनियों की अवरुद्ध कार्यशील पूंजी (Working Capital) को मुक्त करने और बैंक गारंटी पर निर्भरता कम करने के लिए 'बीमा गारंटी बांड' (Insurance Surety Bonds) को प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security) के लिए एक स्वीकार्य साधन बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: C (केवल 1 और 3)
कथन 1 सही है: कोकिंग कोयले को पर्यावरण और वन मंजूरी में तेजी लाने के उद्देश्य से MMDR अधिनियम, 1957 के तहत एक 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज' के रूप में अधिसूचित किया गया है।
कथन 2 गलत है: संशोधनों के अनुसार, कोयला कंपनी के बोर्डों (Coal Company Boards) को खदान खोलने की अनुमति (Mine Opening Permissions) देने का अधिकार दिया गया है, न कि सीधे पर्यावरण मंत्रालय को।
कथन 3 सही है: बैंक गारंटी पर निर्भरता कम करने और निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए बीमा गारंटी बांड (Insurance Surety Bonds) को अब प्रदर्शन सुरक्षा के रूप में स्वीकार किया जाता है।
प्रश्न 3
कोयला क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और उत्पादन से संबंधित निम्नलिखित तकनीकी आंकड़ों पर विचार कीजिए:
2. 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' (FMC) परियोजनाओं के तहत कुल 139 स्वीकृत परियोजनाओं में से लगभग 589 मिलियन टन की क्षमता वाली 72 परियोजनाएं पहले ही चालू की जा चुकी हैं।
3. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट (GW) की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता का लक्ष्य रखा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: घरेलू उत्पादन वित्त वर्ष 2019-20 के 731 मिलियन टन से बढ़कर पिछले दो वर्षों से 1 बिलियन टन से अधिक रहा है, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 का योगदान 1047.52 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 का योगदान 1039 मीट्रिक टन था।
कथन 2 सही है: कुल 1,319 मिलियन टन क्षमता वाली 139 फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) परियोजनाओं में से 589 मिलियन टन की 72 परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
कथन 3 सही है: CIL ने दो चरणों में लक्ष्य रखा है—वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट और वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता विकसित करना।
प्रश्न 4
कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और बाजार-आधारित सुधारों के अंतर्गत प्रयुक्त होने वाली प्रणालियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा मिलान सही है?
2. कोलसेतु (CoalSETU) विंडो: गैर-विनियमित क्षेत्र (NRS) के लिए बिना किसी अंतिम उपयोग प्रतिबंध के कोयले की धुलाई, निर्यात या स्व-उपभोग की सुविधा प्रदान करने हेतु।
3. कोयला विनिमय नियम, 2026: कोयले और उसके प्रसंस्कृत रूपों के वितरण-आधारित अनुबंधों और व्यापार के लिए एक विनियमित ऑनलाइन मंच स्थापित करने हेतु।
सही कूट का चयन कीजिए:
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: SWMA को कोल इंडिया के सभी गैर-लिंकेज कोयले को एक ही विंडो से बेचने के लिए लागू किया गया है ताकि बाजार की विसंगतियां दूर की जा सकें।
कथन 2 सही है: NRS लिंकेज नीलामी के तहत कोलसेतु विंडो उपभोक्ताओं को बिना किसी अंतिम उपयोग प्रतिबंध के स्व-उपभोग, धुलाई या निर्यात के लिए पूर्ण लचीलापन प्रदान करती है।
कथन 3 सही है: हाल ही में अधिसूचित कोयला विनिमय नियम, 2026 के माध्यम से एक विनियमित ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है, जहाँ वितरण-आधारित अनुबंध किए जा सकते हैं।
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