भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति 'प्रहार' (PRAHAAR) 2026

By: Aditya | 1 मार्च 2026 | Aarambh Times
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वर्तमान में आतंकवाद एक ऐसा वैश्विक (Global) खतरा बन गया है जिससे विश्व में सभी देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष (direct and indirect) किसी न किसी तरह से प्रभावित हैं। भारत ने आतंकवाद विरोधी नीति प्रहार को सामने रखा है जिससे आतंकवाद से निपटने में रणनीतिक रूप से सहायता मिल सकती है। गृह मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति जारी की है जो एक शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति पर आधारित है।

भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति के आदर्श (PRAHAAR के सात स्तंभ): 

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Seven Pillars of Counter Terrorism Policy 2026 PRAHAAR

रोकथाम (Prevention)

आतंकी हमलों की रोकथाम। सूचना आधारित (Intelligence-Guided) प्रक्रियाओं का क्रियान्वयन जिसके अंतर्गत बहु-संस्था केंद्र (Multi Agency Centre) का संचालन, संयुक्त सूचना कार्यबल (Joint Task Force on Intelligence - JTFI), आसूचना ब्यूरो (Intelligence Bureau - IB), पुलिस तथा क्षेत्रीय संस्थाओं के द्वारा आतंकवाद से निपटने में सहायता करना। इसके अंतर्गत सोशल मीडिया आधारित आतंकवाद प्रचार, चरमपंथियों (extremists) तथा क्षेत्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों के प्रसार पर कार्यवाही करना।

प्रतिक्रिया (Response)

आतंकवादी हमला होने पर जवाबी कार्यवाही करना जिसमें स्थानीय संस्थाओं जैसे पुलिस तथा उनकी सहायता के लिए राज्य व केंद्र स्तर की संस्थाओं का सहयोग किया जाना। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard - NSG) , गृह मंत्रालय (Ministry Of Home Affairs of India - MHA), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Central Armed Police Forces - CAPF), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation Agency -NIA) तथा जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी दल व संस्थाओं का समन्वय।

क्षमताओं का एकत्रीकरण (Aggregating Capacities)

आतंकवाद विरोधी अभियानों में नई तकनीक, प्रशिक्षण व आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य पुलिस तथा सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करना। इसके अंतर्गत पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (Bureau of Police Research and Development - BPR&D) द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard - NSG) द्वारा विभिन्न राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा कर्मियों को प्रदान किया जाने वाला शहरी युद्ध प्रशिक्षण (NSG Urban Combat Training) इत्यादि आते हैं।

मानवाधिकार एवं विधि आधारित प्रक्रियाएं (Human Rights and Rule of Law based Processes)

आतंकवादी घटनाओं तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों में मानवाधिकारों तथा विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का निष्पक्षता व उचित क्रियान्वयन हो सके। इसके लिए भारत में कई प्रावधान हैं तथा अंतरराष्ट्रीय प्रावधानों का भी भारत हस्ताक्षर करता है जैसे मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 (The Protection of Human Rights Act), इंटरनेशनल कोवेनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (International Covenant on Civil and Political Rights), मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 1948 (The Universal Declaration of Human Rights)।

आतंकवाद संबंधी अपराधों से संबंधित व निवारण के लिए कुछ अन्य अधिनियम

अधिनियम का नाम (Act Name) वर्ष मुख्य उद्देश्य और भूमिका (Key Objective & Role)
विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 विस्फोटक पदार्थों के अवैध निर्माण, कब्जे और उनके माध्यम से जीवन या संपत्ति को खतरे में डालने पर दंड का प्रावधान।
शस्त्र अधिनियम (The Arms Act) 1959 अवैध हथियारों और गोला-बारूद के प्रसार को रोकने के लिए हथियारों के अधिग्रहण और कब्जे को विनियमित करना।
अवैध गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (UAPA) 1967 भारत की मुख्य आतंकवाद विरोधी संविधि। यह आतंकी संगठनों की घोषणा और व्यक्तियों को आतंकवादी नामित करने की शक्ति देता है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को वैध बनाने से रोकना और टेरर फंडिंग की कमर तोड़ना।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम (NIA Act) 2008 आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच के लिए एक केंद्रीय एजेंसी (NIA) का गठन, जिसका अधिकार क्षेत्र पूरे भारत में है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 इसने IPC का स्थान लिया है। इसमें पहली बार सामान्य दंड कानून के भीतर 'आतंकवाद' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 इसने CrPC का स्थान लिया है। यह जांच, गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल-फ्रेंडली बनाता है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 इसने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान लिया है। यह इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता देकर न्याय प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है।

आतंकवाद को पोषण देने वाली परिस्थितियों को कम करना (Attenuating the Conditions Conducive for Terrorism)

भारतीय नागरिकों, विशेषकर युवाओं को आतंकवाद में सम्मिलित करने की घटनाओं व परिस्थितियों को पहचानकर उन पर कार्रवाई करना। कट्टरपंथी, चरमपंथी हिंसक तत्वों को उजागर करना व समाज को उनके प्रभाव से बचाने के लिए जागरूकता फैलाना तथा डी-रैडिकलाइजेशन कार्यक्रमों का संचालन करना। बेरोजगारी, शिक्षा, गरीबी आदि परिस्थितियों से उबरने के लिए सरकारी योजनाओं, पहलों, छात्रवृत्तियों, ऋण योजनाओं के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को सशक्त बनाना।

अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को संरेखित करना तथा उन्हें प्रभावी बनाना (Aligning and Shaping International Efforts)

आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारी जैसे सूचना व साक्ष्य साझा करना, वैधानिक सहायता, प्रत्यर्पण नीति और संधियाँ (Extradition Policy and Treaties), संयुक्त कार्य समूह, समझौता ज्ञापन (MoU) आदि प्रक्रियाएं।

समग्र सामाजिक प्रयासों के माध्यम से पुनर्प्राप्ति एवं स्थिति-स्थापन (Recovery and Resilience through Whole-of-Society Approach)

आतंकवाद से प्रभावित समुदाय को उबारने के लिए तथा पुनः एकीकृत बनाने के लिए मनोवैज्ञानिकों, चिकित्सकों, गैर-सरकारी संगठनों, अधिवक्ताओं, धार्मिक सामुदायिक नेताओं तथा नागरिक समाज आदि को सम्मिलित करना।

PRAHAAR Explained

निष्कर्ष

आतंकवाद हमारे देश के लिए बड़ा खतरा है जहां पड़ोसी देशों में उपस्थित कट्टरपंथी, चरमपंथी तत्वों के कारण अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन भारत में आतंकवादी घटनाएं करते हैं, वहीं देश में आंतरिक स्तर पर उत्पन्न चरमपंथ (extremism), ब्रेनवॉशिंग (Brainwashing) आदि द्वारा शिक्षित युवाओं को आतंकवाद में शामिल किए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन परिस्थितियों में भारत को आतंकवाद के प्रति रणनीतिक व शून्य सहनशीलता की नीति (Zero Tolerance Policy) पर आधारित प्रहार का क्रियान्वयन बहुत अहम है।

प्रश्नोत्तर (FAQ)

1. प्रहार (PRAHAAR) क्या है?

प्रहार भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति है, जिसे गृह मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को जारी किया। यह शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) पर आधारित है और आतंकवाद से निपटने के लिए एक proactive (पूर्व सक्रिय) दृष्टिकोण अपनाती है।

2. प्रहार के सात स्तंभ क्या हैं?

प्रहार के सात स्तंभ हैं: रोकथाम (Prevention), प्रतिक्रिया (Response), क्षमताओं का एकत्रीकरण (Aggregating Capacities), मानवाधिकार एवं विधि आधारित प्रक्रियाएं (Human Rights and Rule of Law), आतंकवाद को पोषण देने वाली परिस्थितियों को कम करना (Attenuating Conditions), अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को संरेखित करना (Aligning International Efforts), और समग्र सामाजिक प्रयासों से पुनर्प्राप्ति (Recovery through Whole-of-Society Approach)।

3. क्या प्रहार कोई नया कानून या एजेंसी बनाती है?

नहीं, प्रहार नया कानून या संस्था नहीं बनाती। यह मौजूदा संस्थाओं, कानूनों (विधि) (जैसे UAPA, PMLA, NIA एक्ट आदि) और तंत्रों को एकीकृत करके एक एकीकृत ढाँचा (unified framework) देती है।

4. प्रहार में जीरो टॉलरेंस का मतलब क्या है?

जीरो टॉलरेंस का मतलब है कि आतंकवाद के किसी भी रूप (चाहे cross-border हो या homegrown, cyber हो या drone-based) के प्रति कोई समझौता नहीं। सभी आतंकी कृत्यों को अपराध माना जाएगा और Funding, हथियार, safe havens से वंचित किया जाएगा।

5. क्या प्रहार मानवाधिकारों का ध्यान रखती है?

हाँ, नीति स्पष्ट रूप से मानवाधिकारों और कानून का शासन (Rule of Law) का पालन सुनिश्चित करती है। इसमें भारतीय कानून (जैसे मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993) और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का भी उल्लेख है ताकि अभियान न्यायसंगत रहें।

6. प्रहार युवाओं और चरमपंथ को कैसे रोकती है?

यह डी-रैडिकलाइजेशन कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, सरकारी योजनाओं (शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति) के जरिए युवाओं को सशक्त बनाकर और कट्टरपंथी तत्वों को उजागर करके आतंकवाद की जड़ों को कमजोर करती है।

7. प्रहार कब और कहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं?

आधिकारिक दस्तावेज़ गृह मंत्रालय की वेबसाइट (mha.gov.in) पर उपलब्ध है।

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