भारत ने नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए और इलेक्ट्रॉनिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और स्थिर बनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका पहल (Pax Silica) का प्रतिभागी सदस्य देश बन गया। यह कदम न केवल भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति को बल देता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में भी स्थापित करता है।
Pax Silica क्या है?
Pax Silica US के राज्य के विभाग (State Department) के नेतृत्व की एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज, अर्धचालक, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों के लिए एक मजबूत, लचीला और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला को स्थापित करना है।
Pax Silica की अवधारणा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements - REE) की आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती असुरक्षा, अस्थिरता और एक पक्षीय एकाधिकार की वैश्विक चिंता से उत्पन्न हुई। दिसंबर 2025 में वाशिंगटन डीसी में इसका उद्घाटन शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था, जहाँ इस गठबंधन की रूपरेखा तैयार की गई थी।
प्रतिभागी सदस्य देश
Pax Silica Initiative में प्रतिभागी देश दो श्रेणियों में विभाजित हैं:
हस्ताक्षरकर्ता प्रतिभागी देश: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और UK और भारत।
गैर-हस्ताक्षरकर्ता प्रतिभागी देश: कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), नीदरलैंड, OECD और ताइवान।
यह विविधता दर्शाती है कि यह गठबंधन केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उभरती अर्थव्यवस्थाओं और तकनीकी दिग्गजों का एक अनूठा संगम है।
पैक्स सिलिका की मुख्य विशेषताएँ
आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा: आपूर्ति श्रृंखला पर एकाधिकार और अत्यधिक एकाग्रता के जोखिम को कम करके इलेक्ट्रॉनिक और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में विविधता को बढ़ावा देना।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी सहयोग: एआई प्रणाली, अर्धचालक (Semiconductors), डेटा आधारभूत अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण तंत्र के मध्य सहयोग को बढ़ावा देना।
महत्वपूर्ण खनिज साझेदारी: भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण दुर्लभ पृथ्वी खनिज और रणनीतिक खनिजों के समन्वित शोधन एवं प्रसंस्करण का समर्थन करना।
निवेश और अवसरंचना सहयोग: विश्वसनीय औद्योगिक और प्रौद्योगिकी नेटवर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए सदस्य देशों के बीच साझा निवेश और वित्तीय प्रोत्साहन।
विश्वसनीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र: सुरक्षित और विश्वसनीय 'प्रौद्योगिकी स्टैक' बनाने के लिए सरकारों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच एक पारदर्शी साझेदारी बनाना।
निष्पक्ष बाज़ार और सुरक्षा ढाँचा: गैर-बाज़ार प्रथाओं, अनुचित डंपिंग और डेटा चोरी जैसे मुद्दों को संबोधित करना तथा संवेदनशील बुनियादी ढांचे को सुरक्षा प्रदान करना।
निजी क्षेत्र की भागीदारी: नवाचार को बढ़ाने के लिए निजी उद्यमों को साथ लाना और आर्थिक सुरक्षा का विस्तार करते हुए उद्योग क्षमताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।
रणनीतिक आर्थिक संरेखण: साझेदार देशों के मध्य दीर्घकालिक प्रौद्योगिक शासन और लचीले वैश्विक आर्थिक संरचना का समन्वय करना।
Pax Silica Initiative Explained | वीडियो हिंदी में
पैक्स सिलिका की तात्कालिक आवश्यकता क्यों पड़ी?
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर खनिजों से जुड़ी है। चीन वर्तमान में वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REE) शोधन क्षमता का लगभग 85-90% नियंत्रित करता है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), रक्षा प्रणालियों (मिसाइल गाइडेंस), और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग किए जाने वाले स्थायी चुंबकों के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।
अक्टूबर 2025 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा दुर्लभ पृथ्वी सामग्रियों पर निर्यात नियंत्रण के निलंबन को एक वर्ष (10 नवंबर, 2026 तक) के लिए बढ़ा दिया गया था। इस अनिश्चितता का सीधा असर भारत जैसे उभरते विनिर्माण केंद्रों पर पड़ा। पैक्स सिलिका गठबंधन का प्राथमिक उद्देश्य खनिज निष्कर्षण से लेकर चिप निर्माण और AI के परिनियोजन तक पूरे उत्पादन चक्र को जोखिम मुक्त (De-Risking) करना है।
महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) का महत्व
Critical Minerals वे खनिज पदार्थ होते हैं जो आधुनिक प्रधौगिकियों, आर्थिक विकास और देश की सुरक्षा के लिए अपरिहार्य होते हैं। इनकी कमी से न केवल उद्योग ठप हो सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची
भारत सरकार ने देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है:
एंटीमनी, बेरिलियम, निकेल, बिस्मथ, कोबाल्ट, कॉपर, गैलियम, ग्रेफाइट, हेफ़नियम, इंडियम, लिथियम, मोलिब्डेनम, नाइओबियम, पीजीई, फॉस्फोरस, पोटाश, आरईई, रेनियम, सिलिकॉन, ज़िरकोनियम, स्ट्रोंटियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, टिन, जर्मेनियम, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम, सेलेनियम और कैडमियम।
वैश्विक खनिज परिदृश्य: एक तुलनात्मक तालिका
| क्र.सं. | महत्वपूर्ण खनिज | शीर्ष 3 खनन देश | शीर्ष 3 शोधन/प्रसंस्करण देश |
|---|---|---|---|
| 1 | लिथियम | ऑस्ट्रेलिया, चिली, चीन | चीन, चिली, अर्जेंटीना |
| 2 | निकेल | इंडोनेशिया, फिलीपींस, रूस | इंडोनेशिया, चीन, जापान |
| 3 | कोबाल्ट | कांगो, इंडोनेशिया, रूस | चीन, फिनलैंड, कांगो |
| 4 | ताँबा | चिली, पेरू, कांगो | चीन, चिली, कांगो |
| 5 | ग्रेफाइट | चीन, जापान, मेडागास्कर | चीन, जापान, इंडोनेशिया |
| 6 | REE | चीन, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार | चीन, यूएसए, मलेशिया |
भारत में खनिज संसाधन: संभावनाएँ और चुनौतियाँ
भारत के पास इन खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है, लेकिन इनके निष्कर्षण और शोधन के लिए उन्नत तकनीक की आवश्यकता है।
लिथियम: जम्मू-कश्मीर (रियासी) और कर्नाटक (मांड्या) में महत्वपूर्ण भंडार की खोज की गई है।
दुर्लभ पृथ्वी तत्व (REE): आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा के तटीय रेत (Monazite sand) में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
कोबाल्ट और निकेल: ओडिशा और झारखंड के लौह-अयस्क बेल्ट में मौजूद हैं।
ग्रेफाइट: अरुणाचल प्रदेश और झारखंड इस क्षेत्र में अग्रणी हैं।
अन्य: राजस्थान अभ्रक के लिए और छत्तीसगढ़ चूना पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।
पैक्स सिलिका और भारत के लिए 'गेम चेंजर' क्यों?
इस पहल में शामिल होना भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- सेमीकंडक्टर मिशन को गति
भारत ने अपना 'सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) शुरू किया है। पैक्स सिलिका के माध्यम से भारत को अमेरिका, ताइवान और जापान जैसे देशों से चिप डिजाइन और निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। - AI और सुपरकंप्यूटिंग में बढ़त
AI के लिए उच्च प्रदर्शन वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) की आवश्यकता होती है। पैक्स सिलिका के तहत 'डेटा आधारभूत अवसंरचना' सहयोग से भारत को एआई हार्डवेयर के विकास में तकनीकी मदद मिलेगी। - चीन पर निर्भरता में कमी
वर्तमान में भारत अपनी अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक चिप्स और खनिज जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर है। पैक्स सिलिका एक 'अल्टरनेटिव सप्लाई चेन' (वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला) बनाता है, जिससे भारत की आर्थिक संप्रभुता सुरक्षित होती है। - हरित ऊर्जा का सपना (Green Energy Goals)
भारत ने 2070 तक 'नेट ज़ीरो' का लक्ष्य रखा है। इसके लिए करोड़ों इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनलों की आवश्यकता होगी। लिथियम, कोबाल्ट और तांबे की सुरक्षित आपूर्ति के बिना यह लक्ष्य हासिल करना असंभव है।
आगे की राह: चुनौतियाँ और समाधान
यद्यपि पैक्स सिलिका एक बेहतरीन पहल है, लेकिन भारत के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
तकनीकी अंतर: भारत के पास भंडार तो हैं, लेकिन खनिजों को शोधित (Refine) करने की तकनीक अभी भी शुरुआती चरण में है।
पर्यावरणीय चिंताएँ: गहरे समुद्र या जंगलों में खनन से पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है। इसके लिए 'ग्रीन माइनिंग' प्रोटोकॉल अपनाना होगा।
निवेश की आवश्यकता: खनिज निष्कर्षण एक पूंजी-प्रधान कार्य है। भारत को विदेशी निवेश (FDI) के साथ-साथ घरेलू निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करना होगा।
निष्कर्ष
पैक्स सिलिका (Pax Silica) केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी की नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की नींव है। भारत का इस पहल में शामिल होना यह दर्शाता है कि हम अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों के सह-निर्माता बनने की दिशा में अग्रसर हैं। एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के त्रिकोण पर आधारित यह गठबंधन भारत को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से ले जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. Pax Silica क्या है?
Pax Silica संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाना है।
2. भारत Pax Silica में कब शामिल हुआ?
भारत 20 फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान Pax Silica पहल में आधिकारिक रूप से शामिल हुआ।
3. Pax Silica का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों, चिप निर्माण और AI तकनीकों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित, स्थिर और चीन जैसे एकल देशों पर निर्भरता से मुक्त करना है।
4. Pax Silica UPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह UPSC के International Relations, Science and Technology और Economy सेक्शन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक तकनीकी गठबंधन और भारत की रणनीतिक भूमिका से जुड़ा है।
5. Pax Silica से भारत को क्या लाभ होगा?
भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण, AI विकास, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षा और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
6. Critical Minerals क्या होते हैं?
Critical Minerals वे खनिज होते हैं जो आधुनिक तकनीक, रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं, जैसे लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व।
7. Pax Silica Initiative का संबंध सेमीकंडक्टर से कैसे है?
यह पहल सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल और तकनीक की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है।
8. Pax Silica का संबंध चीन से क्यों जोड़ा जा रहा है?
क्योंकि चीन वर्तमान में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख नियंत्रण रखता है, इसलिए Pax Silica एक वैकल्पिक और सुरक्षित आपूर्ति नेटवर्क बनाने का प्रयास है।


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