विषय सूची (Table of Contents)
- स्वदेशी अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन: ICAR द्वारा विकसित भारत का पहला स्वदेशी टीका; पशु चिकित्सा क्षेत्र में जैव सुरक्षा और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ी सफलता (UPSC GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; कृषि एवं पशुपालन - जैव सुरक्षा)।
- अरहर (Pigeonpea) जीनोम अनुसंधान: भारत का पहला पूर्णतः एनोटेटेड 'टी2टी' (T2T) रेफरेंस जीनोम; जलवायु-अनुकूल उच्च उपज वाली किस्मों और खाद्य सुरक्षा हेतु ऐतिहासिक उपलब्धि (UPSC GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - जैव प्रौद्योगिकी और कृषि नवाचार)।
- पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI): ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन मापन और सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) के स्थानीयकरण हेतु विकसित नया समग्र मूल्यांकन ढांचा (UPSC GS Paper II: शासन व्यवस्था - पंचायती राज संस्थान और ग्रामीण विकास)।
1. स्वदेशी अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन: जैव सुरक्षा और पशु स्वास्थ्य में ऐतिहासिक उपलब्धि
संदर्भ (Context)
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 04 अगस्त 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के स्थापना दिवस के अवसर पर अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever - ASF) के विरुद्ध भारत का पहला स्वदेशी टीका (Indigenous Vaccine) राष्ट्र को समर्पित किया। अफ़्रीकी स्वाइन फीवर एक अत्यंत विनाशकारी सीमा-पार पशु रोग (Trans-boundary animal disease) है, जिसकी मृत्यु दर (Mortality rate) 100 प्रतिशत तक हो सकती है। भारत में 2020 में इसके पहले मामले का पता चलने के बाद से यह कई राज्यों में फैल गया है, जिससे सूअर पालन क्षेत्र को भारी सामाजिक-आर्थिक नुकसान हुआ है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
विकासकर्ता (Developer): इस टीके का विकास भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-National Institute of High Security Animal Diseases - NIHSAD) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।
प्रौद्योगिकी (Technology): यह भारत का पहला स्वदेशी एमए-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीणित (MA-104 Cell Line-Based Live Attenuated) टीका है। इसे एक नए क्षीणित एएसएफवी जीनोटाइप II (Attenuated ASFV Genotype II) वायरस का उपयोग करके विकसित किया गया है।
सुरक्षा और प्रभावकारिता (Safety and Efficacy): टीके का रोगाणुहीनता (Sterility), शुद्धता (Purity), आनुवंशिक स्थिरता (Genetic stability) और प्रतिरक्षाजनकता (Immunogenicity) के लिए व्यापक प्रयोगशाला मूल्यांकन किया गया है। इसका क्षेत्रीय सत्यापन (Field Validation) पशुपालन एवं दुधारू विभाग (DAHD) के सहयोग से पूर्ण किया गया है।
उपयोग विधि (Administration): यह टीका आठ सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए अनुशंसित है। इसे 1 मिलीलीटर इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन (Intramuscular injection) के रूप में दिया जाता है, जिसके 14 दिन बाद एक बूस्टर खुराक (Booster dose) दी जाती है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
आत्मनिर्भर भारत (Self-reliant India): वर्तमान में वैश्विक स्तर पर केवल वियतनाम जैसे देशों के पास व्यावसायिक टीके उपलब्ध हैं, जो पेटेंट प्राप्त मालिकाना सेल लाइनों (Proprietary cell lines) का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, भारत का टीका व्यापक रूप से उपलब्ध एमए-104 सेल लाइन का उपयोग करता है, जिससे विदेशी विनिर्माण प्लेटफार्मों पर निर्भरता समाप्त होती है।
वैश्विक आपूर्तिकर्ता (Global Supplier): यह तकनीकी सफलता बड़े पैमाने पर उत्पादन (Large-scale production) को सक्षम बनाती है और विनिर्माण लागत (Manufacturing cost) को काफी कम करती है, जिससे भारत किफायती एएसएफ टीकों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।
जैव सुरक्षा (Biosecurity): यह उपलब्धि भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा (Animal health security) को सुदृढ़ करेगी और खाद्य सुरक्षा (Food security) के लक्ष्यों को समर्थन देगी।
आर्थिक और संस्थागत पक्ष (Economic and Institutional Side)
वित्तीय नुकसान का शमन: भारत में एएसएफ के प्रकोप से भारी आर्थिक क्षति हुई है। असम (2020-21) में लगभग ₹276 करोड़ और मिजोरम (2025 तक) में लगभग ₹982 करोड़ का वित्तीय नुकसान अनुमानित है।
आजीविका सुरक्षा: यह टीका विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के छोटे सूअर पालकों (Smallholder pig farmers) की आजीविका की रक्षा करेगा, जो इस बीमारी के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
पशु चिकित्सा नवाचार: आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट के अनुसार, यह पशु चिकित्सा विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत है जो विश्व स्तरीय पशु स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की भारत की वैज्ञानिक क्षमता को प्रदर्शित करती है।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: भारत का प्रथम स्वदेशी एएसएफ टीका; आईसीआर-एनआईएचएसएडी भोपाल; एमए-104 सेल लाइन तकनीक; अफ़्रीकी स्वाइन फीवर की विशेषताएं (100% मृत्यु दर)।
मुख्य परीक्षा हेतु: पशु चिकित्सा अनुसंधान में स्वदेशीकरण का महत्व; ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका पर सीमा-पार पशु रोगों (Trans-boundary animal diseases) का प्रभाव; 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका।
2. अरहर (Pigeonpea) जीनोम संबंधी महत्वपूर्ण शोध: दलहन अनुसंधान
संदर्भ (Context)
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research - ICAR) ने 04 अगस्त 2026 को अरहर (Pigeonpea - Cajanus cajan L. Millsp.) की 'आशा' (Asha) किस्म का भारत का पहला पूर्णतः एनोटेटेड टीलोमेयर-टू-टीलोमेयर (Telomere-to-Telomere - T2T) संदर्भ जीनोम (Reference Genome) विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। अरहर, जिसे 'तूर' भी कहा जाता है, भारत की सबसे महत्वपूर्ण दलहन फसलों में से एक है और आहार प्रोटीन (Dietary protein) का प्रमुख स्रोत है। यह उपलब्धि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा (Food and nutritional security) सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
विकासकर्ता (Developer): यह शोध नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR–National Institute for Plant Biotechnology - NIPB) द्वारा संपन्न किया गया है।
जीनोम संरचना: यह जीनोम असेंबली (Genome assembly), जिसे NIPB_CcT2T_4 नाम दिया गया है, 92 कॉन्टिग्ज (Contigs) में असेंबल किए गए 752.65 मिलियन बेस पेयर्स (Million base pairs) डीएनए को समाहित करती है।
पूर्णता और शुद्धता: इसमें अरहर के सभी 11 गुणसूत्रों (Chromosomes) का पूर्ण प्रतिनिधित्व है, जिसमें सभी 11 सेंट्रोमेयर (Centromeres) और 22 टीलोमेयर (Telomeres) शामिल हैं।
जीन एनोटेशन: विश्लेषण में 36,557 जीन की पहचान की गई है, जो 48,008 एमआरएनए (mRNAs) का उत्पादन करते हैं। ट्रांसक्रिप्टोम मैपिंग (Transcriptome mapping) में 99.9% से अधिक की सटीकता (Read alignment) दर्ज की गई है।
वैश्विक डेटाबेस: इस जीनोम को वैश्विक डेटाबेस (NCBI) में एक्सेस नंबर GCF_000230855.1 के तहत जमा किया गया है, जिसे वैश्विक संदर्भ जीनोम (Global reference genome) के रूप में अनुमोदित किया गया है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
अनुसंधान का आधार: यह टी2टी संदर्भ जीनोम उन्नत जीन विश्लेषण, महत्वपूर्ण कृषि और पोषण संबंधी लक्षणों (Agronomic and nutritional traits) से जुड़े जीन की खोज के लिए एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन के रूप में कार्य करेगा।
प्रजनन में तेजी: इससे जलवायु-अनुकूल (Climate-resilient), उच्च उपज वाली और पोषण से भरपूर अरहर की किस्मों के प्रजनन (Breeding) में तेजी आएगी।
तकनीकी नवाचार: यह उपलब्धि आणविक प्रजनन (Molecular breeding) और जीनोम एडिटिंग (Genome editing) प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को सुगम बनाएगी।
ऐतिहासिक निरंतरता: यह उपलब्धि आईसीएआर-एनआईपीबी के 2011 के अग्रणी कार्य पर आधारित है, जब उसने किसी दलहन फसल का दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम (Draft genome) प्रकाशित किया था।
आर्थिक पक्ष (Economic and Institutional Side)
दलहन में आत्मनिर्भरता: भारत सरकार ने 'दलहन में आत्मनिर्भरता' हेतु मिशन (2025-26 से 2030-31) शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 35 मिलियन टन तक ले जाना है।
आयात निर्भरता में कमी: उच्च उपज वाली किस्मों के विकास से दालों के आयात पर निर्भरता कम होगी और रणनीतिक संप्रभुता (Strategic sovereignty) मजबूत होगी।
किसानों की आजीविका: बेहतर बीज प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि (Rural prosperity) सुनिश्चित करना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: भारत का पहला टी2टी पादप जीनोम (अरहर); आईसीआर-एनआईपीबी की भूमिका; 'आशा' किस्म; 11 गुणसूत्रों की संरचना और 36,557 जीन की संख्या।
मुख्य परीक्षा हेतु: खाद्य सुरक्षा में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) की भूमिका; दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की रणनीतिक आवश्यकता; जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-smart agriculture) हेतु जीनोमिक संसाधनों का महत्व।
3. पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI): सतत विकास के स्थानीयकरण और ग्रामीण सुशासन का मूल्यांकन ढांचा
संदर्भ (Context)
पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) ने सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (Localization of Sustainable Development Goals - LSDGs) के नौ विषयों पर ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats - GPs) के क्रमिक प्रदर्शन सुधार को मापने के लिए पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (Panchayat Advancement Index - PAI) विकसित किया है। पूर्व में 'पंचायत विकास सूचकांक' (Panchayat Development Index - PDI) के रूप में विख्यात यह सूचकांक एक समग्र मूल्यांकन ढांचा (Composite assessment framework) है, जो वैश्विक विकास एजेंडा को जमीनी स्तर पर प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य बनाता है।
तकनीकी और मुख्य विवरण (Technical Highlights)
PAI 2.0 का विस्तार: वित्त वर्ष 2023-24 के लिए आयोजित PAI 2.0 अभ्यास में 33 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की कुल 2.59 लाख ग्राम पंचायतों (या उनके समकक्ष) को ऑनबोर्ड (Onboarded) किया गया है।
मूल्यांकन पद्धति: यह सूचकांक स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड (Scorecards and Dashboards) के माध्यम से विषय-वार और समग्र स्कोर प्रदान करता है।
ग्रेडिंग और प्रदर्शन (Annexure I): PAI 2.0 के तहत पंचायतों को ए+ से डी (A+ to D) ग्रेड में वर्गीकृत किया गया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,59,867 पंचायतों में से 3,635 पंचायतों ने 'A' ग्रेड और 1,18,824 पंचायतों ने 'B' ग्रेड प्राप्त किया है, जबकि 'A+' श्रेणी में वर्तमान में कोई भी पंचायत नहीं है।
संकल्प (Sankalp): ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) को तैयार करने से पहले पंचायतों को विकास के मुख्य क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है, जिसे 'संकल्प' कहा जाता है।
प्रगति रिपोर्ट (2026-27): जुलाई 2026 तक 1.56 लाख से अधिक पंचायतों ने संकल्प लिया है, जिनमें से 31,789 ने 'जल पर्याप्त पंचायत' और 32,806 ने 'स्वच्छ और हरित पंचायत' को प्राथमिकता दी है।
उच्च प्रदर्शन करने वाली पंचायतें (A-ग्रेड प्राप्त राज्यों की संख्या)
उच्च प्रदर्शन वाली पंचायतों की सर्वाधिक संख्या वाले प्रमुख राज्य निम्नलिखित हैं:
त्रिपुरा: यहाँ सर्वाधिक 943 पंचायतों ने 'A' ग्रेड प्राप्त किया है।
तेलंगाना: 624 पंचायतों के साथ यह दूसरे स्थान पर है।
आंध्र प्रदेश: यहाँ 591 पंचायतों ने 'A' ग्रेड हासिल किया है।
ओडिशा: इस राज्य की 555 पंचायतें 'A' ग्रेड श्रेणी में हैं।
महाराष्ट्र: यहाँ 315 पंचायतों ने उच्च प्रदर्शन दर्ज किया है।
तमिलनाडु: यहाँ 197 पंचायतें 'A' ग्रेड में शामिल हैं।
केरल: 95 पंचायतों के साथ इस सूची में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
न्यूनतम प्रदर्शन करने वाली पंचायतें (D-ग्रेड प्राप्त राज्यों की संख्या)
न्यूनतम प्रदर्शन पंचायतों की सर्वाधिक संख्या वाले राज्य निम्नलिखित हैं:
उत्तर प्रदेश: यहाँ सर्वाधिक 6,124 पंचायतें 'D' ग्रेड में हैं।
मणिपुर: यहाँ 1,753 पंचायतों का प्रदर्शन न्यूनतम श्रेणी में दर्ज किया गया है।
छत्तीसगढ़: इस राज्य की 1,736 पंचायतें 'D' ग्रेड में शामिल हैं।
मेघालय: यहाँ 759 पंचायतें न्यूनतम प्रदर्शन ग्रेड में हैं।
महाराष्ट्र: उच्च प्रदर्शन के साथ-साथ यहाँ 621 पंचायतें 'D' ग्रेड में भी हैं।
पंजाब: यहाँ 493 पंचायतें न्यूनतम श्रेणी में आती हैं।
बिहार: यहाँ 418 पंचायतों का प्रदर्शन 'D' ग्रेड का रहा है।
अरुणाचल प्रदेश: यहाँ 318 पंचायतें इस श्रेणी में दर्ज की गई हैं।
निष्कर्ष (Summary of PAI 2.0 Grades)
कुल 'A' ग्रेड पंचायतें: 3,635
कुल 'B' ग्रेड पंचायतें: 1,18,824
कुल 'C' ग्रेड पंचायतें: 1,23,719
कुल 'D' ग्रेड पंचायतें: 13,689
यह सूचकांक (PAI) पंचायतों को उनके प्रदर्शन अंतराल (Performance gaps) की पहचान करने और सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) की दिशा में सुधार करने में सहायता प्रदान करता है।
रणनीतिक और नीतिगत महत्व (Strategic Significance)
प्रभावी ग्रामीण शासन: PAI फ्रेमवर्क प्रभावी ग्रामीण शासन (Effective rural governance), बेहतर सेवा प्रदायगी और परिणाम-उन्मुख विकास को सुगम बनाता है।
अंतराल की पहचान: यह पंचायत स्तर पर निष्पादन में कमियों (Performance gaps) और सापेक्ष मजबूती (Relative strengths) की पहचान कर विशेष ध्यान देने योग्य क्षेत्रों को रेखांकित करता है।
जलवायु अनुकूल कृषि: कुशल जल प्रबंधन (ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली), कृषि वानिकी और टिकाऊ पद्धतियों को 'जल पर्याप्त' और 'स्वच्छ एवं हरित पंचायत' विषयों के तहत एकीकृत किया गया है।
संस्थागत पक्ष (Institutional Side)
क्षमता निर्माण (CB&T): मंत्रालय संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के माध्यम से पंचायतों के नेतृत्व कौशल और शासन में सुधार हेतु प्रशिक्षण प्रदान करता है।
प्रशिक्षण डेटा (Annexure II): वित्त वर्ष 2022-23 से जुलाई 2026 तक LSDG विषयों पर कुल 36,81,750 निर्वाचित प्रतिनिधियों और हितधारकों को प्रशिक्षित किया गया है।
बजट और प्रोत्साहन: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026-27 के बजट में "फ्रंटरनर" (Frontrunner) पंचायतों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन निधि (Special incentive fund) नहीं बनाई गई है।
स्वतंत्रता: मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PAI के तहत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के साथ ऐसा कोई सहयोग स्थापित नहीं किया गया है।
निष्कर्ष/UPSC के लिए मुख्य बिंदु
प्रारंभिक परीक्षा हेतु: PAI (पूर्व नाम PDI); ऑनबोर्डेड पंचायतों की संख्या (2.59 लाख); LSDG के 9 विषय; 'संकल्प' की अवधारणा; RGSA योजना।
मुख्य परीक्षा हेतु: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में पंचायतों की भूमिका; ग्रामीण शासन में डेटा-संचालित मूल्यांकन का महत्व; क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण का पंचायती राज संस्थानों की प्रभावशीलता पर प्रभाव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत का पहला स्वदेशी अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) टीका किसने विकसित किया है?
इस टीके का विकास भोपाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD) के वैज्ञानिकों ने किया है। यह एमए-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीणित टीका है, जिसे 04 अगस्त 2026 को राष्ट्र को समर्पित किया गया।
2. ASF वैक्सीन की खुराक और प्रशासन विधि क्या है?
यह टीका आठ सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों को 1 मिलीलीटर इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है, जिसके 14 दिन बाद एक बूस्टर खुराक दी जाती है।
3. अरहर का T2T रेफरेंस जीनोम किसने और कैसे विकसित किया?
ICAR-राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIPB) ने अरहर की 'आशा' किस्म का भारत का पहला पूर्णतः एनोटेटेड टीलोमेयर-टू-टीलोमेयर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित किया, जिसमें 752.65 मिलियन बेस पेयर्स और 36,557 जीन शामिल हैं।
4. पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) क्या है?
यह पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित एक समग्र मूल्यांकन ढांचा है, जो सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) के नौ विषयों पर ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को मापता है। इसे पहले 'पंचायत विकास सूचकांक' (PDI) कहा जाता था।
5. PAI 2.0 के तहत सबसे अधिक 'A' ग्रेड पंचायतें किस राज्य में हैं?
त्रिपुरा में सबसे अधिक 943 पंचायतों ने 'A' ग्रेड प्राप्त किया है, इसके बाद तेलंगाना (624) और आंध्र प्रदेश (591) का स्थान है। वहीं उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 6,124 पंचायतें 'D' ग्रेड में हैं।
अभ्यास प्रश्न (MCQs for UPSC CSE Prelims)
प्रश्न 1
'स्वदेशी अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन' के तकनीकी विनिर्देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
2. यह टीका वियतनाम में उपलब्ध टीकों के विपरीत व्यापक रूप से उपलब्ध सेल लाइन का उपयोग करता है, जिससे विदेशी मालिकाना विनिर्माण प्लेटफार्मों पर निर्भरता समाप्त होती है।
3. प्राथमिक टीकाकरण (Primary vaccination) के 21 दिन बाद इसकी बूस्टर खुराक (Booster dose) दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: A (केवल 1 और 2)
कथन 1 सही है: अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) के विरुद्ध यह भारत का प्रथम स्वदेशी टीका है जिसे आईसीएआर-एनआईएचएसएडी (ICAR-NIHSAD), भोपाल ने एमए-104 सेल लाइन और क्षीणित एएसएफवी जीनोटाइप II (Attenuated ASFV Genotype II) वायरस का उपयोग कर विकसित किया है।
कथन 2 सही है: वियतनाम के टीकों में पेटेंट प्राप्त मालिकाना सेल लाइनों का उपयोग होता है, जबकि भारतीय टीका एमए-104 सेल लाइन का उपयोग करता है जो व्यापक रूप से उपलब्ध है, जिससे इसकी विनिर्माण लागत (Manufacturing cost) कम हो जाती है।
कथन 3 गलत है: यह टीका 1 मिलीलीटर इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है और इसकी बूस्टर खुराक प्राथमिक टीकाकरण के 14 दिन बाद दी जाती है (न कि 21 दिन)।
प्रश्न 2
'पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स' (PAI) 2.0 और ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन के संबंध में निम्नलिखित आंकड़ों का मूल्यांकन कीजिए:
2. पीएआई 2.0 ग्रेडिंग के आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में केवल 10 पंचायतों ने सर्वोच्च 'A+' ग्रेड प्राप्त किया है।
3. वित्त वर्ष 2022-23 से 10 जुलाई 2026 तक 36,81,750 निर्वाचित प्रतिनिधियों और हितधारकों को सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) पर प्रशिक्षित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 1 और 3
- C. केवल 2 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: B (केवल 1 और 3)
कथन 1 सही है: पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित PAI 2.0 फ्रेमवर्क में देश की 2.59 लाख ग्राम पंचायतों या उनके समकक्षों को शामिल किया गया है।
कथन 2 गलत है: PAI 2.0 FY 2023-24 के अनुसार, देश की किसी भी पंचायत (0) ने 'A+' ग्रेड प्राप्त नहीं किया है। कुल 3,635 पंचायतों ने 'A' ग्रेड और 1,18,824 पंचायतों ने 'B' ग्रेड प्राप्त किया है।
कथन 3 सही है: संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत 10 जुलाई 2026 तक कुल 36,81,750 प्रतिभागियों को विषयगत प्रशिक्षण (Thematic training) दिया जा चुका है।
प्रश्न 3
अरहर (Pigeonpea) के हालिया 'जीनोम ब्रेकथ्रू' के वैज्ञानिक विवरणों पर विचार कीजिए:
2. इस असेंबली (NIPB_CcT2T_4) में 752.65 मिलियन बेस पेयर डीएनए शामिल हैं और इसमें सभी 11 गुणसूत्रों (Chromosomes) का पूर्ण प्रतिनिधित्व है।
3. 'मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस' का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को बढ़ाकर 35 मिलियन टन करना है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सत्य हैं?
- A. केवल 1 और 2
- B. केवल 2 और 3
- C. केवल 1 और 3
- D. 1, 2 और 3
उत्तर: D (1, 2 और 3)
कथन 1 सही है: अरहर की 'आशा' (Asha) किस्म का टी2टी रेफरेंस जीनोम विकसित करना भारत का पहला ऐसा पादप जीनोम ब्रेकथ्रू है।
कथन 2 सही है: यह जीनोम 92 कॉन्टिग्ज (Contigs) में असेंबल किया गया है, जिसमें 11 सेंट्रोमेयर और 22 टीलोमेयर शामिल हैं, जो गुणसूत्र-स्तर की पूर्णता (Chromosome-level completeness) को प्रदर्शित करता है।
कथन 3 सही है: भारत सरकार ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और आयात निर्भरता (Import dependence) कम करने के लिए 2030-31 तक 35 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।