Open Mock Test

UPSC Prelims 2026 की तैयारी

आरंभ टाइम्स लेकर आया है — हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए Free Online Mock Test

100% निःशुल्कPre Paper-I (GS)Instant ResultOnline Mode
✨ Learn Today. Lead Tomorrow

Learn. Grow.
Your Aarambh Starts Here.

Accessible education & professional services platform. Knowledge. Skills. Careers.

Σ

Democratizing Exam Preparation for Every Aspirant

We believe talent is everywhere, but opportunity is not. Aarambh Times bridges this gap with accessible, exam-focused education—whether you're preparing for UPSC, SSC, TET, or state PSC exams. No geographical barriers. Just quality content that works.

DailyCurrent Affairs
100%Free Access
ExamFocused

Why Aspirants Trust Our Content

Built differently for serious exam preparation

Exam-Relevant, Not Just News

Every article analyzed through UPSC, SSC, TET exam lens. We answer: "How can this be asked in your exam?"

Verified & Cross-Checked

Facts sourced from PIB, government releases, official documents. No rumors, no speculation.

Complexity Simplified

International relations, economic policies explained clearly—without losing depth or rigor.

Learn Anywhere, Anytime

Morning capsules on Telegram, videos on YouTube, articles here—your preparation, your schedule.

Master Your Exam Preparation

Comprehensive resources for competitive exam success

UPSC Civil Services Examination

The UPSC CSE is India's most prestigious competitive exam. We cover complete preparation ecosystem: Prelims GS, CSAT exam preparation, Mains answer writing, and Interview guidance.

Our UPSC Test Series includes subject-wise quizzes, full-length mock tests, and previous year question analysis. Daily current affairs connects news to GS Papers I, II, III, IV—plus PIB analysis, Economic Survey breakdowns, and Budget highlights.

SSC, TET & State Exams

SSC CGL, CHSL, MTS, GD Constable and Teacher Eligibility Tests (TET) require strong general awareness and speed. Our content covers last 6-12 months current affairs, static GK, pedagogy concepts, and subject-specific notes.

Focused preparation for Quantitative Aptitude, Reasoning, English, and General Awareness sections with exam-pattern MCQs and shortcut techniques.

Daily Current Affairs Analysis

Current affairs isn't just knowing what happened—it's understanding why it matters. We cover India News, World Affairs, Defence & Security, Economy, Science & Tech with exam-relevant context.

Deep dives into India's foreign policy, military exercises, strategic initiatives like Pax Silica, PRAHAAR Counter-Terrorism Policy, and infrastructure projects with prelims MCQ potential and mains answer angles.

Frequently Asked Questions

Is Aarambh Times completely free for UPSC and SSC preparation?

Current affairs articles, basic study materials, youutbe lectures and daily updates are 100% free. We believe quality education should be accessible to every aspirant regardless of financial background.

Do you provide UPSC CSAT exam preparation and test series?

Absolutely. We offer CSAT practice questions, comprehension exercises, logical reasoning tests, and full-length mock test series for both Prelims GS and CSAT papers.

How is your current affairs different from reading newspapers?

We save you 3-4 hours daily. Instead of reading multiple newspapers, we provide exam-filtered news with prelims MCQ potential and mains answer angles already highlighted.

How often is the content updated?

We publish daily current affairs every morning. Weekly compilations on Sundays, monthly PDFs on the last day of each month for revision.

अमेरिका-ईरान संबंध: तख्तापलट, क्रांति और परमाणु विवाद का इतिहास (1953–2026)

By: Aditya Kumar | तारीख: 8 मार्च 2026 | Aarambh Times
अमेरिका और ईरान इस समय खुले युद्ध में फंसे हुए हैं। ईरान की राजनीति में अमेरिका का यह हस्तक्षेप नया नहीं है इससे पहले भी अमेरिका विभिन्न तरह से ईरान की राजनीति में हस्तक्षेप कर चुका है जो कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते को बहुत ही नाजुक बनाता है।
US vs Iran: तख्तापलट से युद्ध तक का टकराव

1953: तख्तापलट की शुरुआत

1953 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA (Operation Ajax ) ने ब्रिटिश MI6 (Operation Boot) के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया। वजह थी एंग्लो-ईरानियन ऑयल कंपनी (जो ब्रिटिश नियंत्रण में थी) का ईरान द्वारा राष्ट्रीयकरण। प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देग को सत्ता से हटा दिया गया। तख्तापलट के बाद पश्चिम समर्थक शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता मजबूत हुई। 1954 में शाह ने एक कंसोर्टियम समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियों को ईरान के तेल उद्योग में 25 साल के लिए हिस्सेदारी मिली।

1950 – 1970: सहयोग का दौर

1950 से 1970 के दशक तक अमेरिका और ईरान के बीच गहरा सहयोग रहा। इस पूरे दौर में दोनों देशों के रिश्ते सतह पर तो मज़बूत दिखते थे, लेकिन अंदर से खोखले होते जा रहे थे।

परमाणु सहयोग और OPEC की स्थापना

  • 1957- अमेरिका ने "Atoms for Peace" कार्यक्रम के तहत ईरान को परमाणु रिएक्टर और संवर्धित यूरेनियम ईंधन दिया। यह सहयोग 1979 तक चला।
  • 1960- OPEC की स्थापना हुई, जिसमें ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला शामिल थे। इसका मकसद तेल की आपूर्ति पर नियंत्रण करके अमेरिकी कंपनियों को चुनौती देना था।
  • 1972- राष्ट्रपति निक्सन ने ईरान की यात्रा की और कहा कि ईरान अपनी मर्जी से गैर-परमाणु हथियार खरीद सकता है।
  • 1973- अरब-इजरायल युद्ध के दौरान तेल संकट आया, जिससे ईरान को भारी मुनाफा हुआ और उसने अमेरिका से उन्नत हथियार खरीदे। लेकिन यहीं से ईरान अमेरिका के लिए चिंता का विषय बनने लगा।

1979: इस्लामी क्रांति और दुश्मनी की शुरुआत

1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई। शाह देश छोड़कर भाग गए और शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। उन्होंने पश्चिम-विरोधी इस्लामी व्यवस्था स्थापित की।

बंधक संकट(Iran Hostage Crisis)

उसी साल नवंबर में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया। मांग थी — शाह को ईरान सौंपा को जाए। 1981 में "अल्जीयर्स डिक्लेरेशन" (Algiers Accords) के तहत वे रिहा हुए। इस घटना ने दोनों देशों के रिश्ते को हमेशा के लिए खराब कर दिया।

" 444 दिनों की बंधक त्रासदी ने अमेरिकी मानस पर वह घाव छोड़ा जो आज तक नहीं भरा। "

1980 – 1990 का दशक: युद्ध और आतंकवाद के आरोप

1980 और 1990 के दशक अमेरिका-ईरान रिश्तों के लिए सबसे उथल-पुथल भरे रहे। इस दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के टकराव हुए।

ईरान-इराक युद्ध में अमेरिका का पक्ष

  • 1980- ईरान-इराक युद्ध शुरू हुआ। अमेरिका ने इराक का खुलकर समर्थन किया — आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और हथियार दिए।
  • 1983- लेबनान में अमेरिकी बैरकों पर ट्रक बम हमला हुआ, जिसमें 241 अमेरिकी मारे गए। जिम्मेदारी इस्लामिक जिहाद (जिसे हिजबुल्लाह से जुड़ा माना जाता है) ने ली।
  • 1984- अमेरिका ने ईरान को "आतंकवाद प्रायोजक राज्य" (State-sponsored terrorism) घोषित कर दिया।
  • 1988- ऑपरेशन प्रेयिंग मैंटिस (Operation Praying Mantis) में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी तेल प्लेटफॉर्म नष्ट किए और USS Vincennes ने गलती से ईरानी यात्री विमान को मार गिराया, जिसमें 290 लोग मारे गए।
  • 1991- फारस की खाड़ी का युद्ध - पर्सियन गल्फ वॉर(Persian Gulf War) में अमेरिका ने इराक को कुवैत से निकाला।

प्रतिबंधों का सिलसिला और कूटनीतिक प्रयास

1990 के दशक में अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध बढ़ाए। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना और उसकी विदेश नीति को बदलना था।
  • 1992 — Iran-Iraq Arms Non-Proliferation Act: इस कानून के तहत ईरान और इराक को उन्नत हथियार या प्रौद्योगिकी बेचने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए।
  • 1996 — Iran-Libya Sanctions Act: यह कानून ईरान और लीबिया में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों को दंडित करने के लिए लाया गया।
  • 1998 — संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए 6P+2 वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय संपर्क स्थापित हुआ।

2000 के दशक "एक्सिस ऑफ एविल" और परमाणु विवाद

2000 का दशक अमेरिका-ईरान रिश्तों में एक नए तनाव का दौर लेकर आया। 9/11 के बाद अमेरिकी विदेश नीति आक्रामक हो गई और ईरान सीधे निशाने पर आ गया।

बुश का आक्रामक रुख

2001 में बॉन (Bonn) समझौता हुआ। इसका मकसद तालिबान और अलकायदा के खिलाफ कार्रवाई करना था, क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाना बनाया था और वे ईरान व अमेरिका दोनों के साझा दुश्मन थे।
  • 2002- राष्ट्रपति बुश ने ईरान, इराक और उत्तर कोरिया को "एक्सिस ऑफ एविल" (Axis of Evil - बुराई की धुरी) कहा।
  • 2003- इराक युद्ध में अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को हटाया, जिससे ईरान को फायदा हुआ क्योंकि सिया समूह मजबूत हुए।
  • 2006- ईरानी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने बुश को पत्र लिखा, लेकिन परमाणु संवर्धन जारी रहा। इसी वर्ष अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 'ईरान फ्रीडम सपोर्ट एक्ट' को पारित किया गया, जिसमें ईरान के नागरिक समाज को वित्तीय सहायता देकर लोकतंत्र को बढ़ावा देना था।
  • 2007- अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने 2003 में हथियार कार्यक्रम रोक दिया था, लेकिन संवर्धन जारी था।

JCPOA: उम्मीद की एक किरण

सितंबर 2013 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी के मध्य संपर्क स्थापित होता है। 2015 में JCPOA (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता कूटनीति की एक बड़ी जीत था। इस समझौते में P5+1 (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन + जर्मनी) ने ईरान को प्रतिबंधों में राहत दी। बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई।

" JCPOA एक ऐसा समझौता था जो दोनों पक्षों को पसंद नहीं था — लेकिन जो दोनों के लिए ज़रूरी था। "

2018 से अब तक ट्रंप का "अधिकतम दबाव" और युद्ध की राह

ट्रंप की 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) नीति (2018–2020)

  • 2018- ट्रंप ने JCPOA से अमेरिका को बाहर निकाला। यह एक ऐसा फैसला था जिसने यूरोपीय सहयोगियों को भी हैरान कर दिया।
  • 2019- IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स - Islamic Revolutionary Guard Corps) को आतंकवादी संगठन घोषित किया। तेल टैंकर हमले और ड्रोन गिराने की घटनाओं ने तनाव को नई ऊँचाई पर पहुँचाया। मई 2019 में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और जिब्राल्टर (Strait of Gibraltar) में तेल टैंकरों पर हमले हुए, जिसके बाद IRGC ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया। सितंबर 2019 में सऊदी अरब की तेल कंपनियों पर ड्रोन से हमले हुए, जिसकी जिम्मेदारी ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने ली।
  • 2020- अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के सर्वोच्च सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या हुई। यह एक ऐसी घटना थी जिसने मध्य-पूर्व को हिला दिया। इसके बाद ईरान ने अपना पहला सैन्य उपग्रह 'नूर'(Noor) ऑर्बिट (कक्षा - orbit)में प्रक्षेपित किया और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला को तेल भेजा। अक्टूबर 2020 में ट्रंप द्वारा ईरान पर 'अधिकतम दबाव' के लिए प्रतिबंध लगाए गए, जिसका कारण रासायनिक हथियारों के संभावित विकास का संदेह और 2019 के प्रदर्शनकारियों पर मानवाधिकार उल्लंघन था।

बाइडेन से रईसी तक (2021–2024)

  • 2021- रईसी ईरान के राष्ट्रपति बने। परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अप्रैल 2021 में ईरान की एक न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला और विस्फोट भी हुआ।
  • 2022- ईरान को रोकने के उद्देश्य से मार्च में अमेरिका, बहरीन, मिस्र, इजरायल, मोरक्को और UAE ने मिलकर 'नेगेव फोरम' (Negev Forum) की स्थापना की। इसी वर्ष ईरान में महिलाओं के बड़े प्रदर्शन हुए — महसा अमीनी की मौत के बाद "जिन, जियान, आज़ादी" आंदोलन ने दुनिया का ध्यान खींचा (जिन, जियान, आज़ादी - Woman, Life, Freedom)। प्रदर्शनों को सरकार ने दबाया।
  • 2023- हमास के इजरायल पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव तेज़ी से बढ़ा। ईरान समर्थित गुटों — हिजबुल्लाह, हूथी — ने एक साथ मोर्चा खोला। इसी वर्ष अमेरिका और ईरान के बीच कैदियों की अदला-बदली का समझौता भी सामने आया, जिसमें सियामक नमाजी और मुराद शाहबाज सहित अन्य कैदियों को रिहा किया गया।
  • 2024- ईरान और इजरायल के बीच पहली बार सीधे मिसाइल हमले हुए थे। 2024 में रईसी की मौत के बाद ईरान में कट्टरपंथ और बढ़ा।

युद्ध की शुरुआत (2025–2026)

  • 2025- अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए — ऑपरेशन मिडनाइट हैमर (Operation Midnight Hammer)। इस ऑपरेशन में ईरान के तीन परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया। फोर्डो और नतांज परमाणु स्थलों पर B-2 बॉम्बर विमान तैनात किए गए, जबकि इस्फ़हान केंद्र पर टॉमहॉक मिसाइलों और बंकर बस्टर बम (bunker buster bomb) का प्रयोग किया गया। अमेरिका ने पहली बार बम GBU-57 Massive Ordnance Penetrator (MOP) का इस्तेमाल किया। अप्रैल 2025 में मॉस्को में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी बैठक की।
  • 2026- (जनवरी-फरवरी) ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, मुद्रा गिरी और इंटरनेट बंद हुआ। देश के भीतर से सत्ता को चुनौती मिलने लगी। 
  • 28 फरवरी 2026 अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त हमले शुरू किए, जिसमें सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई की मौत हो गई।

U.S. submarine torpedoed Iran's warship IRIS Dena

ईरान ने जवाबी हमले किए — इजरायल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों पर। प्रतिक्रिया के रूप में ईरान ने मिडल ईस्ट के विभिन्न देशों—जैसे अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, साइप्रस, इजरायल, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, UAE और ओमान—में उपस्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए।

युद्ध अब मिडिल ईस्ट से इंडियन ओशन तक फैल गया है, जहाँ तेल टैंकर निशाने पर हैं और ईरानी युद्धपोत डुबोया गया। इसी बीच श्रीलंका के पास इंडियन ओश न में ईरान के 'IRIS Dena' युद्धपोत को अमेरिका की सबमरीन द्वारा टारपीडो से डुबाया गया। यह जहाज भारत के 'मिलन' (MILAN) नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था।

अगर हम पूरे इतिहास को देखें तो एक बात स्पष्ट होती है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव केवल विचारधारा का नहीं है। इसके पीछे कई स्तर हैं: ऊर्जा और तेल की राजनीति, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, परमाणु तकनीक और ऐतिहासिक अविश्वास । 1953 का तख्तापलट, 1979 की क्रांति, परमाणु विवाद, और हाल के सैन्य टकराव — इन सबने मिलकर इस रिश्ते को बेहद जटिल बना दिया है और आज जो कुछ मध्य-पूर्व में हो रहा है, उसे समझने के लिए इस पूरे इतिहास को समझना जरूरी है।

FAQ

1953 का तख्तापलट क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना लोकप्रिय सरकार को अस्थिर कर विदेशी हस्तक्षेप की भावना बढ़ा गई — जो बाद की प्रतिरोधी राजनीति की नींव बनी।

1979 की क्रांति का क्या असर हुआ?
शाह का पतन और धार्मिक नेतृत्व का उदय — पश्चिम-विरोधी नीतियों और अमेरिका के साथ सीधे टकराव का आरंभ।

JCPOA (2015) का उद्देश्य क्या था?
परमाणु कार्यक्रम पर पारदर्शिता और सीमाएँ लगाकर द्विपक्षीय तनाव घटाना; बदले में प्रतिबंधों में राहत देने का समझौता।

IRGC क्या है?
IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की शक्तिशाली सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक संस्था है।

तेल-राजनीति का इस संघर्ष में कितना योगदान है?
बहुत — खाड़ी का स्थिरता और समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिये अहम हैं; इससे बाहरी शक्तियाँ सक्रिय रहती हैं।

आम जनता पर इन टकरावों का क्या असर होगा?
तेल कीमतें, महंगाई, आपूर्ति-व्यवधान, इंटरनेट कटौती और घरेलू अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है — सीधा असर नागरिकों पर पड़ता है।

यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और हमारे देश (भारत) को कैसे प्रभावित कर सकता है?
खाड़ी की अस्थिरता से तेल आपूर्ति और बीमा-क़ीमतें बढ़ेंगी; आयातक अर्थव्यवस्थाएँ महंगाई और व्यापारिक दबाव झेल सकती हैं।

Related Articles
What Is the Gaza Board of Peace? Davos 2026 and India’s Response
Unrest in Balochistan: A History of Conflict and Calls for Justice

Comments

Our Learning Verticals

Targeted education across key domains to help you lead tomorrow.

Govt Exam Prep UPSC • SSC • TET Live Now
Current Affairs India • World • Defence Live Now
Tech & Coding Python • Data • Web Dev Coming Soon
Law & Forensic Learn • Career • Cases Coming Soon